
3D प्रिंटिंग से बने पार्ट्स वाला रूस का सुपरजेट PD-8 इंजन, जिसमें मजबूत टाइटेनियम ब्लेड का इस्तेमाल किया गया है।
भारत-रूस के जॉइंट वेंचर से बनी वंदे भारत ट्रेन, जिसकी खासियत बेहतर सेफ्टी, सुपर स्पीड और यूजर-फ्रेंडली होना है।
CPR की पूरी प्रोसेस को रियल टाइम में मॉनिटर कर उसकी क्वालिटी रिपोर्ट तैयार करने वाली स्मार्ट मेडिकल टेक्नोलॉजी।
यह सब कुछ भारत मंडपम में आयोजित ‘इनोप्रोम इंडिया’ (INNOPROM India) ट्रेड फेयर में दिखा। 18वें BRICS समिट से पहले दिल्ली में भारत-रूस के टेक्नोलॉजी शो में ऐसी तमाम झलकियां दिखीं। 11 सितंबर तक चलने वाले इस ट्रेड फेयर में रूस और भारत की 130 से ज्यादा कंपनियां अपने प्रोडक्ट और टेक्नोलॉजी का प्रदर्शन कर रही हैं।
इस खास मौके पर RT इंडिया भी कार्यक्रम में पहुंचा। इस ट्रेड शो में भारत और रूस की कौन-कौन सी टेक्नोलॉजी, मशीनें और इनोवेशन आकर्षण का केंद्र बने, आइए इसकी पूरी जानकारी देते हैं।
रूस के सुपरजेट PD-8 इंजन की झलक
Rostec और UAC के स्टॉल पर PD-8 इंजन का मॉडल भी प्रदर्शित किया गया है। यह एक टर्बोफैन इंजन है, जिसे खास तौर पर आधुनिक यात्री विमानों के लिए विकसित किया गया है। इस इंजन की खासियत इसकी ईंधन दक्षता, आसान मेंटेनेंस और बेहतर पावर आउटपुट है। इसे SJ-100 क्षेत्रीय यात्री विमान और Be-200ChS विमान के लिए तैयार किया गया है।
PD-8 इंजन का निर्माण यूनाइटेड इंजन कॉरपोरेशन (UEC) ने किया है। PD-8 को रूस की आयात पर निर्भरता कम करने की रणनीति के तहत विकसित किया गया है। इसके निर्माण में उन्नत रूसी सामग्रियों और 3D प्रिंटिंग समेत आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। आरटी इंडिया की रिपोर्टर रुजुता थेटे ने बताया क्यों खास है ये है इंजन?
PD-8 इंजन की 5 खासियतें
- दो शाफ्ट वाला डिजाइन: PD-8 में दो अलग-अलग शाफ्ट हैं। इससे इंजन के अलग-अलग हिस्सों पर पड़ने वाला लोड बेहतर तरीके से बंट जाता है। इसका फायदा यह है कि इंजन में कंपन कम होता है और उसकी उम्र भी बढ़ती है।
- सिर्फ 6 साल में तैयार: नया विमान इंजन बनाने में आमतौर पर 10 साल या उससे ज्यादा समय लग जाता है। लेकिन PD-8 को रूस ने करीब 6 साल में विकसित किया। यही इसकी बड़ी खासियतों में से एक है।
- ईंधन की बचत: PD-8 में 7-स्टेज हाई-प्रेशर कंप्रेसर लगाया गया है। इससे इंजन हवा को ज्यादा दबाव के साथ कंप्रेस कर पाता है और फ्यूल एफिशिएंसी बेहतर होती है। इसका कंप्रेशन रेशियो 28:1 है।
- मजबूत टाइटेनियम ब्लेड: इसके फैन में 24 चौड़े टाइटेनियम ब्लेड लगे हैं। टाइटेनियम हल्का होने के साथ-साथ मजबूत भी होता है, इसलिए यह इंजन के प्रदर्शन और मजबूती के लिए अहम है।
- कम प्रदूषण, ज्यादा तापमान झेलने की क्षमता: PD-8 के कम्बशन चैंबर को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इससे उत्सर्जन कम हो और इंजन ज्यादा तापमान को भी झेल सके। इसमें PD-14 इंजन में इस्तेमाल होने वाली हीट-रेजिस्टेंट तकनीक और कोटिंग्स का भी इस्तेमाल किया गया है।
'वंदे भारत' पर भारत-रूस की साझेदारी
भारत मंडपम में भारत-रूस के जॉइंट वेंचर के तहत तैयार की जा रही वंदे भारत ट्रेन का मॉडल भी प्रदर्शित किया गया है। इस प्रोजेक्ट के तहत 120 ट्रेनों के निर्माण और उनके रखरखाव की योजना है। ट्रेड फेयर में प्रदर्शित मॉडल के प्रोटोटाइप के दिसंबर 2026 तक रोलआउट होने की संभावना है। इस प्रोजेक्ट को भारत की RVNL और रूस की Kinet कंपनी के जॉइंट वेंचर के जरिए जमीन पर उतारा जा रहा है।
इस प्रोजेक्ट की तीन बड़ी प्राथमिकताएं हैं- यूजर फ्रेंडलीनेस, सेफ्टी और स्वदेशी उत्पादन एवं मेंटेनेंस।
जॉइंट वेंचर के तहत रूसी पार्टनर ने अपनी तकनीक को भारत की जरूरतों के मुताबिक विकसित किया है और यहां प्रोडक्शन यूनिट भी स्थापित की है। यानी तकनीक से लेकर ट्रेन के उत्पादन और उसके रखरखाव तक, इस प्रोजेक्ट में भारत में ही काम किया जा रहा है। यही वजह है कि इसे स्वदेशी उत्पादन की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
मेडिकल टेक्नोलॉजी भी आकर्षण का केंद्र
भारत मंडपम में रूस की मेडिकल टेक्नोलॉजी भी लोगों का ध्यान खींच रही है। यहां MedVision एप्लीकेशन के जरिए मरीज की हार्टबीट और CPR की प्रक्रिया को मॉनिटर किया जा सकता है। इसके साथ एक रिपोर्ट भी तैयार होती है, जिससे मेडिकल छात्रों को यह समझने में मदद मिलती है कि CPR तकनीक का सही तरीके से इस्तेमाल किया गया या नहीं।
इस तकनीक को RT इंडिया की रिपोर्टर रिद्धिमा केडिया ने विस्तार से समझाया है। आइए देखते हैं कि यह तकनीक कैसे काम करती है।
रूस और भारत की दिग्गज कंपनियां भी शामिल
प्रदर्शनी में रूस और भारत के राष्ट्रीय पवेलियन को बराबर जगह दी गई है। रूसी पवेलियन में रोस्टेक (Rostec), रोसाटॉम (Rosatom), रोस्कोस्मोस (Roscosmos), यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन (UAC), यूनाइटेड इंजन कॉरपोरेशन (UEC), Sber, ट्रांसमाशहोल्डिंग और RUSAL समेत कई प्रमुख सरकारी और औद्योगिक कंपनियां शामिल हैं।
भारतीय पवेलियन में धातु उद्योग, खनन, डिजिटल टेक्नोलॉजी, परिवहन इंजीनियरिंग, टेक्सटाइल, ऊर्जा और तेल-गैस समेत कई क्षेत्रों की कंपनियां और संस्थान शामिल हैं। इनमें MECON, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL), NMDC, MOIL, सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, RVNL, टीटागढ़ रेल सिस्टम्स, टाटा पावर, ITC ग्रुप और खनिज विदेश इंडिया लिमिटेड (KABIL) शामिल हैं।
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