
यमन के हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ हमले तेज कर दिए हैं और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का दायरा और बढ़ गया है। हूतियों के हमलों ने लाल सागर से लेकर अरब सागर तक हड़कंप मचा दिया है। मक्का डिफेंस डील के बावजूद सऊदी अरब को हूतियों का अकेले मुकाबला करना पड़ रहा है। बीते हफ्ते हूतियों ने सऊदी अरब के कई स्ट्रैटेजिक ठिकानों को निशाना बनाया, जिससे उसे भारी नुकसान उठाना पड़ा है।
एक हमले में सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को भी नुकसान पहुंचा है। इसके बाद सऊदी अरब ने पाइपलाइन के जरिए होने वाली सप्लाई रोक दी है। वहीं, हूतियों ने लाल सागर में बाब-अल-मंदेब से मोखा तक कई स्ट्रैटेजिक पॉइंट्स पर कब्जा कर लिया है। इससे ईरान को इन रणनीतिक ठिकानों पर अप्रत्यक्ष बढ़त मिलती है। आखिर इसका ईरान को क्या रणनीतिक फायदा होगा?
ईरान को हूतियों ने दिलाई रणनीतिक बढ़त?
JNU की असिस्टेंट प्रोफेसर और विदेश मामलों की जानकार राज यादव ने RT हिंदी से बातचीत में कहा कि सऊदी अरब और हूतियों के बीच जंग काफी पुरानी है, लेकिन ताजा संघर्ष ईरान युद्ध के चलते शुरू हुआ। तब से हूती सऊदी अरब को काफी नुकसान पहुंचा चुके हैं। हूतियों को इतनी ताकत ईरान के सपोर्ट से मिली है और उनसे मुकाबला करना सऊदी अरब के लिए आसान नहीं है।
राज यादव के मुताबिक, बाब-अल-मंदेब और मोखा चोकपॉइंट समेत दूसरे रणनीतिक ठिकानों पर हूतियों के कब्जे का फायदा ईरान को मिलेगा। इससे ईरान की अमेरिका के खिलाफ लड़ाई में रणनीतिक बढ़त और मजबूत हो सकती है।
सऊदी और हूतियों का ताजा विवाद क्या है?
लाल सागर एक अहम इंटरनेशनल शिपिंग रूट है। 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर हमास के हमले के बाद जब तेल अवीव ने गाजा में जवाबी कार्रवाई शुरू की, तभी से हूतियों ने “फिलिस्तीनियों के साथ एकजुटता” दिखाते हुए इजरायल के खिलाफ “युद्ध” का ऐलान कर दिया था। इसके बाद हूतियों ने लाल सागर से गुजरने वाले दर्जनों जहाजों को निशाना बनाया।
हालांकि, मौजूदा तनाव की एक बड़ी वजह एक अलग घटनाक्रम को भी बताया जा रहा है। ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर सैयद अयातुल्लाह अली खामेनेई के जनाजे से लौट रहे हूतियों के जहाज पर सऊदी अरब और यमन की सरकार की ओर से बमबारी की गई। इसके बाद हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ पूरी तरह ब्लॉकेड का ऐलान कर दिया।
हूतियों का कहां-कहां कब्जा और बढ़त?
- बाब-अल-मंदेब
- अदन की खाड़ी
- मोखा पोर्ट
- धुबाब
- पेरिम द्वीप
- हनीश द्वीप
- सना
- इब्ब
- बैदा
अब असर क्या होगा?
ईरान पर इजरायल और अमेरिका के हमले से पहले होर्मुज से 20% से ज्यादा समुद्री तेल व्यापार होता था। इसके बाद लाल सागर को उत्तर में स्वेज नहर और दक्षिण में एशिया और यूरोप को जोड़ने वाले बाब-अल-मंदेब के जरिये व्यापार होने लगा। इस रास्ते दुनिया का कुल समुद्री व्यापार का करीब 12-15% होता था। अब इन दोनों चोकपॉइंट्स पर ईरान और हूतियों का कब्जा हो जाने से तेल सप्लाई पूरी तरह चरमराने लगी है।

सऊदी के पास क्या रास्ता?
प्रोफेसर राज यादव ने कहा लाल सागर के प्रमुख ठिकानों पर हूतियों के कब्जे ने ईरान की स्थिति को जंग में और मजबूत कर दिया है। वहीं सऊदी अरब अकेला पड़ गया है। मक्का डिफेंस डील के बाद भी पाकिस्तान और तुर्की उन्हें बचाने नहीं आए। अमेरिका ईरान से युद्ध में वैसे ही बहुत नुकसान उठा चुका है। इसलिए अब वह भी शायद हूतियों से भिड़ना नहीं चाहता। ऐसे में सऊदी अरब असहाय हो गया है। बेहतर है कि वह ईरान के साथ अपने रिश्तों को मजबूत करे। क्योंकि मिडिल-ईस्ट में ईरान का ही प्रभाव चलेगा।
इस्लामिक NATO का लिटमस टेस्ट
JNU में अंतरराष्ट्रीय स्टडी विभाग के प्रोफेसर शांतेश कुमार सिंह ने आरटी हिंदी से बातचीत में कहा कि हाल ही में पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब ने जो त्रिकोणीय डिफेंस डील की थी, जिसमें 'एक पर हमला सब पर हमला' मानने की बात कही गई थी। वह अब कहां है? इस डिफेंस पैक्ट को इस्लामिक नाटो बनाने तक की बात कही जा रही थी। मगर हूतियों ने इस तथाकथित इस्लामिक नाटो का एक तरह से लिटमस टेस्ट करा दिया।
पाकिस्तान ने क्यों खड़ा किया हाथ?
प्रोफेसर शांतेश ने कहा कि हूती ईरान के समर्थक हैं। इसलिए पाकिस्तान हूतियों से लड़ने नहीं जा रहा, क्योंकि एक तरह पाकिस्तान का हूतियों पर हमला ईरान पर हमला माना जाएगा। अगर पाकिस्तान ऐसा करता है तो ईरान उसे छोड़ेगा नहीं। जब अमेरिका को ईरान नहीं छोड़ रहा है तो पाकिस्तान को क्यों बख्शेगा? वहीं अमेरिका ने सऊदी की मदद इसलिए नहीं की, क्योंकि इससे पहले उसे ईरान युद्ध में सऊदी से अपेक्षित मदद नहीं मिली। इजरायल भी अब सऊदी अरब की मदद नहीं करेगा, क्योंकि उसने हाल ही में इजरायल के खिलाफ एक संयुक्त स्टेटमेंट जारी किया था।
अपनी सुरक्षा पर करना होगा पुनः विचार
प्रोफेसर शांतेश सिंह ने कहा कि सऊदी अरब के पास अब कोई मददगार नहीं है। ईरान, तुर्की, अमेरिका सभी ने हाथ खड़े कर दिए हैं।
क्या चाहता है ईरान?
ईरान अगर चाहे तो हूतियों को सऊदी अरब पर हमले रोकने के लिए कह सकता है, लेकिन मौजूदा हालात में वह ऐसा नहीं करना चाहेगा। ईरान अमेरिका के साथ युद्ध के दौरान मिडिल ईस्ट के उन देशों से लगातार कह रहा था, जिन्होंने अपनी जमीन पर अमेरिकी सैन्य बेस को जगह दी है कि वे अमेरिका को अपने यहां से बाहर जाने के लिए कहें या उस पर हमले रोकने का दबाव बनाएं।
यह ईरान की मिडिल ईस्ट के देशों पर एक तरह की प्रेशर टैक्टिक है। इसके जरिए वह इन देशों को अमेरिका के प्रभाव से बाहर आने और अपनी जमीन से अमेरिकी सैन्य मौजूदगी खत्म करने का संदेश देना चाहता है। ईरान का संदेश साफ है कि अगर ये देश ऐसा नहीं करते हैं तो उनकी सुरक्षा की गारंटी कोई नहीं दे सकता।
ईरान मिडिल ईस्ट के देशों को यह एहसास भी कराना चाहता है कि क्षेत्रीय ताकत वही है और इस इलाके में किसी बाहरी ताकत का दबदबा नहीं चलेगा।
वैश्विक सप्लाई व्यवस्था के लिए संकट
प्रोफेसर शांतेश ने कहा कि अभी तक ईरान ने केवल होर्मुज बंद किया था, हूतियों के जरिये उसने अन्य चोकपॉइंट पर बढ़त बना ली है। अब ईरान और हूती मिलकर कंप्लीट ब्लॉकेड कर देंगे। इससे सिर्फ अमेरिका ही नहीं, बल्कि मध्य-पूर्व से एनर्जी खरीदने वाले दुनिया के सभी देशों की स्थिति चरमरा जाएगी। यह वैश्विक व्यवस्था के लिए बहुत संकटपूर्ण समय है।
ईरान को हूतियों के कब्जे का बड़ा रणनीतिक फायदा हुआ है। अब वह अमेरिका पर और ज्यादा दबाव बनाने की स्थिति में है। ईरान की अब तक की स्ट्रैटेजी रही है कि हूतियों, मिलिशिया और हिजबुल्लाह जैसे प्रॉक्सी के जरिए मिडिल ईस्ट के देशों में अपना प्रभाव बनाए रखे। इजरायल और अमेरिका मिलकर ईरान को कमजोर करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन मौजूदा घटनाक्रम ने उसे फिर से अपनी स्थिति मजबूत करने का मौका दिया है।
हूतियों की सऊदी अरब को धमकी, हमले तेज
हूतियों ने हाल के दिनों में लाल सागर के प्रमुख चोकपॉइंट बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट और एक महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर पर कब्जे का दावा किया है। हूतियों के सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सारी ने एक बयान में दावा किया कि उन्होंने सऊदी अरब के नज्रान क्षेत्र के शरूरा प्रांत में एक सैन्य अड्डे को निशाना बनाया।
शनिवार को रात भर यमन की सीमा के पास लाल सागर के साथ अल-तवाल गवर्नरेट में प्रोजेक्टाइल गिरने की रिपोर्ट आई। इससे दो लोग घायल हुए। मस्जिद समेत कई इमारतों को हमले से नुकसान पहुंचा। हूती हाल ही में घोषित ब्लॉकेड के तहत सऊदी के ऑयल सिस्टम और शिपिंग पर हमले कर रहे हैं।
उधर यमन सरकार भी हूतियों के खिलाफ कार्रवाई करने का दावा कर रही है। हूतियों ने मोखा स्ट्रेट पर भी कब्जा कर लिया है, जहां से सऊदी अरब का तेल गुजरता था। हूतियों की तेजी से बढ़ रही आक्रामकता को जहां एक तरह यमन की सरकार और सऊदी अरब के लिए झटका है माना जा रहा है तो वहीं यह ईरान के लिए स्ट्रैटेजिक बढ़त कही जा रही है।

जिबूती के करीब है बाब-अल-मंदेब
बाब-अल-मंदेब जिबूती के काफी करीब है। जिबूती में अमेरिका, चीन, फ्रांस, जापान समेत कई देशों के सैन्य अड्डे हैं। यहां से बाब-अल-मंदेब की दूरी सिर्फ 32 किलोमीटर है। इस जगह पर हूतियों के कब्जे ने ईरान को अमेरिका पर बड़ी रणनीतिक बढ़त दे दी है।
हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने X पर लिखा, “हमारे देश के खिलाफ सऊदी दुश्मन की लगातार आक्रामकता के जवाब में यमनी सशस्त्र बलों ने जवाबी हमले किए। इसमें सऊदी अरब के शरूरा क्षेत्र में स्थित सैन्य अड्डे पर उन हथियारों के गोदामों और कमांड-एंड-कंट्रोल रूमों को निशाना बनाया गया, जो हमारे देश और लोगों के खिलाफ आक्रामकता दिखा कर रहे हैं।”
رداً على استمرار العدو السعودي المجرم في عدوانه على بلدنا نفذت القوات المسلحة اليمنية عملية عسكرية نوعية استهدفت من خلالها مخازن الأسلحة وغرف القيادة والسيطرة التى تدير العدوان على بلدنا وشعبنا في القاعدة العسكرية بمنطقة شرورة السعودية.
— العميد.يحيى سريع (@Yah_Saree) September 12, 2026
وقد نفذت العملية بدفعة كبيرة من الصواريخ…
एक अन्य बयान में याह्या सारी ने कहा कि बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन के बड़े साल्वो से अंजाम दिया गया। हम सऊदी दुश्मन को साफ चेतावनी देते हैं कि अगर वह हमारे लोगों के खिलाफ अपनी आक्रामकता जारी रखता है, तो हम उस पर और भी ज्यादा तेज हमले करेंगे। उधर शनिवार को सऊदी और यमन की सरकारों ने लाल सागर के शहर मोखा में हूती लड़ाकों पर हमला किया था।
ट्रंप ने कहा-हूती हमसे नहीं लड़ना चाहते
ट्रंप ने शनिवार को एक बयान में कहा कि सऊदी के लीडर से उनकी बात हुई थी, लेकिन हूतियों ने भी हमें फोन किया और वे हमसे लड़ना नहीं चाहते।
‘The Houthis called us, and they don’t want to fight with us’ — Trump
— RT Intl (@RT_on_X) September 12, 2026
He says the group wants the US to stay out and is letting most ships pass pic.twitter.com/ltQrZhSebd
हाल ही में हूतियों ने सऊदी अरब के जहाजों के खिलाफ लाल सागर में पूरी तरह ब्लॉकेड का ऐलान किया था। कहा था कि वह इस इलाके से सऊदी अरब के तेल की एक बूंद भी नहीं जाने देंगे। इसके बाद उन्होंने लाल सागर से गुजरने वाले सभी जहाजों पर हमला शुरू कर दिया था। तब से दोनों पक्षों में संघर्ष जारी है।





