Analysis: रूस-अमेरिका की डीजल डील कैसे पूरे ग्लोबल साउथ के लिए गुड न्यूज है?
अमेरिका-रूस की चर्चित डीजल डील से वैश्विक बाजार में ईंधन की सप्लाई बढ़ने और दूसरे देशों से खरीद पर निर्भर ग्लोबल साउथ के देशों को राहत मिलने की उम्मीद है। जानिए, रूस की बढ़ती सप्लाई कैसे ईंधन की किल्लत कम करने, खरीद के विकल्प बढ़ाने और कीमतों के दबाव को घटाने में मदद कर सकती है।
Analysis: रूस-अमेरिका की डीजल डील कैसे पूरे ग्लोबल साउथ के लिए गुड न्यूज है?
रूस-अमेरिका के बीच हुई डीजल डील। (फाइल फोटो)Gettyimages.ru

अमेरिका और रूस के बीच डीजल की डील को लेकर बहस सिर्फ दो देशों या पश्चिमी प्रतिबंधों तक सीमित नहीं है। इसके दायरे में अफ्रीका, एशिया और दक्षिण अमेरिका की वे अर्थव्यवस्थाएं भी हैं, जो ईंधन की किल्लत और बढ़ती कीमतों से जूझ रही हैं। ऐसे में रूस की डीजल सप्लाई की वापसी ग्लोबल साउथ के लिए राहत की उम्मीद बनकर आई है। 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 9 अक्टूबर को घोषणा की थी कि रूस जल्द ही अमेरिका और वैश्विक बाजारों को 3 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा डीजल की सप्लाई करेगा। ट्रंप के मुताबिक, नवंबर में 5 लाख टन और उसके बाद 10 लाख टन की अतिरिक्त सप्लाई भी की जाएगी।

रूस, मिडिल ईस्ट से सप्लाई घटी, दुनिया पर असर

दुनिया में रूस, सऊदी अरब और अमेरिका प्रमुख तेल निर्यातकों में शामिल रहे हैं। ग्लोबल मार्केट में डीजल की किल्लत कितनी गंभीर है, इसका अंदाजा Vitol के CEO रसेल हार्डी के बयान से लगाया जा सकता है। APPEC कॉन्फ्रेंस में हार्डी ने कहा कि रूस से रोजाना 20 लाख बैरल और मध्य पूर्व से करीब 20 लाख बैरल की सप्लाई कम हो रही है। उन्होंने इसके पीछे अतिरिक्त रिफाइनिंग क्षमता की कमी को भी एक बड़ी वजह बताया।

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बाजार में तैयार ईंधन की वास्तव में कमी है, क्योंकि रूस से रोजाना 20 लाख बैरल और मिडिल ईस्ट से करीब 20 लाख बैरल की सप्लाई कम हो रही है।
रसेल हार्डी
रसेल हार्डी
Vitol के CEO

यहां कच्चे तेल और डीजल का अंतर समझना जरूरी है। कच्चे तेल को रिफाइनरी में प्रोसेस करने के बाद ही डीजल और पेट्रोल जैसे ईंधन मिलते हैं। अगर रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हों या उनके काम में रुकावट आए, तो कच्चा तेल होने के बावजूद डीजल की कमी हो सकती है।

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मिडिल ईस्ट की जंग ने तोड़ी US की कमर!

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने वैश्विक ईंधन आपूर्ति पर दबाव बढ़ा दिया है। तेल की सप्लाई में रुकावट और कीमतों में उछाल का असर अमेरिका पर भी पड़ा है। डीजल महंगा होने से ट्रक, माल ढुलाई और खेती जैसे क्षेत्रों की लागत बढ़ती है, जिसका असर आम लोगों तक पहुंच रहा है। EIA के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर 2026 में अमेरिकी डीजल की कीमत 21 सितंबर वाले हफ्ते में 6.529 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई थी।

अफ्रीका और लैटिन अमेरिका क्यों हैं अहम?

रूस के डीजल निर्यात पर प्रतिबंधों के बाद उसके व्यापारिक साझेदारों का रुख बदला। अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (EIA) के मुताबिक, 2023 में तुर्किये रूसी डीजल का सबसे बड़ा समुद्री इम्पोर्टर था। ब्राजील और सऊदी अरब भी रूसी डीजल के प्रमुख खरीदारों में शामिल हो गए थे। इसी दौरान लीबिया, ट्यूनीशिया, मोरक्को और घाना ने भी रूस से समुद्री रास्ते आने वाले डीजल का आयात बढ़ाया।

EIA के आंकड़ों के मुताबिक, 2023 में रूस के समुद्री रास्ते होने वाले डीजल निर्यात में ब्राजील की हिस्सेदारी 13% थी, जबकि तुर्किये की हिस्सेदारी 31% तक पहुंच गई थी। ये आंकड़े दिखाते हैं कि प्रतिबंधों के बाद रूसी डीजल का व्यापार खत्म नहीं हुआ, बल्कि उसके खरीदार और सप्लाई के रास्ते बदल गए।

मोरक्को, लीबिया, टोगो, ट्यूनीशिया और घाना जैसे अफ्रीकी देश भी रूसी डीजल खरीदते रहे हैं। 2024 की शुरुआत में अफ्रीका को रूस से बड़ी मात्रा में डीजल की सप्लाई हुई थी। यह अमेरिकी पाबंदियों में अक्टूबर 2026 में दी गई ढील से पहले की बात है।

रूस से सप्लाई बढ़ने पर उन देशों को राहत मिल सकती है, जो अपनी जरूरत का ईंधन दूसरे देशों से खरीदते हैं। हालांकि, फायदा कितना होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि उन्हें रूस से कितना डीजल मिलता है और उनके पास दूसरे विकल्प कितने हैं।

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ईंधन की किल्लत से आम लोगों की मुश्किलें

ईंधन संकट का असर आम लोगों की जिंदगी पर भी दिख रहा है। लीबिया में एक व्यक्ति बताता है कि पेट्रोल भरवाने के लिए उसे तीन घंटे तक लाइन में इंतजार करना पड़ा। वह ब्रेड, पेट्रोल और डीजल की कमी का जिक्र करते हुए कहता है, 'हमारा देश खत्म हो चुका है।' यानी संकट सिर्फ ईंधन तक सीमित नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जरूरतों पर भी असर डाल रहा है।

केन्या की राजधानी नैरोबी में प्रदर्शन कर रहे लोग भी ईंधन की आसमान छूती कीमतों से परेशान हैं। वे राष्ट्रपति से सवाल कर रहे हैं कि बेहतर सुविधाएं देने के जो वादे किए गए थे, उनका क्या हुआ?

ब्राजील में सरकार पेट्रोल और डीजल की कीमतों को ज्यादा बढ़ने से रोकने के लिए दखल दे रही है। लेकिन वहां के एक नागरिक का कहना है कि सरकार की कोशिशें अनिश्चितकाल तक नहीं चल सकतीं और इसके गंभीर नतीजे सामने आ सकते हैं। 

इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि डीजल की किल्लत और महंगाई का असर माल ढुलाई और खेती पर भी पड़ा है। यूरोप और उत्तरी अमेरिका जैसे देशों में सर्दियों के दौरान घरों को गर्म रखने के लिए ईंधन की मांग बढ़ती है। वहीं, दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका के कई देशों में खेती के लिए डीजल की जरूरत बढ़ सकती है। ऐसे में डीजल की सप्लाई में रुकावट बनी रही, तो घरों को गर्म रखने से लेकर खेती और माल ढुलाई तक का खर्च बढ़ सकता है।

अमेरिका को भी डीजल की जरूरत

रूस के साथ डील के पीछे अमेरिका की अपनी जरूरतें भी हैं। ट्रंप ने यह घोषणा ऐसे समय की, जब अमेरिका में डीजल की कीमतें बढ़ी हुई थीं और 3 नवंबर को वहां मिडटर्म इलेक्शन होने हैं। रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिका में 8 अक्टूबर को डीजल की औसत कीमत 6.28 डॉलर प्रति गैलन थी। ट्रंप प्रशासन का मकसद अतिरिक्त सप्लाई के जरिए कीमतों पर दबाव कम करना है।

इस डील से अमेरिका की ईंधन जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सकती है। वहीं, दुनिया के दूसरे देशों को कितनी राहत मिलेगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि बाजार में डीजल की सप्लाई कितनी बढ़ती है और वह किन देशों तक पहुंचता है।

रूस की वापसी से ग्लोबल साउथ को कैसे फायदा?

रूस की बढ़ती डीजल सप्लाई ग्लोबल साउथ के उन देशों के लिए अहम हो सकती है, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर हैं। इससे रूस को अपने ईंधन निर्यात से कमाई होगी, वहीं आयात करने वाले देशों को डीजल खरीदने के लिए एक और विकल्प मिल सकता है। इसका फायदा तीन तरह से हो सकता है।

  1. बाजार में अतिरिक्त डीजल आने से सप्लाई की कमी दूर करने में मदद मिल सकती है।
  2. आयात करने वाले देशों के पास ईंधन खरीदने के ज्यादा ऑप्शन होंगे।
  3. अगर बढ़ी हुई सप्लाई से कीमतों पर दबाव कम होता है, तो माल ढुलाई, खेती और दूसरे क्षेत्रों की लागत संभालना आसान हो सकता है।

हालांकि, इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि बाजार में कितनी अतिरिक्त सप्लाई आती है और उसका फायदा किन देशों तक पहुंचता है।

डीजल डील के बाद से संभलने लगा मार्केट

रूस 2026 में डीजल का निर्यात बढ़ाकर हर महीने 35 लाख टन तक करने की तैयारी में है। रूस के उपप्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक के मुताबिक, इससे निर्यात संकट से पहले के स्तर पर लौट सकता है। उनका दावा है कि वैश्विक बाजार में अतिरिक्त सप्लाई आने की संभावना का असर दिखने लगा है और अमेरिका के साथ डील की घोषणा के बाद से कीमतें 5-6% तक गिर चुकी हैं।

ग्लोबल साउथ को राहत की संभावना

रूस-अमेरिका की डीजल डील का महत्व दोनों देशों के आपसी संबंधों से आगे जाता है। यह ऐसे समय में आई है, जब वैश्विक बाजार में तैयार ईंधन की सप्लाई पर दबाव है और कई इंपोर्टर देश कीमतों के असर से जूझ रहे हैं। अगर रूस की घोषित सप्लाई बाजार तक पहुंचती है और दूसरे देशों को भी इसका लाभ मिलता है, तो ग्लोबल साउथ की कुछ अर्थव्यवस्थाओं को बड़ी राहत मिल सकती है।

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