
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जब भी मिलते हैं, दोनों नेताओं की तस्वीरें अक्सर चर्चा में रहती हैं। दोनों के बीच दिखाई देने वाली सहजता और गर्मजोशी को लेकर भी पश्चिमी देशों में अक्सर सवाल उठते रहते हैं। लेकिन आखिर मोदी और पुतिन के बीच ऐसी क्या बात है, जो दोनों नेताओं को एक-दूसरे के इतना करीब लाती है?
भारत स्थित रूसी दूतावास में डिप्टी चीफ ऑफ मिशन रोमन बाबुश्किन ने RT हिंदी पर हेड ऑफ न्यूज रुनझुन शर्मा से एक्सक्लूसिव बातचीत में इसकी वजह दोनों नेताओं की सोच, अनुभव और अपने-अपने देशों के हितों को लेकर उनकी समझ को बताया। रूसी होने के बावजूद बाबुश्किन ने हिंदी में सवालों के जवाब दिए।
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‘दोनों मजबूत और अनुभवी नेता’
धाराप्रवाह हिंदी बोलने वाले बाबुश्किन ने मोदी-पुतिन की केमिस्ट्री पर कहा, ‘वे दोनों मजबूत, अनुभवी और जिम्मेदार नेता हैं।’ उनके मुताबिक दोनों नेता केवल अपने देश के राष्ट्रीय हितों को ही नहीं समझते, बल्कि दूसरे देशों के राष्ट्रीय हितों को भी अच्छी तरह समझते हैं।
बाबुश्किन ने कहा कि पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन अपने-अपने देशों के दीर्घकालीन भविष्य को ध्यान में रखकर सोचते हैं। यानी उनका नजरिया केवल आज या किसी एक मुद्दे तक सीमित नहीं रहता।
‘दोनों देशों के सामने एक जैसी चुनौतियां’
बाबुश्किन ने मोदी-पुतिन के बीच तालमेल की एक वजह भारत और रूस के सामने मौजूद चुनौतियों को भी बताया। उन्होंने कहा कि दोनों नेता यह समझते हैं कि उनके देशों के सामने विश्व अर्थव्यवस्था की अस्थिरता और पश्चिमी देशों के दबाव से पैदा होने वाली चुनौतियां हैं। इसी वजह से भारत और रूस का एक-दूसरे का समर्थन करना महत्वपूर्ण है।

क्या रूस में भी लोकप्रिय हैं प्रधानमंत्री मोदी?
बाबुश्किन से यह सवाल भी पूछा गया कि जिस तरह राष्ट्रपति पुतिन भारत में लोकप्रिय हैं, क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी रूस में पसंद किया जाता है?
इस पर बाबुश्किन ने कहा, ‘जी, हां’। उनका कहना था कि रूस में जब भी कोई शिखर सम्मेलन, फोरम या बड़ा कार्यक्रम होता है, राष्ट्रपति पुतिन प्रधानमंत्री मोदी के बारे में अच्छी बातें कहते हैं और उनकी नीतियों और विचारों की सराहना करते हैं।
‘दोस्त एक-दूसरे पर दबाव नहीं बनाते’
बातचीत में मोदी और पुतिन की मुलाकातों और दोनों नेताओं की साझा तस्वीरों पर पश्चिमी देशों की प्रतिक्रिया का भी सवाल उठा। बाबुश्किन ने हिंदी में जवाब देते हुए कहा कि भारत और रूस के रिश्ते ‘काफी प्राकृतिक’ यानी नेचुरल हैं और दोनों देशों के राष्ट्रीय हितों के मुताबिक हैं। इन रिश्तों में दबाव नहीं है। रक्षा हो या ऊर्जा, रूस भारत के लिए महत्वपूर्ण साझेदार है। इसी दौरान उन्होंने कहा, ‘दोस्त एक-दूसरे पर दबाव बनाने की कोशिश नहीं करते हैं।’
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‘मजबूत भारत रूस की प्राथमिकता’
भारत-रूस की दोस्ती इतनी मजबूत क्यों है, इस सवाल पर बाबुश्किन ने कहा कि केवल पिछला इतिहास ही इसकी वजह नहीं है। दोनों देशों के विकास के रास्ते में भारत और रूस एक-दूसरे के पूरक हैं। इसी बातचीत में बाबुश्किन ने कहा, ‘मजबूत भारत रूस की प्राथमिकता है।’
बाबुश्किन के जवाबों से मोदी-पुतिन की केमिस्ट्री की जो तस्वीर निकलती है, उसमें तीन बातें प्रमुख हैं- दोनों नेताओं का लंबा राजनीतिक अनुभव, राष्ट्रीय हितों को लेकर उनकी समझ और भारत-रूस के बीच ऐसा रिश्ता, जिसे रूस दबाव के बजाय परस्पर सहयोग पर आधारित मानता है।
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