
जंग में झोंके जाने के बाद अफगानिस्तान को जिस तरह से दिखाया जाता है, उससे वह देश बिल्कुल अलग है। हां, आप वहां आसानी से घूम नहीं सकते लेकिन विलेन के तौर पर पेश करना भी ठीक नहीं है। अमेरिका के लौटने के बाद पश्चिमी मीडिया में पठानों के इस खूबसूरत मुल्क को डरावने देश के तौर पर पेश किया गया लेकिन जब आप तालिबान के लोगों से भी बात करते हैं तब वो मानवीय पहलू सामने आता है, जो जंग की आग में झुलसा हुआ है। काबुल में घूमते समय कम से कम चार ऐसी चौंकाने वाले चीजें सामने आईं।
1. अफगानों की जुबां पर अमिताभ का नाम
बॉलीवुड की चर्चा होने पर अफगानिस्तान में एक अपनेपन का एहसास होता है। वहां हिंदी फिल्में काफी पॉपुलर हैं। अफगानिस्तान के लोग बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन को खूब पसंद करते हैं। तुलसी विरानी (स्मृति ईरानी) घर-घर पहचाना जाने वाला नाम है। यहां कई लोग 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' सीरियल का दिलचस्प किस्सा सुनाते हैं। जब सीरियल चलता था, तो मिया-बीवी की फाइट भी रुक जाया करती थी। उनसे बात करते समय आपको लगता है कि ये भी हमारे जैसे ही अपने लोग हैं।

2. खड़े होकर लोग देखने लगते
तालिबान प्रशासन से कई परमिशन लेटर लेने के बाद उनकी गाड़ी भी मिल गई थी। तालिबान की गाड़ी पर गनमैन के साथ जब लोग एक महिला को देखते, तो सड़क किनारे खड़े हो जाते। रास्तेभर टकटकी लगाए देखते जाते कि एक महिला क्यों बैठी है। उस गाड़ी में बड़े-बड़े हथियार थे। वहां के लोगों को ही नहीं, तालिबान के नेताओं को भी कैमरे या पत्रकार देखने की ज्यादा आदत नहीं है। अगर वो पत्रकार महिला है, तो सीन बिल्कुल अलग होता है।
3. अचानक बड़े बाले वाला गाड़ी के आगे आ गया
एक दिन सुदूर पहाड़ी इलाके में गाड़ी चली जा रही थी। साथ चल रहे अफगान सहयोगी ने अचानक ब्रेक लगाया। सामने एक लंबा पठान खड़ा था। आंखों में सूरमा और बाल काफी लंबे थे। ड्राइवर ने बताया कि इस इलाके में अमेरिकी बेस हुआ करता था। ये उस समय कमांडर हुआ करते थे। अमेरिका ने इनके ऊपर एक लाख डॉलर का इनाम रखा था। इन लोगों से बात करने पर दर्द समझ में आता है। ये अपनी जमीन वापस पाने के लिए लड़ रहे थे। अमेरिका के लौटने के बाद खुश हैं। पहले अमेरिका के कारण पहाड़ों पर रहते थे, फिर से आइसोलेशन में नहीं रहना चाहते हैं।

4. सड़क पर घूमते समय डर नहीं लगता
हां, ये चीजें अब अच्छी हो गई हैं। 40 साल तक जंग झेलने के बाद देश में चलना फिरना सेफ हो गया है। अमेरिका 20 साल यहां लड़ता रहा। पांच साल पहले सड़क पर चलते समय, गांवों में भी डर लगता था कि कहीं ऊपर से बम न गिर जाए। वो जगह अब सेफ हो गई है। कई इलाकों में कब्रें ही कब्रें दिखाई देती हैं। इस लड़ाई में बहुत से निर्दोष लोग मारे गए। यही वजह है कि अब तालिबान के लोग जगह-जगह रोकते हैं और चेक करते हैं। इससे समझा जा सकता है कि वे लोगों को शक की निगाह से क्यों देखते हैं। मिलने पर कहते हैं कि खफा मत होइएगा, ये हमारी ड्यूटी है।
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