
BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच शनिवार को नई दिल्ली में द्विपक्षीय मुलाकात हुई। करीब 7 साल बाद भारत आए शी जिनपिंग से मुलाकात में पीएम मोदी ने कहा कि भारत-चीन रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए बॉर्डर पर शांति और स्थिरता जरूरी है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को अपने मतभेदों को विवाद में नहीं बदलने देना चाहिए। गलवान संघर्ष के बाद दोनों नेताओं की पहली द्विपक्षीय बैठक अक्टूबर 2024 में रूस के कजान में हुए 16वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। जबकि दूसरी मीटिंग चीन के तियानजिन में 2025 में हुई थी। अब इस बार 2 साल में तीसरी बैठक के बाद भारत-चीन रिश्ते किस दिशा में बढ़ेंगे, इसे एक्सपर्ट से समझेंगे।
मोदी-जिनपिंग के बीच 10 मुद्दों पर बात हुई
1. दोनों देशों को अपने रिश्तों को दीर्घकालिक फायदों और रणनीतिक नजरिये से देखना चाहिए।
2. आपसी मतभेदों को विवाद बनने नहीं देना चाहिए।
3. दोनों पक्षों को आपसी सम्मान, आपसी संवेदनशीलता और आपसी हितों के तीन सिद्धांतों पर चलना चाहिए।
4. द्विपक्षीय संबंधों को लगातार आगे बढ़ाने के लिए बॉर्डर एरिया में शांति और स्थिरता बनाए रखना बहुत जरूरी है।
5. सीमा से जुड़े मुद्दों पर पुराने समझौतों और सहमतियों का दोनों पक्षों द्वारा पालन किए जाने की जरूरत है।
6. दोनों नेताओं ने निष्पक्ष, उचित और दोनों पक्षों को मंजूर सीमा समाधान के लिए अपनी प्रतिबद्धता जताई, जो दोनों देशों के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाए।
7. दोनों नेताओं ने लोगों के बीच आपसी रिश्तों में हुई प्रगति को सराहा। साथ ही दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान, बिजनेस संबंधों और आवाजाही को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
8. आर्थिक और व्यापारिक संबंधों पर उन्होंने व्यापार संतुलन और सप्लाई चेन से जुड़ी चिंताओं को दूर करने व बाजार में आसान और बेहतर पहुंच उपलब्ध कराने की जरूरत पर बल दिया।
9. दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर दोनों पक्षों द्वारा साझा विचार रखने और मिलकर चुनौतियों का सामना करने पर जोर दिया।
10. प्रधानमंत्री ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के लिए चीन के समर्थन और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन-2026 को सफल बनाने में उनके योगदान की सराहना की।
चीन ने क्या कहा?
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा,
1.बदलावों और चुनौतियों से भरे जटिल अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का सामना करते हुए, दुनिया के दो सबसे अधिक आबादी वाले देशों और ग्लोबल साउथ के महत्वपूर्ण सदस्यों के रूप में चीन और भारत पर बड़ी जिम्मेदारियां हैं।
2. दोनों पक्षों को मानवता के भविष्य और अपने लोगों के कल्याण को ध्यान में रखना चाहिए और ग्रेटर ब्रिक्स ढांचे के तहत हाई क्वालिटी वाले सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।
3. हमें एक समान और व्यवस्थित बहुध्रुवीय दुनिया और समावेशी व परस्पर लाभकारी इकोनॉमिक ग्लोबलाइजेशन की वकालत करनी चाहिए, जिससे विश्व शांति, स्थिरता, विकास और समृद्धि को बढ़ावा देने में अधिक सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो सके।
4. चीन के शिन्हुआ न्यूज के अनुसार शी जिनपिंग का कहना है कि चीन और भारत एक-दूसरे की ताकतों से सीख सकते हैं और साझा विकास हासिल कर सकते हैं।
भारत-चीन रिश्ते सुधरे तो कई क्षेत्रों में बढ़ेगा सहयोग
इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस के पूर्व सीनियर रिसर्चर और जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर राजीव नयन ने कहा कि भारत ने चीन के साथ हमेशा अच्छा रिश्ता चाहा। दोनों एशिया की बड़ी ताकतें हैं। विश्व की कुल आबादी का बड़ा हिस्सा चीन और भारत के पास है। चीन के साथ जो पूर्व में समझौता हुआ है, उस पर उसे कायम रहना होगा। अगर दोनों मिलकर काम करें तो बहुत आगे जा सकते हैं। इकोनॉमिकली स्तर पर, एनर्जी के लेबल पर और न्यूक्लियर रिएक्टर से लेकर एआई समेत कई क्षेत्रों में मिलकर काम कर सकते हैं।
भारत और चीन के बीच लंबे समय से कल्चरल और सिविलाइजेशनल टाइज रहे हैं। महाभारत काल से ही भारत-चीन के रिश्तों का जिक्र मिलता है। चीन के साथ भारत का बहुत पुराना संबंध रहा है। उत्तरपथ यानी सिल्क रोड, जिसे चीन कहता है, उसके जरिए दोनों देशों के बीच लंबे समय से ट्रेड टाइज रहे हैं। जमीनी और समुद्री दोनों रास्तों से व्यापार होता रहा है। साझा व्यापार और साझा संस्कृति का भी लंबा इतिहास रहा है। अब उस संस्कृति को और ऊपर उठाने की जरूरत है।
शी जिनपिंग के भारत आने के बाद इन रिश्तों को लेकर उम्मीदें बढ़ गईं हैं। दोनों देशों के रिश्ते आगे और मजबूत होने चाहिए। भारत और चीन दोनों न्यूक्लियर पावर हैं और युद्ध किसी के लिए अच्छा नहीं है। दोनों देशों को अपनी ऊर्जा आपसी टकराव के बजाय विकास और आगे बढ़ने में लगानी चाहिए। इसमें रूस भी सकारात्मक भूमिका निभा सकता है। जिनपिंग भारत आए हैं, तो उम्मीद है कि इससे कुछ अच्छा होगा और दोनों पक्षों के बीच समझदारी बढ़ेगी।
एक्सपर्ट ने क्या कहा?
- चीन को भारत की अहमियत समझ आने लगी है।
- भारत-चीन रिश्ते सुधार कर अपने देश को बहुत आगे ले जा सकते हैं।
- एनर्जी, न्यूक्लियर रिएक्टर और एआई क्षेत्र में दोनों देश अच्छा कर सकते हैं।
- बॉर्डर पर डिसइंगेजमेंट से परस्पर भरोसे को बढ़ा सकते हैं।
- भारत से रिश्ते सुधार कर चीन ब्रिक्स देशों से भारत के रिश्ते का पूरा लाभ ले सकता है।
- पुराने समझौतों और सहमति पर चीन को कायम होना चाहिए।
- चीन को सीमा पर शांति लाने के लिए सेना हटानी चाहिए।
- विवाद और संघर्ष से किसी का भला नहीं होगा।
- दोनों देश मिलकर पूरे एशिया के विकास को गति दे सकते हैं।
- वैश्विक शांति और स्थिरता में बड़ा रोल प्ले कर सकते हैं।
चीन को अब समझ आने लगी है भारत की अहमियत
रक्षा और विदेश नीति विशेषज्ञ कमर आगा ने जिनपिंग के भारत आने और पीएम मोदी के साथ बैठक को लेकर कहा कि चीन को अब भारत की अहमियत समझ आने लगी है। वैश्विक हालात बहुत तेजी से बदल रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति की नीतियों और ट्रेड वार से चीन पर बहुत प्रेशर है। इसलिए वह भारत के करीब आ रहा है। चीन को पता है कि भारत के साथ रिश्ते मजबूत करने से उसका क्या-क्या फायदा हो सकता है। विवाद और संघर्ष से किसी का भला नहीं होगा।
यह जिनपिंग की अच्छी पहल है। ब्रिक्स में भारत का रहना सबसे ज्यादा जरूरी है। यह बात रूस और चीन भी मानते हैं, क्योंकि अगर ब्रिक्स की छवि एंटी पश्चिम नहीं है तो वह भारत की मौजूदगी की वजह से है। इसका फायदा रूस और चीन दोनों को मिल रहा है। ब्रिक्स को मजबूत बनाए रखना और वैश्विक स्तर पर उसकी स्वीकार्यता को बढ़ाये रखने में भारत का सबसे बड़ा रोल है। ब्रिक्स एक ऐसा प्लेटफार्म बन चुका है, जिसके जरिये भारत, रूस और चीन सभी विकास की नई गति हासिल कर सकते हैं।
ब्रिक्स देशों के पास सब कुछ
भारत ब्रिक्स का पिलर है। ब्रिक्स के पास दुनिया की आधी आबादी, तेजी से आगे बढ़ती जीडीपी, तेल, गैस और रेयर अर्थ मिनिरल्स सबकुछ है। ब्रिक्स को किसी और की जरूरत ही नहीं है। भारत और रूस के ग्लोबल साउथ के साथ अच्छे रिश्ते हैं, जिसका फायदा चीन को अपना व्यापार बढ़ाने में मिल सकता है। इसलिए भी उसे भारत का साथ चाहिए। दोनों देश मिलकर वैश्विक शांति और स्थिरता में भी बड़ा रोल अदा कर सकते हैं।
भारत-चीन पुराने मुद्दों को हल करें
अब भारत-चीन को अपने पुराने बॉर्डर इश्यू को मिलकर हल कर लेना चाहिए। भारत सीमा पर शांति और स्थिरता चाहता है। चीन को अगर रिश्ते सुधारने हैं तो उसे यह काम करना होगा। सीमा पर डिसइंगेजमेंट बहुत जरूरी है। इससे ही दोनों देशों में विश्वास बढ़ेगा। तब रिश्ते भी आगे बढ़ेंगे। मौजूदा वैश्विक हालात का सामना करने के लिए और दोनों देशों को आगे बढ़ने के लिए सीमा पर शांति लाना जरूरी है।
दोस्ती बढ़ाने के लिए सीमा का मुद्दा सुलझना जरूरी
विदेश और सामरिक मामलों के एक्सपर्ट रंजीत कुमार ने कहा कि भारत-चीन में दोस्ती बढ़ाने के लिए सीमा के मुद्दों का हल होना जरूरी है। यह अच्छी बात है कि दोनों देश सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहे। दोनों देशों के बीच सीमा व्यापार की भी शुरुआत हुई है। चीन के निवेश प्रस्तावों को भी भारत में मंजूरी दी जा रही है। अब चीन को चाहिए कि वह विवादों को दूर करने का कदम उठाए। पीएम मोदी और जिनपिंग के बीच बहुत सौहार्दपूर्ण बातचीत हुई है। इससे उम्मीद की जा सकती है कि दोनों देशों के रिश्ते आगे बढ़ सकते हैं। चीन को अब सीमा पर शांति और परस्पर विश्वास कायम करने के लिए आगे बढ़ना होगा।





