
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रूसी तेल को लेकर ताजा यू-टर्न ने यूक्रेन का खेल बिगाड़ दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार ट्रंप के इस फैसले ने इस संघर्ष में यूक्रेन को अब साइडलाइन कर दिया है। रूस और अमेरिका के संबंधों में आए इस हालिया बदलाव ने यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की को भी हैरान कर दिया है। वहीं यूरोपीय संघ (ईयू) भी ट्रंप के इस निर्णय से खफा है।
अब सवाल है कि यूक्रेन पर दबाव बनाने के लिए क्या अमेरिका कीव को दी जाने वाली खुफिया सहायता में भी कटौती कर सकता है? ट्रंप के इस यू-टर्न के रूस और यूक्रेन के लिए अलग-अलग मायने क्या हैं? ट्रंप ने यह कदम क्यों उठाया? क्या यह अमेरिका की बदली हुई रणनीति और कूटनीति है? आगे जियोपॉलिटिक्स पर इसका क्या असर होगा?
ट्रंप के इस फैसले ने सिर्फ यूक्रेन और ईयू को ही नहीं, बल्कि अमेरिका में भी बड़ी संख्या में राजनेताओं में असंतोष पैदा कर दिया है। ट्रंप की इस कूटनीति ने दुनिया भर के कई पर्यवेक्षकों को उलझन में डाल दिया है, क्योंकि रूसी डीज़ल आपूर्ति पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों को अचानक निलंबित करने का ट्रंप प्रशासन का यह फैसला उसकी हालिया कार्रवाइयों के बिल्कुल विरोधाभासी दिखता है। क्योंकि अभी तक अमेरिका मॉस्को पर दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से उस और कई नये और कड़े प्रतिबंधों को लगाने का विचार रखता था। कुछ लोग जहां इस बदलाव को ट्रंप की अनिश्चितता से जोड़कर देखते हैं, तो वहीं अन्य इसे एक नई नीति की शुरुआत या यूक्रेन के प्रति प्रशासन के दृष्टिकोण में एक मौलिक बदलाव के सबूत के रूप में देखते हैं।
https://t.co/dJ2TPZARsn
— Rapid Response 47 (@RapidResponse47) October 9, 2026
वास्तव में ट्रंप क्या कर रहे हैं?
वास्तव में क्या हो रहा है, यह समझने के लिए हमें अमेरिकी राष्ट्रपति के सार्वजनिक व्यवहार की अजीबोगरीब हरकतों से परे देखना होगा। ट्रंप का अजीब व्यवहार, जो अक्सर हास्यास्पद सीमा तक पहुंच जाता है, जो आमतौर पर उद्देश्यों के एक अपेक्षाकृत क्लियर सेट को छुपाता है, लेकिन क्या वे उद्देश्य समझदारी भरे हैं, यह एक अलग सवाल है। उनके इस ताजा यू-टर्न की सबसे संभावित व्याख्या अमेरिका की घरेलू राजनीति में ही छिपी है। क्योंकि अमेरिकी कांग्रेस के मिडटर्म इलेक्शन में एक महीने से भी कम समय बचा है, और रिपब्लिकन पार्टी मुश्किल संभावनाओं का सामना कर रही है। इसलिए ट्रंप बेपरवाही का आभास बनाए रखते हैं, क्योंकि कांग्रेस के दोनों सदनों पर से नियंत्रण खोना उन्हें दो साल के राजनीतिक टकराव और भारी निराशा की ओर धकेल देगा।
ट्रंप शायद यह बात समझते हैं कि मतदाताओं के वोट डालने से पहले आर्थिक स्थिति यानी विशेष रूप से उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में मौलिक रूप से सुधार की बहुत कम संभावना है, इसलिए फिलहाल पूरा जोर मनोवैज्ञानिक प्रभाव डालने पर है।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ईंधन की आपूर्ति बढ़ाने के लिए वाशिंगटन ने जिस देश से संपर्क किया है, उसमें रूस पहला नहीं है। ट्रंप जितने अधिक समझौतों की घोषणा कर सकेंगे, उनके पास यह दावा करने के उतने ही अधिक अवसर होंगे कि वाशिंगटन आम अमेरिकियों को बढ़ती कीमतों से बचाने के लिए अथक प्रयास कर रहा है। वह उम्मीद कर रहे हैं कि इसके बाद अमेरिकी मतदाता संभवतः यह भूल जाएंगे कि होर्मुज और फारस की खाड़ी में आ रही समस्याएं खुद ट्रंप के द्वारा खड़ी की गई हैं।
पिछले बयानों के विपरीत है ताजा फैसला
ट्रंप का ताज़ा फैसला उनके पिछले बयानों के विपरीत है। हालांकि इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता,क्योंकि वे लंबे समय से इस धारणा पर काम कर रहे हैं कि शब्दों का मूल्य केवल उसी क्षण होता है जब वे बोले जाते हैं, लेकिन उसके बाद वे बहुत कम असर डालते हैं।
रूस के लिए इसका क्या अर्थ है?
पहली बार अमेरिकी राष्ट्रपति ने संघर्ष की शुरुआत के बाद यूक्रेन को प्राथमिक या निर्णायक कारक बनाए बिना रूस के साथ अपने संबंधों को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब तक, यूक्रेन का मुद्दा मॉस्को के प्रति वाशिंगटन की नीति के लगभग हर पहलू से अटूट रूप से जुड़ा हुआ था, लेकिन इस बार, न केवल इसे किनारे कर दिया गया है, बल्कि यह निर्णय एक बेहद कठिन मोड़ पर सीधे कीव के हितों का विरोध करता है। इसी वजह से यूक्रेनी नेतृत्व में आक्रोश है, क्योंकि उनके दृष्टिकोण से, अमेरिकियों ने अनुचित व्यवहार किया है।

ट्रंप ने क्यों लिया यू-टर्न?
इस बदलाव के संभवतः कई कारण हैं, लेकिन मुख्य कारण रूस के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले रोकने की वाशिंगटन की मांगों को मानने में ज़ेलेंस्की की अनिच्छा प्रतीत होती है, क्योंकि इससे वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, जिससे अमेरिका सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा था। रूस के एनर्जी सेक्टर पर हमला कीव के लिए नया हथियार बन गया है। यूक्रेन ने इसे रोकने के लिए अमेरिकी अनुरोधों को भी नजरअंदाज किया है।
इस बीच, ट्रंप ईंधन की बढ़ती कीमतों से निपटने के साधन के रूप में रूसी तेल आपूर्ति पर निर्भर हो गए हैं। ट्रंप ने स्पष्ट रूप से यह कहना शुरू किया है कि हालात को खराब करने के लिए ज़ेलेंस्की जिम्मेदार हैं। एक बार जब अमेरिकी राष्ट्रपति इस निष्कर्ष पर पहुंच जाते हैं, तो उन्हें इसके विपरीत समझाना बेहद कठिन हो जाता है। इसलिए, फिलहाल कीव की आपत्तियों को बस खारिज कर दिया गया है।
यूक्रेन पर क्या होगा असर?
ट्रंप के इस फैसले का सबसे बड़ा असर यूक्रेन को अमेरिका की ओर से दी जाने वाली खुफिया सहायता पर पड़ेगा। क्योंकि वह अब रूसी ठिकानों पर यूक्रेनी हमलों को रोकने या कम करने के लिए कीव को दी जाने वाली खुफिया जानकारी को सीमित कर सकता है। इसके अलावा ट्रंप ने पहले इस हथियार का उपयोग करने की इच्छा तब दिखाई थी, जब लगभग डेढ़ साल पहले, उन्होंने यूक्रेनी नेतृत्व पर दबाव बनाने के लिए कई दिनों के लिए खुफिया सहयोग को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया था।
मगर एक लंबा निलंबन एक अलग बात होगी और यह संघर्ष के प्रति वाशिंगटन के दृष्टिकोण में एक वास्तविक बदलाव का प्रतिनिधित्व करेगा, जो अमेरिका को उसके यूक्रेनी साझेदार से प्रभावी रूप से दूर कर देगा। लेकिन क्या ट्रंप यह कदम उठाने के लिए तैयार हैं, यह अभी अनिश्चित है। मगर वर्तमान घटनाक्रम को बनाए रखने में रुचि रखने वाला एक व्यापक अनौपचारिक गठबंधन मौजूद है, और इसमें अमेरिकी रक्षा उद्योग, तेजी से प्रभावशाली होती प्रौद्योगिकी (टेक) कंपनियां, यूरोपीय सरकारें और वाशिंगटन में उनके राजनीतिक सहयोगी शामिल हैं।
यदि इसके बाद भी वाशिंगटन कीव पर दबाव बनाने में लगातार अनिच्छुक साबित होता है, तो यह ताज़ा पहल धीरे-धीरे गति खो सकती है। इसलिए, निर्णायक प्रश्न यह है कि क्या अमेरिकी नेतृत्व अपने साझेदारों को उस दिशा में बढ़ने के लिए मजबूर कर सकता है, जिसे वह आवश्यक मानता है। और यदि वह ऐसा कर सकता है, तो किसी समझौते पर आगे की बातचीत का अवसर उभर सकता है।
रूस-यूक्रेन में एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले नहीं करने पर सहमति का दावा
https://t.co/seaOUvJkjK
— Rapid Response 47 (@RapidResponse47) October 11, 2026
अमेरिका के रुख में बदलाव के असली मायने क्या हैं?
वाशिंगटन का ताजा रवैया यह दिखाता है कि संघर्ष का सैन्य चरण समाप्त होने के बाद रूस-अमेरिका संबंध कैसे विकसित हो सकते हैं। हालांकि इसके बाद अभी रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों का विशाल संग्रह कम किए जाने की संभावना नहीं है, और प्रक्रियात्मक व राजनीतिक दोनों तरह से उन्हें हटाना असाधारण रूप से कठिन होगा, क्योंकि बहुत सारे प्रतिबंध कानून और संस्थागत प्रथाओं में गहराई से समा गए हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो अमेरिकी प्रतिबंध किसी न बदलने वाली नीति की स्थाई अभिव्यक्ति बनने के बजाय तत्काल राजनीतिक और आर्थिक जरूरतों के अनुसार सक्रिय या निष्क्रिय किए जाने वाले उपकरण बन जाएंगे। यह अमेरिकी और यूरोपीय दृष्टिकोणों के बीच एक महत्वपूर्ण अंतर है।
इस फैसले के बाद मॉस्को के लिए, वाशिंगटन के साथ अपने भविष्य के संबंधों का निर्माण करते समय इस अंतर को समझना आवश्यक होगा कि जब यूक्रेन पर टकराव एक ऐसे चरण में पहुंच गया है, जहां इसके परिणाम तत्काल सैन्य और क्षेत्रीय प्रश्नों से बहुत आगे तक फैले हुए हैं तो ऐसे में अंतिम परिणाम जो भी हो, यह रूस और पश्चिमी दुनिया के विभिन्न घटकों के बीच भविष्य के राजनीतिक संबंधों की संरचना को निर्धारित करने में मदद करेगा। जब कि वह संरचना पहले से ही उभरनी शुरू हो गई है, उसकी जियोमेट्री अभी भी अस्थिर बनी हुई है, और रेखाएं बदल रही हैं।
(नोट-इसे आरटी.कॉम से अनुवाद किया गया है। इसके लेखक रूसी पत्रकार फ़्योडोर लुक्यानोव हैं, जो अंतरराष्ट्रीय संबंधों और विदेश नीतियों के विशेषज्ञ हैं।







