
एक हफ्ते पहले बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का शिखर सम्मेलन हुआ, जिसमें भारत, रूस और चीन समेत सभी सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष शामिल हुए। अब दुनिया की नजरें नई दिल्ली पर हैं, जहां इस वीकेंड 12-13 सितंबर को ब्रिक्स (BRICS) का शिखर सम्मेलन होने जा रहा है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत ब्रिक्स के सभी सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष इस बैठक में हिस्सा ले रहे हैं। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भी एक बड़े प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत पहुंचने की संभावना है।
भारत ब्रिक्स सम्मेलन की मेजबानी के लिए पूरी तरह तैयार है। नई दिल्ली में लग रहे इस बड़े कूटनीतिक जमावड़े पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं।
भारत बेहद नाजुक भू-राजनीतिक दौर में ब्रिक्स के शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है जब दुनिया में कई जगह तनाव है। विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे वक्त में भारत के लिए यह मेजबानी कुछ चुनौतियों के साथ एक साथ कई मौके भी लेकर आई है। सबसे पहले जान लेते हैं-
ब्रिक्स और इसे लेकर भारत का नजरिया
ब्रिक्स दुनिया के उभरते देशों का एक समूह है, जिसका मकसद आर्थिक सहयोग बढ़ाना और वैश्विक मंचों पर विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करना है। इसकी शुरुआत 2006 में BRIC के रूप में ब्राजील, रूस, भारत और चीन ने की थी।
2010 में दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने के बाद इसका नाम BRICS हुआ। इसके बाद 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान और UAE भी इसके सदस्य बने। 2025 में इंडोनेशिया ब्रिक्स में शामिल हुआ जिससे ब्रिक्स देशों की संख्या बढ़कर 11 हो गई है।
भारत के लिए ब्रिक्स ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों के लिए इस्तेमाल होने वाला टर्म) को मजबूत करने और वैश्विक संस्थाओं में सुधार की आवाज उठाने का मंच है।
2026 में ब्रिक्स की अध्यक्षता संभालते हुए भारत ने इस मंच को नई वैश्विक चुनौतियों के हिसाब से आगे बढ़ाने की कोशिश की है। भारत ने ब्रिक्स को ‘मानवता पहले’ और 'जन-केंद्रित मंच' बनाने पर जोर दिया है। इसका मकसद सदस्य देशों के मतभेदों के बावजूद लोगों के हितों और ग्लोबल साउथ के विकास को साझा एजेंडा बनाना है।

भारत ने ब्रिक्स का नया अर्थ भी दिया है- Building Resilience & Innovation for Cooperation and Sustainability। इसका मतलब है साथ मिलकर सतत विकास के साथ आगे बढ़ना और नई तकनीक को बढ़ावा देना है।
भारत के लिए बड़ा मौका है
मिडिल ईस्ट इंस्टिट्यूट की वरिष्ठ फेलो डॉ. मीना सिंह रॉय 'RT हिंदी' से बात करते हुए कहती हैं कि भारत के लिए अवसर निश्चित तौर पर बड़ा है।
वह कहती हैं, 'भारत की अपनी अर्थव्यवस्था, मानव संसाधन और वैश्विक महत्व है। साथ ही शांति-निर्माण की भारत की छवि उसकी ताकत है। चीन और रूस के नेता भी इस सम्मेलन में आ रहे हैं। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भारत इन सभी देशों के बीच किस तरह की सहमति बनाकर एक मजबूत और सकारात्मक संयुक्त बयान सामने लाता है।'
- भारत में दक्षिण अफ्रीका के हाई कमिश्नर अनिल सूकलाल का कहना है कि 'भारत ने पिछले 18 साल में शायद सबसे मुश्किल दौर में ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली है।'
उन्होंने कहा कि ईरान-अमेरिकी संघर्ष की वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्था बहुत अधिक प्रभावित हुई है। हाई कमिश्नर ने कहा, 'नई दिल्ली में शिखर सम्मेलन ब्रिक्स नेताओं को इन चुनौतियों पर मिलकर चर्चा करने का अवसर देगा।'
हाई कमिश्नर ने कहा कि शिखर सम्मेलन में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा हिस्सा लेंगे और चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग भी आ सकते हैं। बड़े वर्ल्ड लीडर्स की भागीदारी ही इस समूह के बढ़ते रणनीतिक महत्व को दिखाती है।
भारत की कोशिश क्या होगी?
भारत की कोशिश रही है कि ब्रिक्स को पश्चिम विरोधी समूह के तौर पर न देखा जाए बल्कि यह गैर-पश्चिमी मंच बना रहे। लेकिन मौजूदा वैश्विक हालात में यह संतुलन बनाए रखना मुश्किल होता जा रहा है।
भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव, पाकिस्तान के साथ अमेरिका की बढ़ती नजदीकी और QUAD (भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया) को लेकर अनिश्चितता भी भारत के लिए चिंता का विषय हैं।
- अमेरिका में भारत के पूर्व राजदूत टी एस तिरुमूर्ति ने 'द हिंदू' में एक लेख लिखा है जिसमें वह कहते हैं कि ब्रिक्स के कई सदस्य देश भारत के इस रुख का समर्थन करते हैं। इसकी वजह यह है कि वे भी अमेरिका, चीन, रूस और दूसरे देशों के साथ अपने संबंध बनाए रखना चाहते हैं।
वह लिखते हैं, 'तेजी से बदलती दुनिया में भारत को ब्रिक्स के मूल उद्देश्य को फिर से जीवित करना होगा। साथ ही, भारत को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि दूसरे देश इस मंच को अपने हितों के लिए इस्तेमाल न कर सकें।'
संयुक्त राष्ट्र में सुधार पर भी बात
2018 में दक्षिण अफ्रीका में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार नेताओं की बैठक में 'रिफॉर्म्स मल्टीलेटरलिज्म' का अपना दृष्टिकोण सामने रखा था। रिफॉर्म्ड मल्टीलेटरलिज्म का मतलब है वैश्विक संस्थाओं में सुधार कर सभी देशों को बराबर और उचित प्रतिनिधित्व दिया जाए।
मीना सिंह रॉय कहती हैं कि भारत के लिए इस बार मौका है कि वह संयुक्त राष्ट्र में सुधारों की बात रखे।
एक्सपर्ट कहती हैं कि चीन और रूस पहले से ही संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य हैं, लेकिन भारत अभी इसका स्थायी सदस्य नहीं है। इसलिए ब्रिक्स भारत के लिए यह मौका हो सकता है कि वह ग्लोबल साउथ के हितों के अनुरूप यूएन रिफॉर्म्स के एजेंडे को आगे बढ़ाए।
'चीन, रूस, भारत के नेताओं की एक साथ की तस्वीर मजबूत संदेश देगी'
जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के प्रोफेसर गुलशन सचदेवा RT हिंदी से बात करते हुए कहते हैं कि यह शिखर सम्मेलन भारत को ऐसे समय में अपनी आर्थिक और कूटनीतिक ताकत दिखाने का अहम मौका दे रहा है, जब वैश्विक व्यवस्था में बड़े बदलाव हो रहे हैं।
वह कहते हैं, '2023 में भारत की सफल G20 अध्यक्षता को आज भी एक बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि के तौर पर याद किया जाता है। उस दौरान भारत ने अफ्रीकी संघ को G20 में शामिल कराने के लिए सभी देशों के बीच सहमति बनाने में सफलता हासिल की थी। इस बात की अच्छी संभावना है कि ब्रिक्स नेताओं का शिखर सम्मेलन भी एक साझा सहमति वाले घोषणापत्र के साथ खत्म हो।'
प्रो. सचदेवा का कहना है-
भारत की अध्यक्षता को लेकर रूस-चीन क्या कह रहे
ब्रिक्स के लिए रूसी राष्ट्रपति के भारत दौरे से पहले क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि यह यात्रा दोनों देशों को द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने का अवसर देगी। उन्होंने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए भारत को सफलता की शुभकामनाएं भी दीं।
❗️Russia 'Highly Appreciates' India's BRICS Chairmanship - Kremlin Spox Peskov
— RT_India (@RT_India_news) September 8, 2026
"We have no doubt the summit will be successful," he adds.
📹 Sputnik India pic.twitter.com/CIIDgjM5T3
मॉस्को से वर्चुअल प्रेस ब्रीफिंग में पेस्कोव ने कहा, 'हमें विश्वास है कि यह शिखर सम्मेलन सफल होगा। रूस ब्रिक्स सहयोग को आगे बढ़ाने में हरसंभव योगदान दे रहा है। हमारे सहयोग के तीन मुख्य क्षेत्र हैं- नीति और सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और वित्त, तथा सांस्कृतिक और मानवीय क्षेत्र। हम ब्रिक्स के अलग-अलग फॉर्मेट्स में नए देशों को शामिल करने के विचार का भी समर्थन करते हैं।'
वहीं, चीन ने भी भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का समर्थन किया है।
China Gives Its Backing to India’s BRICS Summit Hosting
— RT_India (@RT_India_news) September 8, 2026
Beijing attaches “great importance” to BRICS cooperation and supports India’s efforts to successfully host this year’s leaders’ summit, 🇨🇳's FM spox Mao Ning said.
President Xi is expected to attend - it would mark his… pic.twitter.com/sza2VfGDxp
चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि चीन ब्रिक्स सहयोग को बहुत महत्व देता है और इस साल ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की सफल मेजबानी के भारत की कोशिशों का समर्थन करता है।




