
नई दिल्लीl पिरामिड की तस्वीर तो आपने देखी होगी। यह कुछ-कुछ त्रिभुज (Δ) के आकार का दिखाई देता है। नीचे बेस बड़ा और ऊपर सेंटर की तरफ संकरा होता जाता है। आज ब्रिक्स के मंच से बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी पिरामिड का जिक्र करते हुए दुनिया को एक बड़ा मैसेज दिया। उन्होंने 'पावर और प्रिविलेज पिरामिड' की बात की। पीएम मोदी के संबोधन में पश्चिम एशिया के मौजूदा संकट (ईरान वॉर) की झलक भी दिखाई दी। उन्होंने सीधे-सीधे किसी देश का जिक्र तो नहीं किया, लेकिन संदेश स्पष्ट था।
ईरान वॉर से सबसे ज्यादा मुसीबत झेल रहे मुल्कों की पीड़ा को सामने रखते हुए पीएम ने उससे निकलने का रास्ता भी दिखाया। इसमें ईरान के मन की बात थी, तो ग्लोबल साउथ के हक की भी।
ग्लोबल साउथ से मतलब दुनिया के नक्शे में एशिया, अफ्रीका और साउथ अमेरिका के उस विशाल भूभाग से है, जिसमें आने वाले देश विकासशील हैं या कम विकसित और उभरती हुई अर्थव्यवस्था हैं। ब्रिक्स के मंच से इन्हीं के हित की बात प्रभावी ढंग से कही गई। यह दिखाता है कि वर्ल्ड ऑर्डर अब बदल रहा है।
प्रधानमंत्री पिरामिड का उदाहरण देते हुए जो बोले, आज पूरा ग्लोबल साउथ वही मांग कर रहा है। उनका मैसेज साफ था- अंतरराष्ट्रीय रूल किसी एक देश या एक मंच से तय नहीं होने चाहिए। पीएम ने जो कहा है, उसकी गूंज दूर तक सुनी जाएगी।
असल में, आज के समय में ग्लोबल साउथ की स्थिति भी यही है। विकासशील देश कई तरह के वैश्विक संकट से जूझ रहे हैं लेकिन बड़े फैसलों में उन्हें दूर रखा जाता है। पीएम ने इसी पावर पिरामिड को बदलने की बात की है। यह बात वैश्विक व्यवस्था में खामियों की तरफ इशारा करती है।
पिरामिड के ऊपरी हिस्से में कौन है?
दरअसल, PM ने जिस पावर पिरामिड की बात की है, उसके टॉप में कुछ ताकतवर देश या संस्थानों का कब्जा है, जो पूरी दुनिया के लिए नीतियां और नियम तय करते हैं।
निचले स्तर पर: इसके बड़े हिस्से में वे देश होते हैं, जो इन फैसलों से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उनकी आवाज या हिस्सेदारी बहुत कम होती है।
PM ने साफ कहा-
ग्लोबल साउथ आज वैश्विक संकटों की पहली पंक्ति में है, लेकिन फैसला लेने में सबसे पीछे है। हमें इस ‘प्रिविलेज के पिरामिड’ (विशेषाधिकार) को साझेदारी के मंच में बदलना है। जहां हर देश की आवाज हो, हर सदस्य को सुना जाए। हर प्रयास के केंद्र में मानवता का विकास हो।
ब्रिक्स समिट के समय पीएम मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान की एक फ्रेम में आई तस्वीर हो या ऐसी ही रिश्तों की गर्माहट लिए कई तस्वीरें, ये अपने आप में बड़े पावर शिफ्ट की तरफ इशारा कर रही हैं।
नाविकों की बात- हां, पीएम ने ब्रिक्स समिट के मंच से हाल के महीनों में संघर्षों में मारे गए नाविकों का मुद्दा भी उठाया। इससे भारत समेत ग्लोबल साउथ के कई देश प्रभावित हुए हैं। सीफेयरर (नाविकों) के लिए उन्होंने एक प्लेटफॉर्म बनाने का प्रस्ताव रखा।
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सीफेयरर सप्लायर देश है। 3 लाख से ज्यादा समुद्री पेशेवर इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं।
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पीएम ने कहा कि सीफेयरर्स का वैश्विक व्यापार में बहुत बड़ा योगदान है, लेकिन मुश्किल समय में उन्हें सहारे की कमी महसूस होती है। उन्होंने सीफेयरर्स इमर्जेंसी सपोर्ट नेटवर्क बनाने की बात कही। इससे संबंधित देशों की मेरीटाइम अथॉरिटी और मिशन जुड़ सकेंगे और मदद में भी आसानी होगी।
मोदी ने ब्रिक्स के अगले एक साल का एजेंडा भी तय कर दिया।
ब्रिक्स के सामर्थ्य को नई दिशा देने का 'मंत्र'
पीएम ने कहा कि हम ब्रिक्स की 20वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। मानव जीवन में 20 साल की आयु मैच्योरिटी और जिम्मेदारी के नए चरण का आरंभ करती है। यह वह अवस्था होती है जब सपनों के साथ जिम्मेदारियां जुड़ती हैं। सामर्थ्य को नई दिशा मिलती है।
इशारों में बड़ा मैसेज
दिल्ली ब्रिक्स समिट की खूबी यही है कि अपने-अपने अलग हितों के बावजूद सदस्य देशों ने यहां 'हम साथ-साथ हैं' वाला मैसेज दिया।
PM ने कहा भी कि हम एक दूसरे के दृष्टिकोण का सम्मान करते हैं और सहमति से आगे बढ़ते हैं। हम किसी के खिलाफ नहीं बल्कि सबको साथ लेकर चलने की सोच के साथ आगे बढ़ने का प्रयास करते हैं।
उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि हम ब्रिक्स में हमारी एकता और सहमति को वैश्विक मंच पर ठोस परिणामों में बदलें। थोड़ी देर बाद दिल्ली डेक्लरेशन सबकी सहमति से पास हुआ, जिसे एक बड़ी कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है।
पीएम ने कहा है कि अगले 20 वर्षों के लिए हमें एक नए और महात्वाकांक्षी एजेंडे पर काम करना होगा।
10 प्रस्तावों वाला रोडमैप
पीएम ने कहा कि मैं प्रस्ताव रखता हूं हम मिलकर ग्लोबल गवर्नेंस रिफॉर्म्स के 10 प्रस्ताव तैयार करें, जिसे अगली समिट तक एक ब्रिक्स रिफॉर्म रोडमैप का रूप देने का प्रयास कर सकते हैं।
इसके लिए पीएम मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की बात प्रभावी ढंग से की। उन्होंने कहा कि अब इसे और टाला नहीं जा सकता। इस पर राष्ट्रपति पुतिन का भी समर्थन मिला। उन्होंने ग्लोबल साउथ के देशों के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का दायरा बढ़ाने की बात कही।
इसके अलावा भी पीएम मोदी ने तीन महत्वपूर्ण बातें कही हैं-
1. वित्तीय संस्थानों में वोटिंग पावर, लीडरशिप पोजीशन और पॉलिसी प्राथमिकता को आज के हिसाब से बदलने की जरूरत है। जो देश ग्लोबल इकोनॉमिक ग्रोथ को गति देते हैं, उन्हें ग्लोबल इकोनॉमी गवर्नेंस को दिशा देने में भी उचित भूमिका मिलनी चाहिए।
2. वैश्विक संस्थानों पर लोगों का भरोसा तभी बढ़ेगा, जब ये समस्याओं का प्रभावी तरीके से समाधान करने में सक्षम होंगे।
दरअसल, पश्चिम एशिया में संघर्ष को लेकर संयुक्त राष्ट्र जैसे संगठनों की भूमिका पर सवाल उठते रहे हैं।
3. भविष्य के ग्लोबल रूल तय करने में समान भागीदारी सुनिश्चित करना जरूरी है। एआई, साइबर स्पेस, आउटर स्पेस, क्रिटिकल टेक्नोलॉजी भविष्य के अवसरों के साथ भविष्य के नियम भी तय कर रहे हैं।
आखिर में पीएम का एक लाइन में संदेश था-
ग्लोबल साउथ को नियम मानने वाले से आगे बढ़कर नियम बनाने वाला बनना होगा।
साफ है पावर पिरामिड में चीजें अब बदलने वाली हैं।





