
किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का 26वां शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संगठन की 25 साल की यात्रा और आने वाले 25 वर्षों की दिशा को लेकर भारत का दृष्टिकोण सामने रखा। उन्होंने कहा कि पिछले 25 वर्षों में SCO ने संवाद और सहयोग की मजबूत नींव तैयार की है। अब अगले 25 वर्षों में इस सहयोग को ठोस परिणामों में बदलने का लक्ष्य होना चाहिए।
पीएम मोदी ने इसके लिए SCO को लेकर भारत की पहले बताई गई सोच के तीन स्तंभों- सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर को विजन से आगे बढ़ाकर ठोस परिणामों में बदलने पर जोर दिया।
वहीं, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात ने भारत-रूस की रणनीतिक साझेदारी की मजबूती का संदेश दिया। सम्मेलन के दौरान मोदी, पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की साथ मौजूदगी और उनकी गर्मजोशी भरी मुलाकातों ने भी वैश्विक स्तर पर ध्यान खींचा।
आइए जानते हैं SCO शिखर सम्मेलन के 5 बड़े संदेश क्या रहे?
1. एक मंच पर भारत, रूस और चीन की ताकतवर तस्वीर
बिश्केक में SCO बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक साथ नजर आए। तीनों नेताओं के बीच गर्मजोशी से मुलाकात और बातचीत भी हुई। बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच तीनों नेताओं की एक साथ मौजूदगी चर्चा का विषय रही।
तीनों नेताओं की यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब पश्चिम एशिया संकट के दौर से गुजर रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष जारी है। ऐसे में इस तस्वीर को एक अहम कूटनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
भारत, रूस और चीन यूरेशिया की प्रमुख शक्तियों में शामिल हैं। ऐसे में इन तीनों देशों के शीर्ष नेताओं का एक साथ दिखाई देना पश्चिमी देशों के लिए बड़ा मैसेज माना जा रहा है।

2. विजन से ठोस परिणामों की ओर
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि SCO ने पिछले 25 वर्षों में संवाद और सहयोग की मजबूत नींव तैयार की है। अब अगले 25 वर्षों में इस सहयोग को ठोस परिणामों में बदलना चाहिए।
उन्होंने कहा, “हमें अपने साझा भूगोल को साझा अवसरों में बदलना है। और हमारे प्रयासों से हमारे लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है।”
मोदी ने कनेक्टिविटी के मुद्दे पर बाजारों को जोड़ने, व्यापार को आसान बनाने और विकास के नए रास्ते खोलने पर जोर दिया। उन्होंने सड़क, रेल और हवाई मार्गों के साथ सीमा शुल्क की प्रक्रियाओं को आसान बनाने, डिजिटल दस्तावेजों को बढ़ावा देने और माल ढुलाई की व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की बात कही।
वहीं, अवसर के मुद्दे को उन्होंने सीधे लोगों के जीवन से जोड़ा। उन्होंने कहा कि सहयोग की सफलता इस बात से तय होनी चाहिए कि युवाओं को कितने नए अवसर मिले, उद्यमियों के लिए कितने नए बाजार खुले और किसानों को तकनीक का कितना लाभ मिला।
3. आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने SCO के मंच से आतंकवाद के खिलाफ भारत का स्पष्ट रुख दोहराया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को सिर्फ “एक्शन-रिएक्शन” तक सीमित नहीं रखा जा सकता। इसके पूरे तंत्र को खत्म करना जरूरी है।
पीएम ने आतंकवाद के वित्तपोषण, आतंकियों की भर्ती, कट्टरपंथ और उन्हें सुरक्षित ठिकाने मुहैया कराने वाले पूरे तंत्र को खत्म करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोहरे मापदंड की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जो देश आतंकवाद को अपनी नीति के साधन के तौर पर इस्तेमाल करते हैं, उन्हें भी स्पष्ट संदेश दिया जाना चाहिए।
पहलगाम हमले के बाद भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी पहले से चली आ रही ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को और मजबूती से सामने रखा है।

4. युद्ध नहीं, बातचीत और कूटनीति से शांति
प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया के संकट का जिक्र करते हुए कहा कि आज की आपस में जुड़ी दुनिया में किसी एक क्षेत्र का संघर्ष केवल वहीं तक सीमित नहीं रहता। इसका असर पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री व्यापार और आपूर्ति व्यवस्था पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि इसका सबसे अधिक खामियाजा ग्लोबल साउथ के देशों को भुगतना पड़ता है।
मोदी ने कहा, “सभी तनावों और युद्धों का समाधान युद्ध के मैदान पर नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीति से ही संभव है।”
उन्होंने कहा कि शांत और सुरक्षित यूरेशिया की साझा आकांक्षा अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता से भी जुड़ी है। भारत अफगानिस्तान के लोगों के विकास और मानवीय सहायता में योगदान देता रहा है और आगे भी देता रहेगा।
5. नशीले पदार्थों और संगठित अपराध पर सहयोग
SCO शिखर सम्मेलन में बिश्केक घोषणा के अलावा चार समझौतों और 20 से अधिक फैसलों व बयानों को मंजूरी दी गई। इनमें जलवायु परिवर्तन, परमाणु सुरक्षा, ऊर्जा संरक्षण और ड्रग की लत से निपटने जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि नशीले पदार्थों की तस्करी केवल अपराध नहीं है, बल्कि यह युवा पीढ़ी और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने कहा कि SCO के तहत सुरक्षा खतरों, संगठित अपराध, सूचना सुरक्षा और नशीले पदार्थों जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए बनाए जा रहे केंद्र सकारात्मक कदम हैं।
मोदी ने कहा कि अब इन केंद्रों को व्यावहारिक समन्वय और समय पर कार्रवाई का प्रभावी माध्यम बनाया जाना चाहिए।
शिखर सम्मेलन में भारत ने कई पहलों का नेतृत्व और समर्थन किया। इनमें SCO चार्टर में अंग्रेजी को आधिकारिक भाषा का दर्जा, सभ्यतागत संवाद मंच, युवा वैज्ञानिक मंच और युवा लेखक सम्मेलन जैसी पहल शामिल हैं।




