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जब ‘तुलसी’ को देखने के लिए अफगानिस्तान में थम जाती थी जंग, स्मृति ईरानी ने सुनाया दिलचस्प किस्सा
जब ‘तुलसी’ को देखने के लिए अफगानिस्तान में थम जाती थी जंग, स्मृति ईरानी ने सुनाया दिलचस्प किस्सा
स्मृति ईरानी ने बताया कि अफगानिस्तान में ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ इतना लोकप्रिय था कि शो के आधे घंटे के दौरान कुछ देर के लिए जंग तक रुक जाती थी। इसका जिक्र वहां से आए कई खतों में किया गया था।
बंद कमरों से मंच तक, कैसे लिखे जाते हैं प्रधानमंत्री के भाषण? इनसाइड स्टोरी
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प्रधानमंत्री जब देश को संबोधित करते हैं, संसद में विपक्ष को जवाब देते हैं या फिर अमेरिकी कांग्रेस जैसे वैश्विक मंच पर भारत का पक्ष रखते हैं तो समय देश की जनता को एक चेहरा दिखाई देता है। हालांकि, पीएम के इस भाषण के पीछे पूरा एक सिस्टम होता है। पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार संजय बारू ने इसके बारे में विस्तार से बताया।
3 देश, 3 नेता और 3 संगठन... मोदी, पुतिन और जिनपिंग का दुनिया पर ‘3D इफेक्ट’
3 देश, 3 नेता और 3 संगठन... मोदी, पुतिन और जिनपिंग का दुनिया पर ‘3D इफेक्ट’
चीन, रूस और भारत तीनों ही वैश्विक इकोनॉमी की नई धड़कन हैं, इनकी मिलिट्री ताकत के आगे दुनिया बौनी लगती है, टेक्नोलॉजी में भी ये बहुत आगे हैं। इन तीनों देशों के नेताओं की दोस्ती दुनिया में नया त्रिकोण बनाती है।
एवरेस्ट के चर्चित ग्रीन बूट की अनसुनी कहानी, जो 30 साल से बर्फ में दबा है
एवरेस्ट के चर्चित ग्रीन बूट की अनसुनी कहानी, जो 30 साल से बर्फ में दबा है
ग्रीन बूट्स का शव पिछले 30 सालों से एवरेस्ट के डेथ जोन में पड़ा है। अबतक माना जाता था कि ये शव आईटीबीपी के हेड कॉन्स्टेबल त्सेवांग पल्जोर का है लेकिन कुछ समय पहले ही पता चला कि ये शव लांस नाइक दोरजे मोरुप का है। आईटीबीपी अब इस शव को नीचे लाने की तैयारी में है।
30 साल बाद जब रूस ने हिमालय की गोद से खोज निकाला अपना गुमनाम योद्धा
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जिसे उसके गांव वाले सिर्फ एक किसान समझते थे, उसे खोजने तीन दशक बाद रूस के राजदूत हिमालय पहुंच गए। आखिर कौन था यह गुमनाम भारतीय सैनिक, जिसकी बहादुरी ने इतिहास में चुपचाप अपनी जगह बना ली और जिसे रूस आज तक नहीं भूला?
अफगानिस्तान की INSIDE STORY: काबुल में कदम रखते ही भ्रम टूटता है
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वरिष्ठ पत्रकार और RT इंडिया की हेड ऑफ न्यूज रुनझुन शर्मा ने अपनी काबुल यात्रा के अनुभव साझा किए हैं। तालिबान हुकूमत के पांच साल बाद कैसा है काबुल? यात्रा के अनदेखे और अनछुए पहलुओं को सामने रखती है ये अफगान डायरी।

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