
पाकिस्तान और अफगानिस्तान कुछ समय पहले तक व्यापक संघर्ष के दौर से गुजरे हैं। इसके बाद से दोनों देशों के रिश्ते तनावपूर्ण बने हुए हैं। पाकिस्तान ने हाल ही में सऊदी अरब के मक्का शहर में तुर्की और सऊदी के साथ बड़ी डिफेंस डील की है। तालिबान के लिए इस डील से क्या चिंताएं हैं, और अब वह पाकिस्तान के साथ कैसे रिश्ते रखना चाहता है, और क्या जरूरत पड़ने पर वह अपनी फौज को इस्लामाबाद के खिलाफ उतार सकता है? ऐसे तमाम मुद्दों पर तालिबान के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने आरटी इंडिया के शो 'India, Russia & The World' के विशेष एपिसोड में हेड ऑफ न्यूज रुनझुन शर्मा से विस्तार से बातचीत की। इस दौरान बदलते तालिबान की भविष्य की सोच भी साफ नजर आई।
अफगानिस्तान से 5 साल पहले अमेरिकी सेना की वापसी के बाद, अब सत्ता की कमान तालिबान के हाथों में है। तालिबान मानता है कि अफगानिस्तान तब से सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहा है, लेकिन अभी बहुत सी समस्याएं बनी हुई हैं, जिन पर काम करना बाकी है। तालिबान एक तरफ भारत के साथ संबंधों को और मजबूत करना चाहता है, वहीं पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान के बीच हाल के वर्षों में काफी तीखी जंग और लड़ाई देखने को मिली है। क्या तालिबान अब भी इस्लामाबाद से बातचीत कर रहा है? RT इंडिया के इस सवाल पर तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने आत्मरक्षा के अधिकार की बात कही।
उन्होंने आगे कहा कि हमने न तो लड़ाई शुरू की और न ही हम चाहते हैं कि यह आगे बढ़े। युद्ध से दोनों ही पक्षों का नुकसान होता है। सीमा के दोनों तरफ रहने वाले लोग समान संस्कृति साझा करते हैं। यहां तक कि व्यापार और भूगोल भी काफी कुछ एक जैसा है। यह दिखाता है कि संघर्ष से किसी का फायदा नहीं होता। हम किसी तरह से युद्ध का समर्थन नहीं करते हैं और न ही हम इसे चाहते हैं।
पाकिस्तान-सऊदी-तुर्की डील पर क्या सोचता है तालिबान?
तालिबान प्रवक्ता ने आरटी से कहा कि पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हुई डिफेंस डील हमारे लिए कोई चिंता का विषय नहीं है। उन देशों ने अपने-अपने हितों और फायदे के लिए यह रक्षा समझौता किया है। सऊदी अरब की सुरक्षा जरूरी है। तुर्की और पाकिस्तान भी महत्वपूर्ण इस्लामिक देश हैं। अगर वह किसी मामले पर एक समझौते पर पहुंचते हैं तो इसे हम इस्लामिक देशों के सहयोग के तौर पर देखते हैं।
पाकिस्तान से हमले पर तालिबान के प्रवक्ता का कहना था कि जैसा कि मैंने पहले कहा कि हालिया हमले की शुरुआत पाकिस्तान की ओर से की गई थी, मगर हम इसे स्थानीय मामला मानते हैं। हम चाहते हैं कि यह जल्द सुलझ जाए।
भारत के साथ रिश्तों पर तालिबान का रुख
तालिबान प्रवक्ता ने कहा कि अफगानिस्तान की तरफ से भारत के साथ हमारे रिश्ते में कोई समस्या नहीं है। असल में हम भारत के साथ अपने संबंधों को मजबूत करना चाहते हैं। अफगानिस्तान और भारत व्यापार और सामान की आवाजाही जैसे कई क्षेत्रों में सहयोगी हैं। अफगानिस्तान से छात्र एजुकेशन के लिए और मरीज इलाज के लिए भारत जाते हैं। हम भारत के साथ मजबूत रिश्ता बनाए रखने को बहुत महत्व देते हैं। हमारे बीच संबंध सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। व्यापार बढ़ रहा है। राजनयिक संपर्क भी सुधर रहा है और हमें उम्मीद है कि दोनों देश और करीब आ सकते हैं।
जरूरत पड़ी तो पाकिस्तान के खिलाफ तालिबान अपनी फौज खड़ी करेगा?
इस सवाल के जवाब में तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा, “हम क्षेत्र में युद्ध या अस्थिरता नहीं चाहते। हम नहीं चाहते कि कोई देश किसी दूसरे के खिलाफ संघर्ष शुरू करे। अफगानिस्तान ने युद्ध से बहुत कष्ट झेला है। हम युद्ध के कड़वे अनुभवों को जानते हैं। युद्ध से किसी का भला नहीं होता। क्षेत्र को अस्थिर करने से भी भला नहीं होगा। हम युद्ध बिल्कुल नहीं चाहते और हम अन्य देशों से भी अपील करते हैं कि वे युद्ध में न उलझें।
⚡️ Five Years After The US Exit, RT Returns To ‘The Afghanistan They Left Behind’
— RT_India (@RT_India_news) August 30, 2026
RT India Head of News @runjhunsharmas travels from Kabul to remote villages and former NATO strongholds to examine a country transformed by Taliban rule.
The report offers rare access to Taliban… pic.twitter.com/Ldz6ymdUwH
"अपनी छवि बदलना चाहता है तालिबान"
तालिबान के प्रवक्ता ने कहा कि दुर्भाग्य से हम 20 साल तक युद्ध में थे। उस दौरान तालिबान और आम तौर पर अमीरात के खिलाफ लगातार प्रचार होता रहा। खासकर पश्चिम में अंतरराष्ट्रीय मीडिया का बड़ा हिस्सा तालिबान को बहुत नकारात्मक तरीके से पेश करता था। ऐसी छवि गढ़ने में उन्होंने बहुत प्रयास और पैसा लगाया है, जिसे सुधारने में लंबा समय लगेगा। पश्चिम में तालिबान को अक्सर ऐसे लोगों के रूप में पेश किया जाता है जो युद्ध चाहते हैं, अस्थिरता चाहते हैं, दुनिया के लिए खतरा हैं या दूसरों से जुड़ना नहीं चाहते।
प्रवक्ता ने कहा कि ये जो छवि बनाई गई है, वह झूठी है। बेशक युद्ध के दौरान हर पक्ष सामने वाले को नकारात्मक तौर पर दिखाने की कोशिश करता है, लेकिन अब युद्ध खत्म हो गया है। उन्हें अफगानिस्तान आना चाहिए, हमसे मिलना चाहिए, हमसे बात करनी चाहिए और हमारे उद्देश्यों को समझना चाहिए। मेरा मानना है कि अधिक संपर्क और समझ सभी के लिए फायदेमंद होगी।
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