3,2,1... देखिए तड़के जब रोशन हो गया भारत का आसमान
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भारत ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में फिर एक बार कमाल कर दिया है। इसरो ने तड़के 3 बजे श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से EOS-05 अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट को जियोसिंक्रोनस कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया है। 

यह लॉन्च सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SHAR) के दूसरे लॉन्च पैड से हुआ। इस मिशन को GSLV-F17 रॉकेट के जरिए भेजा गया, जो भारत के जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (GSLV) की 19वीं उड़ान थी।

इसरो और इस मिशन से जुड़े वैज्ञानिकों की सराहना करते हुए अंतरिक्ष विभाग के राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने 'X' पर लिखा,

“अंतरिक्ष में भारत की एक और ऐतिहासिक छलांग! GSLV-F17/EOS-05 के सफल प्रक्षेपण पर इसरो की टीम को बहुत-बहुत बधाई। EOS-05 एक अत्याधुनिक अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट है और जियोसिंक्रोनस कक्षा से काम करने वाला भारत का पहला इमेजिंग सैटेलाइट है। यह विजिबल, इन्फ्रारेड, मल्टी-स्पेक्ट्रल और हाइपरस्पेक्ट्रल बैंड्स में उन्नत तस्वीरें लेने में सक्षम है। प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत की अंतरिक्ष क्षमताएं लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर एक अंतरिक्ष महाशक्ति के रूप में हमारी स्थिति और मजबूत हुई है।”

इस मिशन को लेकर आम जनता में भी भारी उत्साह देखा गया। छात्र, शिक्षक और अंतरिक्ष प्रेमी इस ऐतिहासिक पल के गवाह बनने के लिए श्रीहरिकोटा पहुंचे थे। बारिश के बावजूद लोग लॉन्च-व्यूइंग एरिया में डटे रहे और रॉकेट को उड़ान भरते देखने के लिए बेहद उत्सुक नजर आए।

बता दें कि EOS-05 एक बेहद आधुनिक अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट है। इसका खास महत्व इसलिए है क्योंकि यह जियोसिंक्रोनस कक्षा में स्थापित होने वाला भारत का पहला इमेजिंग सैटेलाइट है। इस कक्षा में रहकर यह उपग्रह पृथ्वी के बड़े हिस्से पर लगातार नजर रख सकेगा और मौसम व खेती-किसानी से जुड़ी अहम जानकारियां मुहैया कराएगा।

इस सैटेलाइट को ले जाने वाले GSLV-F17 रॉकेट का पेलोड फेयरिंग (ऊपरी सुरक्षा कवच) 4 मीटर व्यास वाला ओगिव कंपोजिट डिजाइन का है। रॉकेट का मुख्य काम EOS-05 को सब-GTO कक्षा में पहुंचाना है, जिसके बाद यह उपग्रह अपनी अंतिम तय कक्षा में पहुंचेगा। यह उड़ान GSLV कार्यक्रम के लिए भी बेहद अहम है, जिसे भारी सैटेलाइट्स को जियोसिंक्रोनस कक्षा तक ले जाने के लिए तैयार किया गया है। इससे पहले जुलाई 2025 में GSLV-F16 मिशन के जरिए नासा-इसरो सिंथेटिक एपर्चर रडार (NISAR) उपग्रह को सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया था।

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