
रूल्स के बगैर दुनिया, बिना ट्रैफिक लाइट वाले चौराहे जैसी होती है, जहां अफरातफरी और अव्यवस्था होना लगभग तय है।
ब्रिक्स समिट में शामिल होकर अपने देश लौटते हुए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने यही मैसेज दिया है। उन्होंने अंग्रेजी के एक मुहावरे से भी इशारों में बड़ी बात कह दी। मुहावरे का हिंदी भाव है- जिसकी लाठी, उसकी भैंस, दुनिया में अब ऐसे नहीं चलेगा।
उनके बीजिंग रवाना होने के बाद चीन के विदेश मंत्रालय ने एक लंबा स्टेटमेंट जारी किया है। यह पढ़ते हुए आपको एक दिन पहले समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कही बातों का असर दिखेगा।
ग्लोबल साउथ की बात
पीएम नरेंद्र मोदी ने जो कहा, उसका सपोर्ट करते हुए शी जिनपिंग ने मैसेज दिया है कि हम ऐसे समय में मिले जब दुनियाभर में ऐसी चीजें हो रही हैं, जो पिछले एक सदी में नहीं देखी गईं। ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों का समूह) अपनी सामूहिक प्रगति के साथ दुनिया में मल्टी-पोलर व्यवस्था का मुख्य ड्राइवर बन चुका है।
उन्होंने कहा कि दुनियाभर में अस्थिरता का माहौल है। जोखिम और चुनौतियां अपार हैं। ऐसे में स्थिरता लाने और दुनिया को बेहतर जगह बनाने के लिए BRICS के देशों को ऐतिहासिक पहल करनी होगी, ग्लोबल साउथ को एकजुट करना होगा और अंतरराष्ट्रीय मामलों में एक सक्रिय और सकारात्मक ताकत बनना होगा। हमें पूरी मानवता की भलाई के लिए काम करना होगा।
शी ने आगे कहा-
फेयरनेस और जस्टिस पूरी दुनिया चाहती है। अंतरराष्ट्रीय रूल्स बनाने में सभी देशों की भागीदारी होनी चाहिए।
पावर पिरामिड की बात करते हुए एक दिन पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने भी कुछ ऐसी ही बात कही थी।
अंग्रेजी वाला मुहावरा
हां, शी ने अंग्रेजी का एक मुहावरा दोहराते हुए कहा- might makes right वाली सोच अब नहीं चलती। इसे बहुत पहले छोड़ देना चाहिए था। हिंदी में इसका मतलब 'जिसकी लाठी उसकी भैंस' से है। इसका एक और अर्थ 'जो ताकतवर है, वही सही है'- जिनपिंग ने कहा कि ये सोच अब काम नहीं करती।
उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ के देशों को अंतरराष्ट्रीय मामलों में कानून के शासन की संयुक्त रूप से रक्षा करनी चाहिए, अंतरराष्ट्रीय संबंधों के बुनियादी नियमों की सुरक्षा करनी चाहिए, और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि अंतरराष्ट्रीय कानून और नियम सभी पर समान रूप से लागू हों। इसमें कोई दोहरा मापदंड ना हो। शी ने सभी देशों को कानून की नजर में बराबर देखने, आंतरिक मामलों में दखल न देने और विवादों का शांतिपूर्ण समाधान करने पर जोर दिया है।
आगे की लाइन में भी पीएम मोदी के बयानों का असर दिखाई देता है।
शी ने कहा-
सभी देश, चाहे उनका आकार, ताकत या वेल्थ (संपदा) कुछ भी हो, अंतरराष्ट्रीय समुदाय में उनकी बराबर की हिस्सेदारी है। ग्लोबल साउथ के देशों को बहुपक्षवाद का झंडा बुलंद रखना चाहिए, संयुक्त राष्ट्र के अधिकार और भूमिका का सम्मान करना चाहिए, सुधारों को आगे बढ़ाने में बहुपक्षीय संस्थानों का समर्थन करना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय मामलों में सभी देशों की समान भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए।
जिनपिंग के दौरे से क्या बदलेगा, एक्सपर्ट ने बताया
दिल्ली में ब्रिक्स समिट की शानदार मेजबानी के लिए शी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देते हुए कहा-
- हमें देखना चाहिए कि विश्व व्यापार संगठन (WTO) में सुधार सही दिशा में आगे बढ़ें।
- भविष्य के लिए नए नियमों पर सक्रिय रूप से विचार किया जाए।
- हमें ग्लोबल साउथ के सहयोग को बढ़ावा देने के लिए 'न्यू डेवलपमेंट बैंक' के कामकाज और विकास का समर्थन करना चाहिए।
- विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व और आवाज बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय ढांचे में सुधार किया जाना चाहिए।
- हमेशा लोगों को प्राथमिकता देनी चाहिए। ग्लोबल साउथ के देशों को जन केंद्रित विकास की सोच के साथ काम करना चाहिए।
(इसमें से ज्यादातर बातें पीएम मोदी ने पहले ही कही थीं)
चीन की भी बात
राष्ट्रपति जिनपिंग ने कहा कि चीन दुनिया के लिए अपने दरवाजे खोल रहा है... जैसे-जैसे वैश्विक चुनौतियां सामने आ रही हैं, हमें समस्याओं की मूल वजहों से निपटने के लिए व्यापक नजरिया अपनाना होगा।
ग्लोबल साउथ को मिलकर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना चाहिए और सुरक्षा खतरों का डटकर सामना करना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने वैश्विक जलवायु, एआई, तकनीक पर भी बात की।
उन्होंने कहा कि व्यापक तरक्की के लिए, BRICS के बीच सहयोग की नींव को मजबूत करना जरूरी है। हमें उभरते बाजारों और ग्लोबल साउथ के देशों के साथ अपने करीबी रिश्तों का फायदा उठाना चाहिए, आपसी फायदे के लिए खुले सहयोग को बढ़ावा देना चाहिए, स्थिर और सुचारू औद्योगिक और सप्लाई चेन को सुरक्षित रखना चाहिए, और एक बड़ा एकीकृत बाजार बनाना चाहिए।
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जिनपिंग ने भी पांच पहल का प्रस्ताव रखा-
1. ओपन-सोर्स और समावेशी AI पहल। चीन BRICS एआई ओपन-सोर्स कम्युनिटी बनाने में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। वह AI के लिए एक खुला इकोसिस्टम बनाएगा।
2. व्यापार और निवेश को आसान बनाने की पहल। चीन ने BRICS स्पेशल इकोनॉमिक जोन पार्टनरशिप बनाने का प्रस्ताव रखा।
3. डिजिटल इंड्रस्टी को लेकर सहयोग की बात कही।
4. स्मार्ट फैक्ट्री और मैन्युफैक्चरिंग में सहयोग।
5. साइंस एंड टेक्नोलॉजी टैलेंट संबंधी पहल।
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