
यूक्रेन दौरे पर गए भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रूसी तेल खरीद को लेकर 3 सितंबर को संयुक्त प्रेसवार्ता के दौरान यूक्रेनी पत्रकारों की ओर से पूछे गए सवाल का जवाब दिया। उन्होंने कहा, “रूस-यूक्रेन संघर्ष का हल भारत या किसी देश के रूस से तेल खरीदने या न खरीदने से नहीं निकलेगा, बल्कि शांति का रास्ता बातचीत, कूटनीति और समझौते से तय होगा।” जयशंकर के इस बयान के क्या मायने हैं और अमेरिका समेत पूरी दुनिया को इसका क्या संदेश गया?
रक्षा और विदेश नीति विशेषज्ञ कमर आगा ने कहा कि जयशंकर ने अपने बयान से दुनिया को 3 बड़े संदेश दिए।
जयशंकर के बयान के दुनिया को 3 बड़े संदेश
1. हम अपनी नीति खुद तय करते हैं।
2. भारत कभी भी रूस से अपनी दोस्ती नहीं तोड़ेगा।
3. हम रिश्ते सबसे निभाते हैं, लेकिन दबाव में किसी के नहीं आते।
”अमेरिका से लेकर यूरोप तक को संदेश”
कमर आगा ने कहा कि जयशंकर ने अपने बयान से सिर्फ यूक्रेन को ही नहीं, बल्कि पूरे यूरोप और अमेरिका को बड़ा संदेश दिया है। उन्होंने साफ कर दिया कि भारत वही करेगा, जो उसके हित में है। भारत अपने फैसले खुद लेता है, दुनिया का कोई भी देश उस पर दबाव नहीं डाल सकता। यह बात पूर्व में हमारे प्रधानमंत्री मोदी भी कह चुके हैं। यही देश की पॉलिसी है। यह बात पूरी दुनिया को समझ भी आ रही है।
“भारत कभी भी रूस से दोस्ती नहीं तोड़ेगा”
जयशंकर ने अपने बयान से अमेरिका समेत दुनिया को यह भी संदेश दिया है कि भारत कभी भी रूस को नहीं छोड़ेगा। भारत और रूस की पक्की और गहरी दोस्ती है। अमेरिका ने भले ही रूस पर प्रतिबंध लगाए हों, लेकिन भारत कभी भी उसके पक्ष में नहीं रहा है। रूस ने जब भी और जहां भी जरूरत पड़ी है, उसने हमेशा भारत का सपोर्ट किया है। इसलिए भारत रूस को नहीं छोड़ेगा।
”रिश्ते सबसे लेकिन दबाव में किसी के नहीं”
भारत ने अपने बयान से यह भी स्पष्ट कर दिया है कि हम सबसे रिश्ते चाहते हैं, लेकिन दबाव में किसी के नहीं आएंगे। हम अपनी पॉलिसी और हित को आगे बढ़ाएंगे। हमारे लिए जो उचित होगा, उसका फैसला हम ही करेंगे। हम किससे तेल या ऊर्जा खरीदेंगे, इसे तय करने का अधिकार भारत के पास ही है। कोई दूसरा देश हमें नहीं बता सकता कि हम किससे तेल, गैस खरीदें या किससे नहीं खरीदें। अमेरिका रूस से तेल खरीदने पर कितने भी प्रतिबंध लगा ले, लेकिन वह दबाव नहीं बना सकता। क्योंकि भारत केवल संयुक्त राष्ट्र से अनुमति प्राप्त प्रतिबंधों को ही मानता है। ऐसे बैन उसके लिए बहुत अधिक मायने नहीं रखते।
तेल के सवाल पर 5 प्रमुख मंचों से जयशंकर के जवाब
1. कीव (3 सितंबर 2026)
कीव में यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रेई सिबीहा के साथ द्विपक्षीय बैठक के बाद जयशंकर से पत्रकारों ने सवाल पूछा कि क्या अमेरिकी प्रतिबंधों या यूक्रेन के दबाव के बाद भी भारत रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा या खरीदारी कम करेगा? इस पर जयशंकर ने जवाब दिया-
”मुझे लगता है कि आप सभी के लिए यह समझना भी जरूरी है कि जब दुनिया में ऊर्जा के हालात बहुत मुश्किल हैं, ऐसे समय में 140 करोड़ लोगों के लिए ऊर्जा की व्यवस्था करना कितनी बड़ी चुनौती है। इसलिए मैं यही कहूंगा कि इस मुद्दे पर यूक्रेन का अपना नजरिया है, जिसका हम सम्मान करते हैं, और हमारा अपना नजरिया है, हम उम्मीद करते हैं कि जिसे बाकी लोग भी समझेंगे। लेकिन मैं इसमें एक बात और जोड़ना चाहता हूं कि संघर्ष का हल किसी के तेल खरीदने या न खरीदने से नहीं होगा, बल्कि यह बातचीत, कूटनीति और समझौते से सुलझेगा। इसलिए हमारा फोकस इसी मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करना है।”
EAM Jaishankar Responds Directly to Question on Russian Oil in Kiev
— RT_India (@RT_India_news) September 3, 2026
‘The Ukraine side has its perspective, which we respect. We have ours - and I would expect others to also respect,’ he told reporters.
📹: ANI pic.twitter.com/zhAaG6EjXZ
2. फिनलैंड (11 जून 2026)
‘इमर्जिंग पावर्स एंड द न्यू जियोपोलिटिकल कंपटीशन’ के पैनल डिस्कशन में जयशंकर से एक पत्रकार ने सवाल पूछा कि रूस-यूक्रेन युद्ध पर भारत बहुत ज्यादा सहानुभूति दिखा रहा है और रूसी तेल खरीदने का भी बहुत इच्छुक है?
जयशंकर, “मैं चाहता हूं कि लोग इसे याद रखें। उस समय अमेरिका ने विशेष रूप से भारत से कहा था कि रूसी तेल खरीदें ताकि विश्व बाजार स्थिर रहें। पिछले साल अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने के लिए पहले हमारे ऊपर टैरिफ लगाया, फिर रूस से बैन हटा लिया तो हम यह नाटक न करें कि इसमें कोई बड़ी थ्योरी है। मेरा मतलब है, अगर यह ऑन-ऑफ, ऑन-ऑफ चलता रहे और जब हमें सूट करे तब करो, जब न सूट करे तब मत करो… हम सब यहां समझदार हैं। हमें पता है कि खेल क्या है। इसलिए मुझे नहीं लगता कि इसे नैतिकता या पाखंड का मुद्दा बनाना उचित है।”
#WATCH | EAM Dr S Jaishankar says, "I buy oil based on cost and availability. So at that point of time, ah much of the oil available on the market was Russia because Europeans were essentially buying up the Middle East oil, which was our traditional supply. So circumstances… https://t.co/GqtIiLYbropic.twitter.com/AZlslrCBHy
— ANI (@ANI) June 12, 2026
3. रूस (21 अगस्त 2025)
विदेश मंत्री एस जयशंकर रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ मॉस्को में संयुक्त प्रेस वार्ता कर रहे थे। पत्रकारों ने भारत पर रूसी तेल खरीदने के लिए लगाए गए अमेरिकी टैरिफ को लेकर सवाल पूछा था। जयशंकर ने कहा:
”हम रूसी तेल के सबसे बड़े खरीदार नहीं हैं, वह चीन है। रूस LNG के सबसे बड़े खरीदार यूरोपीय संघ हैं। 2022 के बाद रूस के साथ सबसे ज्यादा व्यापार बढ़ाने वाला देश भी हम नहीं हैं। अमेरिकी कई सालों से हमसे कहते रहे कि वैश्विक ऊर्जा मार्के को स्थिर रखने के लिए तेल खरीदिये, जिसमें रूसी तेल भी शामिल है। अब इसके लिए हमारी आलोचना हो रही है।”
4. म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन (जर्मनी 2025)
सवाल: जब पश्चिमी देश रूस पर बैन लगा रहे हैं, तब भारत लगातार रूसी तेल खरीदकर उनकी अर्थव्यवस्था को बूम क्यों दे रहा है? जयशंकर ने जवाब दिया-
”भारत अगर रूस से तेल नहीं खरीद रहा होता तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें इतनी ज्यादा बढ़ गई होतीं कि यूरोपीय देश भारत से भी ज्यादा कीमत चुका कर तेल ले रहे होते। हम बाजार में महंगाई को नियंत्रित करने में मदद कर रहे हैं। इस बात के लिए तो आपको हमारी सराहना करनी चाहिए।”
5. यूरोपीय मंच (ब्रातिस्लावा, विएना 2022)
सवालः रूस से तेल खरीदकर क्या रूस को भारत आर्थिक लाभ नहीं पहुंचा रहा? इस पर विदेशमंत्री जयशंकर ने कहा,-
“अगर रूस से तेल खरीदना युद्ध को फंड करना है तो यूरोप द्वारा रूस से गैस खरीदना क्या है? भारत एक महीने में जितना रूसी तेल खरीदता है, यूरोप शायद एक ही दोपहर में उससे कहीं ज्यादा ईंधन रूस से खरीद लेता है। यूरोप को अपनी इस सोच से बाहर निकलना होगा कि यूरोप की समस्याएं दुनिया की समस्याएं हैं, लेकिन दुनिया की समस्याएं यूरोप की नहीं हैं। “
SCO में पीएम मोदी ने पुतिन से की थी शांति की अपील
किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन की 31 अगस्त को द्विपक्षीय मुलाकात हुई थी। इस दौरान विभिन्न मुद्दों में रूस-यूक्रेन मुद्दा भी चर्चा में शामिल था। प्रधानमंत्री ने पुतिन से एक बार फिर पुतिन से यूक्रेन में मानवता के लिए शांति लाने की अपील की थी। इसके बाद ही विदेश मंत्री जयशंकर तीन सितंबर को यूक्रेन दौरे पर पहुंचे थे।
#WATCH | Bishkek, Kyrgyzstan: Prime Minister Narendra Modi holds a bilateral meeting with Russian President Vladimir Putin
— ANI (@ANI) August 31, 2026
Translating President Putin's words, a translator says, "India is among the top countries in terms of the number of students studying in Russia. In… pic.twitter.com/c74IXAxFwr
रूसी तेल पर अमेरिका में नया टैरिफ विधेयक
अबी एक महीने पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस से तेल या गैस खरीदने वाले भारत, चीन समेत अन्य देशों पर 100 फीसदी शुल्क लगाने की धमकी थी। इसे लेकर अमेरिकी सीनेट ने एक विधेयक भी पास किया था। इस कानून को लाए जाने के पीछे तर्क था कि इस तरह रूस के साथ व्यापार करने से उसकी अर्थव्यवस्था मजबूत होती है, जो मॉस्को को पैसा जुटाने में मदद करती है। यह विधेयक अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस के 5 सबसे बड़े खरीदार देशों से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है।
#WATCH | Delhi: On being asked how confident Moscow is about the India-Russia energy cooperation, Russian Ambassador to India, Denis Alipov, says, "The question is - how confident is India? India has shown that it's able to stand its ground and defend its national interests. And… pic.twitter.com/gOZ3HFA4TR
— ANI (@ANI) September 4, 2026
भारत-रूस ऊर्जा साझेदारी कितनी मजबूत
भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने भारत-रूस ऊर्जा सहयोग पर पूछे एक सवाल के जवाब में कहा- “भारत ने यह साबित कर दिखाया है कि वह किसी के दबाव में नहीं आता और अपने देश के फायदे के फैसले खुद लेता है। रूस से तेल खरीदने पर जो प्रतिबंध या टैक्स (टैरिफ) लगाने की धमकियां दी जा रही हैं, वे सीधे तौर पर भारत और रूस के व्यापार को प्रभावित करने के लिए हैं, लेकिन भारत के लिए अपने देश की जरूरतें सबसे पहले हैं। भारत को जितने तेल की जरूरत होगी, रूस उतना तेल देने के लिए पूरी तरह तैयार है। दुख की बात यह है कि जो देश प्रतिबंध और टैक्स लगा रहे हैं, वे ईमानदारी से व्यापार करने के बजाय दबाव बनाने की राजनीति कर रहे हैं। वे खुद तो भारत को रूस से सस्ता या बेहतर तेल दे नहीं पा रहे, उल्टा दूसरों पर दबाव डाल रहे हैं।

सच्चाई यह है कि अगर बाजार से रूसी तेल को पूरी तरह हटा दिया गया, तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था बैठ जाएगी। दुनिया का ऊर्जा बाजार रूसी तेल के बिना चल ही नहीं सकता। इसलिए रूसी तेल बाजार में भारत के लिए और अन्य देशों के लिए भी मौजूद रहेगा।
भारत को धमकी बचकाना हरकत
भारत पर दबाव क्यों नहीं डाल पाता पश्चिम?
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय स्टडी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर अभिषेक श्रीवास्तव ने कहा कि भारत की विदेश नीति हमेशा स्वतंत्र और गुटनिरपेक्ष रही है। वह कभी किसी के दबाव में नहीं आता। भारत ने बार-बार दुनिया को यह स्पष्ट संदेश दिया है कि उसे किसके साथ क्या ट्रेड करना है या कैसे रिश्ते रखने हैं, किससे तेल खरीदना है या किससे नहीं खरीदना है, इसे वह खुद तय करेगा। अमेरिका या कोई अन्य देश भारत पर इसके लिए दबाव नहीं बना सकता और न ही भारत किसी के दबाव में आने वाला है।
भारत अपनी इसी विदेश नीति के चलते दुनिया का सबसे भरोसेमंद देश बन चुका है। एशिया से यूरोप तक के देश भारत पर भरोसा कर रहे हैं और उसके साथ डील कर रहे हैं। यह नए भारत की ताकत का प्रमाण है। भारत और रूस के हमेशा से अच्छे संबंध रहे हैं। वह आगे भी रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा। भारत अपने राष्ट्रहित को सबसे आगे रखता है, अगर उसे लगता है कि भविष्य में कहीं और से उसे सस्ता तेल मिल रहा है तो उस पर भी वह निःसंदेह विचार कर सकता है।




