
बीती शाम दुकान पर एक मुद्दे पर बातचीत चल रही थी। चाय की चुस्की लेते हुए शख्स ने कहा,
’अरे अब तो सरकार डिजिटल पेमेंट पर भी चार्ज लगाने जा रही है। दूसरे ने तपाक से कहा-अच्छा ऐसा क्या! मतलब क्या अब किसी को 10, 20, 50 या 500 का यूपीआई पेमेंट करने पर चार्ज देना होगा?
पहले वाले ने कहा- तो क्या? अब किसी दुकान, दोस्त या किसी को भी यूपीआई पेमेंट करने पर शुल्क लगेगा। तीसरा शख्स दोनों की बातें सुन रहा था। उसने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि ऐसा नहीं है। सरकार ने पहले ही सदन में साफ कर दिया था कि ऐसा कोई चार्ज नहीं लगेगा। दोनों शख्स तीसरे की बात सुन नाराज हो गए और उसे कम जानकार मानकर बहस शुरू कर दी।’
ये सिर्फ दुकान में बैठे तीन लोगों की बहस तक सीमित नहीं है। देश का हर नागरिक जानना चाहता है कि क्या आप और हम अब 2000 रुपये तक की पेमेंट पर कोई चार्ज भी देंगे? तो जवाब है नहीं। केंद्र सरकार के ताजा गजट नोटिफिकेशन में ये साफ कर दिया गया है कि आप 2000 तक के किसी भी ऑनलाइन पेमेंट पर कोई चार्ज नहीं देंगे। आम लोगों के बीच इस कसमसाहट की शुरुआत इसी साल अगस्त में संसद में सरकार की ओर से लाए गए एक एक्ट से हुई थी। तब भी सरकार ने कहा था कि 2000 या उससे ज्यादा पर चार्ज का असर आम लोगों पर नहीं होगा। अब सरकार के नए आदेश ने फिर से पिक्चर साफ कर दी है। आइए सरल भाषा में समझते हैं।
सरकार ने असल में कहा क्या है?
केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय ने 14 सितंबर के अपने नोटिफिकेशन में स्पष्ट किया है कि 2000 रुपये तक के UPI लेनदेन और RuPay डेबिट कार्ड से किए गए पेमेंट ऐसे डिजिटल तरीके हैं, जिन पर बैंक या पेमेंट कंपनियां कोई चार्ज नहीं लगा सकती हैं। नोटिफिकेशन में साफ कहा गया है कि इन तरीकों से पेमेंट करने वाले या पेमेंट लेने वाले किसी भी व्यक्ति से कोई भी बैंक या सिस्टम प्रोवाइडर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई शुल्क नहीं वसूल सकता।
इसका मतलब यह है कि अगर आप 2000 रुपये तक का UPI पेमेंट करते हैं,तो आपको किसी भी अतिरिक्त ट्रांजैक्शन फीस की चिंता करने की जरूरत नहीं है। यही नियम RuPay डेबिट कार्ड से पेमेंट करने पर भी लागू होता है। मंत्रालय ने उन खबरों को भी खारिज कर दिया था जिनमें कहा जा रहा था कि इस नीतिगत बदलाव के पीछे कोई बाहरी दबाव है। मंत्रालय ने ऐसे दावों को पूरी तरह से बेबुनियाद,झूठा और भ्रामक बताया।
UPI यूजर्स को अभी क्या समझने की जरूरत है?
छोटे भुगतानों पर कोई शुल्क नहीं: एक आम नागरिक के लिए UPI के जरिए 500, 1,500 या 2,000 रुपये तक भेजना या भुगतान करना पूरी तरह मुफ्त रहेगा।
बड़ी रकम पर भी अभी कोई यूजर चार्ज नहीं: अगर आप UPI से 5,000 या 10,000 रुपये का भुगतान करते हैं,तब भी सरकार की तरफ से ऐसा कोई ट्रांजेक्शन चार्ज घोषित नहीं किया गया है जो सिर्फ 2,000 रुपये से अधिक का पेमेंट होने की वजह से अपने आप कट जाए।
भविष्य में क्या बदल सकता है: आगे चलकर केवल यह बदल सकता है कि बैंक,पेमेंट कंपनियां और कुछ चुनिंदा बड़े व्यापारी (मर्चेंट) बड़े पेमेंट्स को प्रोसेस करने की लागत की भरपाई आपस में कैसे करते हैं।
2,000 रुपये कोई खर्च की सीमा नहीं है: इसलिए 2,000 रुपये के इस आंकड़े को UPI खर्च करने की नई सीमा (लिमिट) न समझें। इसे सरकार के उस नए ढांचे के तौर पर देखना सही होगा,जो यह तय करता है कि डिजिटल पेमेंट्स पर शुल्क कहां लगाए जा सकते हैं और कहां नहीं।
सरकार का वो एक्ट जिसके बाद बहस शुरू हो गई
इसी साल अगस्त महीने की बात है। सरकार ने संसद में टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) एक्ट, 2026 पास किया। इस एक्ट में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट,2007 की धारा 10ए में बदलाव किया गया। इससे सरकार को यह तय करने का अधिकार मिल गया कि किन डिजिटल पेमेंट पर फीस नहीं लगेगी और किसपर नहीं। इसके बाद लोगों के बीच ये गफलत शुरू हो गई कि ₹2,000 या उससे ज्यादा के यूपीआई पेमेंट पर फीस लगने वाली है।
कौन से चार्ज काटने की बात हो रही है?
समझने वाली बात यह है कि 2000 की पेमेंट करने पर कौन सा शुल्क काटने की बात हो रही थी। यह था मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR। मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह फीस होती है जो किसी डिजिटल पेमेंट को प्रोसेस करने के लिए ली जाती है। UPI को लेकर सारी चर्चा इस बात पर केंद्रित है कि बड़ी रकम के UPI पेमेंट स्वीकार करने वाले कुछ चुनिंदा बड़े व्यापारियों (मर्चेंट्स) पर यह शुल्क लगाया जा सकता है।
सरकारी अधिकारियों ने संकेत दिया था कि भविष्य में लागू होने वाला कोई भी MDR मामूली होगा और यह एक तय सीमा से ऊपर के चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजेक्शन तक ही सीमित रहेगा। रिपोर्टों के अनुसार,यह दर 0.25% से 0.4% के बीच हो सकती है, हालांकि सरकार के ताजा नोटिफिकेशन में ऐसी किसी दर की घोषणा नहीं की गई है।
अगर MDR लागू भी होता है,तो यह शुल्क व्यापारी या पेमेंट सिस्टम की ओर से वहन किया जाएगा। इसका यह कतई मतलब नहीं है कि अगर कोई ग्राहक UPI से 5,000 रुपये का भुगतान करता है,तो उसके बैंक खाते से कोई अतिरिक्त फीस कटेगी। सरकार ने बार-बार यह स्पष्ट किया है कि आम नागरिकों के लिए UPI सेवाएं पूरी तरह मुफ्त रहेंगी।
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तो क्या 2000 से ऊपर के ट्रांजेक्शन पर चार्ज लगेगा?
यह एक ऐसी बात है जिसे लेकर लोग आसानी से भ्रमित हो सकते हैं। सरकार के इस ताजा नोटिफिकेशन में ऐसा कहीं नहीं कहा गया है कि 2000 रुपये से अधिक का UPI पेमेंट करने पर आम यूजर को कोई फीस देनी होगी। इसके बजाय, पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट में किए गए हालिया बदलाव सिर्फ कुछ खास मामलों में भविष्य में चार्ज लगाने के लिए एक कानूनी ढांचा तैयार करते हैं।
सरकार ने पहले ही यह साफ किया था कि भविष्य में लागू होने वाला कोई भी मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) केवल एक तय सीमा से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट (दुकानदार या कारोबारी) ट्रांजेक्शन तक ही सीमित रहेगा। सरकार ने यह भी दोहराया है कि आम उपभोक्ताओं को UPI पेमेंट करने पर कोई ट्रांजेक्शन चार्ज नहीं देना होगा।
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