नई दिल्लीः ब्रिक्स समिट से पहले भारत-रूस के व्यापारिक संबंधों को गुरुवार को नई उड़ान मिली। रूस के यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (UAC) और भारत की तीन विमान कंपनियों के बीच 105 विमानों की आपूर्ति के समझौते हुए हैं। नई दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे Innoprom India एग्जीबिशन के इतर इस डील पर साइन किए गए। ये डील क्यों खास है, आइए बताते हैं।
रूस के उद्योग एवं व्यापार मंत्रालय के मुताबिक, इस समझौते के तहत रूस की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन भारतीय विमान कंपनियों को 105 आईएल-114-300 रीजनल एयरक्राफ्ट सप्लाई करेगा। UAC रूस के Rostec कॉर्पोरेशन का हिस्सा है।
किस एयरलाइंस को कितने विमान?
- पिनैकल एयर (Pinnacle Air) के साथ 50 विमानों की सप्लाई का आशय पत्र (letter of intent) साइन किया गया है।
- एयर केरला (Air Kerala) को करीब 20 विमानों की आपूर्ति के लिए समझौता पत्र पर दस्तखत किए गए हैं।
- स्लीक एविएशन (Sleek Aviation) को 35 विमान सप्लाई किए जाएंगे। समझौते के मुताबिक, एयरलाइंस के लिए फुल फ्लाइट सिम्युलेटर से लैस ट्रेनिंग सेंटर भी स्थापित किया जाएगा।
पहले विमान की रूस से आपूर्ति
यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन के सीईओ वदिम बादेखा ने बताया कि पहला विमान सीधे रूस से सप्लाई किया जाएगा। हालांकि इसके लिए सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। तास के मुताबिक, उन्होंने कहा कि चूंकि ये प्रक्रिया लंबी और जटिल है, इसलिए पहले रूसी विमान की सीधी आपूर्ति करने का फैसला लिया गया है। सर्टिफिकेशन पूरा होते ही विमानों की डिलीवरी शुरू हो जाएगी।
इससे पहले, रूस के फेडरल एयर ट्रांसपोर्ट एजेंसी के प्रमुख दिमित्री यादरोव ने पत्रकारों से कहा था कि रूसी और भारतीय एविएशन अथॉरिटीज के बीच Il-114-300 विमानों के अलावा SJ-100 विमानों को स्थानीय स्तर पर तैयार करने को लेकर बातचीत चल रही है।
IL-114-300 विमानों में क्या खास?
- यह विमान एक बार में करीब 1400 किलोमीटर तक सफर कर सकता है।
- इन विमानों में 68 यात्रियों के बैठने की क्षमता है।
- इस विमान को पूरी तरह रूस में बनाया गया है।
- विमान की पहली उड़ान रूस में दिसंबर 2020 में हुई और 2022 में इसे मंजूरी मिल गई।
'भारत को 200 विमानों की जरूरत'
UAC के सीईओ बादेखा का कहना है कि हमने भारतीय कंपनियों के साथ मिलकर आकलन किया है और हमारा अनुमान है कि अगले 10 वर्षों में भारत को करीब 100 सुपरजेट (SJ-100) और 100 से अधिक आईएल-114-300 विमानों की जरूरत हो सकती है।
उन्होंने कहा कि जो समझौते हुए हैं, उनके निकट भविष्य में पक्के कॉन्ट्रैक्ट में बदलने की उम्मीद है। इसके तहत आईएल-114-300 विमानों के भारत में ही प्रोडक्शन पर सहमति बन सकती है। त्रिपक्षीय समझौते पर भी विचार चल रहा है। इसमें UAC अपनी पार्टनर कंपनी को एयरक्राफ्ट देगी, जो आगे इनकी बिक्री करेगा।
SJ-100 विमान की खासियतें
- इस विमान में 103 यात्रियों के बैठने की क्षमता है।
- यह लगभग 50 टन तक का वजन लेकर चल सकता है।
- इसमें सुखोई सुपरजेट 100 के इंजन को मॉडिफाई करके लगाया गया है।
- यह करीब 30 मीटर लंबा विमान है। पंख के साथ इसकी चौड़ाई भी करीब इतनी ही है।
CEO ने RT को क्या बताया?
इस डील के बाद RT India की हेड ऑफ न्यूज रुनझुन शर्मा ने यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन के सीईओ वदिम बादेखा से एक्सक्लूसिव बातचीत की। इस दौरान बादेखा ने कहा कि ये समझौते भारत-रूस संबंधों में एक नया मोड़ हैं। अभी तक दोनों देश लड़ाकू विमान ही मिलकर बनाते रहे हैं। दशकों से ये काम हो रहा है, लेकिन अब पैसेंजर विमानों का भी संयुक्त उत्पादन करने जा रहे हैं।
एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि भारत में रूस के यात्री विमानों खासकर आईएल-114 टर्बोप्रॉप रीजनल एयरक्राफ्ट की अच्छी डिमांड है। हमारी सिविल एविएशन मिनिस्टर से भी मुलाकात हुई है। उन्होंने इस कैटिगरी के विमानों पर फोकस करने को कहा है।
विमान के साथ कई सुविधाएं भी
उन्होंने कहा कि हम भारत को सिर्फ हवाई जहाज ही नहीं बेच रहे हैं, बल्कि उसके साथ ट्रेनिंग, मेंटिनेंस जैसी सुविधाएं भी देंगे। यह एक तरह से संपूर्ण पैकेज की तरह है। हमारा मानना है कि भारतीय एविएशन इंडस्ट्री इसके लिए तैयार है। हमें यकीन है कि इस प्रोजेक्ट का भविष्य बहुत शानदार होगा।
बादेखा ने उम्मीद जताई कि जल्द ही IL-114 की डिलीवरी पर काम शुरू होगा। उनका कहना था कि अगर भारतीय कंपनियां इस विमान के लिए अपनी तरफ से कोई अलग नाम भी रखना चाहेंगी तो हम उसके लिए तैयार हैं।
भारत में विमान बनाने की छूट क्यों?
रूस में बने-बनाए जहाज भारत भेजने के बजाय UAC भारतीय कंपनियों को SJ-100 विमान स्थानीय स्तर पर बनाने, बेचने और उनकी सर्विस का अधिकार क्यों दे रही है? आरटी के इस सवाल पर सीईओ बादेखा ने कहा कि भारत-रूस के अलावा दोनों देशों की कंपनियों और उद्योगों के बीच रिश्ते इतने गहरे हैं कि हम सिर्फ सामान बेचने-खरीदने की बात नहीं करते। न तो भारत ऐसा चाहता है और न ही रूस को इसकी जरूरत है। आज भारत खुद अपने यहां विमान बनाने के लिए तैयार है और हम इसमें पूरा सहयोग करेंगे।
उन्होंने कहा कि रूस दुनिया का इकलौता देश है जो सैन्य विमानों के साथ-साथ यात्री विमानों को भी पूरी तरह अपने यहां बनाता है। यही वजह है कि हमने भारत से बिना किसी शर्त के स्थानीय स्तर पर विमानों के प्रोडक्शन को लेकर बात की है। अगर ये दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद होगा तो इसमें हमें किसी तीसरे पक्ष की जरूरत नहीं है।
क्या वाकई 200 विमानों का ऑर्डर मिलेगा?
सीईओ बादेखा से भारत में करीब 200 SJ-100 और IL-114 विमानों की असेंबलिंग के उनके अनुमान को लेकर भी सवाल किया गया कि आपको इतना भरोसा कैसे है कि भारतीय एयरलाइंस वाकई इतना बड़ा ऑर्डर देंगी?
इस पर बादेखा ने कहा कि हमें अपने भारतीय पार्टनर्स से जो डेटा मिला है, उससे साफ है कि भारत में SJ-100 और IL-114 को लेकर काफी उत्साह है। भारत में विमानों की डिमांड इसलिए भी बढ़ रही है क्योंकि सरकार छोटे शहरों और नए हवाई अड्डों को जोड़ने की बड़ी योजना पर काम कर रही है। इससे अगले 10 वर्षों में SJ-100 और IL-114 जैसे 200 से 300 नए विमानों की जरूरत पैदा होगी। इन विमानों की मदद से भारत में हवाई सफर तेज और सस्ता हो सकेगा। इस मामले में हमारी सोच काफी मिलती है।




