दिल्ली में हर तीसरा वोटर SIR ड्राफ्ट से बाहर, इन 10 सीटों पर बदल जाएगा चुनावी गणित
बुराड़ी में 1.68 लाख, ओखला में 1.64 लाख नाम कम; 8 चुनावी जिलों में 30% से ज्यादा मतदाता ड्राफ्ट से बाहर। 2025 में कम मतदान वाले कई इलाकों में कटौती ज्यादा, लेकिन क्या इससे अगला चुनाव बदल जाएगा? आंकड़ों से समझिए।
दिल्ली में हर तीसरा वोटर SIR ड्राफ्ट से बाहर, इन 10 सीटों पर बदल जाएगा चुनावी गणित
दिल्ली में SIR के बाद वोटर ड्राफ्ट लिस्ट हुई जारी।

दिल्ली की राजनीति का गणित कागज पर अचानक बहुत बदल गया है। 2025 के विधानसभा चुनाव के समय जिस दिल्ली में करीब 1.45 करोड़ मतदाता दर्ज थे, विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के बाद जारी ड्राफ्ट सूची में सिर्फ 97.53 लाख नाम रह गए हैं। कुल 47,56,722 मतदाताओं के नाम फिलहाल ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं हैं। यानी मोटे तौर पर दिल्ली के हर तीन पुराने मतदाताओं में से एक का नाम नई ड्राफ्ट सूची में नहीं है।

लेकिन इस आंकड़े को सीधे 47.56 लाख वोट काट दिए गए कहना भ्रामक होगा। यह अभी ड्राफ्ट सूची है, अंतिम मतदाता सूची नहीं। जिन लोगों का नाम छूटा है, उनके पास 30 सितंबर तक दावा करने का मौका है और फाइनल लिस्ट 4 नवंबर को पब्लिश होनी है। ऐसे में असल राजनीतिक सवाल दूसरा है कि ये 47.56 लाख नाम दिल्ली में कहां से कम हुए हैं और क्या वे उन विधानसभा सीटों पर ज्यादा हैं जहां पिछला चुनाव कुछ हजार वोटों से तय हुआ था?

दिल्ली की SIR लिस्ट में यहां चेक करें अपना नाम

47.56 लाख नाम गए कहां?

दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 47.56 लाख ऐसे मतदाता थे जिनके गणना फॉर्म जमा नहीं हो सके। इनमें 43,32,775 यानी करीब 91% को 'स्थायी रूप से ट्रांसफर, अनुपस्थित या अन्य' श्रेणी में रखा गया। इसके अलावा 2,82,412 मृत मतदाता और 1,41,535 डुप्लीकेट या एक से अधिक जगह दर्ज मतदाता मिले। यानी सबसे बड़ा कारण मौत या डुप्लीकेट नाम नहीं, बल्कि मतदाता का पुराने पते पर नहीं मिलना या फॉर्म जमा नहीं होना है।

चुनाव अधिकारियों के मुताबिक इस श्रेणी में ऐसे लोग भी शामिल हैं जो दूसरे राज्य या केंद्रशासित प्रदेश में मतदाता बन चुके हैं, दिए गए पते पर नहीं मिले, 17 अगस्त तक फॉर्म जमा नहीं किया या मतदाता के रूप में दर्ज रहने की इच्छा नहीं जताई। दिल्ली में वोटर्स की व्यस्तता को ध्यान में रखते हुए BLO को घर-घर जाकर कम से कम तीन बार कोशिश करने को कहा गया था।

10 सीटें जहां संख्या के हिसाब से सबसे ज्यादा नाम कम हुए

दिल्ली CEO की आधिकारिक विधानसभा-वार सूची को क्रम में लगाने पर सबसे ज्यादा कमी वाली दस सीटें सामने आती हैं।

विधानसभा सीटड्राफ्ट से बाहर नाम2025 जीत का अंतरबाहर नाम/जीत का अंतर2025 मतदान
बुराड़ी1,67,88520,6018.1 गुना59.48%
ओखला1,63,82923,6396.9 गुना54.90%
बदरपुर1,46,67325,8885.7 गुना56.93%
विकासपुरी1,46,22512,87611.4 गुना58.50%
रिठाला1,06,51229,6163.6 गुना57.88%
मटियाला1,05,64528,7233.7 गुना60.37%
करावल नगर1,00,16723,3554.3 गुना64.44%
छतरपुर99,4126,23915.9 गुना62.70%
देवली94,72636,6802.6 गुना59.57%
तुगलकाबाद92,03314,7116.3 गुना

55.80%

नामों की कमी के आंकड़े CEO दिल्ली के आधिकारिक SIR डेटा से हैं। 2025 के मतदान और चुनावी नतीजों के आंकड़े प्रकाशित चुनाव परिणामों से मिलते हैं।

गौर करने वाली बात यह है कि इस तुलना का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि जिन लोगों के नाम ड्राफ्ट से बाहर हैं, उन्होंने 2025 में किसी खास पार्टी को वोट दिया था या वोट दिया भी था। यह सिर्फ दोनों संख्याओं के आकार की तुलना है।

अब नंबर गेम समझिए: छतरपुर सबसे दिलचस्प उदाहरण

छतरपुर में 2025 का चुनाव BJP ने महज 6,239 वोट से जीता था। अब SIR ड्राफ्ट में यहां 99,412 पुराने नाम शामिल नहीं हैं। यानी पिछली जीत के अंतर से लगभग 16 गुना बड़ा आंकड़ा।

इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि चुनाव परिणाम उलट जाएगा। इसका अर्थ सिर्फ इतना है कि इस सीट की मतदाता संरचना में अभी इतना बड़ा बदलाव दिख रहा है कि अंतिम सूची आने के बाद राजनीतिक दलों को अपने बूथ और मतदाता गणित की नए सिरे से समीक्षा करनी पड़ेगी।

विकासपुरी की तस्वीर भी समझनी जरूरी है। 2025 में BJP के पंकज कुमार सिंह ने AAP के महेंद्र यादव को 12,876 वोटों से हराया था। ड्राफ्ट में यहां 1,46,225 नाम कम हैं यानी जीत के अंतर से 11 गुना से भी ज्यादा।

बुराड़ी में सबसे ज्यादा 1,67,885 नाम कम हैं। 2025 में AAP के संजीव झा ने यह सीट 20,601 वोट से जीती थी। कम हुए नाम पिछली जीत के अंतर से आठ गुना से ज्यादा हैं।

इसी तरह ओखला में 1.64 लाख नाम ड्राफ्ट में नहीं हैं, जबकि अमानतुल्लाह खान की 2025 की जीत का अंतर 23,639 था।

प्रतिशत देखें तो तुगलकाबाद सबसे ऊपर

एक और दिलचस्प तस्वीर तब सामने आती है जब कुल संख्या के बजाय सीट के पुराने मतदाताओं में से कितने प्रतिशत नाम कम हुए, यह देखा जाए तो तुगलकाबाद में लगभग 47.8%, ओखला में करीब 45.2%, आरके पुरम में 44% से ज्यादा, कस्तूरबा नगर में करीब 44%, जबकि बदरपुर, कालकाजी, न्यू दिल्ली, जंगपुरा, महरौली, पटेल नगर, संगम विहार, करोल बाग और पटपड़गंज जैसी सीटों पर 40% या उससे ज्यादा पुराने मतदाता ड्राफ्ट में शामिल नहीं हैं। यानी तुगलकाबाद में स्थिति लगभग ऐसी है कि 2025 की सूची के हर दो मतदाताओं में से करीब एक नाम फिलहाल ड्राफ्ट में नहीं है।

8 चुनावी जिलों में 30% से ज्यादा नाम बाहर

आधिकारिक आंकड़ों से गणना करने पर 13 SIR चुनावी डिवीजनों में से इन 8 में 30% से ज्यादा पुराने नाम ड्राफ्ट में नहीं हैं:

चुनावी जिला/ SIR डिवीजनड्राफ्ट में मतदाताबाहर/Uncollectableपुराने आधार का लगभग %
दक्षिण-पूर्व8,78,2086,79,08143.61%
नई दिल्ली94,02260,17039.02%
दक्षिण8,25,3365,19,66538.64%
सेंट्रल4,32,5172,65,21638.02%
उत्तर6,25,4593,48,49835.78%
पूर्व10,32,6785,70,68135.60%
पुरानी दिल्ली3,99,3961,97,30333.08%
सेंट्रल नॉर्थ5,61,9062,54,02231.13%

उल्लेखनीय है कि SIR के लिए दिल्ली को 13 चुनावी प्रशासनिक डिवीजनों में बांटा गया है। इन्हें दिल्ली के सामान्य 11 राजस्व जिलों से सीधे नहीं मिलाना चाहिए।

क्या कम मतदान और ज्यादा नाम कटने में कोई संबंध है?

2025 विधानसभा चुनाव में दक्षिण-पूर्व दिल्ली में मतदान केवल 56.4% रहा था। अब इसी चुनावी जिले में 43.61% नाम ड्राफ्ट से बाहर हैं- दिल्ली में सबसे ज्यादा। नई दिल्ली जिले में पिछली बार मतदान 57.23% था और अब करीब 39% नाम ड्राफ्ट में नहीं हैं। दक्षिण दिल्ली में मतदान 58.2% था और ड्राफ्ट से करीब 38.64% नाम बाहर हैं। इसके उलट उत्तर-पूर्व दिल्ली में 2025 में मतदान 66.25% था और वहां नाम कम होने की दर करीब 29% रही। दक्षिण-पश्चिम में 61.09% मतदान हुआ था और नाम कम होने की दर करीब 26.8% रही।

Delhi SIR Draft District wise.pdf

इससे एक संबंध (correlation) जरूर दिखाई देता है कि जहां पहले वोटर कम था, उनमें से कई इलाकों में अब मतदाता सूची से बाहर नामों का अनुपात ज्यादा है। लेकिन इसे कारण-परिणाम मानना ठीक नहीं होगा। यह नहीं कहा जा सकता कि कम मतदान के कारण नाम कटे। एक संभावित व्याख्या यह है कि जिन इलाकों में पहले से बड़ी संख्या में लोग पता बदल चुके थे या पुराने पते पर मौजूद नहीं थे, वहां वे पिछली बार वोट डालने भी नहीं पहुंचे और SIR में BLO को भी नहीं मिले। चुनाव अधिकारियों से जुड़े सूत्रों ने भी यही संभावना बताई है।

चुनाव आयोग आखिर कह क्या रहा है?

आयोग की व्याख्या का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा 43.32 लाख ‘shifted/absent/others’ है। CEO Delhi के अनुसार इनमें मुख्य तौर पर चार तरह की स्थितियां शामिल हो सकती हैं:

  • मतदाता किसी दूसरे राज्य/केंद्रशासित प्रदेश में पंजीकृत हो चुका हो।
  • वह पुराने पते पर नहीं मिला हो।
  • उसने तय तारीख तक गणना फॉर्म जमा नहीं किया हो
  • या उसने मतदाता के रूप में पंजीकरण जारी रखने की इच्छा नहीं जताई हो।

डुप्लीकेट या एक से अधिक जगह दर्ज मतदाता का नाम भी हर जगह से समाप्त नहीं होगा। आयोग के मुताबिक उसका नाम एक वैध स्थान पर रखा जाएगा। और सबसे अहम बात जो चुनाव आयोग का कहना है कि किसी नाम को अंतिम रूप से हटाने से पहले नोटिस, जांच और संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का अवसर देना होगा।

तो क्या दिल्ली का अगला चुनावी गणित बदल जाएगा?

अभी यह कहना जल्दबाजी होगी। इसका पहला कारण तो ये है कि यह अंतिम सूची नहीं है। 30 सितंबर तक दावे और आपत्तियां दाखिल हो सकती हैं और 4 नवंबर को अंतिम सूची आएगी। इसमें बड़ी संख्या में नाम वापस जुड़ सकते हैं।

दूसरा कारण ये कि यह स्पष्ट नहीं हो सकता है कि ड्राफ्ट से बाहर मतदाताओं ने 2025 में वोट दिया था या नहीं या किस दल को वोट किया था।

तीसरा यह कि अगर इनमें बड़ी संख्या वास्तव में दिल्ली छोड़ चुके लोगों, मृत मतदाताओं और डुप्लीकेट नामों की है तो उन्हें हटाना वास्तविक मतदाता आधार को छोटा करेगा, लेकिन जरूरी नहीं कि किसी पार्टी का वोट शेयर उसी अनुपात में बदले।

लेकिन राजनीतिक असर की संभावना वहां सबसे ज्यादा है जहां दो चीजें साथ दिख रही हैं- बहुत बड़ी संख्या में नाम कम हुए हैं और पिछला चुनाव बहुत छोटे अंतर से तय हुआ था। इस लिहाज से छतरपुर, विकासपुरी, तुगलकाबाद, बुराड़ी और ओखला जैसी सीटें खास तौर पर देखने लायक हैं।

आसान भाषा में तो समझें तो दिल्ली के SIR वोटर ड्राफ्ट लिस्ट की कहानी यह है कि 2025 में दिल्ली की कई सीटों पर हार-जीत कुछ हजार वोटों से हुई थी। अब उन्हीं में से कई सीटों की ड्राफ्ट मतदाता सूची से 90 हजार से डेढ़ लाख से ज्यादा पुराने नाम गायब हैं। यह साबित नहीं करता कि नतीजे बदलेंगे, लेकिन अंतिम वोटर लिस्ट तय करेगी कि अगला चुनाव किस आकार के मतदाता आधार पर लड़ा जाएगा।

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