नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद हजारों लोग लापता या संपर्क से बाहर हैं। कई शव और मानव अवशेष ऐसे मिले हैं जिनकी पहचान सिर्फ चेहरा देखकर, कपड़ों या दस्तावेजों से कर पाना संभव नहीं है। अब भारत सरकार ने नेपाल में लापता लोगों के भारत में रहने वाले करीबी परिजनों की डीएनए प्रोफाइलिंग कराने की व्यवस्था शुरू की है।
इसके लिए परिजनों को नेपाल जाने की जरूरत नहीं होगी। वे भारत की केंद्रीय और राज्य फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं तथा कुछ अन्य अधिकृत प्रयोगशालाओं में नमूना दे सकेंगे। उस नमूने से तैयार डीएनए प्रोफाइल नेपाल पुलिस को भेजी जाएगी और उसका मिलान नेपाल में मिले अज्ञात शवों और मानव अवशेषों से किया जाएगा। आपको बता दें कि नेपाल की तबाही में 4 सितंबर सुबह तक के आंकड़े के मुताबिक 1290 लोगों की मौत हुई है, जबकि 4788 लोग अब भी गायब हैं।
𝐏𝐫𝐞𝐬𝐬 𝐑𝐞𝐥𝐞𝐚𝐬𝐞: 𝐃𝐍𝐀 𝐏𝐫𝐨𝐟𝐢𝐥𝐢𝐧𝐠 𝐨𝐟 𝐅𝐢𝐫𝐬𝐭-𝐃𝐞𝐠𝐫𝐞𝐞 𝐑𝐞𝐥𝐚𝐭𝐢𝐯𝐞𝐬 𝐨𝐟 𝐏𝐞𝐫𝐬𝐨𝐧𝐬 𝐌𝐢𝐬𝐬𝐢𝐧𝐠 𝐢𝐧 𝐭𝐡𝐞 𝐅𝐥𝐚𝐬𝐡 𝐅𝐥𝐨𝐨𝐝𝐬 𝐢𝐧 𝐍𝐞𝐩𝐚𝐥
— IndiaInNepal (@IndiaInNepal) September 3, 2026
Through its Press Release dated 01 September 2026, the Embassy of India, Kathmandu,… pic.twitter.com/e9waEzpgdB
नेपाल में दफनाए जा रहे शव?
इसी बीच नेपाल में बड़ी संख्या में शवों को दफनाने के वीडियो और तस्वीरों को लेकर सवाल उठे हैं। भारत के नेपाल में राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया है कि यह सामूहिक अंतिम संस्कार या स्थायी दफन (mass burial) नहीं है। अत्यधिक खराब हो चुके शवों को स्वास्थ्य संबंधी खतरे से बचने के लिए फिलहाल जमीन में सुरक्षित रखा गया है। डीएनए से पहचान हो जाने के बाद उन्हें बाहर निकाला जाएगा और संबंधित परिवारों को सौंपा जाएगा।
भारत में परिजनों का DNA क्यों लिया जा रहा है?
बाढ़ में कई लोगों के शव पूरी अवस्था में नहीं मिले हैं। पानी, मलबे और कई दिन बीत जाने के कारण कुछ शव इतने खराब हो चुके हैं कि चेहरे से पहचान मुश्किल हो सकती है। ऐसे मामलों में डीएनए पहचान का सबसे भरोसेमंद जरिया बन जाता है। नेपाल पुलिस मृतकों और मिले मानव अवशेषों से जैविक नमूने लेकर उनकी डीएनए प्रोफाइल बना रही है। लेकिन यह पता लगाने के लिए कि वह डीएनए किस व्यक्ति का है, उसके किसी करीबी जैविक रिश्तेदार के डीएनए की जरूरत होती है। इसी वजह से भारत सरकार ने भारत में मौजूद लापता लोगों के पहले दर्जे के जैविक रिश्तेदारों (first-degree biological relatives) को यहीं नमूना देने की सुविधा दी है। इनमें पिता, मां, बेटा, बेटी और भाई-बहन शामिल हैं। इसका सीधा फायदा यह है कि किसी परिवार को सिर्फ डीएनए नमूना देने के लिए नेपाल की यात्रा नहीं करनी पड़ेगी।
भारत में DNA जांच कहां कराई जा सकती है?
गृह मंत्रालय ने इसके लिए कई तरह की प्रयोगशालाओं को शामिल किया है। केंद्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाएं (CFSL), राज्य फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाएं (SFSL), राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (NFSU) की प्रयोगशालाएं और ऐसी NABL-मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाएं जिनके पास डीएनए प्रोफाइलिंग की सुविधा है। इसके साथ सरकार ने नमूना लेने के लिए एक निर्धारित फॉर्म और संपर्क केंद्रों की सूची भी जारी की है।.
#WATCH | Kathmandu, Nepal: On the Nepal floods, Indian Ambassador to Nepal, Naveen Srivastava, says, "The floods occurred on August 26, and as soon as we received the information, we coordinated with the Nepalese government and authorities and started tracking information about… pic.twitter.com/2V7ONMIXem
— ANI (@ANI) September 3, 2026
नेपाल पुलिस की सलाह के मुताबिक पहचान के लिए Autosomal STR DNA profiling का इस्तेमाल किया जा सकता है। आसान भाषा में कहें तो इसमें डीएनए के कुछ खास हिस्सों के पैटर्न देखे जाते हैं। नजदीकी जैविक रिश्तेदारों के डीएनए में ऐसे आनुवंशिक पैटर्न का संबंध पाया जा सकता है, जिससे यह जांचने में मदद मिलती है कि अज्ञात शव किसी खास परिवार के सदस्य का हो सकता है या नहीं।
भारत में नमूना देने के बाद क्या होगा?
परिजन का नमूना लिए जाने के बाद उसकी डीएनए प्रोफाइल तैयार की जाएगी। इसके बाद यह प्रोफाइल नेपाल पुलिस को भेजी जा सकती है। भारतीय दूतावास ने इसके लिए नेपाल पुलिस का ईमेल भी जारी किया है। दूतावास को भी उसकी प्रति भेजी जा सकती है, ताकि दोनों देशों के अधिकारियों के बीच समन्वय किया जा सके। इसके बाद नेपाल पुलिस उस डीएनए प्रोफाइल का मिलान अज्ञात शवों या मानव अवशेषों से तैयार डीएनए प्रोफाइल से करेगी।

क्या लापता व्यक्ति को पहले ही मृत मान लिया जाएगा?
नहीं। डीएनए नमूना लिए जाने का अर्थ यह नहीं है कि किसी लापता व्यक्ति को मृत घोषित कर दिया गया है। यह केवल पहचान की प्रक्रिया के लिए एक अतिरिक्त व्यवस्था है। इसका इस्तेमाल तब हो सकता है जब किसी अज्ञात शव या मानव अवशेष की पहचान दूसरे तरीकों से नहीं हो पा रही हो। पहचान हो जाने के बाद भी शव सीधे परिवार को नहीं दिया जाएगा। नेपाल सरकार ने विदेशी नागरिकों के शव सौंपने के लिए कई औपचारिक चरण तय किए हैं।
इनमें शव से संबंधित दस्तावेज तैयार करना, तस्वीरें और विवरण दर्ज करना, पोस्टमार्टम, मौत के कारण की पुष्टि, औपचारिक पहचान, फिंगरप्रिंट या डीएनए जैसे फॉरेंसिक नमूने लेना, मृतक का पासपोर्ट या पहचान पत्र सत्यापित करना, संबंधित दूतावास से प्रक्रिया पूरी करना और अंत में शव सौंपने का आधिकारिक मेमो तैयार करना शामिल है।
फिर नेपाल में शवों को दफनाया क्यों गया?
यही इस पूरे मामले का सबसे संवेदनशील हिस्सा है। नेपाल में बाढ़ के बाद बड़ी संख्या में शव बरामद हुए। इनमें से कई शव अत्यधिक खराब अवस्था में थे। नेपाल सरकार ने स्वास्थ्य संबंधी खतरे को देखते हुए बड़ी संख्या में शवों और मानव अवशेषों को अस्थायी रूप से जमीन में रखा है। भारतीय दूतावास ने 1 सितंबर को जारी सूचना में भी कहा कि ऐसे शवों की पहचान के लिए अब करीबी रिश्तेदारों के डीएनए से मिलान की जरूरत होगी।
भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने भी 3 सितंबर को स्पष्ट किया कि इसे 'मास बरियल' कहना सही नहीं है। उनके मुताबिक शव इतनी खराब अवस्था में हैं कि उन्हें स्वास्थ्य संबंधी वजहों से अस्थायी तौर पर दफनाया गया है। जब किसी शव के डीएनए का उसके रिश्तेदार के डीएनए से मिलान हो जाएगा, तब उसे दोबारा बाहर निकाला जाएगा और परिवार को सौंपने की प्रक्रिया शुरू होगी।
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क्या परिवार फोटो देखकर भी पहचान कर सकता है?
हां। नेपाल पुलिस ने बरामद शवों और मानव अवशेषों की तस्वीरें तथा उपलब्ध विवरण अपनी वेबसाइट पर डाले हैं। अगर परिवार तस्वीर या विवरण के जरिए अपने लापता सदस्य की पहचान कर लेता है तो भारतीय दूतावास नेपाल के अधिकारियों के साथ संपर्क कर शव सौंपने और उसे भारत लाने की प्रक्रिया में मदद करेगा। लेकिन जहां फोटो या सामान्य पहचान संभव नहीं होगी, वहां डीएनए मिलान प्रमुख तरीका बनेगा।
अगर शव बहकर भारत पहुंच गया हो तो?
बाढ़ का पानी सीमा नहीं देखता। इसलिए यह संभावना भी है कि नेपाल से कुछ शव या मानव अवशेष नदी के रास्ते भारतीय इलाके तक पहुंच गए हों। राजदूत नवीन श्रीवास्तव के मुताबिक भारत सरकार संबंधित राज्य सरकारों के संपर्क में है। ऐसे मामलों में भी शव से डीएनए नमूना लेकर रखा जाएगा, ताकि बाद में परिजनों के डीएनए से उसका मिलान किया जा सके।
166 भारतीयों को बचाया जा चुका है
भारतीय राजदूत के मुताबिक नेपाल की सेना की मदद से अब तक 166 भारतीय नागरिकों को बचाया गया है। इनमें तमिलनाडु से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गया 21 लोगों का समूह, जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाली कंपनी एंड्रिट्ज से जुड़े 80 से अधिक लोग और बाढ़ प्रभावित इलाके में रह रहे दूसरे भारतीय शामिल हैं।
पूरी प्रक्रिया को एक उदाहरण से समझिए
मान लीजिए नेपाल की बाढ़ के बाद किसी भारतीय मजदूर का परिवार उससे संपर्क नहीं कर पा रहा है। नेपाल में एक अज्ञात शव मिलता है, लेकिन उसकी हालत ऐसी है कि चेहरे से पहचान संभव नहीं है। नेपाल पुलिस शव का डीएनए नमूना लेकर उसकी प्रोफाइल तैयार करेगी। भारत में उस लापता व्यक्ति का पिता, मां, बेटा, बेटी या भाई-बहन अधिकृत लैब में अपना नमूना देगा। भारत में तैयार डीएनए प्रोफाइल नेपाल पुलिस तक पहुंचेगी। दोनों प्रोफाइल का वैज्ञानिक मिलान होगा। अगर संबंध स्थापित होता है और दूसरी औपचारिक जांच भी पूरी हो जाती है तो मृतक की पहचान आधिकारिक तौर पर स्थापित की जा सकेगी। अगर शव पहले ही स्वास्थ्य कारणों से अस्थायी रूप से दफनाया जा चुका है तो उसे बाहर निकाला जाएगा और संबंधित परिवार को सौंपने तथा भारत लाने की प्रक्रिया शुरू होगी।




