
किसान के घर में जन्मा एक बच्चा नई चीजों को बनाता-बिगाड़ता रहता था। वह बड़ा होने लगा, तो शिकार के लिए राइफल चलानी सीख ली। आगे मौका मिला, तो दूसरे विश्व युद्ध में इसने सोवियत संघ की तरफ से नाजी जर्मन से लड़ाई लड़ी। उस समय वह टैंक कमांडर था। एक दिन जंग में बुरी तरह जख्मी हुआ और अस्पताल में बिस्तर पर पड़ गया। हालांकि, हथियारों से खेलने का शौक नहीं छूटा। उसने अस्पताल में रहते हुए एक ऐसे हथियार के बारे में सोचा, जो घातक हो। कुछ ऐसा, जो अब तक किसी ने नहीं बनाया हो। इसी लड़के ने आगे चलकर जो हथियार बनाया, वह 80 साल बाद भी दुनिया की सबसे भरोसेमंद असॉल्ट राइफल है। ये कहानी है AK-47 बनाने वाले मिखाइल कलाशनिकोव की, जिनकी थीम पर रूस के सहयोग से भारत अब अमेठी में पूरी तरह स्वदेशी एके-203 असॉल्ट राइफल बना रहा है।
हथियार डिजाइन में रुचि को देखते हुए 1942 में उन्हें छोटे हथियारों के एक रिसर्च सेंटर भेजा गया। वहां उन्होंने सबसे पहले एक सब-मशीन गन डिजाइन की। 7.62×41mm और उसके बाद 7.62×39mm की एक कारतूस प्रतियोगिता में हिस्सा लिया। उनका शुरुआती डिजाइन एम1 गारैंड से प्रभावित था, मगर एसकेएस कार्बाइन के सामने वह टिक नहीं पाए। फिर भी हौसला नहीं टूटा। 1946 की प्रतियोगिता में कलाशनिकोव ने अपनी टीम के साथ गैस ऑपरेटेड रोटेटिंग बोल्ट वाला राइफल बनाया। 1947 में पहली बार एके-1 और एके-2 प्रोटोटाइप ने दूसरा राउंड पास किया। कलाशनिकोव ने सहयोगी अलेक्जेंडर जायेत्सेव की मदद से डिजाइन को और बेहतर बनाया। 1948 में परीक्षण शुरू हुआ और 1949 में सोवियत संघ की सेना ने इसे 7.62 mm कलाशनिकोव असाल्ट राइफल (एके) के रूप में अपना लिया।

"पंछी, नदियां पवन के झोंके, कोई सरहद न इसको रोके"
आज यह एक ऐसा हथियार है, जिसे कोई भी मौसम अपनी सीमाओं में बांध नहीं सकता। बारिश हो, धूप, धूल, रेगिस्तान, प्रचंड गर्मी या भीषण सर्दी… कलाशनिकोव रायफल्स दुनिया का सबसे भरोसेमंद हथियार बन चुका है। दूसरे विश्व युद्ध तक दुनिया में ऐसा कोई हथियार नहीं था। अफगानिस्तान युद्ध से लेकर वियतनाम, इराक और अफ्रीका के गृहयुद्ध में इस हथियार का बड़ा रोल रहा।
इसका पूरा नाम एवटोमैट कलाशनिकोव है। सोवियत संघ के समय में इसे मिखाइल कलाशनिकोव ने 1947 में पहली बार डिजाइन किया था।
सबसे मशहूर मॉडल एके-47 है, जो 7.62×39mm गोलियों की बौछार करता है। यह गैस ऑपरेटेड होने के साथ लॉन्ग स्ट्रोक पिस्टन और रोटेटिंग बोल्ट सिस्टम है। यह कम मेंटेनेंस वाली शानदार राइफल है।
कलाशनिकोव असॉल्ट राइफल बर्फ, कीचड़ या पानी में भी बिना जाम हुए लगातार आग उगलती है। यह दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला नाम है। कारखाना रूस के इसेव्स्क में है। इस कारखाने की शुरुआत 19वीं शताब्दी में रूसी सम्राट अलेक्जेंडर-1 के सम्मान में की गई थी, बाद में 21वीं शताब्दी की शुरुआत में कंपनी का नाम बदलकर रूसी हथियार डिजाइनर मिखाइल कलाशनिकोव पर रख दिया गया।

एके-47 के बाद बनी एकेएम और एके-74
एके-47 की लोकप्रियता देख रूस ने इसे और ज्यादा अपग्रेड किया। 1959 में एकेएम और 1974 में एके-74 वर्जन की राइफलें बनीं। एके-74 राइफल 5.45×39mm की कारतूस फायर करती है। यह दुनिया की सबसे मारक और भरोसेमंद हथियार के रूप में अपनी पहचान बना चुकी है। यही वजह है कि दुनियाभर की सेनाओं, गुरिल्ला और मिलिशिया समूहों में इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है।

रूसी कलाशनिकोव की AK सीरीज की अब तक 7.5 करोड़ से भी ज्यादा राइफलें बन चुकी हैं। यह राइफल कई बड़े युद्धों, क्रांतियों और आधुनिक सैन्य इतिहास की सबसे प्रभावशाली प्रतीक बन चुकी है। इसे दुनिया के सबसे प्रसिद्ध और व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाले फायरआर्म्स में गिना जाता है।

… और बढ़ती गई AK सीरीज
हां, कलाशनिकोव की पहली राइफल AK के रूप में सेना में शामिल हो गई, पर वह संतुष्ट नहीं थे। वह ऐसी राइफल चाहते थे जो कीचड़, धूल, बर्फ और कठिन से कठिन मौसम में बिना रुके फायर करती रहे। इसी मकसद से उन्होंने एके-47 पर काम किया। एके-47 का प्री-प्रोडक्शन प्रोटोटाइप 1948 से पहले ही बना लिया गया। 1951 से AKM बनाने के दौरान एके टाइप-2 और टाइप-3 के रूप में इसमें और सुधार किया गया। एके-47 की सबसे बड़ी विश्वसनीयता यह थी कि यह बड़े गैस पिस्टन, ढीले टॉलरेंस और टेपर्ड कारतूस डिजाइन की वजह से गंदगी, धूल, बर्फ आदि में भी फायरिंग में सक्षम थी। इसका प्रोडक्शन सस्ता और आसान था।
बाद में आई एके-100, एके 101, एके-103 सीरीज
एके-74 के बाद इसे और अपग्रेड करते हुए 1990 के दशक में एके-100, एके-101 और एके-103 वर्जन लांच किया गया। इसमें कई अतिरिक्त फीचर जोड़े गए, जो सैनिकों को पसंद आए।
स्वदेशी AK-203 ‘शेर’ राइफल का अमेठी में सफल परीक्षण
इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा निर्मित AK-203 ‘शेर’ राइफल का अमेठी में हाल ही में सफल परीक्षण किया गया। इसमें बर्स्ट फायरिंग समेत कई परीक्षण किए गए। कंपनी के CEO मेजर जनरल एसके शर्मा ने शुरुआती नतीजों को बेहद उत्साहजनक बताया। उन्होंने कहा कि अब AK-203 ‘शेर’ का सितंबर में भारतीय सेना के लिए परीक्षण किया जाएगा। रूस में डिजाइन की गई इस राइफल का भारत में निर्माण मेक इन इंडिया पहल के तहत एक अहम उपलब्धि माना जा रहा है। यह रूस के सहयोग से बनी पूरी तरह स्वदेशी राइफल है।
2019: भारत की एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड (AWEIL) , म्यूनिशन्स इंडिया लिमिटेड (MIL), रूस की रोसोबोरोन एक्सपोर्ट और कलाश्निकोव कंसर्न के बीच ज्वॉइंट वेंचर के रूप में इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना हुई।
2021: भारत के रक्षा मंत्रालय के साथ 6 लाख से अधिक राइफलों की खरीद के लिए कॉन्ट्रैक्ट साइन हुआ।
जनवरी 2023: इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड (IRRPL) के कोरवा प्लांट में AK-203 राइफलों का उत्पादन शुरू हुआ।
जुलाई 2024: भारत को 35,000 राइफलें डिलीवर की गईं और पहला फेज पूरा हुआ। इसके साथ राइफलों में लोकलाइजेशन भी बढ़ाया गया।
अगस्त 2026: पहली AK-203 ‘शेर’ राइफल पूरी तरह भारतीय कंपोनेंट्स और मैटेरियल्स से तैयार की गई।
एके-12 और एके-15 लेटेस्ट और 5वीं पीढ़ी की राइफलें
कलाशनिकोव की लेटेस्ट और 5वीं पीढ़ी की राइफलें एके-12 और एके-15 हैं। इनमें से एके-12 असॉल्ट राइफल का डिजाइन एके-74 पर बेस्ड है। ये 5.45 एमएम राउंड का इस्तेमाल करती है। रूसी सेना ने इस राइफल को अपनी थल सेना, वायुसेना और नौसेना के लिए अपनाया है। वहीं, एके-15 राइफल भारी और बड़े 7.62 एमएम राउंड का इस्तेमाल करती है, जो साइलेंसर के साथ मिलकर इसे फोर्सेज के लिए विशेष हथियार बनाते हैं।
एके-12 में करीब 922 एमएम लंबी और 415 एमएम की बैरल लंबाई के साथ टेलीस्कोप भी है, जिसे फोल्ड किया जा सकता है। इसकी मैग्जीन 30 राउंड ले सकती है। इसका वजन 2.5 किलो है। इसकी गोली 50 मीटर दूर से 5 एमएम मोटी लोहे की प्लेट को आरपार भेद जाती है।

कलाशनिकोव ने इन असॉल्ट राइफलों की 150 से ज्यादा डिजाइनों को पेश किया। 2013 में उनका निधन हो गया।
भारत में एके-203 का निर्माण बड़ी उपलब्धि
भारत-रूस राइफल प्राइवेट लिमिटेड, अमेठी के सीईओ मेजर जनरल एसके शर्मा ने साल 2025 में दिए गए एक बयान में अमेठी में एके-203 के निर्माण को भारत के लिए अहम उपलब्धि बताया था। उन्होंने इसे भारतीय सेना के लिए ताकतवर हथियार कहा था।
India & Russia's Joint Venture In Developing Assault Rifles Is 'Successful' & Extremely Important,' Says Maj Gen SK Sharma, Indo-Russian Rifles Private Ltd. CEO pic.twitter.com/Q6vAelyrxQ
— RT_India (@RT_India_news) December 4, 2025
दुनिया की टॉप-5 असॉल्ट राइफल्स
1.AKM सिरीज: रूस
लंबाई: 88 सेमी
वजन: 3.3 किग्रा
फायरिंग: 600 राउंड/मिनट
रेंज: 300–400 मीटर
मैगजीन: 30 राउंड
ऑपरेटिंग सिस्टम: लॉन्ग-स्ट्रोक गैस पिस्टन, रोटेटिंग बोल्ट
ऑपरेशनः ऑल वेदर यानी भीषण ठंड, बर्फ, कीचड़, रेत और गंदगी में।
इस्तेमालः पूर्वी यूरोप, एशिया, अफ्रीका, मिडिल ईस्ट समेत दुनिया के दर्जनों देश।
2. M16 फैमिली/M4 कारबाइन: अमेरिका
लंबाई:29.75-33 इंच
वजन: 3.2 किग्रा
फायरिंग:700–950 राउंड/मिनट
रेंज:500–600 मीटर
मैगजीन:30 राउंड
ऑपरेटिंग सिस्टम: गैस ऑपरेटेड, डायरेक्ट इंपिंजमेंट, रोटेटिंग बोल्ट
ऑपरेशनः सामान्य से मध्यम परिस्थितियों में।
इस्तेमालः अमेरिका समेत कई देशों में जंगल से रेगिस्तान तक।
3. CZ ब्रेन 2: चेक रिपब्लिक
लंबाई: 57–88 सेमी.
वजन: 3.25 किग्रा.
फायरिंग: 850 राउंड/मिनट
रेंज:300–500 मीटर
मैगजीन: 30 राउंड
ऑपरेटिंग सिस्टम: शॉर्ट-स्ट्रोक गैस पिस्टन, 3-पोजिशन गैस रेगुलेटर
ऑपरेशनः कीचड़, रेत, ठंड
इस्तेमालः चेक, यूक्रेन, फ्रांस, हंगरी, पोलैंड आदि देशों में सेवा में।
4. IWI Tavor X95: इजरायल
लंबाई: 26.1 इंच
वजन: 3.9 किग्रा.
फायरिंग: 750–950 राउंड/मिनट
रेंज: 300–500 मीटर
मैगजीन:30 राउंड
ऑपरेटिंग सिस्टम: लॉन्ग-स्ट्रोक गैस पिस्टन, रोटेटिंग बोल्ट
ऑपरेशनः रेगिस्तान, रेत और गर्म मौसम में।
इस्तेमालः इजरायल, भारत, यूक्रेन, जॉर्जिया आदि देशों में इस्तेमाल।
5. FN SCAR 16 (SCAR-L): बेल्जियम
लंबाई: 25–35 इंच
वजन: 3.6 किग्रा.
फायरिंग: 550–650 राउंड/मिनट
रेंज: 400–600 मीटर
मैगजीन: 30 राउंड
ऑपरेटिंग सिस्टम: शॉर्ट-स्ट्रोक गैस पिस्टन, एडजस्टेबल गैस सिस्टम
ऑपरेशनः विशेष अभियानों और बदलते मौसम में
इस्तेमालः बेल्जियम, फिनलैंड, जर्मनी, जापान, नॉर्वे, यूक्रेन आदि देशों में।
(सोर्सः Gun University अमेरिका)




