Live META अब मानेगा, बच्चों से यौन शोषण की शिकायत अब खुद पुलिस से करेगा
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META अब मानेगा, बच्चों से यौन शोषण की शिकायत अब खुद पुलिस से करेगा
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बिग अपडेट्स

चंद्रमा और शुक्र की दोस्ती: बीती रात आसमान में एक दुर्लभ नजारा देखने को मिला। चांद और शुक्र ग्रह देखते ही देखते काफी करीब आ गए। दोनों के इस खास मिलन का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। यह भी ध्यान देने वाली बात है कि पृथ्वी से देखने पर भले ही चांद और शुक्र बिल्कुल पास नजर आते हैं,लेकिन वास्तव में उनके बीच करोड़ों किलोमीटर की दूरी होती है। चंद्रमा पृथ्वी से करीब 3.84 लाख किलोमीटर दूर है,जबकि शुक्र ग्रह अंतरिक्ष में कई करोड़ किलोमीटर आगे स्थित है।

ट्रंप मेल बैलेट आदेश: सुप्रीम कोर्ट ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को झटका दिया है। कोर्ट ने उनके मेल बैलेट को सीमित करने की कोशिश को खारिज कर दिया है। इस फैसले के बाद राज्य उसी पुरानी व्यवस्था के तहत डाक मतपत्र भेजना जारी रख सकते हैं,जिसका इस्तेमाल वे सालों से करते आए हैं और जिसके जरिए लगभग एक-तिहाई वोट डाले जाते हैं।

यह फैसला ट्रंप के लिए एक बड़ा झटका है,क्योंकि वे लगातार इस मुद्दे को चुनाव की निष्पक्षता के लिए बेहद जरूरी बताते रहे हैं,भले ही डाक मतपत्रों में धोखाधड़ी का लगभग कोई सबूत नहीं मिला है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने अपने फैसले का विस्तार से कारण नहीं बताया। दो जजों सैमुअल अलिटो और क्लेरेंस थॉमस ने इस संक्षिप्त आदेश पर सार्वजनिक रूप से असहमति जताई है।

यूपीआई पेमेंट पर चार्ज: UPI और RuPay डेबिट कार्ड से होने वाले ट्रांजेक्शन पर चार्ज लगाने पर केंद्र सरकार ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। सरकार के नए गजट नोटिफिकेशन में बताया गया है कि 2000 रुपये तक के पेमेंट पर कोई चार्ज नहीं लगेगा। मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग की ओर से जारी गजट नोटिफिकेशन में कहा गया है कि UPI से 2000 रुपये तक के लेनदेन और RuPay से जुड़े डेबिट कार्ड पेमेंट पर बैंक या सिस्टम प्रोवाइडर किसी भी तरह का कोई चार्ज नहीं लगा सकेंगे। न ही सीधे तौर पर बैंक चार्ज लगा सकेंगे और न ही अन्‍य तरीकों से लगा सकते हैं।

एशियन गेम्स का शेड्यूल जारी: एशियन गेम्स में भारत के मैच कब-कब होंगे, इसपर पूरी पिक्चर क्लियर हो गई है। बीती रात 19 सितंबर से शुरू हो रहे एशियन गेम्स में भारत के मैचों का पूरा शेड्यूल आ गया है। 19 सितंबर को ओपनिंग सेरेमनी से होगी,लेकिन कई खेल आधिकारिक तारीख से पहले शुरू हो जाएंगे,जिसमें बास्केटबॉल भी शामिल है। भारत की नजर अपने पदकों की संख्या बढ़ाने पर होगी। इस बार क्रिकेट भी इसका पार्ट होगा।

ब्रिटेन से अलग होने वाले देशों का एक और फैसला: स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड के प्रथम मंत्रियों (फर्स्ट मिनिस्टर्स) जॉन स्विनी,रून ऐप इओरवेर्थ और मिशेल ओ'नील ने यूनाइटेड किंगडम (UK) से अलग होने के इन क्षेत्रों के अधिकार की पुष्टि करते हुए एक सहमति पत्र (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह हस्ताक्षर समारोह वेल्स की राजधानी कार्डिफ में आयोजित हुआ था।

विशेष रूप से,इन नेताओं ने ब्रिटिश सरकार से संवैधानिक बदलाव की तैयारी करने,उसकी योजना बनाने और उसे आसान बनाने की अपील की ताकि ये क्षेत्र ब्रिटेन से अलग होने के लिए जनमत संग्रह (रेफरेंडम) करा सकें। उन्होंने कहा, “हमारे देशों का भविष्य यूरोपीय संघ (EU) में है।” इस समझौते में यह भी कहा गया है कि ये नेता आपस में आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने का इरादा रखते हैं।

कार्डिफ की यह बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से डबलिन में आयरिश प्रधानमंत्री माइकल मार्टिन से मुलाकात के दो दिन बाद हुई,जिसमें ट्रंप ने कहा था कि वे आयरलैंड और उत्तरी आयरलैंड को फिर से एकजुट होते देखना चाहते हैं। वहीं,ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने 27 अगस्त को बेलफास्ट की अपनी यात्रा के दौरान इस मुद्दे पर किसी भी जनमत संग्रह की संभावना से इनकार कर दिया था।

  • जजों के खिलाफ जांच पर CJI सूर्यकांत ने कह दी बड़ी बात

    भारत के चीफ जस्टिस सीजेआई सूर्यकांत 6वें राम जेठमलानी मेमोरियल लेक्चर में शामिल हुए थे। उन्होंने इस दौरान कहा कि सुधार एक निरंतर नियम होना चाहिए। कोई भी संस्थान बदलाव से दूर रहकर या यथास्थिति बनाए रखकर न तो टिक सकता है और न ही उस पर गर्व कर सकता है।

    सीजेआई ने कहा,

    suryakant
    किसी अदालत के लिए पारदर्शिता का मतलब सिर्फ खुले दरवाजे और खुली सुनवाई तक सीमित नहीं है। इसी तरह,जनता का विश्वास (पब्लिक ट्रस्ट) और जनता की पसंद (पब्लिक अप्रूवल) दोनों एक जैसी चीजें नहीं हैं और इन दोनों के बीच का फर्क बहुत मायने रखता है।
    सूर्यकांत
    सूर्यकांत
    भारत के चीफ जस्टिस

    CJI ने आगे कहा,

    'कोई भी अदालत लोगों की पसंद बनकर या वही फैसले देकर जनता का भरोसा हासिल नहीं करती जो लोग सुनना चाहते हैं। जैसा कि कुछ विद्वान और प्रखर वक्ताओं ने बिल्कुल सही कहा,सोशल मीडिया या अन्य बाहरी प्रभावों से अदालतों को खुद को पूरी तरह दूर रखने की जरूरत है।'


    सीजेआई सूर्यकांत ने जजों की जांच पर बड़ा बयान देते हुए कहा,

    'जजों के खिलाफ शिकायतों से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट्स की ओर से विकसित व्यवस्था पूरी तरह 'मजबूत',बेहद संवेदनशील और समय पर कदम उठाने वाली है। हम बिना किसी झिझक के यह स्वीकार करते हैं कि सुधार एक निरंतर नियम होना चाहिए। कोई भी संस्थान बदलाव से दूर रहकर या यथास्थिति बनाए रखकर न तो टिक सकता है और न ही उस पर गर्व कर सकता है। फिर कुछ ऐसे मुद्दे भी होते हैं,जिन पर सार्वजनिक मंच से प्रतिक्रिया देना या जवाब देना समझदारी भरा कदम नहीं होता।'

  • वो अपनी गलती मानने को तैयार नहीं....एक्सीडेंट के बाद पहली बार आया सिया का स्टेटमेंट

    गुरुग्राम हिट एंड रन केस के बाद पहली बार लेडी बाइकर सिया मीडिया के सामने आईं। उन्होंने गोल्फ कोर्स में अपने साथ हुई इस घटना का पूरा डिटेल दिया है। सिया ने बताया,

    'आप सब ने मेरा सोशल मीडिया पर पोस्ट किया वीडियो देखा होगा। एक कार मेरा पीछा कर रही थी। मैं आमतौर पर रविवार को बाइक चलाती हूं। उस समय मुझे ध्यान नहीं रहा कि वह कार मेरे पीछे आ रही थी। सबसे पहले ड्राइवर ने बहुत तेज रफ्तार में गाड़ी को बिल्कुल मेरे करीब से निकाला। मुझे अजीब लगा कि कार इतनी पास क्यों आई,लेकिन मैंने उसे अनदेखा कर दिया।' 

    सिया ने आगे बताया,

    'इसके बाद कार धीमी हुई और पीछे चली गई। फिर कार ठीक मेरी बाइक के बराबर में आई और अंदर बैठे लोगों ने कुछ इशारे किए। उन्होंने मुझसे कुछ कहा और रुकने का इशारा किया,जिससे मैं डर गई। उनके चेहरे देखकर साफ लग रहा था कि उन सबने शराब पी रखी थी।'

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    ड्राइवर के बगल में एक और शख्स बैठा था जो लगातार इशारे कर रहा था और मुझे लगता है कि पिछली सीट पर भी दो लोग और बैठे थे। कार के शीशे काले (टिन्टेड) थे,इसलिए मैं ठीक से नहीं देख पाई कि पीछे वास्तव में कौन और कितने लोग बैठे थे।
    सिया
    सिया
    लेडी बाइकर

    'तभी जब हमारे बीच में एक दूसरी गाड़ी आ गई,तो मेरी बाइक की रफ्तार धीमी हो गई। उसी दौरान वह कार पहली लेन से मेरे फ्रंट कैमरे के सामने आई,तेजी से रास्ता काटते हुए सीधे तीसरी लेन में घुसी,मुझे टक्कर मारी और फरार हो गई। यह बेहद चौंकाने वाला था।'

    सिया ने आगे बताया,

    'मैं आराम से तीसरी लेन में चल रही थी और आगे दूसरी गाड़ी आने पर मैंने रफ्तार धीमी की थी। तभी उस कार ने मुझे टक्कर मारी,मैं नीचे गिरी और बेहोश हो गई। जब मेरे साथी राइडर ने ड्राइवर को रोकने की कोशिश की और उससे कहा कि गलती तुम्हारी है रुको,तो उसने कहा,'नहीं,नहीं,नहीं,यह मेरी गलती नहीं थी।'

    नीचे देखिए पूरी वीडियो

  • बच्चों के यौन शोषण के मामलों की शिकायत खुद META पुलिस को देगा

    बच्चों के यौन शोषण से जुड़े मामलों पर मेटा ने आखिर अपनी गलती मानी है और अब वह इन मामलों पर पुलिस को खुद रिपोर्ट करने पर राजी हो गया है। ANI के हवाले से सरकारी सूत्रों ने बताया कि मेटा (फेसबुक और इंस्टाग्राम की मूल कंपनी) बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों की रिपोर्ट संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसियों (पुलिस व जांच एजेंसियों) को करने पर सहमत हो गई है।

    भारत सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फैलने वाली नुकसानदेह और आपत्तिजनक जानकारियों पर रोक लगाने के लिए कंपनियों के साथ लगातार बातचीत कर रही है।

    सरकार चाहती है- 

    • भारत में किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के संचालन के लिए बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा एक बुनियादी शर्त है और इसपर कोई समझौता नहीं हो सकता।
    • यह फैसला प्लेटफॉर्म्स को बच्चों के लिए सुरक्षित बनाने की दिशा में पहला कदम है,लेकिन इस दिशा में अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।
    • सरकार ऐसे आपत्तिजनक कंटेंट की खुद पहचान करने और उसे हटाने के लिए अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ भी लगातार संपर्क में है।
    • जो प्लेटफॉर्म बच्चों की सुरक्षा के लिए खुद आगे आकर कड़े कदम नहीं उठाएंगे,उनके खिलाफ सरकार सख्त कार्रवाई करेगी।

    ...तो इसलिए झुकना पड़ा

    इसी महीने 9 सितंबर को Meta India के हेड राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग तलब किए गए थे। NCPCR ने कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और Meta India के प्रमुख को चाइल्ड सेक्सुअल एक्सप्लॉइटेशन एंड एब्यूज मटेरियल (CSEAM) से जुड़े विज्ञापनों के लिए तलब किया था। उनसे इसपर जवाब मांगा गया था। मेटा ने हालांकि अपना जवाब सौंप दिया था। अब सरकार की ओर से इसपर कड़ा रुख अपनाने के कारण मेटा को भी सरकार की बात माननी पड़ी है।

    यहां से शुरू हुआ था खेल

    एक निजी चैनल ने पहले एक इंस्टा अकाउंट बनाया। शुरुआत में अकाउंट ने कुछ ऐसे प्रोफाइल फॉलो किए, जो सामान्य कंटेंट पोस्ट करते थे। इसके बाद बीबीसी के बनाए अकाउंट पर इंस्टाग्राम बच्चों से जुड़े यौन प्रकृति वाले विज्ञापन दिखाने शुरू कर दिए। इसके साथ ऐसे विज्ञापन भी थे, जिनमें बच्चों के शोषण से जुड़े कंटेंट के लिए टेलीग्राम चैनलों के लिंक दिए गए थे। यहीं से एक रिपोर्ट तैयार हुई और अब सरकार ने भी इसपर ऐक्शन ले लिया है।

  • ट्रंप की किस मांग पर अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक?

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को वहां की सुप्रीम कोर्ट ने मिडटर्म इलेक्शन से पहले बड़ा झटका दिया है। ट्रंप मध्यावधि चुनावों के लिए डाक मतपत्रों (मेल बैलेट) को सीमित करना चाहते थे। ट्रंप मानते हैं कि इसके चलते चुनावों में धोखाधड़ी होती है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी इस मांग को अस्वीकार करते हुए पुरानी व्यवस्था को बनाए रखने की बात कही है।

    इस फैसले के बाद राज्य उसी पुरानी व्यवस्था के तहत डाक मतपत्र भेजना जारी रख सकते हैं, जिसका इस्तेमाल वे सालों से करते आए हैं और जिसके जरिए लगभग एक-तिहाई वोट डाले जाते हैं। यह फैसला ट्रंप के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि वे लगातार इस मुद्दे को चुनाव की निष्पक्षता के लिए बेहद जरूरी बताते रहे हैं, भले ही डाक मतपत्रों में धोखाधड़ी का लगभग कोई सबूत नहीं मिला है।

    सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने अपने फैसले का विस्तार से कारण नहीं बताया। दो जजों सैमुअल अलिटो और क्लेरेंस थॉमस ने इस संक्षिप्त आदेश पर सार्वजनिक रूप से असहमति जताई है। वहां की संसद (कांग्रेस) के नियंत्रण के लिए होने वाले अहम नवंबर चुनावों से पहले, ट्रंप प्रशासन ने इस विवाद में अदालत से पाबंदियां लगाने की मंजूरी मांगी थी।

    जस्टिस अलिटो ने अपनी असहमति में लिखा कि डाक सेवा के पास डाक व्यवस्था को नियंत्रित करने का व्यापक अधिकार है और संभवतः उसके पास ट्रंप की लगाई गई पाबंदियों को लागू करने की शक्ति भी है। वहीं, जस्टिस ब्रेट कवानुआ ने माना कि इन पाबंदियों को मध्यावधि चुनावों के दौरान लागू नहीं किया जाना चाहिए,लेकिन उन्होंने संकेत दिया कि अगर यह मामला भविष्य में दोबारा अदालत के सामने आता है, तो वे ट्रंप प्रशासन के पक्ष में फैसला दे सकते हैं।

    चुनाव अधिकारियों का कहना था कि मध्यावधि चुनावों से ठीक कुछ हफ्ते पहले पूरी व्यवस्था को पूरी तरह से बदलना बिल्कुल नामुमकिन था। वास्तव में अलबामा, नॉर्थ कैरोलिना और विस्कॉन्सिन जैसे राज्यों ने पिछले हफ्ते ही मतदाताओं को डाक मतपत्र भेजना शुरू कर दिया था, जबकि नई व्यवस्था अब तक लागू भी नहीं हुई थी।

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