'शेर' ने खून का स्वाद चख लिया है... AK-47 के 'Gen-Z' का अनसुना किस्सा
’इंडिया, रशिया एंड द वर्ल्ड विद रुनझुन शर्मा’ कार्यक्रम में इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड के CEO और MD मेजर जनरल एसके शर्मा ने शिरकत की।
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’शेर’ ने खून का स्वाद चख लिया है

यह कहना है इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड के CEO और MD मेजर जनरल एसके शर्मा का। यहां ‘शेर’ का मतलब AK-203 राइफल से है। ’इंडिया, रशिया एंड द वर्ल्ड विद रुनझुन शर्मा’ कार्यक्रम में मेजर जनरल एसके शर्मा ने AK-203 की खासियतों के साथ भारत-रूस की डिफेंस पार्टनरशिप पर भी बात की। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच डिफेंस कोऑपरेशन अब लगातार नए क्षेत्रों तक बढ़ रहा है।

AK-203 राइफल को हम क्या कहें?

मेजर जनरल एसके शर्मा के मुताबिक, AK-203 को सिर्फ मेड इन इंडिया या रूसी राइफल कहना सही नहीं होगा। यह दोनों देशों की संयुक्त राइफल है।

उन्होंने कहा, “यह इंडो-रशियन राइफल है। इसका DNA रूस और कलाश्निकोव का है। कलाश्निकोव एक ऐसा ब्रांड है, जो अपनी विश्वसनीयता के लिए जाना जाता है। भारतीय सेना हमेशा से इस राइफल को चाहती थी, क्योंकि AK-47 के साथ हमारे कई सफल ऑपरेशन रहे हैं। भारतीय सेना में हमेशा से एक कहावत रही है किसी सैनिक को AK-47 दीजिए और उसे कहीं भी भेज दीजिए।”

’AK-47 की Gen-Z पीढ़ी है AK-203’

मेजर जनरल एसके शर्मा ने कहा कि भारतीय सेना का AK-47 के साथ लंबा और सफल अनुभव रहा है। इसी वजह से सेना लंबे समय से कलाश्निकोव परिवार की राइफल चाहती थी। उन्होंने AK-203 को AK-47 की ‘Gen-Z’ यानी नई पीढ़ी बताया।

उन्होंने कहा, “आज हमारे पास उसी (AK-47) की Gen-Z यानी नई पीढ़ी AK-203 है। इसलिए मैं रूस की भूमिका का श्रेय कम नहीं करना चाहूंगा। कलाश्निकोव राइफल की पूरी विचारधारा को जन्म रूस ने दिया है।”

उन्होंने आगे कहा, “लेकिन अब जहां तक हमारी बात है, हम इसका निर्माण भारत में कर रहे हैं। अब इसका हर कंपोनेंट, हर छोटा पार्ट और हर इनपुट मटेरियल भारतीय होगा। इस तरह यह भारत और रूस की संयुक्त कोशिश है।”

क्या ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में AK-203 का इस्तेमाल हुआ था?

मेजर जनरल शर्मा से बातचीत के दौरान RT इंडिया की हेड ऑफ न्यूज रुनझुन शर्मा ने पूछा कि कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि AK-203 का इस्तेमाल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हुआ था। इसमें कितनी सच्चाई है?

इसका जवाब देते हुए मेजर जनरल शर्मा ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर मई 2025 में हुआ था और तब तक हम भारतीय सेना को करीब 45 हजार AK-203 राइफलें दे चुके थे। ये राइफलें सेना की अलग-अलग यूनिट्स तक पहुंच चुकी थीं। इनमें से ज्यादातर उत्तरी कमान की यूनिट्स के पास थीं और ऑपरेशन सिंदूर का पूरा अभियान भी इसी क्षेत्र में हुआ था।”

उन्होंने आगे कहा, “इसलिए हां, AK-203 का इस्तेमाल वहां किया गया था। मैं आपको भरोसे के साथ कह सकता हूं कि ‘शेर’ ने खून का स्वाद चख लिया है।”

इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड (IRRPL) की ओर से बनाई जा रही इस राइफल को ‘शेर’ नाम दिया गया है। उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के कोरवा स्थित ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में इसका निर्माण हो रहा है।

इंडो-रसियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड (IRRPL) में भारत की 50.5% और रूस की 49.5% हिस्सेदारी है। यह रूस के बाहर सबसे बड़ी AK फैक्ट्री है। कंपनी भारत में बनी AK-203 राइफलों का निर्यात भी करेगी और दिसंबर 2030 तक कुल 6,01,000 राइफल बनाने का लक्ष्य है।

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