आखिर मुस्लिम देश भी सरकार को मान्यता क्यों नहीं दे रहे? तालिबान ने दिया जवाब
RT Exclusive: अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने किसी भी मुस्लिम देश द्वारा तालिबान सरकार को मान्यता न दिए जाने पर बयान दिया। वहीं, सूचना एवं संस्कृति उप मंत्री मुहाजिर फराही ने बताया कि तालिबान राज में लोग कितने खुश हैं?
आखिर मुस्लिम देश भी सरकार को मान्यता क्यों नहीं दे रहे? तालिबान ने दिया जवाब
तालिबान के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद© RT Hindi

15 अगस्त 2021, जब भारत उस रोज अपना 75वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा था, उसके पड़ोसी मुल्क अफगानिस्तान की सरकार बदल रही थी। 20 साल के लंबे अंतराल के बाद अफगानिस्तान की सत्ता में तालिबान की एंट्री हो रही थी। अमेरिका की फौजें हटने और राष्ट्रपति अशरफ गनी के देश छोड़ने के साथ ही अफगानिस्तान तालिबान के अधीन हो गया। इससे पहले 1996 से 2001 तक अफगानिस्तान पर तालिबान का शासन रहा था। अब इस बात को पांच साल बीच चुके हैं। तालिबान के नेता मानते हैं कि देश में चुनौतियां हैं, पर सुरक्षा व्यवस्था के मजबूत होने, कई देशों से अच्छे रिश्ते और विकास के कई कार्य शुरू होने से चीजें आगे बढ़ रही हैं।

एक सवाल फिर भी घूमकर आता है कि किसी भी मुस्लिम देश ने तालिबान सरकार को मान्यता क्यों नहीं दी? RT India की हेड ऑफ न्यूज रुनझुन शर्मा के ‘इंडिया, रशिया एंड द वर्ल्ड’ प्रोग्राम में तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद से ये सवाल भी पूछा गया। अफगानिस्तान सरकार में सूचना व संस्कृति मामलों के उप मंत्री मुहाजिर फराही से पूछा गया कि क्या तालिबान राज में लोग खुश हैं? जानिए, सरकार के इन दो नुमाइंदों ने इस पर क्या कुछ कहा।

मुस्लिम देश तालिबान को मान्यता क्यों नहीं दे रहे?

RT India पर एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में इस सवाल के जवाब में तालिबान सरकार के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा, “दरअसल कई देशों के साथ हमारे संबंध आधिकारिक हैं। कतर, सउदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, पाकिस्तान और ईरान जैसे इस्लामिक देशों के साथ हमारे सामान्य संबंध हैं। इसके अलावा तुर्कमेनिस्तान, उज्बेकिस्तान और तजाकिस्तान के साथ भी हमारे संबंध हैं।

उन्होंने कहा कि इन सभी देशों के दूतावास अफगानिस्तान में सक्रिय हैं और हमारे दूतावास भी इन देशों में काम कर रहे हैं। व्यावहारिक रूप से देखें तो इन देशों से हमारा आधिकारिक संपर्क पहले से मौजूद है, लेकिन इन देशों ने अभी तक औपचारिक रूप से यह घोषणा नहीं की है कि उन्होंने तालिबान सरकार को मान्यता दे दी है। यह उनका अपना निर्णय है। उन्हें अपने हालात और अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर यह फैसला लेना है।

अंतरराष्ट्रीय मान्यता के लिए क्या बदलेगा तालिबान?

RT India की रुनझुन शर्मा ने सवाल किया कि तालिबान चाहता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय उसे मान्यता दे, लेकिन इसके लिए क्या तालिबान अपने में बदलाव के लिए तैयार है? मिसाल के तौर पर, महिलाओं और शिक्षा को लेकर तालिबान की नीतियों की बहुत ज्यादा आलोचना होती है। क्या अंतरराष्ट्रीय मान्यता पाने के लिए आप कुछ नीतियों को बदलने के लिए तैयार हैं?

इस पर तालिबान के मुख्य प्रवक्ता ने कहा कि आधिकारिक मान्यता के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो भी शर्तें मौजूद हैं, और जो शर्तें संयुक्त राष्ट्र ने हमारे सामने रखी हैं, हम उन सभी शर्तों को पूरा कर चुके हैं। हमारे पास एक निश्चित क्षेत्र है। हमारे पास एक देश चलाने वाली सरकार है, जो पूरा कंट्रोल रखती है। लोगों को सरकारी सेवाएं दी जा रही हैं। इन सभी बातों के आधार पर हमारा मानना है कि हमारी सरकार को मान्यता मिलने का अधिकार है।अगर अफगानिस्तान पर ऐसी अतिरिक्त शर्तें लगाई जाती हैं, जो दुनिया के बाकी देशों पर लागू नहीं होतीं तो ये हमारे साथ अन्याय है। 

taliban spokesperson
अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र को समझना चाहिए और हम पर अतिरिक्त शर्तें न लगाई जाएं। अफगानिस्तान की अपनी मान्यताएं हैं, अपना धर्म और आस्थाएं हैं, अपने आंतरिक हित हैं और अपने नियम हैं। इन मान्यताओं, हितों और कानून की कद्र की जानी चाहिए।
जबीहुल्लाह मुजाहिद
जबीहुल्लाह मुजाहिद
तालिबान सरकार के मुख्य प्रवक्ता

क्या तालिबान के शासन में लोग खुश हैं?

इस सवाल के जवाब में तालिबान के सूचना एवं संस्कृति उप मंत्री मुहाजिर फराही ने कहा- हां, क्योंकि इस समय अफगानिस्तान सुरक्षित है। पूरे देश में सुरक्षा व्यवस्था है। देश में एक मजबूत सरकार है। कई प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं। अगर आप काबुल जाएंगे, तो आपको आज और पांच साल पहले के काबुल के बीच बहुत बड़ा अंतर देखने को मिलेगा। अफगानिस्तान में विकास के कई काम हो रहे हैं और देश आगे बढ़ रहा है।

तालिबान के लोगRT© RT Hindi

अफगानिस्तान में बेरोजगारी की स्थिति पर तालिबान सरकार के मंत्री ने कहा कि ये सही है कि देश में कुछ समस्याएं भी हैं। हमारे कुछ लोग बेरोजगार हैं, लेकिन सरकार नागरिकों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने और उन्हें काम-धंधा मुहैया कराने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है। हमारा मकसद है लोगों को काम और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएं। लेकिन हमें स्वीकार करना होगा कि अफगानिस्तान में कुछ समस्याएं हैं। हर क्षेत्र में कुछ न कुछ दिक्कतें मौजूद हैं, लेकिन दुर्भाग्य से इन समस्याओं का इस्तेमाल तालिबान सरकार के खिलाफ किया जाता है। कुछ लोग इसके बहाने राजनीतिक फायदा लेने की कोशिश करते हैं। सरकार भी लोगों को सुविधाएं देने, उनकी मदद करने की लगातार कोशिश कर रही है।

ये भी देखें- 

जरूरत पड़ी तो भारत के लिए पाकिस्तान से जमीनी लड़ाई लड़ेगा अफगानिस्तान? जानें तालिबान का जवाब

मक्का डिफेंस डील से हमें खतरा नहीं... तालिबान ने बताया पाकिस्तान से कैसे रिश्ते चाहते हैं

ताज़ा ख़बरें