हाथ से बनाया ‘O’ सिर्फ OK नहीं... जानें सीधा सा इशारा कैसे बना ग्लोबल कंट्रोवर्सी
ओके का प्रयोग हम लोग बोलचाल के साथ ही लिखने में करते हैं। ओके जेस्चर का भी डेली लाइफ में यूज होता है। यही, ओके जेस्चर वर्ल्डकप में भी विवादों में रहा। वीडियो रेफरी के इस इशारे पर पूरा हंगामा मच गया था। ऐसे में जानते हैं कि आखिर ओके का पूरा विवाद और इसके इतिहास के बारे में।
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हाथ से बनाया ‘O’ सिर्फ OK नहीं... जानें सीधा सा इशारा कैसे बना ग्लोबल कंट्रोवर्सी
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हमें जब भी किसी को कहना होता है- ‘सब ठीक है’ या ‘सब बढ़िया है’, तो हम क्या करते हैं? या तो मुंह से बोलते हैं, या फिर हाथ के अंगूठे और तर्जनी उंगली (Index finger) को मिलाकर O बनाते हैं, और इशारा कर देते हैं। रोजमर्रा की जिंदगी में हम सभी इसका कई बार इस्तेमाल करते हैं, लेकिन हाल ही में फीफा वर्ल्ड कप के एक मैच में जब एक अधिकारी ने इसी तरह का इशारा (Hand Gesture) किया, तो बवाल हो गया। इसे नस्लीय कहा जाने लगा। अधिकारी को बर्खास्त करने की मांग होने लगी। फीफा को जांच बिठानी पड़ गई। लेकिन सवाल है कि ऐसा हुआ क्यों? आखिर हाथ से OK के इशारे में ऐसा क्या है कि इतनी बड़ी कंट्रोवर्सी खड़ी हो गई। क्यों दुनिया के कुछ हिस्सों में OK को, खासकर तब जब हाथ को उल्टा करके बनाया जाए, तो इसे 'वाइट सुप्रीमेसी' (गोरे लोगों की श्रेष्ठता) और कट्टर दक्षिणपंथी प्रतीक के रूप में देखा जाता है? आइए समझते हैं।

फीफा वर्ल्ड कप में हुआ क्या था?

पहले समझिए कि फीफा वर्ल्ड कप में आखिर हुआ क्या था। 14 जून 2026 का दिन था। चार बार की वर्ल्ड चैंपियन जर्मनी मैदान पर थी। ग्रुप ई के छठे मुकाबले में जर्मनी के सामने कैरेबियन सागर के छोटे से द्वीप कुरासाओ की टीम खेलने उतरी। महज 1.56 लाख की आबादी वाला कुरासाओ वर्ल्ड कप खेलने वाला अब तक का सबसे छोटा देश था। मैच का लाइव ब्रॉडकास्ट हो रहा था। उसी दौरान ऑस्ट्रेलियाई वीडियो असिस्टेंट रेफरी (VAR) शॉन इवांस ने हाथ से नीचे की तरफ, उल्टा ‘OK' बनाया। उनकी ये हरकत कैमरे में कैद हो गई।

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मैच तो जर्मनी ने 7-1 से जीत लिया, लेकिन VAR अधिकारी के इस एक इशारे ने भारी विवाद खड़ा कर दिया। इसे रेसिस्ट यानी नस्लीय बताया जाने लगा। भेदभाव-विरोधी ग्रुप 'फेयर' (Fare) नेटवर्क ने इवांस को टूर्नामेंट से हटाने की मांग कर दी। फेयर नेटवर्क का आरोप था कि यह इशारा साफ तौर पर उस सिंबल जैसा है, जिसका इस्तेमाल कट्टर दक्षिणपंथी (Far-right) ग्रुप्स में 'वाइट-पावर' या ‘वाइट सुप्रीमेसी’ के संकेत के तौर पर किया जाता है। एक VAR सुपरवाइजर फुटबॉल के ग्लोबल इवेंट में यह सिंबल क्यों इस्तेमाल कर रहा है, जबकि उसे पता है कि कैमरों का फोकस उसी पर है? ग्रुप ने इस इशारे को 'नियो-नाजी' करार दिया, यानी हिटलर और उसकी नाजी पार्टी की नफरती विचारधारा को बढ़ावा देने वाला।

मामले ने तूल पकड़ लिया। दुनिया भर में कई फुटबॉल फैंस और मानवाधिकार संगठनों ने इस पर तीखी आपत्ति जताई। विवाद इतना गहराया कि फीफा को जांच बिठानी पड़ी। दरअसल फीफा जैसे बड़े संगठन 'नस्लवाद' को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाते हैं। हालांकि इवांस से पूछताछ के बाद फीफा ने बयान जारी करके कहा कि उसे इस बात का कोई सबूत नहीं मिला है कि VAR अधिकारी का ये इशारा रेसिस्ट था। इस तरह ये मामला तो खत्म हो गया, लेकिन ये सवाल कुछ लोगों के मन में घुमड़ता रहा कि आखिर इस इशारे में ऐसा क्या है कि इतना विवाद खड़ा हो गया।

कैसे हुई ओके की शुरुआत

'OK' शब्द की उत्पत्ति कैसे हुई, इसे लेकर कई सिद्धांत हैं। हालांकि, कुछ इतिहासकार सबसे प्रामाणिक दस्तावेजी प्रमाण 19वीं सदी के अमेरिका का मानते हैं। 1830 के दशक में बोस्टन और न्यूयॉर्क के समाचार पत्रों में शब्दों की जानबूझकर गलत वर्तनी (Misspelling) करके उनके संक्षिप्त रूप (Abbreviations) बनाने का एक चलन चला था। merriam webster डिक्शनरी और History.com जैसी बेवसाइटों के मुताबिक, 23 मार्च 1839 को 'Boston Morning Post' में पहली बार “O.K.” शब्द छपा, जो कि “Oll Korrect” (All Correct का मजाकिया रूप) का संक्षिप्त रूप था। कहा जाता है कि इसी के बाद OK प्रचलन में आ गया।

बच्चों के गेम से क्या लिंक है?

फीफा के मैच में वीडियो रेफरी इवांस ने जो इशारा किया, लगभग वैसा ही इशारा बच्चे लंबे अरसे से 'सर्कल गेम' या “गॉचा” खेल में करते रहे हैं। इसमें कोई बच्चा कमर के नीचे अंगूठे और उंगलियों से ओके जैसा इशारा करता है। “OK” का इशारा आमतौर पर तर्जनी उंगली और अंगूठे से घेरा बनाकर किया जाता है, जबकि बाकी तीन उंगलियां फैली रहती हैं। बच्चा अपनी कमर के नीचे उल्टा करके यह इशारा बनाता है और दूसरों को उसे देखने के लिए उकसाता है। जो बच्चा इसे देखता है, उसके कंधे पर मुक्का मारा जाता है। यह खेल 2000 के दशक की शुरुआत में टीवी सिटकॉम “मैल्कम इन द मिडल” से मशहूर हुआ था।

धार्मिक-आध्यात्मिक कनेक्शन

प्राचीन काल से हिंदू परंपरा में ओके से मिलती-जुलती हस्त मुद्रा कई मायनों में प्रयोग की जाती रही है। इसे `ज्ञान मुद्रा या चिन्मय मुद्रा भी कहते हैं। इस मुद्रा को आत्मा और परमात्मा का मिलन, ध्यान और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। बौद्ध धर्म से जुड़ी मूर्तिकलाओं में भगवान बुद्ध को कई बार ऐसी ही हस्त मुद्रा में दर्शाया गया है। इसे 'वितर्क मुद्रा' कहा जाता है। इसे बुद्ध की शिक्षाओं, तर्क और ज्ञान के प्रवाह का प्रतीक माना जाता है। भारत के अलावा थाईलैंड, म्यांमार आदि देशों में भगवान बुद्ध की कई प्राचीन प्रतिमाओं में यह मुद्रा स्पष्ट देखी जा सकती है।


प्राचीन ग्रीक और रोमन वक्ता (Orators) सार्वजनिक भाषण देते समय विचारों पर जोर देने के लिए इस मुद्रा का उपयोग किया करते थे। इसे 'Ring Gesture' कहा जाता था। इसका इस्तेमाल प्यार और स्नेह दर्शाने के लिए किया जाता था।

जब अंगूठा और तर्जनी उंगली मिलती है तो…

यहां सवाल ये है कि सबकुछ ठीक या सहमति जताने के लिए इस्तेमाल होने वाला एक सीधा-सादा उंगलियों का इशारा 'वाइट सुप्रीमेसी' (गोरे लोगों की श्रेष्ठता) से कैसे जुड़ गया? 'OK' जेस्चर पिछले कुछ सालों में ग्लोबल लेवल पर 'वाइट पावर' (W और P की आकृति) के प्रतीक के रूप में विवादों में रहा है। जब अंगूठा और तर्जनी उंगली का सिरा मिलाया जाता है तो वह O या P जैसी आकृति बनाता है, और बाकी 3 उंगलियां सीधी रहती हैं, जिसे W की तरह भी देखा जा सकता है।

OK जेस्चर रेसिस्ट कैसे बन गया?

न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट की मानें तो इस इशारे के नस्लीय होने की अफवाह 2017 में एक ऑनलाइन मैसेज बोर्ड 4chan के यूजर्स ने फैलाई थी। उन्होंने एक ट्रोलिंग कैंपेन शुरू किया ताकि वामपंथी पत्रकारों और एक्टिविस्ट्स को यकीन दिलाया जा सके कि हाथ का यह इशारा असल में 'वाइट-पावर' का गुप्त प्रतीक है। कई मीडिया संगठनों और एंटी-डिफेमेशन लीग जैसे अधिकार समूहों ने भी इस बात पर यकीन कर लिया।

OK जेस्चर को अमेरिका के श्वेत वर्चस्ववादी और धुर दक्षिणपंथी समूह कू क्लक्स क्लान (Ku Klux Klan) की पोशाक जैसे कथित नफरती प्रतीकों की सूची में जोड़ा जाने लगा। अमेरिका के नागरिक अधिकार संगठन एंटी डिफेमेशन लीग (ADL) ने 2019 में इसे हेट सिंबल की लिस्ट में शामिल कर दिया। उसी साल न्यूजीलैंड में क्राइस्टचर्च मस्जिद में गोलीबारी करने के आरोपी ने कोर्ट में पेशी के दौरान इसी तरह का जेस्चर दिखाया, तो उस विवाद ने भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा था। न्यूजीलैंड में गोलीबारी के आरोपी ने कोर्ट में ये हैंड जेस्चर बनाया था। Photo : DPA

चरमपंथियों का गुप्त कोड?

अक्सर इंटरनेट और वैश्विक संस्कृतियों में कुछ सामान्य दिखने वाले इशारों या मीम्स को कुछ चरमपंथी समूहों द्वारा अपने गुप्त कोड या प्रतीक के रूप में अपना लिया जाता है। तब से कई मौके ऐसे आए हैं, जब लोग इस तरह का इशारा करने वाले लोगों को एक्टिविस्ट संगठनों की आलोचना का सामना करना पड़ा है। उन पर नस्लवाद के आरोप लगे हैं। कुछ मामलों में तो उन्हें नौकरी से हाथ धोना पड़ा है या वेन्यू में उनके आने पर रोक लगा दी गई है।

पेरिस ओलंपिक में भी हुआ था विवाद

2024 के पेरिस ओलिंपिक में महिलाओं के स्ट्रीट स्केटिंग फाइनल के दौरान एक अधिकारी ने बैकग्राउंड में ‘OK जेस्चर’ दिखाया था। उसने अपने हाथ को बगल में रखते हुए दो बार ये हरकत दोहराई। यह घटना टीवी कैमरे में कैद हो गई। इस जेस्चर को वाइट सुप्रीमेसी का प्रतीक माना गया। इसके बाद अधिकारी की मान्यता रद्द कर उसे वापस भेज दिया गया। वह अधिकारी ओलिंपिक ब्रॉडकास्टिंग सर्विस से जुड़ा था।

UEFA प्रतियोगिताओं में भी कई दर्शकों और खिलाड़ियों पर नस्लीय या अति दक्षिणपंथी प्रतीकों के प्रदर्शन के आरोप लगे। कई बार OK Gesture को संदिग्ध माना गया, लेकिन कार्रवाई आमतौर पर संदर्भ देखकर की गई।

IOC को जारी करनी पड़ी गाइडलाइन

खेल आयोजन में विवाद से बचने को लेकर टोक्यो ओलिंपिक के दौरान आईओसी के नियम 50 को लेकर खास निर्देश दिए गए थे। 'नियम 50' (Rule 50) की इस गाइडलाइन का उद्देश्य खेल के मैदान, मेडल सेरेमनी और ओलंपिक विलेज को किसी भी तरह के राजनीतिक, धार्मिक या नस्लीय विवादों से दूर रखना था। खेल गांव और मेडल सेरेमनी के दौरान एथलीटों को खासतौर से ब्रीफ किया गया था कि वे पोडियम पर 'ओके' जैसे इशारे न करें, क्योंकि कुछ देशों और तबकों में इसकी अलग और विवादित व्याख्या की जा सकती है।

ओलंपिक चार्टर का नियम 50 यह तय करता है कि ओलंपिक के किसी भी आयोजन स्थल या क्षेत्र में कोई भी ऐसा प्रदर्शन नहीं किया जा सकता, जो राजनीतिक, धार्मिक और नस्लीय दुष्प्रचार माना जा सके। गाइडलाइन के अनुसार, इन हरकतों को 'विरोध प्रदर्शन' माना जाएगा, जिसकी अनुमति नहीं है:

  • कोई भी राजनीतिक संदेश दिखाना, जैसे कि कोई तख्ती, साइन दिखाना या बाजू पर पट्टी/आर्मबैंड पहनना
  • राजनीतिक संदर्भ वाले इशारे करना, जैसे कि हाथ से कोई खास इशारा करना या घुटने के बल बैठना आदि।
  • पदक या खेल समारोह के तय नियमों और प्रोटोकॉल को मानने से इनकार कर देना।

ये नियम सिर्फ खिलाड़ियों और एथलीटों पर ही नहीं, बल्कि ओलंपिक में शामिल हर व्यक्ति पर लागू होते हैं। इसमें सहभागी देशों के नेता जैसे कि राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री, कोच, ट्रेनर और अन्य अधिकारी भी शामिल हैं। यहां तक कि मेजबान देश के राष्ट्राध्यक्ष को भी उद्घाटन या समापन समारोह में पहले से तय शब्दों के अलावा, कोई अन्य भाषण या टिप्पणी करने की अनुमति नहीं होती है।

हाल के वर्षों में इंटरनेशनल ओलिंपिक कमेटी ने खिलाड़ियों के राजनीतिक या वैचारिक संकेतों पर अधिक सतर्क रुख अपनाया है। इसलिए किसी भी विवादास्पद समझे जाने वाले हाथ के संकेत की जांच की संभावना रहती है, भले ही उसका उद्देश्य अलग हो।

वर्ल्ड कप विवाद के मद्देनजर 'OK' जेस्चर को एक अलग ही नजरिए से देखा गया है। यह पूरा घटनाक्रम दिखाता है कि किस तरह समय और संदर्भ, किसी सामान्य संकेत का अर्थ पूरी तरह बदल सकते हैं। ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर जाने-अनजाने में किया गया छोटा सा इशारा एक तबके में बड़े विवाद की वजह बन सकता है।

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