
क्या आपने कभी सोचा है कि अगर एक दिन आपके घर की छत पर या गार्डन में अचानक आसमान से कोई रहस्यमयी धातु का गोला आ गिरे तो क्या होगा? पहली नजर में शायद आपको लगे कि यह किसी एलियन के यान का हिस्सा होगा या फिर कोई अज्ञात वस्तु। लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग भी हो सकती है।
हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड के फॉरेस्ट बीच पर ऐसी ही छह रहस्यमयी धातु की गेंदें मिलीं। इन्हें लेकर तरह-तरह के कयास लगाए गए। किसी ने इन्हें एलियन से जोड़ा, तो किसी ने अंतरिक्ष से गिरा मलबा बताया। शुरुआती जांच में आशंका जताई गई कि ये किसी रॉकेट के हिस्से यानी स्पेस डेब्रिस (अंतरिक्ष मलबा) हो सकते हैं। इस घटना ने इस सवाल को फिर से हवा दे दी कि क्या अंतरिक्ष का कचरा अब धरती के लिए नई चुनौती बनता जा रहा है?
इस स्टोरी में जानिए कि आसमान से रहस्यमयी चीजें आखिर क्यों गिरती हैं, क्या ये आपके घर पर भी तक भी गिर सकती हैं, और अगर ऐसा होता है तो नुकसान की भरपाई कौन करेगा। साथ ही, अब तक आसमान से टपकी 10 सबसे रहस्यमयी वस्तुओं की कहानी भी जानेंगे, जिन्होंने आम लोगों से लेकर वैज्ञानिकों तक को हैरान कर दिया।
स्पेस डेब्रिस होता क्या है?
सबसे पहले समझते हैं कि अंतरिक्ष का कचरा या स्पेस डेब्रिस होता क्या है? आसान शब्दों में कहें तो, जिस तरह धरती पर बेकार प्लास्टिक और धातु का कचरा यहां-वहां पड़ा होता है, वैसे ही अंतरिक्ष में बेकार हो चुके या अपनी उम्र पूरी कर चुके सैटेलाइट, रॉकेट के हिस्से, अंतरिक्ष यानों के टूटे हुए टुकड़े और यहां तक कि छोटे-छोटे कण मंडराते रहते हैं। यही कचरा ‘स्पेस डेब्रिस’ कहलाता है। ये करीब 28,000 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से पृथ्वी की कक्षा में घूम सकते हैं, जो एक गोली की गति से लगभग सात गुना अधिक है। इतनी तेज रफ्तार के कारण ये टुकड़े एक्टिव सैटेलाइट और अंतरिक्ष यान ही नहीं, भविष्य के स्पेस मिशनों के लिए भी बड़ा खतरा बन सकते हैं।

अंतरिक्ष का ये मलबा पृथ्वी की निचली कक्षा (Low Earth Orbit) में चक्कर लगा रहा है। लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) पृथ्वी से 160 से 2,000 किलोमीटर की ऊंचाई वाला वह क्षेत्र है, जहां दुनिया के ज्यादातर सैटेलाइट और अंतरिक्ष स्टेशन परिक्रमा करते हैं। यही वजह है कि स्पेस डेब्रिस का सबसे बड़ा खतरा भी इसी क्षेत्र में होता है।
जब पुराने सैटेलाइट या रॉकेट के हिस्से बेकार हो जाते हैं, तो वे LEO में घूमते रहते हैं और कभी-कभी पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर जमीन तक भी पहुंच सकते हैं। हालांकि अधिकतर टुकड़े धरती के वायुमंडल में प्रवेश के दौरान जलकर नष्ट हो जाते हैं, लेकिन कुछ पार्ट्स पृथ्वी तक पहुंचने में सफल हो जाते हैं।
अंतरिक्ष में इतना मलबा कैसे जमा हुआ?
नासा के अनुसार, लो अर्थ ऑर्बिट में करीब 6,000 टन मलबा मौजूद है। इसी कारण से लो अर्थ ऑर्बिट को ‘अंतरिक्ष का कबाड़खाना’ भी कहा जाने लगा है।
नासा के मुताबिक, इसके पीछे कई वजहें हैं। समय के साथ पुराने सैटेलाइट और रॉकेट बेकार होते गए और उनका मलबा कक्षा में जमा होता गया। इसके अलावा कुछ घटनाओं ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया:
2007 में चीन ने अपने ही फेंगयुन-1C सैटेलाइट को मिसाइल से नष्ट कर दिया था।
2009 में एक अमेरिकी और एक रूसी सैटेलाइट की अंतरिक्ष में टक्कर हो गई थी।
इन दोनों घटनाओं के बाद लो अर्थ ऑर्बिट में बड़े आकार के स्पेस डेब्रिस की संख्या लगभग 70% तक बढ़ गई, जिससे अन्य सैटेलाइटों के टकराने का खतरा भी काफी बढ़ गया।
स्पेस डेब्रिस को ट्रैक करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था ‘स्पेस डेब्रिस कोऑर्डिनेशन कमेटी’ के अनुसार, पृथ्वी की कक्षा में इस समय 30,000 से अधिक ऐसे स्पेस डेब्रिस मौजूद हैं, जिन पर नजर रखी जा सकती है। इनमें खराब हो चुके सैटेलाइट से लेकर रॉकेट और अंतरिक्ष यानों के टूटे हुए बड़े टुकड़े शामिल हैं:
3,000 से अधिक निष्क्रिय (Defunct) सैटेलाइट अब भी पृथ्वी की कक्षा में मौजूद हैं।
10 सेंटीमीटर से बड़े 23,000 से अधिक स्पेस डेब्रिस ट्रैक किए जा रहे हैं।
10 सेंटीमीटर से छोटे कम से कम 5 लाख टुकड़े भी अंतरिक्ष में मौजूद हैं।
इनके अलावा, करोड़ों बेहद छोटे कण ऐसे हैं, जिन्हें मौजूदा तकनीक से ट्रैक करना संभव नहीं है।
कब-कब गिरा स्पेस डेब्रिस?
- 2026: ऑस्ट्रेलिया में समंदर किनारे मिले 6 रहस्यमयी गोले
आसमानी कचरा टपकने की सबसे हालिया चर्चित घटना जुलाई के महीने में हुई है। उत्तरी क्वींसलैंड के फॉरेस्ट बीच पर एक-दो नहीं बल्कि 6 रहस्यमयी गोले मिले। इन ‘स्पेस बॉल’ को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए गए। वहीं, क्वींसलैंड फायर डिपार्टमेंट ने एहतियात के तौर पर इन वस्तुओं के आसपास 50 मीटर का सुरक्षा घेरा बना दिया। लोगों से इन गोलों से दूर रहने की अपील जारी कर दी।

ऑस्ट्रेलियाई स्पेस एजेंसी ने हालांकि शुरुआती जांच में साफ कर दिया कि ये वस्तुएं किसी स्पेस लॉन्च व्हीकल (रॉकेट) के प्रेशर वेसल थे। प्रेशर वेसल रॉकेट का वह हिस्सा होता है, जिसमें गैस या तरल पदार्थ को उच्च दबाव में रखा जाता है।
“इन वस्तुओं की स्थिति और विशेषताएं इस बात से मेल खाती हैं कि ये हाल ही में पृथ्वी की कक्षा से वायुमंडल में दोबारा प्रवेश करने वाले किसी रॉकेट के टुकड़ों का मलबा हैं।” - ऑस्ट्रेलियाई स्पेस एजेंसी
Queensland Fire and Rescue crews are continuing to assist partner agencies following the discovery of several potentially hazardous objects around Forrest Beach in North Queensland.
— Queensland Fire Department (@QldFireDept) July 5, 2026
Specialist QFR Scientific teams have safely secured a number of the items throughout the weekend… pic.twitter.com/BVq9xJPPlX
- 2025: 500 किलोग्राम की रिंग गिरी
केन्या के माकुएनी काउंटी में करीब 500 किलोग्राम वजनी और लगभग 2.5 मीटर व्यास की विशाल धातु की रिंग मिली। शुरुआत में लोगों ने इसे रहस्यमयी वस्तु माना, लेकिन जांच के बाद केन्या स्पेस एजेंसी ने बताया कि यह किसी रॉकेट की सेपरेशन रिंग थी, जिसका इस्तेमाल रॉकेट के विभिन्न चरणों को अलग करने में होता है।
- 2024: अमेरिका में घर पर गिरा ISS का मलबा
मार्च 2024 में फ्लोरिडा के नेपल्स शहर में एक घर की छत तोड़कर धातु का एक टुकड़ा अंदर जा गिरा। जांच में NASA ने पुष्टि की कि यह अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) से छोड़े गए पुराने बैटरी पैलेट का हिस्सा था। घटना के बाद घर के मालिक ने नुकसान की भरपाई की मांग की। यह हाल के वर्षों में स्पेस डेब्रिस से निजी संपत्ति को हुए सबसे चर्चित नुकसान के मामलों में शामिल है।
- 2023: ऑस्ट्रेलिया के तट पर भारत के रॉकेट का हिस्सा
जुलाई 2023 में ऑस्ट्रेलिया के पर्थ के पास समुद्र तट पर धातु का एक विशाल गुंबदनुमा ढांचा (मेटल डोम) मिला था। यह करीब ढाई मीटर चौड़ी और तीन मीटर लंबी थी। शुरुआत में इसे लेकर कई तरह के कयास लगाए गए। बाद में भारत की अंतरिक्ष एजेंसी ISRO ने पुष्टि की कि यह भारत के PSLV रॉकेट का हिस्सा था, जो मिशन के दौरान अलग हुआ था।

- 2022: ऑस्ट्रेलिया में मिला SpaceX के कैप्सूल का मलबा
जुलाई 2022 में ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स के स्नोवी माउंटेन्स इलाके के एक खेत में आसमान से गिरा जला हुआ धातु का बड़ा टुकड़ा मिला। इसकी बनावट किसी बड़ी मशीन के हिस्से जैसी थी, इसलिए शुरुआत में इसकी पहचान को लेकर कई तरह की अटकलों ने जोर पकड़ लिया।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जांच में ऐसे तीन बड़े टुकड़े मिले थे। इन्हें 1979 के बाद ऑस्ट्रेलिया में मिला सबसे बड़ा स्पेस डेब्रिस माना गया। इससे पहले 1979 में Skylab के 77 टन वजनी अंतरिक्ष स्टेशन का मलबा पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में गिरा था, जो आज भी ऑस्ट्रेलिया में गिरा सबसे बड़ा स्पेस डेब्रिस माना जाता है।
खैर, जांच के बाद ऑस्ट्रेलियाई स्पेस एजेंसी ने पुष्टि की कि यह मलबा अमेरिकी कंपनी SpaceX के एक स्पेस मिशन से जुड़े ड्रैगन कैप्सूल का हिस्सा था। एजेंसी ने बताया कि इस मामले में उसने अमेरिकी अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर जांच की थी।
- 2022: महाराष्ट्र में मिले रॉकेट के टुकड़े
अप्रैल 2022 में भारत में महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में एक बड़ी सी मेटल रिंग और गोला आसमान से गिरा था, जो लोगों के बीच कौतूहल का विषय बन गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिंदेवाही के एक गांव में 3 मीटर की मेटल रिंग मिली थी, जबकि एक दूसरे गांव में 1.5 फीट व्यास (डायमीटर) का गोला मिला था। तब विशेषज्ञों ने कहा था कि यह मलबा उपग्रह प्रक्षेपण के बाद रॉकेट बूस्टर के टुकड़े हो सकते हैं।
Maharashtra | Yesterday night we received information about a 3-metre ring being found in a village in Sindewahi. Ring was hot & seemed like it has fallen from sky while spherical object was found in another village today morning: Ganesh Jagdale, Tehsildar, Sindewahi, Chandrapur pic.twitter.com/WhHl8c7257
— ANI (@ANI) April 3, 2022
- 2022: गुजरात में गिरे रहस्यमय गोले
मई 2022 में गुजरात के आणंद जिले के कई गांवों में आसमान से धातु के रहस्यमयी गोले गिरने की घटनाओं ने लोगों को चौंका दिया था। पहले 12 मई को भालेज गांव में करीब 5 किलोग्राम वजनी काले रंग का धातु का गोला खेत में गिरा। उसी दिन आणंद जिले के खंभोलज और रामपुरा गांवों में भी ऐसे ही दो धातु के टुकड़े मिले। ये तीनों गांव लगभग 15 किलोमीटर के दायरे में हैं।
स्थानीय लोगों ने बताया था कि धातु की ये वस्तुएं सीधे आसमान से गिरी थीं। इसके दो दिन बाद, 14 मई को आणंद जिले के ही चकलासी गांव में भी इसी तरह का एक और गोलाकार धातु का मलबा मिला। यह गांव भालेज से करीब 8 किलोमीटर दूर स्थित है।
लगातार चार स्थानों पर इस तरह के धातु के गोले मिलने के बाद प्रशासन और विशेषज्ञों ने जांच शुरू की। शुरुआती जांच में इन्हें किसी रॉकेट या अंतरिक्ष मलबे (स्पेस डेब्रिस) का हिस्सा माना गया। हालांकि, उस समय यह स्पष्ट नहीं हो पाया था कि यह मलबा किस देश या किस अंतरिक्ष मिशन से जुड़ा था।
- 1997: जब पहली बार इंसान से टकराया स्पेस डेब्रिस
22 जनवरी 1997 को अमेरिका के ओक्लाहोमा राज्य के टुल्सा शहर के उपनगर टर्ली में एक ऐसी घटना हुई, जिसे आज भी स्पेस डेब्रिस के इतिहास का सबसे चर्चित मामला माना जाता है। इसे ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में शामिल किया गया है। यह अब तक का दुनिया का एकमात्र प्रमाणित मामला माना जाता है, जिसमें अंतरिक्ष से गिरा मलबा किसी व्यक्ति से सीधे टकराया, लेकिन उसे कोई गंभीर नुकसान नहीं पहुंचा।
उस दिन लॉटी विलियम्स (Lottie Williams) पार्क में टहल रही थीं, तभी उन्होंने आसमान में एक तेज चमक देखी, जो किसी टूटते तारे जैसी दिखाई दी। कुछ मिनट बाद एक काला धातुनुमा टुकड़ा उनके कंधे से टकराकर घास में जा गिरा।

बाद में, जांच से पुष्टि हुई कि यह टुकड़ा अमेरिकी Delta II रॉकेट के दूसरे चरण (Second Stage) का हिस्सा था, जो पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश के बाद जलते हुए धरती तक आ गया था। करीब 12.7 सेंटीमीटर (5 इंच) लंबा यह टुकड़ा फाइबरग्लास का बना था और उसका वजन लगभग 16 ग्राम था—यानी एक खाली सॉफ्ट ड्रिंक के कैन के बराबर। गनीमत रही कि लॉटी विलियम्स को इस घटना में कोई चोट नहीं आई।
- 1979: ऑस्ट्रेलिया में गिरा NASA का स्काईलैब
11 जुलाई 1979 को NASA का पहला अंतरिक्ष स्टेशन स्काईलैब पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश के दौरान टूट गया। इसका अधिकांश मलबा हिंद महासागर में गिरा, जबकि कुछ हिस्से पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के कम आबादी वाले इलाकों में गिरे। यह इतिहास की सबसे चर्चित अनियंत्रित री-एंट्री (Uncontrolled Re-entry) घटनाओं में से एक मानी जाती है।
- 1978: कनाडा में गिरा सोवियत उपग्रह का मलबा
24 जनवरी 1978 को सोवियत संघ का ‘कोसमोस-954’ (Kosmos 954) नाम का परमाणु ऊर्जा से चलने वाला उपग्रह पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश के दौरान टूट गया। इसके बाद उसका रेडियोएक्टिव मलबा उत्तरी कनाडा के विशाल इलाके में बिखर गया।
यह मलबा तत्कालीन नॉर्थवेस्ट टेरिटरीज, मौजूदा नुनावुत और अल्बर्टा तथा सस्केचेवान प्रांतों के उत्तरी हिस्सों तक फैल गया। रेडियोएक्टिव मलबे के कारण पर्यावरण और लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई। घटना के बाद कनाडा और अमेरिका की संयुक्त टीम ने करीब 1.24 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में कई महीनों तक मलबे की तलाश और उसे हटाने का अभियान चलाया। इस अभियान को ‘ऑपरेशन मॉर्निंग लाइट’ नाम दिया गया था।

यह घटना आज भी स्पेस डेब्रिस के इतिहास की सबसे गंभीर घटनाओं में गिनी जाती है, क्योंकि इसमें अंतरिक्ष से गिरा मलबा रेडियोएक्टिव था और इसके लिए बड़े पैमाने पर सफाई अभियान चलाना पड़ा था।
अंतरिक्ष से टुकड़ा गिरे तो जिम्मेदारी किसकी?
दुनियाभर में अंतरिक्ष का मलबा गिरने की घटनाएं सामने आने के बाद सवाल उठता है कि अगर भविष्य में किसी के घर या संपत्ति पर स्पेस डेब्रिस गिर जाए, तो जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या पीड़ित को मुआवजा मिल सकता है? इसका जवाब अंतरराष्ट्रीय कानून ‘लायबिलिटी कन्वेंशन, 1972’ में मिलता है।
लायबिलिटी कन्वेंशन संयुक्त राष्ट्र (UN) के तहत बना एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है, जो 1 सितंबर 1972 से लागू हुआ था। इसका उद्देश्य यह तय करना है कि अगर किसी देश का अंतरिक्ष यान, रॉकेट या उसका मलबा दूसरे देश में नुकसान पहुंचाता है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। आज अधिकांश अंतरिक्ष गतिविधियों वाले देश इस संधि का हिस्सा हैं।
इस संधि के अनुसार, यदि अंतरिक्ष वस्तु या उसके मलबे से पृथ्वी पर किसी व्यक्ति, मकान, वाहन या अन्य संपत्ति को नुकसान होता है, तो उसकी भरपाई के लिए वह देश पूरी तरह जिम्मेदार है, जिसने उस स्पेस ऑब्जेक्ट को लॉन्च किया है।
मुआवजे का ऐतिहासिक उदाहरण
1978 में जब सोवियत संघ के सैटेलाइट का मलबा कनाडा में गिरा था, तब सफाई अभियान पर हुए खर्च के लिए कनाडा ने लायबिलिटी कन्वेंशन के तहत सोवियत संघ से मुआवजे की मांग की थी। बाद में दोनों देशों के बीच समझौता हुआ और सोवियत संघ ने कनाडा को 30 लाख कनाडाई डॉलर का भुगतान किया। यह आज भी इस संधि के तहत मुआवजे का सबसे चर्चित मामला है।
अंतरिक्ष से मलबा हटाने में क्या प्रॉब्लम?
नासा के अनुसार, फिलहाल अंतरिक्ष में मौजूद मलबे को साफ करने के लिए कोई वैश्विक कानून नहीं है। दूसरा, इसे हटाना बेहद महंगा और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण काम है।
नासा ने 1979 में अपना ऑर्बिटल डेब्रिस प्रोग्राम (Orbital Debris Program) शुरू किया था। इस कार्यक्रम का उद्देश्य अंतरिक्ष में नया मलबा बनने से रोकना, पहले से मौजूद मलबे की निगरानी करना और भविष्य में उसे हटाने के तरीके विकसित करना है।
नासा का कहना है कि स्पेस डेब्रिस किसी एक देश की नहीं, बल्कि अंतरिक्ष में सक्रिय सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है। अंतरिक्ष मलबे की समस्या एक वैश्विक चुनौती है और इसका समाधान भी सभी देशों के सहयोग से ही संभव है। भविष्य के सुरक्षित अंतरिक्ष मिशनों के लिए अंतरिक्ष को साफ रखना पूरी दुनिया की सामूहिक जिम्मेदारी है।




