इनसाइड स्टोरी: ट्रेन के जिस मॉडल पर ठहर गई PM मोदी और पुतिन की नजर

भारत मंडपम में मोदी-पुतिन के सामने आया एक ट्रेन मॉडल चर्चा में है। दिखने में वंदे भारत जैसी, लेकिन इसके अंदर की कहानी में रूस का बड़ा हाथ है। जानिए इसकी एक-एक डीटेल जो इसे खास बनाती है।
अपर्णा रांगड़अपर्णा रांगड़ Published

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें दोनों एक प्रदर्शनी में नजर आते हैं। इस दौरान उनकी नजर कई प्रोजेक्ट्स और मशीनों पर पड़ती है। वहां एक मॉडल ने सभी का ध्यान खींचा, वो था- एक ट्रेन का मॉडल।

दोनों नेता इस ट्रेन को गौर से देखते हैं। ये कौन-सी ट्रेन है, जिसका मॉडल भारत मंडपम में राष्ट्रपति पुतिन और पीएम मोदी को दिखाया गया? ये क्यों खास है और मौजूदा ट्रेनों से कैसे अलग है? आपको इसकी एक-एक डीटेल बताते हैं।

वीडियो में जो ट्रेन का मॉडल नजर आया, ये कोई सामान्य ट्रेन नहीं है। ये उस वंदे भारत का नया रूप है, जिसे भारत और रूस की साझेदारी से तैयार किया जा रहा है। खास बात है कि यह वंदे भारत रातभर सोते हुए भी लंबी दूरी तय करने के लिए तैयार हो रही है।

यानी जिस ट्रेन को आप अभी तक सीटों वाली तेज रफ्तार वंदे भारत के तौर पर जानते हैं, उसका अब एक नया अवतार सामने आने वाला है- वंदे भारत स्लीपर का एडवांस वर्जन। 

भारत मंडपम में आयोजित INNOPROM.India प्रदर्शनी में पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन।

भारत मंडपम में दिखा भारत-रूस का रेल कनेक्शन

शुक्रवार 11 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित INNOPROM.India प्रदर्शनी में पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने भारत-रूस के औद्योगिक और तकनीकी सहयोग से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स के मॉडल देखे।

इसी दौरान दोनों नेताओं ने इस खास ट्रेन मॉडल को भी देखा। इसके पीछे है भारत और रूस का एक बड़ा जॉइंट वेंचर- किनेट रेलवे सॉल्यूशंस (Kinet Railway Solutions)।

किनेट, भारतीय कंपनी रेल विकास निगम लिमिटेड यानी RVNL और रूस की ट्रान्समिशहोल्डिंग (Transmashholding) यानी TMH के बीच बना भारत-रूस का जॉइंट वेंचर है।

और इसी साझेदारी के तहत भारतीय रेलवे के लिए 120 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट (Vande Bharat Sleeper trainsets) तैयार किए जा रहे हैं।

120 ट्रेनें... और 1920 कोच

अब जरा इस प्रोजेक्ट के आकार को समझिए।

120 ट्रेनसेट। हर ट्रेनसेट में 16 कोच। यानी कुल 1,920 कोच।

किनेट रेलवे सॉल्यूशंस के मुताबिक, इनका निर्माण महाराष्ट्र के लातूर स्थित मराठवाड़ा रेल कोच फैक्ट्री में किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट के लिए फैक्ट्री को भी अपग्रेड किया गया है।

किनेट रेलवे सॉल्यूशंस संभाल रहा इस ट्रेन के मैन्युफैक्चरिंग और मेंटेनेंस का काम।

और कहानी सिर्फ ट्रेन बनाने तक सीमित नहीं है। इस साझेदारी में टेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग सपोर्ट के साथ-साथ ट्रेनसेट के लंबे समय तक रखरखाव की जिम्मेदारी भी शामिल है।

यानी ट्रेन बनेगी भारत में, रूसी तकनीकी विशेषज्ञता का इस्तेमाल होगा और लंबे सफर के बाद इसकी देखभाल की जिम्मेदारी भी इसी बड़े प्रोजेक्ट का हिस्सा होगी।

आखिर ये वंदे भारत मौजूदा ट्रेन से अलग कैसे है?

भारत में चल रही वंदे भारत एक्सप्रेस को आपने ज्यादातर चेयर कार के रूप में देखा है।

सीट पर बैठिए, सफर कीजिए और कुछ घंटों में अपनी मंजिल तक पहुंच जाइए। लेकिन स्लीपर वंदे भारत की कहानी थोड़ी अलग है।

यह ट्रेन खास तौर पर लंबी दूरी और रातभर की यात्रा को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है।

हर ट्रेन में होंगे 16 कोच

इस नई वंदे भारत स्लीपर के हर ट्रेनसेट में 16 कोच होंगे। इनमें शामिल होंगे- 

  • 11 AC 3-Tier Sleeper कोच
  • 4 AC 2-Tier Sleeper कोच
  • 1 First AC कोच

यानी वंदे भारत का फोकस अब सिर्फ स्पीड पर नहीं, बल्कि लंबी दूरी के आरामदायक सफर पर भी होगा।

लंबी दूरी और रातभर की यात्रा को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही ट्रेन।

सिर्फ सीट को बर्थ में बदलना नहीं है कहानी

इसे सिर्फ इस तरह समझना ठीक नहीं होगा कि पुरानी वंदे भारत में सीटें थीं और नई ट्रेन में बर्थ लगा दी गईं।

स्लीपर वंदे भारत को रातभर की यात्रा के हिसाब से तैयार किया जा रहा है। लंबे सफर में यात्रियों को कम झटके महसूस हों, शोर और कंपन कम हो और सफर ज्यादा आरामदायक रहे- इस पर जोर दिया गया है।

बेहतर एयर-कंडीशनिंग और HVAC व्यवस्था यानी हीटिंग, वेंटिलेशन और एयर कंडीशनिंग, आधुनिक इंटीरियर्स और यात्री सुविधाओं के साथ-साथ फायर सेफ्टी और crashworthiness (ट्रेन के डिब्बों और ढांचे की वह क्षमता, जो टक्कर या दुर्घटना के समय झटके और ऊर्जा को सोख लेती है ताकि यात्रियों को कम से कम नुकसान पहुंचे ) पर भी खास ध्यान दिया जा रहा है। ट्रेन की छत और HVAC सिस्टम को भी इस तरह तैयार किया जा रहा है कि लंबे सफर के दौरान बेहतर क्लाइमेट कंट्रोल और पैसेंजर कम्फर्ट मिल सके।

रूस की टेक्नोलॉजी, भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता

इस प्रोजेक्ट की एक और बड़ी खासियत है इसका भारत-रूस मैन्युफैक्चरिंग मॉडल।

रूस की ट्रान्समिशहोल्डिंग की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत की उत्पादन क्षमता को एक साथ लाकर इन ट्रेनों को भारत में तैयार किया जा रहा है। इसका मकसद सिर्फ 120 ट्रेनें बनाना नहीं, बल्कि भारत में एडवांस्ड रोलिंग-स्टॉक मैन्युफैक्चरिंग की क्षमता को मजबूत करना भी है।

यानी रूस से तकनीकी अनुभव और भारत से मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम, दोनों को एक प्लेटफॉर्म पर लाने की कोशिश है।

भारत और रूस का जॉइंट वेंचर- किनेट रेलवे सॉल्यूशंस कर रहा इसपर काम।

कब तक तैयार होगा प्रोटोटाइप?

पहले वंदे भारत स्लीपर के प्रोटोटाइप को जून 2026 तक तैयार करने का लक्ष्य रखा गया था।

बाद में समयसीमा में बदलाव हुआ। अगस्त 2026 में RVNL ने बताया कि प्रोटोटाइप मौजूदा वित्त वर्ष में आएगा यानी मार्च 2027 तक। इसके बाद आगे की प्रक्रिया और परीक्षणों के जरिए इन ट्रेनों को भारतीय रेलवे के नेटवर्क पर उतारने की दिशा में काम बढ़ेगा।