भारत अपने सबसे अहम फाइटर जेट सुखोई (Su-30MKI) की मारक क्षमता को और बढ़ाने की तैयारी में है। इन जेट्स में रूस में बनी एक पावरफुल हाइपरसोनिक मिसाइल लगाने पर काम चल रहा है। यह प्रस्ताव ऐसे समय में सामने आया है जब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन कुछ ही दिनों में BRICS सम्मेलन के लिए भारत आने वाले हैं। इस दौरे में दोनों देशों के बीच कई अहम रक्षा और रणनीतिक मुद्दों पर बातचीत होने की उम्मीद है।
पूर्व एयर वाइस मार्शल आशीष वोहरा कहते हैं कि यह प्रस्ताव फिलहाल सुखोई अपग्रेड प्रोग्राम का हिस्सा है। सुखोई को नए अवतार में लाने के लिए उसमें स्वदेशी AESA विरुपाक्ष (शाब्दिक अर्थ- सर्वदृष्टि) रडार, स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक रडार (EW) सूट और RVV-BD तथा अस्त्र Mk-II जैसी लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइलों को शामिल करने की प्लानिंग है।
सुखोई के नए अवतार की तैयारी
सुखोई को एडवांस बनाने में रूसी मिसाइल अहम मानी जा रही है। आशीष वोहरा कहते हैं, 'भारत के फाइटर जेट सुखोई को रूस के जिस मिसाइल से लैस किए जाने की बात हो रही है, उसे मिलिट्री एविएशन की दुनिया में 'AWACS' किलर के नाम से जाना जाता है।'
वह कहते हैं कि रूसी मिसाइल फाइटर जेट को दिशानिर्देश देने वाले AWACS, टैंकर विमान और जासूसी विमान जैसे विमानों को भी दूर से ही मार गिरा सकती है।
रूसी मिसाइल के हमला करने की ताकत लाजवाब है
RVV-BD, रूस की R-37M एयर-टू-एयर मिसाइल का एक्सपोर्ट वर्जन है। RVV-BD रूसी शब्दों 'रकेता वोजदुख-वोजदुख बोल्शोय दाल्नोस्ती' से बना है, जिसका मतलब है लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल। इसे रूस ने लंबी दूरी के हवाई लक्ष्यों को निशाना बनाने के लिए विकसित किया है।
इसे 'बियॉन्ड-विजुअल-रेंज' यानी BVR मिसाइल कहा जाता है। इसका मतलब है कि यह इतनी दूर से दुश्मन के विमान पर हमला कर सकती है कि दोनों तरफ के पायलट एक-दूसरे को अपनी आंखों से देख भी नहीं सकते।
टार्गेट को खोजकर मारती है रूसी मिसाइल
रूसी मिसाइल की अधिकतम रेंज करीब 200 किलोमीटर है। कई रिपोर्टों में रेंज 300 किलोमीटर तक भी बताई जा रही है। इसकी रफ्तार करीब मैक-6, यानी ध्वनि की गति से छह गुना ज्यादा बताई जाती है, जिसे हाइपरसॉनिक कैटेगरी के करीब माना जाता है। इसका वजन करीब 510 किलोग्राम है और इसमें 60 किलोग्राम का वारहेड लगा होता है।
इसकी गाइडेंस प्रणाली शुरुआत में मिड-कोर्स गाइडेंस के जरिए मिसाइल को आगे बढ़ाती है, जबकि अंतिम चरण में यह अपने रडार से टार्गेट को खोजकर उस पर निशाना साधती है।

40 सुखोई विमानों की बढ़ाई जाएगी क्षमता
सोमवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें थल सेना, नौसेना और वायुसेना के लिए करीब 1.10 लाख करोड़ रुपये के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। मंत्रालय के मुताबिक, इस पूरी खरीद का करीब 98 प्रतिशत हिस्सा भारतीय उद्योग से सोर्स किया जाएगा।
बैठक में 40 सुखोई विमानों के ओवरहॉल का प्रस्ताव भी रखा गया। यह प्रस्ताव हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने दिया है। खास बात यह है कि पिछले साल के मुकाबले इस बार ओवरहॉल के लिए विमानों की संख्या दोगुनी है। पिछले साल 20 Su-30MKI विमानों के ओवरहॉल का प्रस्ताव था।
ओवरहॉल का मतलब है विमानों की पूरी तरह से जांच, मरम्मत और जरूरी हिस्सों को बदलना, ताकि वे लंबे समय तक सुरक्षित और बेहतर तरीके से उड़ान भर सकें।
भारतीय वायुसेना के पास करीब 260 सुखोई विमान हैं। ये विमान अलग-अलग इलाकों में तैनात हैं और हवाई सुरक्षा के साथ-साथ लंबी दूरी के हमले जैसे कई महत्वपूर्ण मिशनों में इस्तेमाल होते हैं।
सुखोई में रूसी मिसाइल वायुसेना की ताकत बढ़ाएगा
सुखोई भारतीय वायुसेना के लड़ाकू बेड़े की रीढ़ माना जाता है। अगर इसमें यह मिसाइल लगाई जाती है, तो इससे विमान की लंबी दूरी तक मार करने की क्षमता बढ़ जाएगी और भारत की हवाई ताकत और मजबूत होगी।
डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे दुश्मन को अपने रणनीतिक असेट्स को युद्ध क्षेत्र से बहुत दूर रखना पड़ेगा।
पूर्व एयर वाइस मार्शल आशीष वोहरा कहते हैं-
भारतीय सेना के सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर और डिफेंस एक्सपर्ट डॉ. जीवन सिंह राजपुरोहित कहते हैं, 'इतनी लंबी दूरी और करीब 25 किलोमीटर तक की ऊंचाई से इसे फायर करके दुश्मन के एयरक्राफ्ट, किसी रिफ्यूलर या बड़े फाइटर जेट्स को नष्ट करने की क्षमता हासिल करना भारतीय वायुसेना की युद्ध की रणनीति में बहुत बड़ा बदलाव होगा।'
डॉ. राजपुरोहित कहते हैं कि पहले चरण में 40 विमानों को यह क्षमता दे देना भी ऑपरेशनल तौर पर बहुत महत्वपूर्ण होगा। इससे वायुसेना की क्षमता को बड़ा बूस्ट मिलेगा।
वो कहते हैं कि रूसी मिसाइल की सही रेंज कई चीजों पर निर्भर करती है। उनके मुताबिक, ‘रेंज इस बात पर निर्भर करेगी कि मिसाइल को किस ऊंचाई से फायर किया गया, किस गति से फायर किया गया, टारगेट एयरक्राफ्ट का व्यवहार और उसकी मूवमेंट कैसी है और उसका रेडियो एक्टिव इंडिकेशन कितना है।’
सुखोई को एडवांस बनाने में कितना समय लगेगा?
सुखोई फाइटर जेट भारतीय वायुसेना में 2002 में शामिल हुआ था और अब इसे 24 साल हो चुके हैं। रिटायर्ड एयर मार्शल अनिल चोपड़ा कहते हैं कि अगर हम अभी इसके अपग्रेड की प्रक्रिया शुरू करते हैं, तो इसमें करीब दो से तीन साल लग सकते हैं।
वह कहते हैं, 'इस अपग्रेड के दौरान सुखोई की सर्विस लाइफ भी बढ़ाने की योजना है। इसमें नया रडार लगाया जाएगा और हमारा प्रस्ताव है कि इसमें स्वदेशी भारतीय रडार लगाया जाए। इसके अलावा इसमें नया ग्लास कॉकपिट, नए एवियोनिक्स और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम भी लगाए जाएंगे।'
An Upgrade & Life Extension: Air Marshal (Retd) @Chopsyturvey Describes How The Planned 🇮🇳 Air Fleet Improvements pic.twitter.com/6SODdzSRmw
— RT_India (@RT_India_news) September 7, 2026
वह बताते हैं, 'मिसाइलें, अस्त्र मिसाइल, ब्रह्मोस और अब रूसी मिसाइल को भी इस अपग्रेड के तहत Su-30MKI में इंटीग्रेट किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में हमें निश्चित तौर पर रूस की मदद की जरूरत होगी।'
आशीष वोहरा का मानना है कि सुखोई को रूसी मिसाइल से लैस करने में कोई बड़ी तकनीकी या ऑपरेशनल समस्या नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, 'भारत के पास सुखोई पर अस्त्र मिसाइल को स्वदेशी तरीके से इंटीग्रेट करने का अनुभव और तकनीकी जानकारी भी है। इसके अलावा, रूस अपने आधुनिक Su-30SM2 विमानों पर अपने मिसाइल को पहले ही इंटीग्रेट कर चुका है इसलिए जरूरत पड़ने पर इसके लिए रूस की मदद भी ली जा सकती है।'
ऑपरेशन सिंदूर में निभाई अहम भूमिका
हाल ही में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ भारत के 'ऑपरेशन सिंदूर' में सुखोई विमानों ने अहम भूमिका निभाई थी।
इन विमानों ने ब्रह्मोस एयर-लॉन्च्ड मिसाइल और रैम्पेज जैसे लंबी दूरी के एयर-टू-ग्राउंड हथियारों से पाकिस्तान के कई एयरबेस तबाह किए थे। यही सफलता अब वायुसेना को इस बेड़े की एयर-टू-एयर क्षमता को भी और मजबूत करने के लिए प्रेरित कर रहा है।
डॉ. राजपुरोहित कहते हैं-
वो आगे कहते हैं, 'इसका सीधा मतलब यह होगा कि दुश्मन को अपने महत्वपूर्ण रणनीतिक एसेट्स को पीछे खिसकाना पड़ेगा। दुश्मन अपने महत्वपूर्ण रणनीतिक एसेट्स को अपने फॉरवर्ड एयर बेस के आसपास नहीं रख पाएगा। और अगर वह उन्हें वहां रखता है, तो उन्हें नुकसान पहुंचाने की क्षमता हमारे पास होगी। यह भारत के लिए एक बहुत बड़ा रणनीतिक फायदा होगा।'
मजबूत होती डिफेंस पार्टनरशिप
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 12-13 सितंबर के बीच नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए भारत आ रहे हैं। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय बैठक भी होगी।
पूर्व एयर वाइस मार्शल आशीष वोहरा कहते हैं कि रक्षा सहयोग बढ़ाने पर चर्चा के दौरान सुखोई अपग्रेड प्रोग्राम का मुद्दा भी उठ सकता है।
वह आगे कहते हैं, 'भारत रूस से पांच अतिरिक्त S-400 स्क्वाड्रन मांग रहा है, इस मुद्दे पर भी चर्चा हो सकती है। रूस ने भारत को Su-57 फाइटर जेट की पेशकश भी की है। इसमें भारत को ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी (ToT) देने और भारत में इसके उत्पादन की पेशकश शामिल है। यह मुद्दा भी बातचीत में उठ सकता है।'

भारत-रूस के बदलते रक्षा संबंधों पर डॉ. राजपुरोहित कहते हैं, 'भारत और रूस का रक्षा संबंध अब एक बड़े रणनीतिक सहयोग में बदल चुका है। दोनों देश भविष्य में एक-दूसरे की जरूरतों को पूरा करने और नई तकनीक विकसित करने में सहयोग कर सकते हैं।'
वह कहते हैं कि रूसी मिसाइल का भारत आना हमारे लिए एक ऑपरेशनल जरूरत तो है ही, साथ ही यह भारत की आत्मनिर्भरता के साथ अपनी एयर कॉम्बैट क्षमता को मजबूत करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। यह मिसाइल भारत और रूस के बीच एक रणनीतिक पुल की तरह काम कर सकती है, जो न केवल हमारी रक्षा क्षमता को मजबूत करेगी, बल्कि दोनों देशों के रिश्तों को भी और गहरा करेगी।
यह भी पढ़ेंः स्पेस से खींची तस्वीर कितनी जल्दी मिल जाएगी? RT India से इसरो चीफ की Exclusive बातचीत




