
ईरान युद्ध और यूक्रेन संघर्ष के कारण खड़े हुए वैश्विक ऊर्जा संकट से जहां एक तरह यूरोप से लेकर यूरेशिया तक और ग्लोबल नॉर्थ से ग्लोबल साउथ तक तेल और गैस की भारी किल्लत खड़ी हो गई है, तो वहीं भारत ने इस आपदा को अवसर में बदल दिया है। इन संकटों के बीच भारत ने न सिर्फ अपने देश में ऊर्जा की सप्लाई को बहाल रखा, यूरोप से लेकर दुनिया के अन्य देशों के ईंधन आपूर्ति में भी मदद की। यही वजह है कि भारत ग्लोबल एनर्जी संकट के बीच सिर्फ इंपोर्टर ही नहीं, बल्कि ऊर्जा का सप्लायर भी बन गया। अमेरिका के बाद अब इंडोनेशिया ने भी भारत से गैसोलीन लेने की इच्छा जाहिर की है।
भारत ने कैसे आपदा को अवसर में बदला?
दुनिया भर में छाये तेल संकट के बीच भारत ने रूस और वेनेजुएला, ब्राजील, नाइजीरिया, अंगोला जैसे से न सिर्फ भारी मात्रा में तेल खरीदा, बल्कि अपनी बेहतरीन रिफायनरी में इस तेल को संशोधित करके यूरोप समेत दूसरे देशों को इसे बेचा और उनके ऊर्जा संकट में मददगार बना। अभी कुछ दिन पहले अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो भी भारत से गैसोलीन लेने के लिए आए थे और उन्होंने जामनगर रिफायनरी का दौरा किया था। इसकी वजह है कि वेनेजुएला के भारी तेल को भारत की हाईटक रिफायनरी में ही रिफाइन किया जा सकता है। अमेरिका को भी इसीलिए भारत से गैसोलीन चाहिए।
अमेरिका के बाद अब इंडोनेशिया ने भारत से मांगी गैसोलीन
अभी तक सिंगापुर इंडोनेशिया का मुख्य आपूर्तिकर्ता बना हुआ था, लेकिन बढ़ती ऊर्जा कीमतों और जंगलों की आग से फैले जहरीले धुंध को लेकर सिंगापुर के साथ उसका तनाव बढ़ गया है। इस तनातनी के बीच इंडोनेशिया भारत से गैसोलीन (पेट्रोल) की आपूर्ति सुरक्षित करने की कोशिश कर रहा है। 'जकार्ता ग्लोब' की रिपोर्ट के अनुसार, इंडोनेशिया के ऊर्जा मंत्री बहलिल लहादालिया ने भारत से और अधिक गैसोलीन आपूर्ति सुरक्षित करने के लिए इस हफ्ते नई दिल्ली की यात्रा करने वाले हैं। उन्होंने जकार्ता में कहा, “सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए मैं भारत और चीन सहित कई देशों की यात्रा करूंगा।”
तनाव के कारण इंडोनेशिया की आपूर्ति हुई बाधित
बता दें कि दक्षिण-पूर्व एशियाई क्षेत्रों में एक प्रमुख रिफाइनिंग हब कहा जाने वाला सिंगापुर अब तक इंडोनेशिया की गैसोलीन जरूरतों के करीब आधे हिस्से की आपूर्ति करता रहा है। साल 2026 की पहली छमाही में इंडोनेशिया के कुल तेल और गैस आयात का 28.36% हिस्सा सिंगापुर से ही आया था। हालांकि, इंडोनेशिया ने पिछले हफ्ते ही सिंगापुर को पाइपलाइन के जरिए की जाने वाली गैस सप्लाई में कटौती कर दी। जकार्ता द्वारा यह कटौती अपने पड़ोसी देशों की खिंचाई करने के कुछ ही दिनों बाद हुई, जिन्होंने इंडोनेशिया के क्षेत्र में लगी भीषण जंगलों की आग से फैले धुंध (धुएं) की शिकायत की थी।
गैस सप्लाई में की गई इस कटौती से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है। सिंगापुर अपनी बिजली बनाने की लगभग 95% जरूरतों के लिए आयातित प्राकृतिक गैस पर ही निर्भर है। सिंगापुर ने अभी तक जवाब में कोई सख्त कदम नहीं उठाया है, लेकिन उसके विदेश मंत्री मंगलवार को इंडोनेशिया के दौरे पर जा रहे हैं।
भारत बना संकटों का साथी
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के अलावा, बढ़ती मांग और सप्लाई नेटवर्क में आ रही दिक्कतों के कारण इंडोनेशिया अपने विभिन्न प्रांतों में ईंधन आपूर्ति के गंभीर संकट का भी सामना कर रहा है। वहीं इस दौर में भारत मुश्किलों का मददगार बना गया है। वैश्विक तेल संकट के बीच अपने ईंधन की जरूरतों के लिए भारत की ओर रुख करने वाला इंडोनेशिया पहला देश नहीं है। इससे पहले हाल ही में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत को “रिफाइनिंग सुपरपावर” (तेल शोधन की महाशक्ति) कहा था, क्योंकि वाशिंगटन वैश्विक ईंधन कीमतों को कम करने के लिए नई दिल्ली की तेल रिफाइनिंग क्षमताओं का लाभ उठाना चाहता था। वह भी भारत से शोधित गैसोलीन चाहता है।
भारत की तरफ क्यों देख रही दुनिया?
भारतीय रिफाइनरियां-विशेष रूप से अरबपति मुकेश अंबानी के स्वामित्व वाला जामनगर रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स रूसी और वेनेजुएला दोनों देशों के भारी कच्चे तेल को प्रोसेस (शोधित) करने में सक्षम हैं। विशेष रूप से वेनेजुएला के कच्चे तेल को वैश्विक स्तर पर डीजल की कीमतों को कम करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इससे अधिक मात्रा में डीजल प्राप्त होता है।





