नेपाल हादसे के 9 दिन बाद 'चमत्कार', टनल से दो लोगों को जिंदा निकाला; जानें दिनभर के 5 बड़े अपडेट
हिमालय से आई तबाही को 9 दिन बीच चुके हैं। सरकारी आंकड़ों में मौतों की संख्या 1250 के पार चली गई है तो वहीं लापता लोगों की संख्या 5000 के पार है। त्रिशूली टनल से दो वर्कर्स को भी बाहर निकाल लिया गया है। नेपाल त्रासदी से जुड़े हर अपडेट के लिए बने रहिए RT Hindi के साथ
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नेपाल हादसे के 9 दिन बाद 'चमत्कार', टनल से दो लोगों को जिंदा निकाला; जानें दिनभर के 5 बड़े अपडेट
नेपाल में आपदा के बाद प्रभावित लोगों का बचाव कार्य जारी है।Gettyimages.ru© RT India

नेपाल में अचानक आई बाढ़ से भारी तबाही के 9 दिन बाद शुक्रवार को त्रिशूली 3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की एक सुरंग से दो लोगों को जिंदा बचाया गया। दोनों को इलाज के लिए अस्पताल में एडमिट कराया गया। नेपाली आर्मी की तरफ से जारी वीडियो में दिखा कि कीचड़ से भरे एक छोटे से रास्ते से एक आदमी के बाहर निकलते ही लोग खुशी से झूम उठे। बचाव कर्मियों ने उसे उठने में मदद की।

इमरजेंसी वर्कर्स उसे अपनी पीठ पर बिठाकर हेलीकॉप्टर की ओर ले गए। इस दौरान उसने अपना हाथ ऊपर उठाया। कीचड़ से सना एक दूसरा आदमी स्ट्रेचर पर ले जाए जाते समय हाथ जोड़कर प्रार्थना कर रहा था। बचाए गए शख्स में से एक का नाम है संजय शाह तो दूसरे का नाम है कबीर महार्जन। संजय मैकेनिकल फोरमैन के पद पर कार्यरत थे, जबकि कबीर मैकेनिकल सुपरवाइजर थे।

1. सुरंग में दो के जिंदा निकलने से बढ़ी उम्मीद

दो लोगों को जिंदा बचने से सुरंग में फंसे अन्य लोगों को बचने की उम्मीद जगी है। बचावकर्मियों ने त्रिशूली 3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की टनल के अंदर फंसे लोगों से बातचीत शुरू कर दी है। नेपाली सेना और आर्म्ड पुलिस फोर्स के जवानों वाली एक रेस्क्यू टीम सुरंग के अंदर है। टीम ने सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन तेज कर दिया है। फंसे हुए लोगों से सीधा संपर्क हो पाना, चल रहे बचाव अभियान में एक अहम और उत्साहजनक घटनाक्रम माना जा रहा है।

2. परिवार ने छोड़ दी थी जिंदा निकलने की उम्मीद

त्रिशूली 3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग से कबीर महर्जन के बचाए जाने पर उनके परिवार वालों ने बहुत खुशी जताई। महर्जन की चचेरी बहन ने कहा कि एक समय परिवार ने उम्मीद छोड़ दी थी, लेकिन उनके सुरक्षित लौटने पर वे खुशी से झूम उठे। ‘बहन ने कहा, ‘यह एक चमत्कार है। हमने एक बार उम्मीद छोड़ दी थी, लेकिन आज हमारी खुशी की कोई सीमा नहीं है। जब खबर मिली, तो मैंने अभी-अभी पूजा की थी। फिर मैंने अपनी दूसरी बहनों को फोन किया और भाई के सुरक्षित लौटने के लिए भगवान का शुक्रिया अदा किया

3. नेपाल में बाढ़ से बिहार में नदियां उफान पर

नेपाल में आई बाढ़ के बाद बिहार में गंगा, कोसी और बरंडी नदियों का जलस्तर बढ़ने से स्कूली बच्चों का दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। प्रतापगंज स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय के करीब 300 बच्चों के लिए स्कूल के दिन की शुरुआत बाढ़ के पानी के बीच नाव की सवारी से होती है, क्योंकि बाढ़ ने उनके पूरे स्कूल परिसर को घेर रखा है। मुख्य रास्ता पानी में डूब जाने के कारण, इन छोटे-छोटे बच्चों को सिर्फ क्लास करने के लिए निजी नावों के जरिए इधर से उधर ले जाना पड़ता है।

4. आपदा में मरने वालों की संख्या 1300 के करीब हुई

नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के अनुसार, पिछले महीने नेपाल में आई भयानक बाढ़ और अचानक आई बाढ़ (flash floods) में मरने वालों की संख्या शुक्रवार तक बढ़कर 1,290 हो गई है। मरने वालों में सबसे अधिक शव चितवन (359) में मिले। इसके बाद नवलपरासी ईस्ट (219), नवलपरासी वेस्ट (212), नुवाकोट (184), रसुवा (140), गोरखा (72), धाडिंग (63) और तनहुन (38) है। अब तक 96 शव परिवारों को सौंपे जा चुके हैं। NDRRMA ने बताया कि खोज और बचाव अभियान जारी हैं। लगभग 5,083 लोग लापता बताए जा रहे हैं, जिनमें रसुवा में 2,130, नुवाकोट में 2,340 और 583 विदेशी नागरिक शामिल हैं।

5.भारत से मदद लेकर नेपाल पहुंचे दो विमान

बाढ़ से प्रभावित नेपाल को भारत की मानवीय मदद जारी है। गुरुवार रात काठमांडू में छठी और सातवीं राहत उड़ानें पहुंचीं, जिनमें कुल 21.5 टन राहत सामग्री थी। इस सामग्री में बचाव और राहत कार्यों के लिए फोरेंसिक किट और मेडिकल उपकरण शामिल थे। विदेश मंत्रालय ने X पर एक पोस्ट में कहा कि मदद लेकर आए दोनों C-130J विमान काठमांडू में उतरे और राहत सामग्री नेपाल के विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार मंत्री महावीर पुन को सौंपी गई। 

नेपाल को अब तक कितना नुकसान?

  • कुल मौतें-1290
  • रेस्क्यू किए गए-12038
  • लापता- 5053
  • कुल घायल-5384(नेपाल की आपदा प्रबंधन NDRRMA के दिए आंकड़ों के अनुसार)

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  • त्रासदी के बीच भी नहीं कम हुई श्रद्धा, जन्माष्टमी पर काठमांडू के कृष्ण मंदिर में उमड़े श्रद्धालु

    नेपाल की राजधानी काठमांडू के ऐतिहासिक कृष्ण मंदिर में शुक्रवार तड़के बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। भक्तों ने उपवास, पारंपरिक अनुष्ठानों और गहरी आस्था के साथ श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार मनाया। सदियों पुराने मंदिर परिसर में काठमांडू घाटी के कोने-कोने से लोग दर्शन करने, प्रसाद ग्रहण करने और उत्सव के माहौल का हिस्सा बनने पहुंचे।

    नेपाल में हाल ही में आई विनाशकारी अचानक आई बाढ़ (फ्लैश फ्लड) के गमगीन माहौल के बीच, काठमांडू के इस प्राचीन मंदिर ने लोगों को आत्मिक शांति और संबल प्रदान किया है। सुबह 4:00 बजे से ही पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। स्थानीय लोगों और मंदिर के पुजारी ने बताया कि इस बार दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग की वजह से इस दिन का आध्यात्मिक महत्व और बढ़ गया है। मंदिर के पुजारी भुवन थपलिया ने इस साल के उत्सव के खास मुहूर्त के बारे में जानकारी दी।

    उन्होंने कहा, “वैदिक सनातन धर्म में कई तरह के त्योहार मनाए जाते हैं। उनमें भगवान श्रीकृष्ण का पर्व जन्माष्टमी एक अत्यंत प्राचीन वैदिक परंपरा है। हमारे अन्य प्रमुख त्योहारों की तरह जन्माष्टमी भी सबसे महत्वपूर्ण पर्वों में से एक है। यह भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को पड़ता है। इसका संबंध रोहिणी नक्षत्र से भी है, जो भगवान श्रीकृष्ण का जन्म नक्षत्र है। इस साल आज ही के दिन रोहिणी नक्षत्र का संयोग बना है।”

    पुजारी ने आगे कहा, “आज प्रभु का वास्तविक जन्म नक्षत्र है और इस वर्ष यह दुर्लभ संयोग पूरी तरह सटीक बैठा है। जैसा कि कहा जाता है—'सोने पर सुहागा', ऐसा संयोग हर साल नहीं बनता। इसलिए इस बार यह पर्व बेहद खास है।”

    मंदिर के पुजारी ने बताया कि सभी हिंदू वैदिक सनातनी श्रद्धालु तड़के 4:00 या 4:30 बजे से ही यहां जुटने लगे थे। उन्होंने कहा, “यह काफी प्राचीन मंदिर है। वैदिक सनातन परंपरा के सभी श्रद्धालु सुबह 4:00 या 4:30 बजे से ही यहां एकत्रित होने लगते हैं। मंदिर रात 8:00, 8:30 या कम से कम 9:00 बजे तक खुला रहता है। यहां भक्तों की भारी भीड़ जुटी हुई है और लोग दूर-दराज से दर्शन-पूजन करने पहुंच रहे हैं।”

    भुवन थपलिया ने कहा, “यूं तो कई मंदिर हैं, लेकिन पाटन का कृष्ण मंदिर मुख्य माना जाता है और वहां का माहौल काफी अनोखा होता है। वहीं काठमांडू में, जिसे हम हनुमान ढोका, काष्ठमंडप कहते हैं—यह इस अवसर के लिए बेहद खास मंदिर है। यह कई वर्ष पुराना है। सभी श्रद्धालु यहां आकर दर्शन करते हैं, प्रभु की कृपा और प्रसाद पाते हैं, और पूरे उल्लास के साथ पर्व मनाते हैं।”

  • टनल से जिंदा निकले कबीर का परिवार खुश, बहन ने कहा- भगवान का शुक्रिया

    त्रिशूली 3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग से कबीर महर्जन के बचाए जाने पर उनके परिवार वालों ने बहुत खुशी जताई। मीडिया से बात करते हुए महर्जन की चचेरी बहन ने कहा कि एक समय परिवार ने उम्मीद छोड़ दी थी, लेकिन उनके सुरक्षित लौटने पर वे खुशी से झूम उठे। उन्होंने कहा, 'हम बहुत खुश हैं। हम उनसे मिलने आए हैं। हमारी खुशी का कोई ठिकाना नहीं है। वह 10 दिनों तक सुरंग में फंसे रहे थे।'बहन ने कहा, 'यह एक चमत्कार है। हमने एक बार उम्मीद छोड़ दी थी, लेकिन आज हमारी खुशी की कोई सीमा नहीं है। जब खबर मिली, तो मैंने अभी-अभी पूजा की थी। फिर मैंने अपनी दूसरी बहनों को फोन किया और भाई के सुरक्षित लौटने के लिए भगवान का शुक्रिया अदा किया।'

    इससे पहले नेपाल आर्मी ने टनल से निकाले जाने के बाद मैकेनिकल सुपरवाइजर कबीर महर्जन को एयरलिफ्ट कर काठमांडू ले जाने की बात कही। कबीर को काठमांडू के नेशनल ट्रॉमा सेंटर में एडमिट करा दिया गया है। अब उनके परिजन वहां उनसे मिलने पहुंच चुके हैं।

    नेपाली सेना और आर्म्ड पुलिस फोर्स के जवानों वाली एक रेस्क्यू टीम टनल के अंदर गई है। टीम ने सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन तेज कर दिया है। फंसे हुए लोगों से सीधा संपर्क हो पाना, चल रहे बचाव अभियान में एक अहम और उम्मीद जगाने वाली बात मानी जा रही है। नेपाल में बचाव और राहत कार्य जारी हैं। इससे पहले शुक्रवार को, नुवाकोट के बिदुर में आर्मी कैंप के बाढ़ प्रभावित इलाके से एक गर्भवती महिला को एयरलिफ्ट करके काठमांडू ले जाया गया। त्रिशूली 3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की टनल के अंदर फंसे माने जा रहे लोगों का पता लगाने और उन्हें बचाने के लिए नौ दिनों से खोज और बचाव अभियान चल रहा है।

    प्रोजेक्ट साइट पर इंजीनियर के तौर पर तैनात न्यूपाने गुरुवार शाम तक खोज और बचाव अभियान में शामिल रहे। उन्होंने नेपाली सेना, आर्म्ड पुलिस फोर्स, टेक्निकल टीमों और बचाव कार्य में लगे अन्य लोगों की कोशिशों की तारीफ की। साथ ही उम्मीद जताई कि अंदर फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया जाएगा। त्रिशूली 3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग में फंसे लोगों का पता लगाने और उन्हें बचाने के लिए नौ दिनों से खोज और बचाव अभियान चल रहा है। इस बीच, नेपाल पुलिस के अनुसार, नेपाल में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1290 हो गई है।

  • नेपाल में राहत सामग्री से लेकर पहुंचे दो भारतीय विमान

    बाढ़ से प्रभावित नेपाल को भारत की मानवीय मदद जारी है। गुरुवार रात काठमांडू में छठी और सातवीं राहत उड़ानें पहुंचीं, जिनमें कुल 21.5 टन राहत सामग्री थी। इस सामग्री में बचाव और राहत कार्यों के लिए फोरेंसिक किट और मेडिकल उपकरण शामिल थे। विदेश मंत्रालय ने X पर एक पोस्ट में कहा कि मदद लेकर आए दोनों C-130J विमान काठमांडू में उतरे और राहत सामग्री नेपाल के विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार मंत्री महावीर पुन को सौंपी गई। पोस्ट में लिखा था, 21.5 टन मानवीय सहायता लेकर आए दोनों C-130J विमान नेपाल के काठमांडू में उतरे हैं। राहत सामग्री विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार मंत्री श्री महावीर पुन को सौंपी गई। यह सहायता बाढ़ प्रभावित इलाकों में चल रहे राहत और बचाव कार्यों में मदद करेगी।”

    RT© Source : @mea/X

    नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने भी कहा कि ये नई खेपें रासुवा में अचानक आई बाढ़ से निपटने में नेपाल को भारत की लगातार मदद का हिस्सा हैं। श्रीवास्तव ने X पर एक पोस्ट में कहा, “रासुवा में अचानक आई बाढ़ के लिए नेपाल के राहत कार्यों में भारत का सहयोग जारी है: आज रात काठमांडू में छठी और सातवीं राहत उड़ानें (C-130J) पहुंचीं, जिनमें 21.5 टन राहत सामग्री थी, जिसमें फोरेंसिक किट और मेडिकल सामान शामिल थे।”

    उन्होंने कहा कि सामग्री नेपाल को सौंप दी गई है और इससे चल रहे राहत और बचाव कार्यों तथा बाढ़ से प्रभावित समुदायों को मदद मिलेगी। भारत की राहत कार्रवाई पिछले हफ्ते बुधवार को आई विनाशकारी बाढ़ के तुरंत बाद शुरू हुई थी। भारत का पहला राहत विमान 26 अगस्त को नेपाल पहुंचा था, जिसमें 10 टन सामान था, जिसमें अस्थायी शेल्टर, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप और दवाएं शामिल थीं।


    दूसरी उड़ान 27 अगस्त को 37.5 टन राहत सामग्री के साथ पहुंची, जिसमें टेंट, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप, पानी निकालने वाले पंप, किचन सेट, जनरेटर, दवाएं और खाने का सामान शामिल था। इसके बाद तीसरी खेप में 10 टन और सहायता भेजी गई।

    30 अगस्त को, 11 टन राहत सामग्री लेकर चौथी उड़ान नेपाल पहुंची। इस खेप में खोज और बचाव कार्यों के लिए उपकरणों के साथ एक तकनीकी दल और DNA जांच के लिए फोरेंसिक एक्सपर्ट्स की एक टीम शामिल थी; साथ ही कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल, प्लास्टिक शीट और हाइजीन किट भी भेजे गए। 2 सितंबर को, भारत ने नेपाल के लिए अपना पांचवां विमान भेजा, जिसमें 11 सदस्यों वाली बचाव टीम, खास उपकरण और 5.5 टन जरूरी दवाइयां थीं।

  • 'घबराएं नहीं हम आपको बचा रहे हैं...' सुरंग के भीतर दो लोगों तक कैसे पहुंची रेस्क्यू टीम

    नेपाल में अचानक आई बाढ़ से भारी तबाही के कुछ दिनों बाद त्रिशूली 3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की एक सुरंग से दो लोगों को ज़िंदा बचाया गया है। नेपाली सेना ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। 'काठमांडू पोस्ट' ने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के सांसद श्री राम न्यूपाने के हवाले से बताया कि इन दोनों लोगों की पहचान मैकेनिकल फोरमैन संजय साह और मैकेनिकल सुपरवाइज़र कबीर महर्जन के तौर पर हुई है। उन्हें एयरलिफ्ट करके काठमांडू ले जाया गया है। सेना के अधिकारियों के अनुसार, साह का इलाज छाउनी स्थित बीरेंद्र आर्मी हॉस्पिटल में होगा, जबकि महर्जन को नेशनल ट्रॉमा सेंटर ले जाया जाएगा। नेपाली सेना ने X पर एक पोस्ट के जरिए उनके बचाव अभियान की जानकारी भी दी।


    हिमालयी देश में आपदा आने के नौ दिन बाद, बचाव कर्मियों ने त्रिशूली 3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग के अंदर फंसे माने जा रहे लोगों से संपर्क स्थापित कर लिया है। 26 अगस्त को रसुवा में भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ के कारण सुरंग बंद हो गई थी। बचाव दल के अनुसार, शुक्रवार को ऑपरेशन के दौरान सुरंग के अंदर से एक से ज़्यादा लोगों की आवाज़ें सुनी गईं। खबरों के मुताबिक, बचाव कर्मियों ने अंदर मौजूद लोगों से कहा, “घबराएं नहीं, हम आपको बचा रहे हैं,” जिसके जवाब में उन्होंने कहा, “हाँ।”

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    नेपाली सेना और आर्म्ड पुलिस फ़ोर्स के जवानों वाली रेस्क्यू टीम सुरंग में दाखिल हो गई है। सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन तेज कर दिया है। फंसे हुए लोगों से सीधा संपर्क होना जारी बचाव प्रयासों में एक अहम और उत्साहजनक घटनाक्रम माना जा रहा है। इससे पहले, राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के सांसद और ऊर्जा विभाग के प्रमुख श्रीराम न्यूपाने ने कहा था कि बचाव अभियान में शामिल नेपाली सेना के जवानों को जानकारी मिली थी कि सुरंग के अंदर से लोग बोल रहे हैं।

  • टनल से बाहर आए दो शख्स को मिला दूसरा जीवन, नेपाल आपदा से जुड़े बड़े अपडेट्स

    हाथ पकड़कर निकाला... कंधे पर बैठाया...और जब नई जिंदगी मिल गई तो हाथ जोड़कर टीम का आभार जताया... त्रिशूली टनल से दोनों वर्कर्स के सफल रेस्क्यू की आज यही कहानी है। 9 दिन से जिस टनल के अंदर फंसी जिंदगियों को निकालने की कोशिश जारी थी, वो आज सफल हो गई।

    काठमांडू के कबीर महर्जन और सप्तरी के संजय शाह की तस्वीरें और वीडियो आज वायरल हैं। बचाव टीम ने भी उनके सफल रेस्क्यू पर खूब गदगद है। कबीर महर्जन मैकेनिकल सुपरवाइजर हैं तो संजय मैकेनिकल फोरमैन के पद पर थे। बचाव कार्य में जुटे सुरक्षाकर्मियों ने बताया कि वे दोनों एक्सेस टनल (प्रवेश सुरंग) के बीच में मिले। वे बाहर निकलने की कोशिश के दौरान बीच में ही फंस गए थे।

    रेस्क्यू टीम ने कहा था-घबराना नहीं है, हम आपको बचा लेंगे...

    इससे पहले रेस्क्यू टीम ने इसी त्रिशूली 3 A के अंदर फंसे वर्कर्स से बात भी की थी। टीम ने आश्वस्त किया था कि आपको घबराना नहीं है, हम आपको बता रहे हैं और अंदर से एक आवाज आई थी-हां। इसका दावा हालांकि नेपाल के ही एक सांसद ने किया था जो बाद में सही साबित हुआ।

    नेपाल में बाढ़ से बिहार में नदियां उफान पर,नाव से जा रहे स्कूली बच्चे

    नेपाल में आई बाढ़ के बाद बिहार में गंगा, कोसी और बरंडी नदियों का जलस्तर बढ़ने से स्कूली बच्चों का दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। प्रतापगंज स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय के करीब 300 बच्चों के लिए स्कूल के दिन की शुरुआत बाढ़ के पानी के बीच नाव की सवारी से होती है, क्योंकि बाढ़ ने उनके पूरे स्कूल परिसर को घेर रखा है।

    मुख्य रास्ता पानी में डूब जाने के कारण, इन छोटे-छोटे बच्चों को सिर्फ क्लास करने के लिए निजी नावों के जरिए इधर से उधर ले जाना पड़ता है। स्कूल के शिक्षक अब्दुल बारिक ने एएनआई (ANI) को बताया,

    “यह काफी मुश्किल है। नाव पर चढ़ते समय हमें थोड़ा डर लगता है। स्कूल जाने वाली मुख्य सड़क पानी में डूबी हुई है, इसलिए हमें आने-जाने के लिए पास से ही एक निजी नाव बुलानी पड़ती है। अगर यहां एक ऊंचा पुल बन जाए, तो हमें इस परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।”

    हमने भारत से कोई मुआवजा नहीं मांगा- नेपाल के विदेश मंत्री

    नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ (फ्लैश फ्लड) पर विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने जोर देकर कहा है कि काठमांडू ने भारत से किसी भी तरह के वित्तीय मुआवजे की मांग नहीं की है। एएनआई (ANI) से बातचीत के दौरान खनाल ने उन खबरों को खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि नेपाल ने अपने पड़ोसी देश से औपचारिक रूप से जलवायु मुआवजे (क्लाइमेट कंपनसेशन) की मांग की है।

    खनाल ने कहा,

    “न तो मैंने और न ही विदेश मंत्रालय या नेपाल सरकार के किसी भी व्यक्ति ने भारत या चीन अथवा अमेरिका सहित किसी अन्य देश से मुआवजे की मांग की है या दावा किया है।” उन्होंने आगे कहा, “हमारी अपील केवल इतनी रही है कि वैश्विक समुदाय इस आपदा को जलवायु परिवर्तन और नेपाल पर इसके पड़ रहे असर के नजरिए से देखे।”

  • 10 दिन बाद टनल के अंदर फंसे लोगों से हुई रेस्क्यू टीम की बात

    नेपाल में 10 दिन बाद टनल में फंसे लोगों को एक राहत की किरण दिखाई दी। टीम की अंदर फंसे लोगों से बात हुई है। कांतिपुर में छपी रिपोर्ट के अनुसार, अंदर से आवाजें सुनने के बाद नेपाली सेना और सशस्त्र पुलिस बल के जवान सुरंग में दाखिल हुए और बचाव कार्य को तेज कर दिया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सांसद और इंजीनियर श्रीराम न्यौपाने ने बताया कि नेपाली सेना और सशस्त्र पुलिस बल की बचाव टीम सुरंग में दाखिल हो चुकी है और बचाव अभियान को तेज कर रही है।

    सुरंग के भीतर से इंसानी आवाजें सुनाई देने की जानकारी एक उम्मीद जगाने वाला संकेत है। उन्होंने यह भी पुष्टि की कि अंदर से एक से ज्यादा लोगों की आवाजें सुनाई दी थीं। न्यौपाने ने कहा “जब बचाव टीम ने कहा,'घबराएं नहीं,हम आपको बचा रहे हैं',तो अंदर से जवाब मिला 'हां'।”

    नेपाल टनल रेस्क्यू© Nepal Police

  • नेपाल में मरने वालों की संख्या 1252 पहुंची, सुरंग में अभी भी फंसे लोग

    नेपाल 9 दिन बाद भी भीषण आपदा के बाद संभलने की कोशिश कर रहा है। नुकसान कई हजार करोड़ का है,सीधे समझिए कि इस त्रासदी ने नेपाल के आम जन-जीवन के साथ जीडीपी को भी हिला दिया है। राहत और बचाव कार्य जारी है। मौत का आंकड़ा 1252 पर आ पहुंचा है। सबसे ज्यादा शव 355 चितवन से बरामद हुए हैं। राहत ती बात ये भी है कि अबतक 5 हजार से ऊपर घायलों का इलाज भी हो चुका है।

    नेपाल में आई बाढ़ ने बिहार की नदियों को भी उफान में ला दिया है।
    ▶️ दरभंगा, पश्चिम चंपारण, पूर्णिया, वैशाली, भागलपुर और मुंगेर समेत 15 से अधिक जिले बाढ़ की चपेट में हैं।
    ▶️ गंगा,सोन,पुनपुन,कोसी,गंडक,बूढ़ी गंडक,बागमती और घाघरा नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।
    ▶️ गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए पटना जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट पर है।

    नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने गुरुवार को काठमांडू में मौजूद डिप्लोमैटिक कम्युनिटी को भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद की ताजा स्थिति के बारे में बताया। इस दौरान उन्होंने सरकार की ओर से चलाए जा रहे खोज और बचाव अभियानों,प्रभावित विदेशी नागरिकों की स्थिति और नेपाल को मिल रही अंतरराष्ट्रीय सहायता का ब्योरा भी दिया।

    विदेश मंत्रालय में आयोजित इस विशेष ब्रीफिंग में विभिन्न देशों के राजदूत,राजनयिक मिशनों के प्रमुख व प्रतिनिधि शामिल हुए। इसके अलावा विश्व बैंक (World Bank),एशियाई विकास बैंक (ADB) और संयुक्त राष्ट्र (UN) सहित प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठनों के वरिष्ठ अधिकारी भी इस बैठक में मौजूद रहे।

  • नेपाल आपदा : आज के 5 बड़े अपडेट
    1. नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) की गुरुवार को जारी जानकारी के अनुसार, नेपाल में अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या 1,252 हो गई है। वहीं, लगभग 4,216 लोग लापता हैं या उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। सबसे अधिक 355 शव चितवन से मिले हैं। इसके बाद नवलपरासी ईस्ट (218), नवलपरासी वेस्ट (208), नुवाकोट (177) और रसुवा (127) है। NDRRMA के अनुसार, गोरखा, धाडिंग और तनाहुन से भी शव बरामद किए गए हैं। अब तक केवल 95 शवों की पहचान हो पाई है और उन्हें रिश्तेदारों को सौंपा गया है। इससे पीड़ितों की पहचान करने की चुनौती बनी हुई है।
    2. बाढ़ से प्रभावित त्रिशूली में पुल बह जाने के बाद समुदायों के बीच संपर्क बहाल करने के लिए एक कामचलाऊ जि प लाइन बनाई गई है। इसे चलाने में नेपाल पुलिस मदद कर रही है। पुल और सड़क संपर्क टूटने के कारण नदी के दूसरी ओर फंसे लोगों के लिए इस अस्थायी व्यवस्था ने एक जरूरी संपर्क का जरिया प्रदान किया है। स्थानीय निवासी मुहम्मद अमीर हक, जो आठ दिनों तक नदी के दूसरी ओर फंसे हुए थे, ने बताया कि शुरुआती डर के बावजूद जिप लाइन ने उन्हें नदी पार करने में मदद की।
    3. अमेरिका ने नेपाल को और मानवीय और आपदा राहत सहायता भेजी है। X पर एक पोस्ट में जानकारी देते हुए, भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने बताया कि गुरुवार को अमेरिका के दो मिलिट्री कार्गो विमानों ने नेपाल के नेतृत्व में चलाए जा रहे खोज, बचाव और राहत कार्यों में मदद के लिए 5,000 खास राहत सामग्री, 500 फर्स्ट-एड किट, स्ट्रेचर और फ्रंट-एंड लोडर पहुंचाए। गोर ने कहा कि यह सहायता नेपाल सरकार के अनुरोध पर भेजी गई है और यह बाढ़ राहत के लिए पहले से घोषित 3.6 मिलियन डॉलर की अमेरिकी सहायता के अतिरिक्त है।
    4. नेपाल में भारत की तरफ से 5 विमान उतर चुके हैं। इसमें खास उपकरणों और 5.5 टन ज़रूरी दवाओं के साथ 11 सदस्यों की बचाव टीम मौजूद थी। इससे पहले, स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह नेपाल में प्रभावित समुदायों को तुरंत आपातकालीन मदद देने के लिए UN के जरिए कुल मिलाकर लगभग 1 मिलियन अमेरिकी डॉलर की मानवीय सहायता दे रहा है। WAM की रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने UAE सहायता एजेंसी के जरिए मित्र देश 'फेडरल डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ नेपाल' को एक विमान से ज़रूरी राहत सामग्री भेजी है। इस सामग्री में 83 टन फूड सप्लाई और रहने-सहने व मानवीय जरूरतों का अन्य सामान शामिल है।
    5. नेपाल में अचानक आई बाढ़ के बाद बिहार की कई नदियों, जैसे गंगा, कोसी और गंडक में पानी का स्तर तेज़ी से बढ़ गया है। इससे निचले इलाकों (दियारा क्षेत्रों) में रहने वाले लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा है। नकटा दियारा और नदी के किनारे बसे दूसरे इलाकों के लोगों का कहना है कि बाढ़ का पानी उनके घरों में घुस गया है। सड़कें डूब गई हैं और मवेशियों के लिए खाने-पीने और रहने की जगह की समस्या हो रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि उन तक राहत सामग्री और जरूरी सुविधाएं नहीं पहुंची हैं।
  • लंगटांग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट-2 की बाढ़ प्रभावित सुरंग में खोज और बचाव अभियान जारी : नेपाल पुलिस

    काठमांडू : नेपाल पुलिस ने गुरुवार को बताया कि रसुवा जिले में स्थित लंगटांग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट-2 की सुरंग के अंदर खोज और बचाव अभियान चल रहा है। पुलिस ने X पर एक पोस्ट में कहा कि यह अभियान नेपाली सेना के सहयोग से चलाया जा रहा है। पुलिस ने लिखा, 'नेपाल पुलिस और नेपाली सेना की संयुक्त टीम रसुवा जिले में स्थित लंगटांग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट-2 की सुरंग के अंदर खोज और बचाव अभियान चला रही है।' यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब नेपाल में अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,252 हो गई है, जबकि लगभग 4,216 लोग लापता हैं या उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। यह जानकारी नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) द्वारा गुरुवार को जारी खोज, बचाव और राहत कार्यों की ताजा रिपोर्ट में दी गई है।

    लापता लोगों की लिस्ट में कई तरह के लोग शामिल हैं। इनमें से लगभग 900 लोग हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स से जुड़े हैं, जिनका अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है। साथ ही, लगभग 583 विदेशी नागरिक और विदेशी पर्यटकों के साथ आए 164 नेपाली नागरिक भी लापता या संपर्क से बाहर बताए गए हैं। दोपहर 12 बजे तक मिली जानकारी पर आधारित ये आंकड़े कई जिलों में आपदा के व्यापक असर को दिखाते हैं। सबसे ज्यादा 355 शव चितवन से मिले हैं। इसके बाद नवलपरासी ईस्ट (218 शव), नवलपरासी वेस्ट (208 शव), नुवाकोट (177 शव) और रसुवा (127 शव) है।

    NDRRMA के अनुसार, गोरखा, धाडिंग और तनाहुन से भी शव बरामद किए गए हैं। अब तक केवल 95 शवों की पहचान हो पाई है और उन्हें परिजनों को सौंपा गया है, जो पीड़ितों की पहचान करने की लगातार बनी हुई चुनौती को दर्शाता है। अथॉरिटी ने बताया कि लगभग 11,993 लोगों को बचाया गया है, जबकि 5,135 घायल लोगों का इलाज किया गया है। इनमें से 301 लोगों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में हुआ, जबकि नेपाली सेना और आर्म्ड पुलिस फोर्स ने क्रमशः 3,206 और 1,628 लोगों का इलाज किया।

  • शव न मिलने पर टूट गई उम्मीद,इन परिवारों ने 9 दिन बाद कर दिया अपनों का अंतिम संस्कार

    नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के नौ दिन बीत जाने के बाद अब लापता लोगों के परिवारों ने यह मान लिया है कि उनके अपने अब इस दुनिया में नहीं रहे। भारी मन से परिजनों ने शव मिले बिना ही अपने प्रियजनों का श्राद्ध और शोक संस्कार करना शुरू कर दिया है। बेतरावती के बोगटी टार गांव में एक परिवार ने अपने दो भाइयों 65 वर्षीय केदार प्रसाद आचार्य और 60 वर्षीय मधुसूदन आचार्य के लिए शोक और श्राद्ध कर्म किया। ये दोनों 26 अगस्त को बाढ़ आने के बाद से लापता थे।

    दोनों भाई सुबह करीब 8 बजे नदी किनारे जंगल की तरफ घास काटने गए थे, लेकिन कभी वापस नहीं लौटे। नौ दिनों की लगातार तलाश के बावजूद न तो उनका कोई सुराग मिला और न ही शव बरामद हो सका।

    लापता भाइयों के एक अन्य भाई ने समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) को बताया कि काफी खोजबीन के बाद भी उनका कोई पता नहीं चल सका। उन्होंने कहा,”हम उन्हें नहीं ढूंढ पाए। वह घास काटने गए थे। सरकार द्वारा बरामद किए गए शवों में भी उनका कुछ पता नहीं चला।” जब उनसे पूछा गया कि क्या परिवार ने मान लिया है कि दोनों भाइयों की मौत हो चुकी है, तो उन्होंने कहा,”हां,वे गुजर गए...हमने इसे स्वीकार कर लिया है।”

    उन्होंने बताया कि परिवार के दो सगे भाई बाढ़ में बह गए। उन्होंने कहा, “आज नौवां दिन है। इसलिए हम मुंडन और शुद्धि की रस्में निभा रहे हैं।”

    परिवार के एक अन्य सदस्य ने कहा कि उन्होंने नौ दिनों तक इंतजार किया और हर मुमकिन जगह तलाश की, लेकिन शव नहीं मिले। उन्होंने कहा “हमने नौ दिन तक इंतजार किया और सब जगह ढूंढा, पर कुछ हाथ नहीं लगा। जब वे नहीं मिले, तो हमने समझ लिया कि अब वे कभी नहीं मिलेंगे।”

    उन्होंने आगे कहा, “अब तक तो शव क्षत-विक्षत हो चुके होंगे या कहीं दूर बह गए होंगे, किसी को नहीं मालूम। इसलिए हिंदू परंपरा और रीति-रिवाजों के अनुसार हमने नौवें दिन से शोक संस्कार शुरू कर दिए हैं।” आचार्य परिवार ने हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार श्राद्ध और तर्पण की प्रक्रिया पूरी की।

    नेपाल त्रासदी© ANI

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