नई दिल्ली : भारत में ब्रिक्स समिट 2026 के लिए मेहमानों का आना शुरू हो गया है। समिट में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के आने की पुष्टि हो चुकी है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी आ रहे हैं। पुतिन के आने से पहले रूसी विमानों का आना शुरू हो चुका है। गुरुवार को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर रूस के तीन विमान उतरे। नोएडा एयरपोर्ट पर किसी इंटरनेशनल विमान की यह पहली लैंडिंग है। इन विमानों का भारत के 'गजराज' विमानों से भी अनोखा रिश्ता है।
भारत की अध्यक्षता में 12 और 13 सितंबर को ब्रिक्स का शिखर सम्मेलन हो रहा है। इसके लिए राजधानी नई दिल्ली के भारत मंडपम को खास तौर से सजाया गया है। 18वें ब्रिक्स समिट से पहले गुरुवार को जेवर एयरपोर्ट पर रूस के तीन ट्रांसपोर्ट विमान उतरे। इनमें इल्यूशिन आईएल-76 विमान भी शामिल है।
ये विमान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के आगमन से एक दिन पहले पहुंचे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ये विमान BRICS शिखर सम्मेलन की सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स तैयारियों के तहत रूसी एडवांस टीम और सैन्य अधिकारियों को लेकर पहुंचे हैं।
नोएडा में उतरे विमान की खासियत
आईएल-76 चार इंजनों वाला भारी मल्टी पर्पज मिलिट्री ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट है।
इस विमान को सोवियत संघ के समय 'इल्यूशिन डिजाइन ब्यूरो' ने डिजाइन किया था।
ये मालवाहक विमान भारी सैन्य साजो-सामान, बख्तरबंद गाड़ियां आदि पहुंचाने में बहुत काम आता है।
मुश्किल हालात और दुर्गम इलाकों तक तेजी से सामान और सैनिकों को पहुंचाने के लिए डिजाइन किया गया है।
आईएल-76 चार टर्बोफैन इंजनों से ऑपरेट होता है। इसकी स्पीड 800 से 850 किमी प्रति घंटे तक बताई जाती है।
आईएल-76 के अलग-अलग वेरिएंट 40 से 50 टन वजन ले जाने में सक्षम हैं।
भारत का गजराज कनेक्शन
इंडियन एयरफोर्स भी कई दशकों से आईएल-76 के स्पेशल एडिशन विमानों का इस्तेमाल करती रही है। भारत में इन्हें 'गजराज' नाम से जाना जाता है। इनका प्रयोग भारतीय वायुसेना भारी एयरलिफ्टर विमान के रूप में करती रही है। ये इतने बड़े हैं कि टी-72 जैसा विशालकाय टैंक रखकर भी ले जा सकता है।




