
भारत और रूस के बीच रिश्तों में अब एक और कड़ी जुड़ गई है- RT हिंदी। मौजूदा हालात को देखते हुए संबंधों में ‘हिंदी की ये नई बिंदी’ कितनी जरूरी है? इस सवाल का जवाब दिया भारत में रूसी दूतावास के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन रोमन बाबुश्किन ने। एक रूसी होकर भी धाराप्रवाह हिंदी बोलने वाले बाबुश्किन ने ‘RT हिंदी’ के लॉन्च को एक जरूरी पहल बताया।
रूस के डिप्टी एंबेसडर बाबुश्किन ने RT इंडिया की हेड ऑफ न्यूज रुनझुन शर्मा के साथ स्पेशल इंटरव्यू को अपने हिंदी ज्ञान से लाजवाब बना दिया। ‘RT हिंदी’ लॉन्चिंग की अहमियत बताते हुए बाबुश्किन ने वैश्विक सूचना माहौल का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि आज सूचना के क्षेत्र में रूस के खिलाफ पश्चिमी देशों की तरफ से अभियान चलाया जाता है और भारत के इस्तेमाल की भी कोशिश होती है।
उन्होंने कहा कि ऐसे माहौल में हिंदी भाषी लोगों तक रूस के बारे में निष्पक्ष और सही जानकारी पहुंचाने की जरूरत महसूस की जा रही थी। इसके लिए एक मंच की जरूरत थी, जिसे RT हिंदी उपलब्ध कराएगा। बाबुश्किन ने रूस के बारे में ‘निष्पक्ष सही जानकारी’ पहुंचाने के लिए RT हिंदी को ‘बिल्कुल जरूरी’ पहल बताया।
खुद बताया दिल में कैसे बस गई हिंदी
इंटरव्यू के दौरान बाबुश्किन से हिंदी में सवाल किए गए और रूसी राजनयिक ने हिंदी में ही सभी के जवाब दिए। उन्होंने इस सवाल का भी जवाब दिया कि उनके दिल में हिंदी कैसे बस गई। बाबुश्किन ने कहा कि भारत मेरे लिए दूसरा घर बन चुका है। ये मेरी कर्मभूमि है। उन्होंने ये भी खुलासा किया कि उन्हें दिल्ली की चाट बहुत पसंद है।
बाबुश्किन ने माना कि लोगों के स्तर पर जुड़ाव बढ़ाने की जरूरत है। दोनों देशों में संस्कृति और युवाओं से जुड़े द्विपक्षीय फेस्टिवल होते हैं, दोनों देशों के स्टूडेंट भी एक-दूसरे के यहां आते-जाते हैं और BRICS जैसे मंचों के जरिए भी दोनों देशों के युवा और संस्थाएं जुड़ते हैं। लेकिन इसके बावजूद बाबुश्किन ने कहा, ‘मैं सहमत हूं कि इसे और बढ़ाना पड़ेगा।’

भारतीय पत्रकारों पर क्या बोले रूसी राजनयिक
बाबुश्किन ने मीडिया की मौजूदगी का मुद्दा खास तौर पर उठाया। उन्होंने कहा, ‘रूस में कोई भी भारतीय संवाददाता निरंतर काम नहीं करता है और मीडिया हाउस उपस्थित नहीं हैं।’ बाबुश्किन ने कहा, जब किसी देश में दूसरे देश के संवाददाता और मीडिया संस्थान लगातार मौजूद नहीं होंगे, तो वहां की घटनाओं, समाज और नीतियों की जानकारी लोगों तक सीधे पहुंचना मुश्किल होगा। इसीलिए उन्होंने इस स्थिति को ऐसी समस्या बताया, जिस पर काम किए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा, ‘इस समस्या को जरूर सुलझाना चाहिए।’
RT हिंदी को बाबुश्किन क्यों मानते हैं जरूरी?
बाबुश्किन के पूरे जवाब को देखें तो ‘RT हिंदी’ को जरूरी बताने के पीछे उनकी दो मुख्य बातें सामने आती हैं।
1. रूस के बारे में निष्पक्ष और सही जानकारी लोगों तक पहुंचनी चाहिए।
2. भारत और रूस के बीच मीडिया की मौजूदगी और संवाददाताओं का सीधा संपर्क बढ़ना चाहिए।
यही वजह है कि उन्होंने एक तरफ RT हिंदी के लॉन्च को जरूरी बताया, तो दूसरी तरफ रूस में भारतीय संवाददाताओं और भारतीय मीडिया हाउस की कमी को ऐसी समस्या कहा, जिसे दूर किया जाना चाहिए।
संबंधों की 80वीं वर्षगांठ पर खास तैयारी
बाबुश्किन ने इंटरव्यू में बताया कि अगले साल भारत और रूस के कूटनीतिक संबंधों के 80 साल पूरे होने जा रहे हैं। इस संबंधित कई गतिविधियों की तैयारी की जा रही है। उनके मुताबिक, दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक कार्यक्रम, यूथ फेस्टिवल और छात्र-छात्राओं के आदान-प्रदान पहले से होते रहे हैं, लेकिन 80वीं वर्षगांठ के मौके पर लोगों के बीच संपर्क और बढ़ाने की दिशा में भी काम किया जाएगा।




