हॉर्मुज टेंशन: ईरान जंग ने दुनिया में बदल दिया तेल का पूरा रूट मैप, देखिए कैसे
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से लेकर भारत, इजरायल और फ्रांस जैसे कई देश स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को बायपास करने का विकल्प तलाशने में जुट गए हैं। हॉर्मुज को बायपास करने के लिए ये देश ओमान की खाड़ी से भूमध्य महासागर तक पाइपलाइन बिछाने की योजना पर काम कर रहे हैं।
दुनिया
हॉर्मुज टेंशन: ईरान जंग ने दुनिया में बदल दिया तेल का पूरा रूट मैप, देखिए कैसे
होर्मुज बायपास

ईरान और अमेरिका की लड़ाई हॉर्मुज में दबदबे पर आ गई है। ईरान जब होर्मुज को बंद करने का दावा करता है तो अमेरिका इसके खुले होने का ऐलान करता है। इस गफलत में वहां से गुजरने वाले कई कॉमर्शियल जहाजों पर हमले हो रहे हैं। कई भारतीय नाविक भी इस हमले में अपनी जान गंवा चुके हैं। कार्गो और तेल गैस सप्लाई का प्रमुख वैश्विक मार्ग होने की वजह से हॉर्मुज की जंग ने पूरी दुनिया में सप्लाई चेन को बाधित कर दिया है। इस संघर्ष ने हॉर्मुज के नेविगेशन को जटिल बना दिया है।

हॉर्मुज क्षेत्र में कॉमर्शियल जहाजों पर हमले, समुद्री माइन्स और क्षेत्र में लड़ाई के कारण जलमार्ग में आवाजाही लगभग पूरी तरह ठप हो गई है। लिहाजा अब संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से लेकर भारत, इजरायल और फ्रांस जैसे कई देश स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को बायपास करने का विकल्प तलाशने में जुट गए हैं। हॉर्मुज को बायपास करने के लिए ये देश ओमान की खाड़ी से भूमध्य महासागर तक पाइपलाइन बिछाने की योजना पर काम कर रहे हैं।  

UAE फुजराह को बनाएगा एक्सपोर्ट हब

 स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को बायपास करने के लिए यूएई गल्फ ऑफ ओमान में नया पोर्ट और तेल हब बनाने की योजना बना रहा है। फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार यह नया पोर्ट (बंदरगाह) फुजराह शहर में बनाया जाएगा। हालांकि, यहां पहले से एक पोर्ट मौजूद है, लेकिन अभी यहां से बड़े पैमाने पर निर्यात करने के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं मौजूद नहीं हैं। फुजराह हॉर्मुज के बिल्कुल उल्टी दिशा में है, जो ओमान की खाड़ी में स्थित है। यहां नया पोर्ट बनाकर यूएई हॉर्मुज को बंद होने की स्थिति में इस रास्ते से निर्यात को बायपास करना चाहता है।

यूएई के मुख्य डीपी वर्ल्ड ऑपरेटर के नेतृत्व में फुजराह पोर्ट को विकसित किए जाने की योजना है ताकि फारस की खाड़ी में स्थित दुबई के प्रमुख जिबेल अली हब से भी निर्भरता को कम किया जा सके। यूएई की मुख्य योजनाएं दिब्बा, खोर, फक्कन और फुजराह पर केंद्रित हैं। यूएई ओमान की खाड़ी में पड़ने वाले इन बंदरगाहों पर बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर काम कर रहा है।  

नेतन्याहू भूमध्यसागर तक बिछाना चाहते हैं पाइपलाइन

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने न्यूजमैक्स को दिए एक साक्षात्कार में भूमध्यसागर के रास्ते को हॉर्मुज का विकल्प बनाने की बात कही थी। उनकी योजना के तहत, पाइपलाइन के जरिए खाड़ी देशों के तेल और गैस को भूमध्यसागर तक पहुंचाना है। नेतन्याहू की योजना हॉर्मुज के स्थायी और दीर्घकालिक समाधान के लिए ऊर्जा की पाइपलाइनों को पश्चिम से जोड़ना है। इसके लिए सऊदी अरब के रास्ते लाल सागर और भूमध्यसागर तक पाइपलाइन बिछाना है ताकि हॉर्मुज चोक पॉइंट को पूरी तरह बायपास किया जा सके। 

भूमध्यसागर पाइपलाइन योजना

 

भारत का फोकस

 हॉर्मुज के विकल्प के तौर पर भारत इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप कॉरिडोर (IMEC) पर फोकस कर रहा है ताकि हाइफा को तेल और गैस निर्यात का प्रमुख हब बनाया जा सके। हाइफा, इजरायल का तीसरा बड़ा शहर और अहम बंदरगाह है। IMEC कॉरिडोर का ऐलान अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन ने 2023 में नई दिल्ली में हुए G20 शिखर सम्मेलन के दौरान किया था। इस योजना के ऐलान का मकसद भारत को फारस की खाड़ी और पूर्वी भूमध्यसागर के रास्ते यूरोप से कनेक्ट करना था, जो एक परिवर्तनकारी ढांचे और व्यापारिक परियोजना के रूप में पेश की गई।

मगर इस परियोजना में दिक्कत यह है कि सऊदी अरब इजरायल को IMEC परियोजना से बाहर रखने के लिए अन्य भागीदार देशों पर दबाव बना रहा है। वह चाहता है कि यह कॉरिडोर इजरायली क्षेत्र से गुजरे बिना रेलवे को सीरिया के रास्ते मोड़कर भूमध्यसागर तक लैंडब्रिज बना दिया जाए। ईरान IMEC की प्रगति को लेकर चिंतित है। 

युद्ध के कारण थम गई IMEC की रफ्तार

 अब तक इजरायल-अमेरिका और ईरान युद्ध के चलते IMEC की रफ्तार थम गई थी मगर अब इसे हॉर्मुज के विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। इसलिए IMEC की रफ्तार तेज करने को लेकर विभिन्न देशों के बीच योजनाएं बनाई जा रही हैं। अमेरिकी नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की पूर्व डायरेक्टर और अटलांटिक काउंसिल के फेलो समंता सुत्तन ने येरूशलम पोस्ट से कहा कि मौजूदा हॉर्मुज संकट खाड़ी देशों को इस पहल में इजरायल को शामिल करने को प्रेरित नहीं कर रहा।

लिहाजा फिलिस्तीन के साथ शांति समझौता और नॉर्मलाइजेशन प्लान ज्यादा उपयोगी होंगे। उन्होंने कहा कि लगता है कि ये देश युद्ध के बाद शायद इजरायल को पार्टनर की बजाय बोझ के रूप में देख रहे हैं। हालांकि, इस योजना में शामिल भारत जैसे देशों के इजरायल से अच्छे संबंध हैं, मगर मुझे नहीं लगता कि हालिया युद्ध ने मध्य-पूर्व के देशों में इजरायल की छवि को ठीक करने में कोई मदद की है।

यूरोप

सऊदी अरब की योजना क्या है ?

  1. पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन का विस्तार
  2. यह यान्बू और लाल सागर से गुजरेगी
  3. इसमें कुवैत, बहरीन और कतर जैसे देशों को शामिल करने की योजना है। 

यूएई की योजना

 संयुक्त अरब अमीरात की योजना गल्फ ऑफ ओमान में फुजराह पोर्ट और हबशान-फुजराह पाइपलाइन का विस्तार करना है।

 इजरायल का प्लान

 इजरायल गल्फ-सऊदी अरब-एलट-अश्केलॉन पाइपलाइन का प्रस्ताव लेकर आया है। साथ ही वह IMEC कॉरिडोर को बढ़ावा देना चाहता है।

 इराक की योजना

इराक दो तेल रूटों पर काम कर रहा है। इसमें पहला तुर्की-जोर्डन और सीरिया रूट और दूसरा ओमान-तुर्की-सीरिया रूट है।   

भारत का प्लान

 भारत IMEC कॉरिडोर को तेजी से आगे बढ़ाने पर काम कर रहा है ताकि हॉर्मुज को बायपास करके मिडिल ईस्ट (यूएई, सऊदी अरब, ओमान) के रास्ते पोर्ट और पाइपलाइन के जरिए तेल और गैस आयात का विकल्प बनाया जा सके। यह सुगम और सुरक्षित होने के साथ सस्ता भी होगा।  

भारत का प्लान नंबर- 2

 भारत ने हॉर्मुज के विकल्प के तौर पर मलक्का स्ट्रेट से सीधी कनेक्टिविटी के लिए अंडमान निकोबार द्वीप समूह में “द ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट”  पर काम शुरू किया है। यह स्ट्रेट ऑफ मलक्का से काफी नजदीक है। हॉर्मुज के बाद मलक्का को ग्लोबल ट्रेड और कच्चे तेल का प्रमुख मार्ग माना जाता है। यहां से ग्लोबल ट्रेड कंट्रोल हो सकता है। भारत का “द ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट” मलक्का के मुहाने पर है, जो आने वाले समय में ग्लोबल ट्रेड की दिशा बदल सकता है।

इसे हिंद महासागर में भारत का मास्टरस्ट्रोक कहा जा रहा है, क्योंकि इसी रास्ते दुनिया का 35 से 40 फीसदी ट्रेड और तेल का आयात-निर्यात होता है। वहीं, भारत का 50 फीसदी ट्रेड इसी रास्ते से होता है। हॉर्मुज के बाद फिलहाल भारत, सिंगापुर और मलेशिया को भी विकल्प के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है, लेकिन इस रास्ते से गुजरने के लिए 200-300 मिलियन डॉलर अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है। ऐसे में “द ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट” से हर साल यह पैसा भारत बचा सकता है। 



द ग्रेट निकोबार

रूसी तेल किस रास्ते से आ रहा भारत

भारत रूस से अपने तेल को बिना किसी बाधा के आयात कर रहा है। यह काला सागर से होते हुए डार्डानेल्स स्ट्रेट और तुर्की के पास बॉसफोरस स्ट्रेट से गुजरेगा। आगे इजिप्ट और इराक के बीच से गुजरने वाली स्वेज नहर से होते हुए सऊदी अरब के यानबू द्वीप से यमन के बाब-अलमंदेब को क्रॉस करते हुए अरब सागर से होकर भारत पहुंच रहा है। इसको नीचे दिए गए चार्ट से समझा जा सकता है।

 

रूस-भारत

 

हिंद महासागर में भारत की रणनीतिक बढ़त

भारत का “ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट” सिर्फ मलक्का तक बेहतर कनेक्टिविटी और व्यापारिक पहुंच का माध्यम नहीं है, बल्कि हिंद महासागर में भारत की रणनीतिक स्थिति को मजबूत करने वाली अहम परियोजना है। मलक्का के करीब स्थित होने के कारण ग्रेट निकोबार का महत्व व्यापार, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिहाज से बढ़ जाता है। भारत यहां विश्वस्तरीय ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, आधुनिक टाउनशिप और बिजली का बुनियादी ढांचा बना रहा है।

द ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट से भारत को 5 बड़े फायदे?

  1. समुद्री निगरानी और सुरक्षा क्षमता मजबूत होगी।
  2. ब्लू इकोनॉमी को बढ़ावा मिल सकता है।
  3. पोर्ट बनने से विदेशी बंदरगाहों पर निर्भरता घटेगी
  4. व्यापार और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।
  5. स्थानीय लोगों के लिए कनेक्टिविटी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की योजना

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हाल में सीरिया की राजधानी दमिश्क का दौरा किया था। उन्होंने सीरिया को क्षेत्रीय एनर्जी का हब बनाने की प्लानिंग की है ताकि हॉर्मुज संकट का विकल्प तैयार किया जा सके। इसके लिए वह भूमध्यसागर से गल्फ देशों के बीच लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसमें फ्रांस 4-Sea इनिशिएटिव के तहत कैस्पियन सागर, भूमध्य सागर, काला सागर और फारस व ओमान की खाड़ी को जोड़ना चाहता है।  

France

ट्रंप भी खोज रहे वैकल्पिक मार्ग

हॉर्मुज की लड़ाई में ईरान अमेरिका पर भारी पड़ रहा है। यह बात हम नहीं कह रहे, बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन बयानों से यह स्पष्ट हो रहा है, जिसमें वह कॉमर्शियल जहाजों के लिए हॉर्मुज का वैकल्पिक रास्ता खोजने की बात कह रहे हैं। ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में कहा है कि पिछले कुछ महीनों में बहुत सी चीजें हुई हैं। पाइपलाइनें बिछाई जा रही हैं, हम टेक्सास और अलास्का समेत बहुत अच्छे विकल्प लेकर आ रहे हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक बाजारों में तेल की आपूर्ति के लिए हॉर्मुज के बेहतर विकल्प मौजूद हैं। वहीं शिपिंग डेटा में हॉर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की संख्या कम होने के आंकड़ों पर कहा कि यदि लोग इधर से जाना चाहते हैं तो यह जलमार्ग खुला है। हालांकि, उन्होंने कहा कि हम इसे ईरान के लिए नहीं खोल रहे हैं। वही इकलौता देश है जिसके लिए यह बंद है। 

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