
‘RT हिंदी’ वेबसाइट को अब रोजाना पढ़ा करूंगी…
भारत और रूस के रिश्ते दशकों पुराने हैं। इन रिश्तों की कहानी सिर्फ सरकारों, समझौतों और कूटनीतिक मुलाकातों की नहीं है। बीच में एक ऐसा रिश्ता भी है, जो बिना किसी आधिकारिक दस्तावेज के लोगों को जोड़ता आया है और वो है- भाषा और संस्कृति का रिश्ता।
RT हिंदी वेबसाइट लॉन्च के मौके पर हमारे संवाददाता रूस की यूनिवर्सिटियों में हिंदी सीख रहे रूसी छात्रों से लेकर मॉस्को में रह रहे भारतीयों तक पहुंचे और उनसे बात की। रूस में कई लोगों के लिए हिंदी दोनों देशों के बीच संवाद का एक स्वाभाविक माध्यम बन चुकी है। ऐसे में RT हिंदी की शुरुआत को लेकर रूस में उत्साह की वजह सिर्फ एक नए न्यूज प्लेटफॉर्म का आना नहीं, बल्कि अपनी पसंद की भाषा में भारत-रूस से जुड़ी खबरों तक पहुंच भी है।
'हिंदी में पढ़ने को मिलेंगी खबरें'
रशियन स्टेट यूनिवर्सिटी फॉर द ह्यूमैनिटीज में पिछले 26 वर्षों से हिंदी पढ़ा रहीं प्रोफेसर इंदिरा गज़िएवा इस जुड़ाव को करीब से देखती रही हैं। उनके मार्गदर्शन में 200 से ज्यादा स्टूडेंट हिंदी की पढ़ाई पूरी कर चुके हैं। इनमें कुछ पत्रकार बने, तो कुछ भारत-रूस से जुड़ी कंपनियों में काम कर रहे हैं। इंदिरा के लिए RT हिंदी का लॉन्च उन छात्र-छात्राएं के लिए भी खास है, जो हिंदी जानते हैं और अब इसी भाषा में खबरों को सुनने, पढ़ने और समझने का नया माध्यम पा रहे हैं।
दरअसल, रूस में हिंदी सीखने वाले इन युवाओं के लिए भारत सिर्फ नक्शे पर मौजूद एक देश नहीं है। किसी को भारतीय इतिहास आकर्षित करता है, किसी को साहित्य, किसी को सिनेमा तो किसी को यहां की संस्कृति। भाषा उनके लिए इस दुनिया में प्रवेश करने का रास्ता बनती है।
RT हिंदी को लेकर रूसी स्टूडेंट्स में उत्साह
भाषा विज्ञान की छात्रा इलेना की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। वह हिंदी इसलिए सीख रही हैं क्योंकि उनके मुताबिक भाषा के जरिए किसी समाज की संस्कृति, परंपराओं और लोगों के बारे में समझ विकसित होती है। प्रेमचंद और निराला को पढ़ चुकीं इलेना आगे भारत आकर हिंदी की पढ़ाई जारी रखना चाहती हैं। RT हिंदी को लेकर उनका उत्साह इसी सांस्कृतिक जुड़ाव की अगली कड़ी दिखाई देता है। इलेना कहती हैं कि वह RT हिंदी को रोजाना पढ़ेंगी।
इसी तरह रूसी स्टूडेंट अलीना की हिंदी सीखने के बाद भारत और दक्षिण एशिया से जुड़ी खबरों में खास दिलचस्पी बनी है। उनके लिए भारत-रूस सहयोग और दोनों देशों के रिश्तों से जुड़ी खबरें भी महत्वपूर्ण हैं। RT हिंदी के आने से उन्हें ऐसी जानकारी अपनी सीखी हुई भाषा में मिलने का एक नया माध्यम मिलेगा।
यानी रूस में हिंदी की कहानी सिर्फ क्लासरूम तक सीमित नहीं है। किसी के लिए यह साहित्य से तो किसी के लिए सिनेमा से जुड़ने की भाषा है, और किसी के लिए खबरों की भाषा। मार्गरीटा भारतीय संस्कृति और खाने से प्रभावित होकर हिंदी सीख रही हैं और भारत-रूस से जुड़ी खबरें पढ़ना पसंद करती हैं। वेरोनिका भारतीय अखबारों और समाचारों के साथ बॉलीवुड की फिल्मों में दिलचस्पी रखती हैं, जबकि एलिज़ावेता के लिए भारत का इतिहास और संस्कृति हिंदी सीखने की बड़ी वजह है।
लेकिन कहानी का दूसरा पहलू रूस में रह रहे भारतीयों का है। उनके लिए हिंदी में रूस की खबरें मिलना सिर्फ सुविधा नहीं, कई बार जरूरत भी है।
‘रूस को अपनी भाषा में बेहतर समझ पाएंगे’
मॉस्को में पढ़ाई कर रहीं भारतीय छात्रा किंजल पंचाल बताती हैं कि रूस में रहने वाले बहुत से भारतीय रूसी भाषा नहीं जानते। ऐसे में हिंदी में खबरें मिलने से वे रूस और मॉस्को के हालात को ज्यादा आसानी से समझ सकेंगे। यानी जिस भाषा को रूसी स्टूडेंट भारत को समझने के लिए सीख रहे हैं, वही भाषा भारतीय प्रवासियों के लिए रूस को समझने का माध्यम बन रही है।
मॉस्को में पढ़ाई कर रहीं जाह्नवी शर्मा भी इसी जरूरत की ओर इशारा करती हैं। उनका मानना है कि हिंदी में समाचार उपलब्ध होने से रूस में रहने वाले ही नहीं, भारत में बैठे लोग भी रूस को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे। जब जानकारी अपनी भाषा में आसानी से उपलब्ध हो, तो किसी दूसरे देश को समझने की दूरी भी कुछ कम हो जाती है।
यही वजह है कि भारत-रूस संबंधों को सिर्फ राजनयिक रिश्तों के बजाय पीपल-टू-पीपल कनेक्शन के तौर पर देखने वाले लोग भी RT हिंदी को महत्वपूर्ण मान रहे हैं।
रूस की हिंदू सोसाइटीज काउंसिल के अध्यक्ष संजीत कुमार झा पिछले 37 वर्षों से रूस में रह रहे हैं। उन्होंने दोनों देशों के रिश्तों को बदलते और मजबूत होते देखा है। उनके मुताबिक, सांस्कृतिक और राजनयिक संबंधों को गहरा करने के लिए आम लोगों के बीच संपर्क जरूरी है। हिंदी में रूस से जुड़ी जानकारी मिलने से भारतीयों की रूस को जानने की उत्सुकता बढ़ सकती है और इसका असर पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर भी पड़ सकता है।
दिशा सोसाइटी के प्रेसिडेंट डॉ. रामेश्वर सिंह भी भाषा को इसी पुल के रूप में देखते हैं। उनके मुताबिक, किसी देश की भाषा को अनुवाद के जरिए समझने और उसे सीधे महसूस करने में फर्क होता है। हिंदी में रूस की खबरें, संस्कृति, वैज्ञानिक सहयोग और पर्यटन से जुड़ी जानकारियां अब ज्यादा बड़े भारतीय दर्शक वर्ग तक पहुंच सकती हैं।
और शायद इसी जुड़ाव की सबसे दिलचस्प मिसाल करीब पांच दशक पुरानी है।
और गहरी होगी भारत-रूस की दोस्ती
विनय शुक्ला वरिष्ठ पत्रकार हैं। वह बताते हैं कि जब वह मॉस्को यूनिवर्सिटी में पढ़ते थे और रेडियो मॉस्को के हिंदी विभाग से जुड़े थे, तब भारत से श्रोताओं के पत्र आया करते थे। एक श्रोता की इच्छा थी कि वह दिन आए, जब रूस की खबरें सिर्फ रेडियो पर ही न सुनी जाएं, बल्कि टीवी पर भी देखी जा सकें। आज RT हिंदी की शुरुआत को वह उसी पुराने सपने के पूरा होने से जोड़ते हैं। उनके मुताबिक, यह माध्यम भारत और रूस के लोगों की दोस्ती को और गहरा कर सकता है।
इस पूरे जुड़ाव में एक और दिलचस्प बात है- आज तकनीक ने उस दूरी को और कम कर दिया है, जो कभी भाषा और भौगोलिक दूरी की वजह से बनी रहती थी। मॉस्को में काम कर रहे रवि कौल बताते हैं कि हिंदी में कंटेंट मिलने से मोबाइल पर ही रूस के इतिहास, घटनाओं और अलग-अलग मुद्दों से जुड़ी जानकारी हासिल करना आसान हो गया है। वहीं रूस में काम कर रहे भारतीय शेफ सुशील कुमार का मानना है कि यह प्लेटफॉर्म छात्रों और भारतीय प्रवासियों के लिए खास तौर पर उपयोगी होगा।
मॉस्को में रूसी भाषा सीख रहे भारतीय छात्र अमित सिंह इस रिश्ते को एक और दिशा में देखते हैं। उनके मुताबिक, हिंदी के जरिए रूसी लोग भारत की विविध संस्कृति को बेहतर समझ सकते हैं और भारतीयों को भी रूस की संस्कृति अपनी भाषा में जानने का मौका मिलेगा।
यानी RT हिंदी को लेकर सामने आई इन आवाजों में सिर्फ एक न्यूज प्लेटफॉर्म के लॉन्च की खुशी नहीं है। इनमें एक पुराना सांस्कृतिक रिश्ता है, हिंदी सीखने वाले नए रूसी युवाओं की उत्सुकता है, रूस में रह रहे भारतीयों की अपनी भाषा में जानकारी पाने की जरूरत है और उन लोगों की उम्मीद है, जो मानते हैं कि भारत और रूस की दोस्ती सिर्फ सरकारों के बीच नहीं, बल्कि आम लोगों के बीच भी मजबूत होनी चाहिए।




