ग्लोबल साउथ की पावर! BRICS के बैंक ने भारत के किन प्रोजेक्ट्स में लगाया है पैसा
BRICS का न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) इंफ्रास्ट्रक्चर और सस्टेनेबल डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स के लिए फंडिंग देता है, जिसका असर जमीन पर भी दिख रहा है। दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ RRTS इसका एक उदाहरण है, जिसे NDB ने 50 करोड़ डॉलर का लोन दिया था। यह बैंक ग्लोबल साउथ के लिए एक अहम विकास बैंक के तौर पर उभर रहा है।
ग्लोबल साउथ की पावर! BRICS के बैंक ने भारत के किन प्रोजेक्ट्स में लगाया है पैसा
NDB बैंक बड़े विकास प्रोजेक्ट्स को फंड कर रहा है© NDB Website

ब्रिक्स देशों का अपना एक बैंक है- न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB), जो सदस्य देशों को इंफ्रास्ट्रक्चर और सस्टेनेबल डेवलपमेंट प्रोजेक्टस के लिए फंड देता है। अगर यह समझना हो कि NDB की फंडिंग असल में जमीन पर कैसी दिखती है, तो इसका सबसे स्पष्ट उदाहरण है- दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS)।

NDB ने 30 सितंबर 2020 को इस प्रोजेक्ट के लिए 50 करोड़ डॉलर का लोन मंजूर किया था। पांच साल से भी कम समय में, यह कॉरिडोर पूरी तरह से ऑपरेशनल है और यात्रियों को पहले के मुकाबले कम समय में दिल्ली-एनसीआर तक पहुंचा रहा है।

मेरठ की रहने वाली पलक शुक्ला रोजाना अपने काम के सिलसिले में रैपिड मेट्रो से नोएडा आती हैं। वह RT हिंदी से अपना अनुभव शेयर करते हुए कहती हैं, 'जब रैपिड मेट्रो नहीं थी तब मुझे ऑफिस आने में 3 घंटे तक लग जाते थे। ट्रैफिक में फंसे तो यह समय और लंबा खिंच जाता था। लेकिन इस साल फरवरी से मेरे लिए यह यात्रा बहुत आसान हो गई है। रैपिड मेट्रो की वजह से मैं मेरठ से नोएडा 45 मिनट में ही आ जाती हूं।'

लोगों के सफर को आसान बनाता ब्रिक्स बैंक कब बना

NDB बैंक 15 जुलाई 2014 को ब्राजील के फोर्टालेजा में हुए BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान अस्तित्व में आया था। इसका मुख्यालय चीन के शंघाई में है और बैंक 21 जुलाई 2015 से ऑपरेशनल है।

© NDB Website

तब ब्रिक्स में पांच देश थे- भारत, रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका। इस बैंक को बनाने के पीछे मकसद था- विकासशील देशों की वित्तीय ताकत को इकट्ठा करना, साथ ही उसे इन्फ्रास्ट्रक्चर और सस्टेनेबल डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स में इस्तेमाल करना।

अब इस बैंक से बांग्लादेश, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), मिस्र, अल्जीरिया और उज्बेकिस्तान भी जुड़ गए हैं।

बैंक की वेबसाइट के मुताबिक, बैंक अब तक कुल 42.9 अरब डॉलर की फंडिंग मंजूर कर चुका है, जो 139 अलग-अलग प्रोजेक्ट्स में लगी है। वेबसाइट के मुताबिक, इस फंडिंग से करीब 2,400 मेगावाट रिन्यूएबल और क्लीन एनर्जी क्षमता स्थापित होगी, हर साल 1.47 करोड़ टन कार्बन उत्सर्जन रोका जाएगा, 35,000 घर बनेंगे, और 40,400 किलोमीटर सड़कें बनाई या अपग्रेड की जाएंगी।

NDB की फंडिंग का एक बड़ा हिस्सा ऐसे प्रोजेक्ट्स में जा रहा है, जिसका सीधा असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है।

भारत में ब्रिक्स के बैंक ने कितने प्रोजेक्ट्स में लगाया पैसा

2023 के अंत तक बैंक ने भारत के लिए कुल 27 प्रोजेक्ट्स मंजूर किए थे, जिनमें से एक रद्द होने के बाद 26 प्रोजेक्ट्स सक्रिय रह गए। इन प्रोजेक्ट्स के लिए NDB भारत को कुल 8.6 अरब डॉलर देने वाला है जिसमें से अब तक करीब 44% राशि दी जा चुकी है।

NDB की आधिकारिक 'India Country Portfolio Evaluation' रिपोर्ट (दिसंबर 2024) के मुताबिक, सबसे ज्यादा फंडिंग ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर में गई है। इस तरह के 14 प्रोजेक्ट्स में कुल राशि का 55% हिस्सा खर्च हो रहा है जिनमें RRTS, मुंबई मेट्रो और चेन्नई मेट्रो जैसे प्रोजेक्ट्स शामिल हैं।

इसके बाद पानी और सफाई से जुड़े 7 प्रोजेक्ट्स और कोविड-19 इमरजेंसी सहायता के 2 प्रोजेक्ट्स हैं। राज्यों की बात करें तो, मध्य प्रदेश को सबसे ज्यादा प्रोजेक्ट्स मिले हैं।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले साल जुलाई में रियो दि जेनेरियो में NDB बैंक के बढ़ते अहमियत पर बात की थी।

© YouTube/NDB

बैंक की 10वीं वार्षिक बैठक में वित्त मंत्री ने कहा था, 'NDB ने साबित कर दिया है कि ग्लोबल साउथ के नेतृत्व में बना कोई संस्थान समय पर, भरोसेमंद और देशों की जरूरत के मुताबिक विकास से जुड़े समाधान दे सकता है।'

IMF और वर्ल्ड बैंक से कैसे अलग है NDB?

NDB का गठन ऐसे समय हुआ जब विकासशील देशों में यह बहस तेज थी कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास प्रोजेक्ट के लिए मौजूदा अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के अलावा और विकल्प होने चाहिए। ब्रिक्स देशों ने इसी जरूरत को देखते हुए अपना विकास बैंक बनाया।

हालांकि, NDB खुद को IMF या वर्ल्ड बैंक के विकल्प के तौर पर पेश नहीं करता। इसका फोकस इन्फ्रास्ट्रक्चर और टिकाऊ विकास के लिए वित्त उपलब्ध कराने पर है। बैंक का कहना है कि वह अपने सदस्य देशों के विकास टार्गेट्स और सस्टेनेबल्स डेवलपमेंट लक्ष्यों को देखते हुए प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता देता है।

NDB की एक अहम प्राथमिकता स्थानीय मुद्राओं में फंडिंग बढ़ाना भी रही है। इसका मकसद विकासशील देशों को विदेशी मुद्रा और खासकर डॉलर से जुड़े रिस्क को कम करने में मदद करना है। बैंक अलग-अलग बाजारों और मुद्राओं में फंड जुटाकर अपने प्रोजेक्ट्स के लिए फंड उपलब्ध कराता है।

BRICS के लिए क्यों अहम है NDB?

ब्रिक्स की पहल से बना NDB अब समूह की सबसे ठोस संस्थागत उपलब्धियों में से एक बन चुका है। ब्रिक्स जहां एक राजनीतिक और आर्थिक सहयोग मंच के तौर पर काम करता है, वहीं NDB उस सहयोग को प्रोजेक्ट्स और वित्तीय संस्थागत ढांचे में बदलने का जरिया देता है।

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करीब एक दशक में 100 से ज्यादा प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू करना बताता है कि NDB ग्लोबल साउथ की विकास जरूरतों के लिए अहम बैंक की भूमिका निभा रहा है।

NDB के इंडिपेंडेंट इवैलुएशन ऑफिस के महानिदेशक अश्वनी मुथू ने कहा, 'NDB की तरफ से जो पहल हो रही है, वो टिकाऊ विकास में योगदान दे रही हैं। 2015 से अब तक 100 से अधिक प्रोजेक्ट्स के लिए फंडिंग की जा चुकी है।'

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