नेपाल में अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई, लेकिन त्रिशूली के एक स्कूल के प्रिंसिपल की सूझबूझ से करीब 900 स्कूली बच्चों की जिंदगी बच गई। अब स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी ने RT India को बताया है कि फ्लैश फ्लड की खबर मिलते ही उन्होंने महज 30 सेकंड के अंदर फैसला कर लिया था कि क्या करना है। जैसे ही उन्हें कुछ लोगों ने बताया कि ये बाढ़ गंभीर हो सकती है, उन्होंने तुरंत एक फैसला लिया। यही वो एक फैसला था, जिसने सैकड़ों बच्चों की जान बचा ली।
त्रिभुवन त्रिशूली सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी ने आरटी को बताया कि त्रिशूली में फ्लैश फ्लड आने से कुछ मिनट पहले ही 10वीं में पढ़ने वाले बच्चे के पैरेंट्स स्कूटर- मोटरसाइकल पर आए थे। उन्होंने बताया कि बाढ़ आ रही है और ये बहुत भयानक हो सकती है। मैं अपने बच्चे को घर ले जाने के लिए आया हूं।
नुवाकोट जिले के त्रिशूली घाटी में स्थित स्कूल के प्रिंसिपल ने बताया कि जब हम अभिभावकों से बात कर रहे थे, तभी मेरे कुछ कलीग्स भी वहां आ गए थे। मुझे एक फोन भी आया। उसके बाद मैंने लोगों से बात की और 30 सेकंड के अंदर ही फैसला कर लिया कि क्या करना है।
उन्होंने कहा कि हमने सोचा कि अगर बाढ़ की सूचना गलत भी निकली तो ज्यादा से ज्यादा क्या होगा, बच्चों की एक दिन की पढ़ाई का नुकसान होगा। लेकिन अगर खबर सही निकली तो हम बच्चों की और अपनी जिंदगी बचाने में कामयाब हो जाएंगे।

उस वक्त स्कूल में करीब 900 बच्चे थे। हमने स्कूल की छुट्टी कर दी। स्कूल की घंटी बजा दी। सिक्योरिटी स्टाफ ने सीटियां बजाकर बच्चों को क्लास रूम्स से बाहर निकाला और उन्हें तुरंत अपने घर जाने के लिए कहा। अगले 5 मिनट के अंदर स्कूल खाली करा लिया और हम सभी लोग ऊपर पहाड़ी की तरफ चले गए। बाद में मुझे लगा कि मैंने जो फैसला लिया, वो सही था।
दवाड़ी ने बताया कि बाढ़ सचमुच भयानक थी। कुछ घंटे बाद जब मैंने वापस आकर स्कूल की जगह को देखा तो पता चला कि पूरा का पूरा परिसर बह गया है। मैं बहुत घबरा गया। वहां के हालात ऐसे थे कि मैं अपने आंसू नहीं रोक पाया और फूट-फूटकर रोया। मेरे लिए वह सिर्फ बच्चों का स्कूल नहीं था, मेरे घर जैसा भी था। मैंने खुद वहीं से पढ़ाई की थी।
उन्होंने RT इंडिया को बताया कि जितनी जल्दी हो सकेगा, हम स्कूल को फिर से शुरू करने के बारे में सोच रहे हैं। लेकिन हमारे पास अब न तो जमीन बची है और न ही संसाधन। भारत सरकार की तरफ से भी मुझे आश्वासन मिला है। मैं नेपाल में भारत के राजदूत से मिला। उन्होंने स्कूल फिर से खोलने में मदद का भरोसा दिलाया।
इस हादसे के बाद स्कूली बच्चों की क्या स्थिति है, इसे लेकर प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी ने बताया कि बाढ़ इतनी भयानक थी कि बच्चे बहुत घबराए हुए हैं। उनकी साइको काउंसलिंग करवाई जा रही है। इसके अलावा हम फिर से सबको एकजुट करने की प्लानिंग कर रहे हैं ताकि फिर से स्कूल को शुरू किया जा सके।
रसुवा भोटेकोशी बाढी सम्बन्धी खोज तथा उद्धार अपडेट २०८३।०५।२० गते ०५:०० बजेसम्म pic.twitter.com/C9XgRjnPmX
— Nepal Police (@NepalPoliceHQ) September 5, 2026
नेपाल की बाढ़ का अपडेट देते हुए नेपाल पुलिस ने शनिवार को बताया कि इस आपदा में अब तक 1344 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। अभी 4,898 लोग लापता हैं, जिनमें से 618 विदेशी नागरिक हैं। करीब 3655 लोग अभी भी होल्डिंग सेंटरों में शरण लिए हुए हैं।




