BRICS के मंच से शांति का रास्ता निकलेगा, दिल्ली समिट से दुनिया को क्या उम्मीदें हैं?
भारत ऐसे समय में ब्रिक्स की मेजबानी कर रहा है, जब पश्चिम एशिया से लेकर यूक्रेन तक अशांति है। ऐसे में दुनिया भारत से उम्मीद लगाए बैठी है। भारत में क्षमता है कि वह दुनिया को संघर्षों से इतर शांति की राह दिखा सकता है।
BRICS के मंच से शांति का रास्ता निकलेगा, दिल्ली समिट से दुनिया को क्या उम्मीदें हैं?
नई दिल्ली में ब्रिक्स की तैयारी।© ANI

इस बार का ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ऐसे वक्त में हो रहा है, जब यूक्रेन से लेकर ईरान और पूरा पश्चिम एशिया संघर्ष में घिरा है। भारत हमेशा सभी पक्षों से दुनिया में छिड़े संघर्षों को शांति और कूटनीति से हल करने की अपील करता रहा है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई मंचों पर कह चुके हैं कि युद्ध से शांति की राह नहीं खोजी जा सकती। यह युग युद्ध का नहीं है। युद्ध मानवता के खिलाफ है इसलिए संघर्षों को रोका जाना चाहिए। 

संयोग से ब्रिक्स 2026 की अगुवाई भारत कर रहा है। ऐसे में पूरी दुनिया को यूक्रेन से लेकर पश्चिम एशिया तक चल रहे संघर्षों में शांति की उम्मीद है। विशेषज्ञों के अनुसार ब्रिक्स में वैश्विक स्तर पर छिड़े संघर्षों पर चर्चा होने और उसके समाधान की ओर आगे बढ़ने की पूरी उम्मीद है। इसकी एक प्रमुख वजह यह भी है कि कुछ देशों को छोड़कर ब्रिक्स में वही देश सदस्य हैं, जो संघर्ष में हैं। ऐसे में ब्रिक्स वैश्विक संघर्षों को खत्म करने के लिए एक मंच साबित हो सकता है। आइए विशेषज्ञों से समझते हैं कि भारत की अध्यक्षता में 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से दुनिया को इतनी ज्यादा उम्मीदें क्यों हैं और भारत वैश्विक संघर्ष को खत्म करवाने के साथ शांति की राह खोजने में कितनी बड़ी भूमिका निभा सकता है?

ब्रिक्स के सदस्य देश

BRICS Countries© RT

ब्रिक्स के कौन-कौन से देश संघर्ष में हैं?

रूस, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ऐसे देश हैं जो किसी ना किसी देश के साथ संघर्ष में हैं। रूस जहां यूक्रेन के साथ 2022 से संघर्ष में है तो वहीं ईरान फरवरी 2026 से अमेरिका और इजरायल के साथ लड़ रहा है। हालांकि, अब यह लड़ाई सीधे अमेरिका बनाम ईरान हो गई है। ईरान युद्ध की वजह से मिडिल-ईस्ट के देश सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) भी पश्चिम एशिया में छिड़े युद्ध की कीमत चुका रहे हैं।

पश्चिम एशिया संघर्ष की शुरुआत 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल पर हमास के हमले से शुरू हुई थी। इजरायल और यूक्रेन दोनों ही ब्रिक्स के सदस्य नहीं हैं। यह ब्रिक्स के पार्टनर देशों में भी शामिल नहीं हैं, लेकिन रूस, ईरान, सऊदी अरब और यूएई संघर्ष में उलझे देशों में हैं। ब्रिक्स इन्हें एक साथ एक मंच पर बैठने का मौका देगा। ऐसे में रूस-यूक्रेन से लेकर पश्चिम एशिया तक संघर्षों पर चर्चा होने और उसका समाधान खोजे जाने की उम्मीदें बढ़ गई हैं। क्योंकि इससे पहले बिश्केक में भी भारत ने पश्चिम एशिया समेत रूस-यूक्रेन संघर्ष को खत्म करने के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था।

बिश्केक में पीएम मोदी ने की थी शांति की अपील

ब्रिक्स से पहले 1 सितंबर को किर्गिस्तान के बिश्केक में हुए शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के शिखर सम्मेलन के दौरान भी भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन के साथ बैठक के दौरान यूक्रेन में शांति को लेकर बातचीत की थी। इसके बाद भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर यूक्रेन गए थे। भारत रूस और यूक्रेन दोनों ही देशों को बातचीत और कूटनीति के माध्यम से शांति का रास्ता खोजने की अपील करता रहा है।

भारत इसके लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के साथ भी बिश्केक में द्विपक्षीय वार्ता की थी। इस दौरान पीएम मोदी ने ईरान समेत पश्चिम एशिया में छिड़े संघर्ष में शांति की अपील की थी। 

भारत ला सकता है रूस-यूक्रेन में शांति

भारत के रूस से परंपरागत घनिष्ठ संबंध हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन आपस में बहुत अच्छे मित्र हैं। उनकी केमिस्ट्री दुनिया में जाहिर है। साथ ही यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमिर जेलेंस्की के साथ भी पीएम मोदी के अच्छे रिश्ते हैं। ऐसे में भारत रूस-यू्क्रेन के बीच शांति स्थापित करने में बड़ा रोल अदा कर सकता है। विदेशी मामलों के जानकार संजय वर्मा ने आरटी इंडिया से कहा कि भारत हमेशा से शांति का मंच तैयार करने का प्रयास किया है। नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स समिट ने फिर दुनिया को शांति की राह दिखाने का मौका दिया है।

हालांकि, समस्या यह है कि रूस तो ब्रिक्स का सदस्य है, लेकिन यूक्रेन नहीं। इसलिए दोनों पक्ष यहां मौजूद नहीं होंगे, लेकिन पीएम मोदी और पुतिन के बीच द्विपक्षीय वार्ता होनी है। ऐसे में भारत शांति का सुझाव दे सकता है। साथ ही वह रूस-यूक्रेन के बीच एक बैक चैनल शुरू कर सकता है, जिसके जरिये शांति की राह खोजी जा सकेगी। भारत ने पहले भी कई बार ऐसा किया है। रूस-यूक्रेन के बीच शांति लाने में भारत बड़ा रोल अदा कर सकता है।

'संघर्ष में अमेरिका का फायदा है'

रक्षा और विदेश नीति विशेषज्ञ कमर आगा ने कहा कि ब्रिक्स बहुत बड़ा मंच है। भारत इसकी अध्यक्षता कर रहा है, जिसके रूस-यूक्रेन से लेकर ईरान तक के साथ अच्छे संबंध हैं। भारत, रूस और चीन तीनों को मिलकर ईरान और पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध में शांति लाने के लिए वार्ता करनी चाहिए। इसके साथ ही यूक्रेन संघर्ष को भी खत्म किया जाना चाहिए। यह दोनों ही मोर्चे बंद होने चाहिए। इससे सबसे ज्यादा नुकसान गैर-पश्चिमी देशों को ही हो रहा है। दुनियाभर में इन संघर्षों के कारण महंगाई बढ़ी है।

Foreign Expert
भारत पर सभी देश भरोसा करते हैं। इसलिए वह वैश्विक स्तर पर छिड़े संघर्षों में शांति स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है। दुनिया को भारत से बड़ी उम्मीदें हैं। दुनिया में एकमात्र देश भारत ही है, जो वसुधैव कुटुंबकम और शांति की बात करता है। ब्रिक्स इसके लिए अच्छा मंच हो सकता है।
कमर आगा
कमर आगा
रक्षा और विदेश नीति विशेषज्ञ

खाद्य और ऊर्जा की कीमतें आसमान छूने लगी हैं। युद्ध से महंगाई बढ़ती है। इससे किसी का भला नहीं होता। मगर अमेरिका जैसे देश दूसरे देशों को एक दूसरे से लड़ाकर तमाशा देखना चाहते हैं। उनका काम ही एक दूसरे के खिलाफ भड़काना और फिर उनके खिलाफ जंग करवाना है ताकि उनके हथियार बिक सकें। अमेरिका सबसे बड़ा हथियार सप्लायर है। वह पूरी दुनिया को हथियार बेचता है। मगर वह इस बार ईरान युद्ध में बुरा फंस गया है।

इजरायल और ईरान के साथ भी भारत के अच्छे संबंध

इजरायल और ईरान के साथ भी भारत के अच्छे संबंध हैं। साथ ही फिलिस्तीन के साथ भी भारत के पुराने रिश्ते हैं। वहीं अमेरिका के अलावा मिडिल-ईस्ट देशों में भारत की मजबूत व्यापारिक और सांस्कृतिक रिश्ते हैं। भारत अपने इन रिश्तों का लाभ पश्चिम एशिया में शांति लाने में इस्तेमाल कर सकता है। खास बात यह है कि सभी देश भारत को भरोसेमंद देश के रूप में मानते हैं। इसलिए सभी को भारत से बड़ी उम्मीदें हैं। 

भारत की अध्यक्षता में क्यों बढ़ी शांति की उम्मीदें?

नई दिल्ली की अध्यक्षता में इसलिए दुनिया रूस-यूक्रेन और पश्चिम एशिया संघर्ष पर वार्ता होने और उसका समाधान खोजे जाने की उम्मीद कर रही है, क्योंकि भारत ही एक मात्र ऐसा देश है जो संघर्ष में उलझे सभी देशों से अच्छे संबंध रखता है। रूस और चीन भारत के साथ मिलकर शांति और समाधान का रास्ता खोज सकते हैं। क्योंकि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में एक बार फिर पीएम मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन और शी जिनपिंग के जुटने की उम्मीदें हैं, जिन पर दुनिया की निगाहें टिकी हैं।

ब्रिक्स से पहले तीनों नेता 1 सितंबर को किर्गिस्तान में एससीओ के मंच पर एकजुट हुए थे। बिश्केक से तीनों नेताओं की पावरफुल तस्वीरों को पूरी दुनिया ने देखा था। इस दौरान ईरान पर हमले की संयुक्त निंदा की गई थी। साथ ही पीएम मोदी ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन से यूक्रेन में शांति लाने की अपील की थी। 

भारत, चीन और रूस हैं ब्रिक्स के पिलर

भारत, चीन और रूस ब्रिक्स के अहम पिलर माने जाते हैं। यह तीनों देश इतने ताकतवर और प्रभावी हैं कि वह यूक्रेन से लेकर पश्चिम एशिया तक छिड़े संघर्षों को खत्म करने की राह खोज सकते हैं। भारत के सभी पक्षों के साथ अच्छे संबंध शांति की पहल में बड़ा योगदान कर सकते हैं। अगर यह संघर्ष खत्म होते हैं तो इससे भारत, रूस और चीन की ताकत और बढ़ जाएगा। मौजूदा वैश्विक हालातों में ये तीनों देश दुनिया के नये पावर सेंटर बन रहे हैं। तीनों देशों की इकोनॉमी 27 ट्रिलियन डॉलर से अधिक पहुंच चुकी है। 

भारत, रूस और चीन की जीडीपी।

भारत, रूस और चीन ब्रिक्स के संस्थापक सदस्यों में हैं। इनकी तिकड़ी ब्रिक्स की ताकत का प्रमुख आधार है। इनके अलावा ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों की मौजूदगी ने ब्रिक्स को और भी ज्यादा पावरफुल बना दिया है। अब ब्रिक्स बड़े वैश्विक मंच के रूप में अपनी भूमिका अदा कर रहा है। 

शांति के लिए भारत की पहल

  • पीएम मोदी ने रूस के राष्ट्रपति पुतिन से हर बार की बैठक में यूक्रेन में शांति की अपील की।
  • पीएम मोदी अगस्त 2024 में खुद यूक्रेन गए थे। इस दौरान जेलेंस्की को भी शांति के लिए प्रेरित किया था।
  • भारत ने कई बार वैश्विक मंचों पर दुनिया को संघर्ष से शांति की राह पर बढ़ने की अपील की।
  • एससीओ में भी पीएम मोदी ने पुतिन के साथ बैठक में यूक्रेन शांति पर बात की।
  • भारतीय विदेश मंत्री हाल ही में यूक्रेन दौरे पर गए और शांति के लिए कीव को प्रेरित किया।
  • ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियन के साथ वार्ता में मोदी ने पश्चिम एशिया संघर्ष खत्म करने की अपील की।

ब्रिक्स से जुड़े अहम फैक्ट्स

ब्रिक्स के मौजूदा सदस्यों की संख्या-11

पार्टनर देशों की संख्या- 10

ब्रिक्स देशों की आबादी- 49% (दुनिया की लगभग आधी)

ब्रिक्स के मौजूदा सदस्य और आमंत्रित सदस्य© BRICS India

ब्रिक्स के 10 पार्टनर सदस्य

ब्रिक्स का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि बेलारूस, बोलविया, कजाकिस्तान, क्यूबा, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, यूगांडा और उज्बेकिस्तान और वियतनामम ब्रिक्स की ताकत को और अधिक मजबूत बना सकते हैं। बशर्ते यूक्रेन से पश्चिम एशिया तक संघर्षों को खत्म करने की जरूरत है। 

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