सच्चा दोस्त ऐसा ही होता है! श्रीलंका के एयर डिफेंस को धार देगा भारत
भारत और श्रीलंका ने श्रीलंकाई वायु सेना के लिए L70 गन को अपग्रेड करने और दोनों देशों के नेशनल कैडेट कोर (NCC) व नेशनल डिफेंस कॉलेजों के बीच सहयोग के लिए समझौता ज्ञापनों (MoU) का आदान-प्रदान किया। इन एयर डिफेंस गन के अपग्रेड होने से श्रीलंका में अहम संपत्तियों की एयर डिफेंस व्यवस्था मजबूत होगी।
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सच्चा दोस्त ऐसा ही होता है! श्रीलंका के एयर डिफेंस को धार देगा भारत
कोलंबो में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके।

संकट चाहे आर्थिक हो, प्राकृतिक आपदा हो या सुरक्षा से जुड़ी चुनौती... भारत हरदम पड़ोसी श्रीलंका का साथ निभाने के लिए तैयार खड़ा रहा है। 2022 के आर्थिक संकट में भारत ने उसे ईंधन, भोजन और दवाओं समेत करीब 4 अरब डॉलर की मदद दी थी। अब भारत अपने खर्च पर श्रीलंकाई वायुसेना की छह L-70 गनों को आधुनिक बनाकर उसकी हवाई सुरक्षा को नई ताकत देगा।

बता दें कि भारत और श्रीलंका के संबंध अब आपदा राहत और आर्थिक मदद से आगे बढ़कर रक्षा साझेदारी की ओर बढ़ रहे हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की श्रीलंका यात्रा के दौरान दोनों देशों ने श्रीलंकाई वायुसेना की छह L-70 एयर डिफेंस गन को आधुनिक बनाने का समझौता किया है। भारत के रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इन छह गनों का आधुनिकीकरण भारत सरकार के अनुदान से किया जाएगा। ये गन पहले भी भारत ने ही श्रीलंकाई वायुसेना को दी थीं। इन्हें आधुनिक बनाने से श्रीलंका के महत्वपूर्ण ठिकानों की हवाई सुरक्षा मजबूत होगी।

L-70 गन क्या है?

L-70 एक 40 मिलीमीटर की विमान-रोधी तोप है। इसका उपयोग कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमानों, हेलिकॉप्टरों और ड्रोन जैसे हवाई खतरों को निशाना बनाने के लिए किया जाता है। DRDO की एक आधिकारिक पत्रिका के मुताबिक, L-70 गन एक मिनट में करीब 300 गोले दाग सकती है। हवाई लक्ष्यों के खिलाफ इसकी प्रभावी दूरी करीब तीन से चार किलोमीटर है। इस कारण यह महत्वपूर्ण ठिकानों को कम दूरी से आने वाले हवाई खतरों से सुरक्षा दे सकती है।

भारत ने L-70 गन को 1960 के दशक की शुरुआत में अपनी सेना में शामिल किया था। पहले इसे विदेश से मंगाया गया और बाद में जबलपुर की गन कैरिज फैक्ट्री में इसका उत्पादन शुरू हुआ। हवाई हमलों का स्वरूप बदलने के साथ इस पुरानी लेकिन भरोसेमंद गन को आधुनिक तकनीक से लैस किया गया।

आधुनिक बनने के बाद क्या बदलेगा?

श्रीलंका के साथ हुए समझौते में यह विस्तार से नहीं बताया गया है कि उसकी छह गनों में कौन-कौन से उपकरण लगाए जाएंगे। हालांकि, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड यानी BEL ने अपने आधुनिक L-70 संस्करण की खूबियां बताई हैं। BEL के मुताबिक, आधुनिक L-70 गन में दिन और रात दोनों समय टारगेट को देखने में सक्षम है। इसमें लेजर से लक्ष्य की दूरी नापने वाला उपकरण, दिन में काम करने वाला कैमरा और अंधेरे में टारगेट पहचानने वाली थर्मल इमेजिंग प्रणाली शामिल है।

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इसकी कंप्यूटर आधारित प्रणाली लक्ष्य की दूरी, दिशा और रफ्तार के आधार पर यह गणना करती है कि गोला किस दिशा में दागा जाना चाहिए। इससे तेजी से उड़ रहे टारगेट पर सटीक निशाना लगाने में मदद मिलती है। आधुनिक संस्करण में पुराने हाइड्रोलिक हिस्सों को इलेक्ट्रिक प्रणाली से बदला जाता है। इससे गन को लक्ष्य की तरफ घुमाने की प्रक्रिया अधिक तेज और भरोसेमंद हो जाती है। यह गन बैटरी की सहायता से भी काम कर सकती है और इसे निगरानी तथा निशाना लगाने वाले रडार से जोड़ा जा सकता है।

L-70 की क्या है खासियत?

क्षमता

खासियत

आकार40 मिलीमीटर
हवाई लक्ष्य पर प्रभावी दूरीकरीब 3 से 4 किलोमीटर
गोले दागने की रफ्तारकरीब 300 गोले प्रति मिनट
निगरानीदिन और रात काम करने वाले कैमरे
दूरी का पता लगानालेजर आधारित उपकरण
निशानाकंप्यूटर की मदद से लक्ष्य की दिशा और रफ्तार की गणना
संचालनपुराने हाइड्रोलिक हिस्सों की जगह इलेक्ट्रिक प्रणाली
रडार से संपर्कनिगरानी और निशाना लगाने वाले रडार से जोड़ी जा सकती है
बिजली की व्यवस्थाबैटरी की सहायता से भी संचालन

श्रीलंका के लिए यह समझौता क्यों अहम है?

L-70 कम ऊंचाई और कम दूरी से आने वाले हवाई खतरों के खिलाफ नजदीकी सुरक्षा देने वाली प्रणाली है। इसके आधुनिक होने से श्रीलंका अपने हवाई अड्डों, सैन्य ठिकानों, बंदरगाहों या ऊर्जा प्रतिष्ठानों जैसी अहम जगहों की सुरक्षा बेहतर कर सकता है। हालांकि, रक्षा मंत्रालय ने यह नहीं बताया है कि इन छह गनों को किन जगहों पर तैनात किया जाएगा। साथ ही यह समझौता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत केवल श्रीलंका को रक्षा उपकरण नहीं दे रहा, बल्कि पहले दिए गए हथियारों को आधुनिक बनाकर लंबे समय तक इस्तेमाल के योग्य बनाने में भी मदद कर रहा है।

राहत से रक्षा तक मजबूत होती साझेदारी

इसी यात्रा के दौरान भारत और श्रीलंका ने अपने राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालयों के बीच शैक्षणिक सहयोग और राष्ट्रीय कैडेट कोर के युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम को औपचारिक बनाने के लिए भी समझौते किए।

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राजनाथ सिंह और श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने भारतीय रक्षा बलों द्वारा बनाए गए तीन बेली ब्रिज का भी उद्घाटन किया। राष्ट्रपति दिसानायके ने दोहराया कि श्रीलंका अपनी जमीन का इस्तेमाल भारत के सुरक्षा हितों के खिलाफ किसी गतिविधि के लिए नहीं होने देगा। दोनों देशों ने क्षेत्र में सुरक्षा, शांति और समृद्धि के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई है।

मुश्किल में श्रीलंका का साथ निभाता रहा है भारत

गौरतलब है कि भारत ने चक्रवात दित्वा के बाद ‘ऑपरेशन सागर बंधु’ के तहत श्रीलंका को राहत सहायता भी दी थी। राजनाथ सिंह ने कहा कि करीबी मित्र और पड़ोसी होने के नाते संकट के समय श्रीलंका की मदद करना भारत के लिए कोई एहसान नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है।

यही इस रक्षा समझौते का बड़ा संदेश भी है कि भारत और श्रीलंका का रिश्ता अब संकट के समय सहायता देने तक सीमित नहीं है। यह प्रशिक्षण, रक्षा तकनीक, हवाई सुरक्षा और समुद्री सहयोग तक फैलती लॉन्ग टर्म साझेदारी बन रहा है।

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