
सोने से ज्यादा चमकती दिख रही यह चीज असल में पेड़ों से मिलने वाला गोंद है, जो कठोर होकर पत्थर की तरह बन जाता है। यह पारदर्शी चीज (एम्बर) करोड़ों साल पहले पेड़ों से मिली थी। इसके बीच एक कॉकरोच फंसा दिखाई दे रहा है। रूस में मिला ये कॉकरोच डायनासोर के जमाने से भी बहुत पहले का है। आप सोच रहे होंगे कि इतने समय बीतने के बाद भी ये अब तक सुरक्षित कैसे है? असल में इसकी वजह है वो एम्बर, जिसमें ये कैद है। आइए बताते हैं करोड़ों साल पुराने इस कॉकरोच की अनोखी कहानी।
- यह कॉकरोच कलिनिनग्राद क्षेत्र में एम्बर (पेड़ों की गोंद) के एक टुकड़े के अंदर फंसा हुआ मिला था।
- आज जो कॉकरोच की प्रजातियां दिखती हैं, ये लगभग उसी तरह का दिखता है।
- इतने समय में जीव-जंतुओं और आम इंसानों के शारीरिक आकार और बनावट काफी कुछ बदल चुके हैं, लेकिन ये कॉकरोच अब तक हूबहू वैसी ही स्थिति में है।
कॉकरोच… घर के गंदे-अंधेरे कोनों में चुपचाप रेंगने वाला यह छोटा सा जीव, असल में धरती के सबसे पुराने और जिद्दी कीट में से एक है। कॉकरोच इंसान ही नहीं बल्कि डायनासोरों के जमाने से भी करोड़ों साल पहले से इस पृथ्वी पर आबाद हैं। जिंदा रहने की इनकी क्षमता इतनी बेमिसाल है कि ये परमाणु बम के जानलेवा रेडिएशन को भी मात दे सकते हैं। दुनिया के बड़े-बड़े जीव समय के साथ विलुप्त हो चुके हैं, लेकिन कॉकरोच अब तक जिंदा हैं।
दुनिया का सबसे प्राचीन कॉकरोच
दुनिया का सबसे पुराना कॉकरोच जीवाश्म कार्बोनिफेरस काल का माना जाता है। ये करीब 25 करोड़ साल पुराना है और डायनासोर से भी काफी पहले का है। जुरैसिक काल में मिले कॉकरोचों के जीवाश्म की उम्र 12.5 से 14 करोड़ वर्ष के बीच मानी जाती है। दुनिया के कई अध्ययनों में 18 करोड़ साल पुराना जुरैसिक कॉकरोच फॉसिल मिलने का भी दावा किया गया है। कुछ अध्ययनों में डायनासोर काल में यानी 30 करोड़ वर्ष पहले भी कॉकरोच की मौजूदगी बताई जाती है।

रूस के प्लांट में मिला था ये कॉकरोच
जिस कॉकरोच की हमने ऊपर बात की, वह दरअसल रूस के कलिनिनग्राद एम्बर प्लांट के कर्मचारियों को साल 2025 में मिला था। एम्बर पेड़ों की Resin यानी राल से बनने वाला एक तरह की सख्त हो चुकी गोंद जैसा जैविक पदार्थ होता है। यह एम्बर मुख्य रूप से बाल्टिक सागर के आसपास के क्षेत्रों जैसे कलिनिनग्राद (रूस), पोलैंड, लिथुआनिया, लातविया आदि में मिलता है।
एम्बर अब विलुप्त हो चुके प्राचीन शंकुधारी पेड़ों की राल से बना होता है। इस गोंद में अक्सर कीड़े-मकोड़े और फूल, पत्तियां जैसी वनस्पतियां फंसकर सैकड़ों-हजारों नहीं, बल्कि लाखों, करोड़ों वर्षों तक संरक्षित रह जाते हैं, जो वैज्ञानिक शोध के लिए महत्वपूर्ण होता है। ऐसे ही एक एम्बर के टुकड़े में ये कॉकरोच मिला था।
7 ग्राम वजनी गोंद में कैद कॉकरोच
विश्व स्वास्थ्य संगठन की “Cockroaches : their biology, distribution and control” किताब के अनुसार, कॉकरोच का जीवाश्म रिकॉर्ड बताता है कि ये कार्बोनिफेरस काल का है। टेक्नोलॉजी कंपनी रोस्टेक ने वीडियो में बताया था कि यह तिलचट्टा 41 मिलीमीटर लंबे और 21 मिमी चौड़े एम्बर के टुकड़े में कैद है, जिसका वजन 7 ग्राम है। कॉकरोच एम्बर की सतह के बहुत करीब संरक्षित है, जिससे इसके पंख, पैर और सिर को साफ देखा जा सकता है।

करीब 4 करोड़ साल पुराना जीवाश्म
कलिनिनग्राद एम्बर कॉम्बाइन की जेमोलॉजिस्ट (रत्न विशेषज्ञ) अन्ना दुगिना के मुताबिक, पिछले पांच साल में कंपनी कर्मचारियों को मिला यह सबसे बड़ा कॉकरोच जैसा नमूना है। यह कम से कम 3.5 से 4 करोड़ साल पुराना हो सकता है। यह कॉकरोच रेजिन में बेहद सुरक्षित तरीके से ढका हुआ है। यह एम्बर इतना सख्त है कि घिसाई और पॉलिश करने के दौरान भी इसे कोई नुकसान नहीं हुआ। रूसी वैज्ञानिक ने बताया कि इस कॉकरोच की तरह की प्रजातियां आज भी उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाई जाती हैं।
इस खोज को कलिनिनग्राद क्षेत्रीय एम्बर संग्रहालय के कलेक्शन में शामिल किया गया है। यहां पहले से 14,000 से ज्यादा अलग-अलग एम्बर के टुकड़े हैं। इनमें 3,000 से ज्यादा एम्बर ऐसे हैं, जिनमें कई जीवों के अवशेष हैं। कलिनिनग्राद में पाया जाने वाला बाल्टिक एम्बर प्राचीन जीवों की आकृतियों को अनोखे अंदाज में संरक्षित करने के लिए जाना जाता है। दुनिया के 90% से अधिक एम्बर भंडार इसी क्षेत्र में हैं, जिनमें से अधिकांश यंतरनी गांव के पास मौजूद हैं।
कहां पाए जाते हैं ज्यादा कॉकरोच
कॉकरोच की सबसे ज्यादा प्रजातियां उष्णकटिबंधीय देशों में मिलती हैं। यानी भूमध्य रेखा के आसपास के देश, जहां भीषण गर्मी पड़ती है और बारिश भी खूब होती है। अंटार्कटिका को छोड़कर ज्यादातर गर्म और नर्म जलवायु वाले देशों में कॉकरोच पाए जाते हैं।




