अमेरिकी दबाव के बावजूद रूस से तेल क्यों खरीदता है भारत? डिप्टी एंबेसडर बाबुश्किन ने बताया मॉस्को एंगल
RT हिंदी से एक्सक्लूसिव बातचीत में रूस के डिप्टी एंबेसडर रोमन बाबुश्किन ने कहा कि भारत और रूस एक-दूसरे के राष्ट्रीय हितों को अच्छी तरह समझते हैं। भारत पर बाहरी दबाव को लेकर उन्होंने कहा कि भारत को जो चाहिए, रूस देने के लिए तैयार है।
अमेरिकी दबाव के बावजूद रूस से तेल क्यों खरीदता है भारत? डिप्टी एंबेसडर बाबुश्किन ने बताया मॉस्को एंगल
रूस के डिप्टी एंबेसडर रोमन बाबुश्किन (बाएं) ने RT इंडिया की न्यूज हेड रुनझुन शर्मा को हिंदी में विशेष इंटरव्यू दिया।

रूस से भारत तेल क्यों खरीदता है? ये सवाल अमेरिका अक्सर उठाता है। भारत में रूस के डिप्टी एंबेसडर रोमन बाबुश्किन के RT हिंदी पर एक्सक्लूसिव इंटरव्यू के दौरान सवाल-जवाब के बीच इसका मुद्दा भी आया। धाराप्रवाह हिंदी बोलने वाले बाबुश्किन ने इसे अच्छी तरह समझाया। 

RT India की हेड ऑफ न्यूज रुनझुन शर्मा ने नई दिल्ली स्थित रूसी दूतावास में चार्ज डी’अफेयर्स (Chargé d’affaires) रोमन बाबुश्किन से सवाल किया कि भारत के इस रुख को मॉस्को कैसे देखता है, जिसमें भारत साफ कहता है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों के हिसाब से फैसले करेगा। इस पर बाबुश्किन ने कहा कि भारत और रूस एक-दूसरे के राष्ट्रीय हितों को अच्छी तरह समझते हैं।

उन्होंने हिंदी में जवाब देते हुए कहा, "हम एक-दूसरे के राष्ट्रीय हित अच्छी तरह समझते हैं।" बाबुश्किन ने आगे कहा कि रूस का नेतृत्व कई बार साफ कर चुका है कि भारत को जिस चीज की जरूरत होगी, रूस उसे उपलब्ध कराने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, "भारत को जो चाहिए, रूस वह देने के लिए तैयार है।"

भारत के फैसलों पर रूस का रुख

इंटरव्यू में सवाल इस संदर्भ में पूछा गया कि भारत रूस से तेल खरीदता है और अमेरिका की तरफ से इसे लेकर दबाव बनाया जाता है, जबकि भारत का रुख रहा है कि वह वही फैसला करेगा, जो उसके हित में होगा। 

बाबुश्किन के जवाब से साफ है कि मॉस्को भारत के इस रुख को दोनों देशों के राष्ट्रीय हितों की समझ के तौर पर देखता है। उन्होंने इस मुद्दे पर भारत की आलोचना या किसी तरह के दबाव की बात नहीं की, बल्कि इस बात पर जोर दिया कि दोनों देश एक-दूसरे की जरूरतों और राष्ट्रीय हितों को समझते हैं।

‘दोस्त एक-दूसरे पर दबाव नहीं बनाते’

इसी इंटरव्यू में बाबुश्किन से भारत-रूस संबंधों और पश्चिमी देशों की प्रतिक्रिया को लेकर भी सवाल किया गया। उनका कहना था कि भारत और रूस के रिश्ते स्वाभाविक हैं और दोनों देशों के राष्ट्रीय हितों के मुताबिक आगे बढ़ते हैं। बाबुश्किन ने कहा कि रक्षा हो या ऊर्जा, रूस भारत के लिए महत्वपूर्ण साझेदार है।

भारत-रूस संबंधों की मजबूती से जुड़े सवाल के जवाब में उन्होंने एक अहम बात कही,

roman babushkin
दोस्त एक-दूसरे पर दबाव बनाने की कोशिश नहीं करते हैं।
-रोमन बाबुश्किन, रूसी दूतावास में चार्ज डी’अफेयर्स
-रोमन बाबुश्किन, रूसी दूतावास में चार्ज डी’अफेयर्स

रूसी तेल के सवाल पर बाबुश्किन के जवाब से मॉस्को का संदेश साफ है कि भारत अपने राष्ट्रीय हित के हिसाब से फैसला करता है और रूस उस फैसले को उसी नजरिए से देखता है।

‘मजबूत भारत रूस की प्राथमिकता’

भारत-रूस की दोस्ती इतनी मजबूत क्यों है, इस सवाल पर बाबुश्किन का कहना था कि केवल पुराना इतिहास ही इसकी वजह नहीं है। उनके मुताबिक, दोनों देशों के विकास के रास्ते में भारत और रूस एक-दूसरे के पूरक हैं। बातचीत के दौरान बाबुश्किन ने मजबूत भारत को रूस की प्राथमिकता बताया। 

प्रधानमंत्री मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन की गर्मजोशी हाल ही में बिश्केक में हुई SCO समिट के दौरान भी नजर आई।© ANI

बाबुश्किन के जवाबों से मोदी-पुतिन की गहरी केमिस्ट्री की जो तस्वीर निकलती है, उसमें तीन बातें साफतौर पर सामने आती हैं। पहला, दोनों नेताओं का लंबा राजनीतिक अनुभव, दूसरा, राष्ट्रीय हितों को लेकर उनकी समझ और तीसरा, भारत-रूस के बीच ऐसा रिश्ता जिसे रूस दबाव के बजाय परस्पर सहयोग पर आधारित मानता है।

'दोनों देशों के सामने एक जैसी चुनौतियां'

बाबुश्किन ने मोदी-पुतिन के बीच तालमेल की एक वजह भारत और रूस के सामने मौजूद चुनौतियों को भी बताया। उन्होंने कहा कि दोनों नेता यह समझते हैं कि उनके देशों के सामने विश्व अर्थव्यवस्था की अस्थिरता और पश्चिमी देशों के दबाव से पैदा होने वाली चुनौतियां हैं। इसी वजह से भारत और रूस का एक-दूसरे का समर्थन करना महत्वपूर्ण है।

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