E20 का डर, महंगा पेट्रोल या... कार खरीदने के मामले में क्यों बदल गई भारतीयों की पसंद
देश में पहली बार ऐसा हुआ है कि CNG, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक जैसे ऑल्टरनेट फ्यूल वाली कारों की कुल बिक्री पेट्रोल कारों से ज्यादा हो गई है। लेकिन पसंद के मामले में CNG अब भी EV से आगे है।
E20 का डर, महंगा पेट्रोल या... कार खरीदने के मामले में क्यों बदल गई भारतीयों की पसंद
कार बाजार में आए इस बदलाव को CNG और इलेक्ट्रिक गाड़ियां आगे बढ़ा रही हैं। EV की बिक्री तेजी से बढ़ी है, लेकिन बाजार में CNG का हिस्सा अब भी उससे तीन गुना से ज्यादा है। (Photo-ANI)

भारत के कार बाजार में पहली बार पेट्रोल कारों की बादशाहत खत्म हो गई है। ईरान-अमेरिका जंग के कारण तेल की कीमतों पर बढ़ा दबाव, महंगा पेट्रोल और E20 को लेकर लोगों के मन में उठ रहे सवाल इसकी बड़ी वजह माने जा रहे हैं।

फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस (FADA) के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 में पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में CNG/LPG, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों की कुल बिक्री में हिस्सेदारी 41.95% रही। वहीं पेट्रोल/एथनॉल कारों की बिक्री कम हुई है। अगस्त 2026 में कुल बिकी कारों में पेट्रोल और एथनॉल से चलने वाली कारें 40.85% दर्ज की गईं। यानी पिछले महीने पेट्रोल कारों से CNG, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक कारें 1.10% ज्यादा बिकीं।

इन आंकड़ों का मतलब यह नहीं है कि अकेले इलेक्ट्रिक कारों ने पेट्रोल को पीछे छोड़ दिया है। अलग-अलग सेगमेंट में देखें तो पेट्रोल कारें अब भी लोगों की पहली पसंद हैं। लेकिन ऑल्टरनेटिव फ्यूल जैसे CNG, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक जैसी कारों की कुल बिक्री पहली बार उससे आगे निकल गई है। इनमें सबसे बड़ा हिस्सा CNG कारों का है।

किस फ्यूल की कितनी कारें बिकीं?

ईंधन

कुल बिक्री में हिस्सा

पेट्रोल/एथनॉल40.85%
CNG/LPG25.28%
डीजल17.21%
हाइब्रिड9.04%
इलेक्ट्रिक7.63%
CNG, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक मिलाकर41.95%

CNG, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक कारों की कुल बिक्री में अकेले CNG/LPG कारों का हिस्सा करीब 60% है। इतना ही नहीं, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक कारों को मिला दें तो भी उनकी हिस्सेदारी CNG से कम है।

इसलिए पेट्रोल कारों को पीछे छोड़ने वाली इस कहानी में सबसे बड़ा किरदार फिलहाल EV नहीं, बल्कि CNG है।

एक साल में कैसे बदला कार बाजार?

अगस्त 2025 में कुल कार सेल्स में CNG, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक कारों की संयुक्त हिस्सेदारी 35.26% थी, जबकि पेट्रोल की हिस्सेदारी 46.37% थी। यानी पेट्रोल कारें बाकियों से करीब 11.11% ज्यादा बिकी थीं। लेकिन एक साल बाद, अगस्त 2026 में इन तीनों की कुल हिस्सेदारी बढ़कर 41.95% हो गई और पेट्रोल 40.85% पर आ गया। यानी एक साल में करीब 11% की बढ़त खत्म हो गई और उससे CNG, हाइब्रिड व इलेक्ट्रिक कारें 1.10% ज्यादा बिक गईं।

आसान भाषा में समझें तो एक साल में:

  • पेट्रोल कारों की बिक्री 46.37% से घटकर 40.85% हो गई।
  • CNG कारों की सेल्स 21.47% से बढ़कर 25.28% पहुंच गई।
  • हाइब्रिड कार खरीदने वालों की संख्या 7.96% से बढ़कर 9.04% हो गई।
  • इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री 5.83% से बढ़कर 7.63% हुई।

ईंधन

अगस्त 2025

जुलाई 2026

अगस्त 2026

पेट्रोल/एथनॉल46.37%41.68%40.85%
CNG/LPG21.47%24.67%25.28%
हाइब्रिड7.96%8.02%9.04%
इलेक्ट्रिक5.83%7.90%7.63%
डीजल18.37%17.73%17.21%

साफ है कि कार बाजार में आए इस बदलाव को CNG और इलेक्ट्रिक गाड़ियां आगे बढ़ा रही हैं। EV की बिक्री तेजी से बढ़ी है, लेकिन बाजार में CNG का हिस्सा अब भी उससे तीन गुना ज्यादा है।

क्या पेट्रोल कारों से मोहभंग हो रहा है?

कार और दुपहिया वाहन निर्माताओं की संस्था के सीईओ सहर्ष दमानी ने RT हिंदी से कहा कि पेट्रोल गाड़ियों की बिक्री लगातार कम हो रही है। इसके उलट CNG, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री बढ़ रही है। उन्होंने इसकी वजह भी बताई। 

सहर्ष दमानी 1
इस बदलाव की बड़ी वजह गाड़ी चलाने का खर्च है। पेट्रोल की कीमतें पिछले दो-तीन महीनों में जंग की वजह से बढ़ी भी हैं। ऐसे में रोजाना आने-जाने या लंबी दूरी तय करने वाले लोग ऐसी गाड़ी चाहते हैं, जिसे चलाने पर कम खर्च आए। CNG और इलेक्ट्रिक गाड़ियों में प्रति किलोमीटर खर्च पेट्रोल के मुकाबले कम पड़ता है।
सहर्ष दमानी
सहर्ष दमानी
CEO, फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स (FADA)

ईरान-अमेरिका युद्ध की वजह से सप्लाई पर असर के कारण तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ा है। 28 फरवरी को ईरान युद्ध शुरु होने के दिन दिल्ली में पेट्रोल करीब 94 रुपये लीटर था, जो अब 104 रुपये पर बिक रहा है। ये तब है, जब सराकार ने छूट दे रखी है। महंगे पेट्रोल की वजह से गाड़ी चलाने का खर्च बढ़ गया है। ये भी एक वजह है कि लोग CNG, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक कारों की तरफ जा रहे हैं।

EV की कीमत घटी, सफर बढ़ा

सहर्ष दमानी कहते हैं कि देश में इलेक्ट्रिक कारों की कीमतें धीरे-धीरे कम हो रही हैं। इसके अलावा बैटरी परफॉर्मेंस बढ़ने से ये कारें अब एक बार चार्ज करने पर पहले से ज्यादा दूरी तय कर सकती हैं। पहले जो चार्जिंग स्टेशनों की समस्या थी, वह भी दूर हो रही है। देश में चार्जिंग स्टेशन बढ़ रहे हैं।

सहर्ष दमानी 2
इलेक्ट्रिक गाड़ियों की कीमतें धीरे-धीरे कम हो रही हैं। उनकी रेंज बढ़ी है और चार्जिंग का ढांचा भी विकसित हो रहा है। इससे इलेक्ट्रिक वाहन आम लोगों की पहुंच में आ रहे हैं और उनकी बिक्री बढ़ रही है।
सहर्ष दमानी
सहर्ष दमानी
CEO, फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स (FADA)

फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस के अध्यक्ष साई गिरिधर ने भी कार सेल्स के नए आंकड़ों पर रॉयटर्स से कहा कि यह बदलाव तो होना ही था। अब लोगों के पास CNG, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक कारों के ज्यादा मॉडल उपलब्ध हैं। इलेक्ट्रिक कारें अब एक चार्ज में लंबा सफर कर सकती है और चार्जिंग की सुविधा भी धीरे-धीरे बेहतर हो रही है।

CNG कारों की पुरानी परेशानी कम हुई

CNG कारों की ज्यादा बिक्री की वजह सिर्फ पेट्रोल के मुकाबले सस्ता ईंधन नहीं है। पहले CNG का बड़ा सिलेंडर कार की लगभग पूरी डिक्की घेर लेता था। इससे सामान रखने की जगह नहीं बचती थी। अब कंपनियों ने गाड़ियों की बनावट में बदलाव किया है। अब छोटे और ज्यादा सुविधाजनक सिलेंडर लगाए जा रहे हैं। इससे डिक्की में सामान रखने की जगह बचने लगी है।

सहर्ष दमानी 3
पहले बड़ा सिलेंडर लगने के कारण डिक्की की लगभग पूरी जगह घिर जाती थी। अब कंपनियां छोटे और अधिक सुविधाजनक सिलेंडर इस्तेमाल कर रही हैं, जिससे सामान रखने के लिए पर्याप्त जगह मिलती है। CNG मॉडल भी पहले के मुकाबले ज्यादा उपलब्ध हैं।
सहर्ष दमानी
सहर्ष दमानी
CEO, फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स (FADA)

यानी CNG कारों के साथ जुड़ी दो बड़ी परेशानियां कम हुई हैं। इन्हें चलाने का खर्च पेट्रोल से कम है और नए मॉडलों में डिक्की की जगह भी पहले से बेहतर हुई है।

E20 ने भी बढ़ाई लोगों की उलझन

पेट्रोल कारों की बिक्री पिछले एक साल में करीब 5.5 पर्सेंट घट गई है। इसकी एक वजह E20 पेट्रोल को लेकर लोगों के मन में पैदा हुई चिंता भी मानी जा रही है। E20 ऐसा पेट्रोल है, जिसमें 20% एथनॉल और 80% पेट्रोल होता है। सरकार इसका मकसद विदेश से खरीदे जाने वाले कच्चे तेल का बिल कम करना बताती है। 

पुरानी गाड़ियां चलाने वाले कई लोगों का दावा है कि इसकी वजह से माइलेज घटने के सरकारी दावे से कहीं ज्यादा असर पड़ रहा है। कार के कुछ पार्ट्स प्रभावित होने की शिकायतें भी आई हैं।

सहर्ष दमानी मानते हैं कि E20 को लेकर लोगों के मन में ऐसी ही उलझनें उन्हें पेट्रोल कारों से दूर ले जा रही है। यह कहना हालांकि सही नहीं होगा कि पेट्रोल कारों की बिक्री केवल E20 के कारण कम हुई है। FADA ने ग्राहकों की पसंद पर कोई अलग सर्वे जारी नहीं किया है।

E20 पर सरकार का क्या कहना है?

सरकार ने E20 से बड़े पैमाने पर गाड़ियों के इंजन और अन्य पार्ट्स खराब होने के दावों को खारिज किया है। सरकार का कहना है कि देश में तीन करोड़ से ज्यादा पेट्रोल कारें एथनॉल मिले ईंधन पर चल चुकी हैं, लेकिन बड़े स्तर पर इंजन खराब होने का कोई सबूत नहीं मिला है।

सरकार ने हालांकि E20 से जुड़े सवाल-जवाब में माना है कि कुछ गाड़ियों का माइलेज 3% से 5% तक कम हो सकता है। RT हिंदी से बातचीत में सहर्ष दमानी ने भी इस बात पर जोर दिया कि E20 के कारण नई गाड़ियों के इंजन खराब होने जैसी चिंताएं बेवजह हैं।

नई कार खरीदने वालों के लिए सवाल केवल पार्ट्स खराब होने तक सीमित नहीं गया है। अगर समान दूरी तय करने में ज्यादा पेट्रोल लगेगा तो हर महीने गाड़ी चलाने का खर्च कितना बढ़ेगा, खरीदारी के फैसले में अब यह सवाल भी मायने रखता है।

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