
4 सितंबर 2026, तड़के 2 बजकर 55 मिनट... जब देशवासी चैन की नींद सो रहे थे, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में एक तेज रोशनी चमकी। GSLV-F17 रॉकेट अपने साथ EOS-05 सैटेलाइट को लेकर उड़ गया। भारत के जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (GSLV) की यह 19वीं उड़ान थी। ऑर्बिट में स्थापित होने के साथ ही भारत ने इतिहास रच दिया।
EOS मतलब Earth Observing Satellite मतलब ऐसी सैटेलाइट जो दूर अंतरिक्ष से भारत पर नजर रखेगी। मौसम बदले, जंगलों में आग लगे या कोई भी जानकारी, पृथ्वी से करीब 36 हजार किलोमीटर ऊपर इसरो ने एक ऐसी 'आंख' फिट कर दी है जो सबकी तस्वीर उपलब्ध करा देगा। इसरो की इस कामयाबी पर पूरा भारत गदगद है। RT India ने इसरो चीफ वी. नारायणन से एक्सक्लूसिव बातचीत की। इसरो चीफ ने बताया कि कैसे दूर अंतरिक्ष से खींची गई तस्वीर जमीन पर उपलब्ध हो जाएगी। इसके अलावा वी.नारायणन ने यह भी बताया कि इस उपलब्धि के बाद भारत किस दिशा में बढ़ेगा और इसरो के सामने आगे क्या चुनौतियां हैं। पेश है उनसे हुई बातचीत के प्रमुख अंश-
सवाल: इस सैटेलाइट से भारत ऐसा क्या देख पाएगा या ऐसी क्या सुविधा मिल जाएगी, जो हम अपने पुराने इमेजिंग सैटेलाइट्स से उतनी अच्छी तरह नहीं कर पाते थे? इसमें नया क्या है?
जवाब: यह एक एडवांस लेवल की निगरानी रखने वाली सैटेलाइट है इसीलिए EOS-05 को भारत पर नजर रखने के लिए जियोस्टेशनरी ऑर्बिट में स्थापित किया है। (जियोस्टेशनरी ऑर्बिट, पृथ्वी की भूमध्य रेखा से ठीक ऊपर 35,786 किलोमीटर की ऊंचाई पर एक सर्कुलर ऑर्बिट होती है।)
सवाल: सैटेलाइट से तस्वीरें लेने के मामले में इससे भारत की क्षमताओं में कितना बदलाव आएगा?
जवाब: देखिए, यह सैटेलाइट लगातार निगरानी करता रहेगा। इससे आप किसी खास जगह की तुरंत तस्वीर यानी स्पॉट फोटो भी ले सकते हैं। इसमें घूमने वाला कैमरा भी लगा है, जिसे उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व की ओर घुमाया जा सकता है। आप एक तय सीमा के अंदर इसे घुमाकर पूरे इलाके को स्कैन कर सकते हैं।
सवाल: अंतरिक्ष में खींची गई तस्वीर जमीन पर इस्तेमाल के लिए कितनी जल्दी तैयार हो जाती है?
जवाब: जब आप रिमोट सेंसिंग की बात करते हैं खासकर लो-अर्थ ऑर्बिट या पोलर ऑर्बिट की तो, वे इलाके को स्कैन तो करते हैं, लेकिन तुरंत या कहें रियल-टाइम जानकारी मिलने में काफी समय लग जाता है। इस सैटेलाइट को हम जियोस्टेशनरी ऑर्बिट में रख रहे हैं, इसलिए यह भारतीय क्षेत्र की बिल्कुल रीयल-टाइम और बहुत गहराई से निगरानी करेगा।
सवाल: इस खास सैटेलाइट की मदद से भारत किस तरह के बदलावों या गतिविधियों पर ज्यादा बारीकी से नजर रख पाएगा?
जवाब: यह सैटेलाइट से जुड़े विभिन्न उद्देश्यों के लिए है।
सवाल: भारत में खासकर बॉर्डर एरिया की बात करें तो कई बेहद दुर्गम इलाके हैं। क्या इस तरह की लगातार निगरानी से हमें उन दूरदराज इलाकों की घटनाओं को पहले से कहीं अधिक तेजी से समझने में मदद मिलेगी?
जवाब: मैं सिर्फ इतना कह सकता हूं कि ऐसे निगरानी करने वाली सैटेलाइट के जरिए भारतीय क्षेत्र पर लगातार नजर रखी जाएगी।
सवाल: आपके हिसाब से भारत अब यहां से आगे किस दिशा में बढ़ेगा? जियोस्टेशनरी ऑर्बिट में एडवांस इमेजिंग सैटेलाइट भेजने की क्षमता तो हमने दिखा दी है। अब इसरो के सामने अगली तकनीकी चुनौती क्या है?
Yet another outstanding achievement by ISRO and a proud moment for our nation.
— Narendra Modi (@narendramodi) September 4, 2026
The successful launch of GSLV-F17 carrying EOS-05, India’s first-ever imaging satellite from Geosynchronous orbit is a reflection of the excellence, innovation and growing capabilities that define… https://t.co/fXzwnSmwAF
जवाब: हम कई तकनीकों पर काम कर रहे हैं, जैसे ऑल-इलेक्ट्रिक सॉल्यूशन, हाइपर-स्पेक्ट्रल इमेजिंग सैटेलाइट और नई टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेशन सैटेलाइट। नई तकनीकों के प्रदर्शन पर काफी काम चल रहा है। इसके अलावा क्वांटम कम्युनिकेशन और इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन जैसे कई अलग-अलग क्षेत्रों में तेजी से नए विकास के काम हो रहे हैं।
सवाल: दुनिया भर में पृथ्वी की निगरानी (अर्थ ऑब्जर्वेशन) के लिहाज से यह उपलब्धि कितनी बड़ी है, क्या यह भारत को उन चुनिंदा देशों में शामिल करती है जिनके पास लगातार नजर रखने वाली क्षमता पहले से है?
जवाब: मैं दूसरे देशों से सीधी तुलना नहीं करना चाहता। यह हमारे देश की जरूरत है इसलिए हम इन उपग्रहों को जियोस्टेशनरी ऑर्बिट में स्थापित कर रहे हैं।
सवाल: लॉन्च व्हीकल, अर्थ ऑब्जर्वेशन, संचार और नेविगेशन के क्षेत्र में भारत जो कुछ तैयार कर रहा है, उसे देखते हुए क्या हम उस मुकाम पर पहुंच रहे हैं जहां अंतरिक्ष भारत की सुरक्षा, प्रबंधन और निगरानी के लिए रोजमर्रा का हिस्सा बन जाएगा?
जवाब: मुझे लगता है आप भी इस बात से सहमत होंगे कि अंतरिक्ष तकनीक अब देश के हर नागरिक की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुकी है। आप कोई भी क्षेत्र देख लीजिए, पृथ्वी की निगरानी, टेलीकम्युनिकेशन, टीवी प्रसारण, मौसम का अनुमान, पार्किंसन जैसी बीमारियों के लिए संसाधनों की निगरानी, आपदा की पूर्व चेतावनी और बचाव कार्य या फिर बाढ़ पर नजर रखना। मुझे लगता है कि यह हर भारतीय के जीवन का एक अभिन्न अंग बन चुका है।
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