धरती, आकाश, सुरंग... नेपाल में तबाही के बाद भारत कैसे कर रहा मदद
नेपाल में अचानक आई बाढ़ से भारी तबाही हुई है। अभी सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की खोजने और उन तक पहुंचने की है जिसमें भारत लगातार मदद कर रहा है। राहत सामग्री, रेस्क्यू टीमों के अलावा भी कई तरह से सहायता की जा रही है।
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धरती, आकाश, सुरंग... नेपाल में तबाही के बाद भारत कैसे कर रहा मदद
भारत की स्पेशल रेस्क्यू टीम टनल में फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।© @navsri6619/X

नेपाल-तिब्बत सीमा पर स्थित त्रिशूली और भोटेकोशी नदियों में अचानक आई बाढ़ ने भीषण तबाही मचाई है। इस आपदा से नेपाल में बुधवार को 1,127 लोगों की मौत और 4,858 लोग लापता होने की पुष्टि की गई है। वहीं, तिब्बत में 16 मौतें हुई हैं और 546 लोगों का पता नहीं चल पा रहा है।

लापता लोगों को खोजने लिए रेस्क्यू टीमें भारी मशीनों, हेलिकॉप्टरों और खुदाई करने वाली मशीनों की मदद ले रही हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन में भारत की स्पेशल रेस्क्यू टीम भी नेपाली टीम के साथ मिलकर काम कर रही है।

रेस्क्यू टीमें बाढ़ में तबाह हुए हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स के मलबे को भी हटाने में जुटी हैं। देश के 11 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स के 900 से ज्यादा कर्मचारी लापता हैं जिन तक पहुंचने के लिए खुदाई करने वाली मशीनों की मदद ली जा रही है।

नेपाल की मदद में भारत ने अब तक क्या-क्या किया?

बाढ़ के बाद भारत नेपाल की हरसंभव मदद कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक जताते हुए कहा कि भारत 'फर्स्ट रिस्पॉन्डर' के तौर पर नेपाल के साथ खड़ा है।

वहीं, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने नेपाली समकक्ष शिशिर खनाल से बात कर हर संभव मदद का भरोसा दिलाया।

भारत नेपाल को भारी मात्रा में राहत सामग्री भेज रहा है, साथ ही मेडिकल सहायता, टनल रेस्क्यू, शवों की डीएनए पहचान और बुनियादी ढांचे की बहाली, इन सभी मोर्चों पर मदद कर रहा है।

© @navsri6619/X

अब तक 5 विमानों से भारत ने भेजी राहत

भारत ने अब तक पांच सैन्य विमानों के जरिए कुल 74 टन राहत सामग्री नेपाल भेजी है।

2 सितंबर- भारत का पांचवां विमान राहत सामग्री लेकर काठमांडू पहुंचा। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक ट्वीट कर बताया कि नेपाल को विशेष उपकरणों से लैस 11 सदस्यीय रेस्क्यू टीम और 5.5 टन जरूरी दवाइयां भेजी गई हैं।

30 अगस्त- भारत से चौथा विमान 11 टन राहत सामग्री के साथ काठमांडू पहुंचा। विमान में सुरंगों में खोज और बचाव अभियान के लिए विशेष उपकरणों के साथ एक अतिरिक्त तकनीकी टीम भेजी गई है।

डीएनए जांच के लिए 19 सदस्यीय स्पेशल फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम और जरूरी फॉरेंसिक उपकरण भी भेजे गए हैं।

29 अगस्त- विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत की टनल रेस्क्यू टीम भी नेपाल पहुंच गई है। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि मलबे से 163 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाल लिया गया है।

28 अगस्त- भारत से नेपाल के लिए तीसरा विमान रवाना हुआ जिसमें 10 टन सामान के साथ-साथ 11 सदस्यीय डॉक्टर-पैरामेडिक टीम सवार थी।

सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने के लिए एक रेक्की टीम भी भेजी गई ताकि उनके बारे में जानकारी जुटाई जा सके।

27 अगस्त- भारत से दूसरा विमान 37.5 टन राहत सामग्री लेकर नेपाल पहुंचा जिसमें दवाइयां, खाने-पीने की चीजें, अस्थायी शेल्टर, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप, पोर्टेबल जनरेटर, पानी साफ करने वाली गोलियां, डी-वॉटरिंग पंप और किचन सेट शामिल थे।

26 अगस्त- आपदा के ठीक बाद भारत से जरूरी राहत सामग्री लेकर भारत से पहला विमान नेपाल पहुंचा। विमान में 10 टन राहत सामग्री थी।

सुरंग में रेस्क्यू मिशन बेहद मुश्किल

भारत की टनल रेस्क्यू टीम नेपाल के हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में फंसे लोगों तक पहुंचने में नेपाली टीम के साथ मिलकर काम कर रही है।

नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव के मुताबिक, भारतीय टीम ने नेपाल में दो हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स चिलिमे और लांगटांग पर रेस्क्यू ऑपरेशन में महत्वपूर्ण प्रगति की है।

भारतीय टीम ने चिलिमे साइट की एक सुरंग के अंदर अपनी स्थिति बना ली है, जबकि लांगटांग साइट पर सुरंग के अंदर करीब 185 मीटर तक जाकर जांच की है।

राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने खुद काठमांडू में इन टीमों से मुलाकात कर उनके काम की जानकारी ली और बताया कि रेस्क्यू ऑपरेशन अगले दिनों में भी जारी रहेगा।

इस ऑपरेशन में हालांकि, रेस्क्यू टीम को काफी मुश्किलें आ रही हैं क्योंकि सुरंग में जाने की जगह बेहद कम है, खराब इलाके के कारण बचाव के लिए इस्तेमाल होने वाले विशेष उपकरणों का इस्तेमाल भी सीमित है और सुरंग का फर्श कीचड़ से भरा हुआ है।

शवों की पहचान में भी भारत कर रहा मदद

अचानक आई बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में शव मिले हैं और कइयों की पहचान करना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में भारत की फॉरेंसिक टीम DNA विश्लेषण में मदद कर रही है ताकि शवों की पहचान हो सके।

यह टीम काठमांडू घाटी के खुमलतार इलाके में स्थित नेपाल पुलिस की सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी और नेशनल फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी में अपने नेपाली समकक्षों के साथ मिलकर काम कर रही है।

नेपाल पुलिस के मुताबिक, करीब 400 शवों के आंशिक अवशेष ही मिले हैं। यही वजह है कि इनकी पहचान के लिए DNA टेस्टिंग जरूरी हो गई है।

नेपाल में भारत की फोरेंसिक टीम© @navsri6619/X

टूटे पुलों और सड़कों को फिर जोड़ने में मदद

बाढ़ में नेपाल के कई पुल और सड़कें बह गई हैं, जिससे प्रभावित इलाकों तक राहत पहुंचाना और लोगों को बाहर निकालना मुश्किल हो गया है।

भारत ने इस समस्या से निपटने के लिए 230 फुट लंबे सिंगल-लेन मॉड्यूलर स्टील ब्रिज के निर्माण का सामान भेजा है, जिसे 16 ट्रकों में नेपाल पहुंचाया गया।

इसके अलावा, भारत 7 और बेली ब्रिज के लिए उपकरण भेजने और उन्हें लगाने के लिए तकनीकी टीम जल्द भेजी जाएगी।

नेपाल का ये स्कूल बनाने में मदद करेगा भारत

नेपाल में आई भीषण बाढ़ के दौरान नुवाकोट के त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। लेकिन प्रिंसिपल की सूझबूझ से स्कूल के करीब 1,600 बच्चों की जान बच गई।

ऊपरी इलाकों में बाढ़ की खबर मिलते ही प्रिंसिपल राजेंद्र दावाड़ी ने स्कूल खाली करा दिया और बच्चों को ऊपरी इलाकों में भेज दिया था, जिससे उनकी जान बच गई।

1950 के दशक में इस स्कूल की इमारत का डिजाइन उस समय त्रिशूली हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के निर्माण से जुड़े एक इंजीनियर ने तैयार किया था।

बाद में 2022 में स्कूल की नई इमारत भारत सरकार के HICDP (हाई इम्पैक्ट कम्युनिटी डेवलपमेंट प्रोग्राम) के तहत मिली आर्थिक मदद से बनाई गई थी।

बाढ़ में क्षतिग्रस्त हुए स्कूल की पहले की और आपदा के बाद की तस्वीर© @navsri6619/X

अब भारत ने एक बार फिर इस स्कूल को दोबारा खड़ा करने का जिम्मा उठाया है। राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने स्कूल के प्रिंसिपल से मुलाकात की है और स्कूल के पुनर्निर्माण में मदद का वादा किया है।

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