
भारत और रूस के रिश्ते कई मोर्चों पर मजबूत हैं, लेकिन डॉलर में व्यापार को लेकर दोनों देशों की सोच कुछ हद तक अलग है। रूस लंबे समय से डॉलर पर निर्भरता कम करने की बात करता रहा है। भारत में रूस के डिप्टी एम्बेसडर रोमन बाबुश्किन ने RT हिंदी पर अपने पहले इंटरव्यू में इसे लेकर भी रूस का रुख साफ किया।
RT India की न्यूज हेड रुनझुन शर्मा ने रोमन बाबुश्किन से सवाल पूछा कि रूस डी-डॉलराइजेशन की बात करता है, लेकिन भारत फिलहाल पूरी तरह इस रास्ते पर नहीं जाना चाहता। ऐसे में अलग-अलग सोच रखने वाले दो दोस्त एक ही मेज पर कैसे साथ चलेंगे?
भारत में रूस के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन बाबुश्किन ने कहा कि उनके मुताबिक यह विरोधाभास उतना बड़ा नहीं है, क्योंकि डी-डॉलराइजेशन अब एक वैश्विक ट्रेंड बन रहा है। उन्होंने कहा कि डॉलर के इस्तेमाल के तरीके की वजह से उस पर भरोसा कम हो रहा है। डॉलर को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करना जब शुरू किया गया, तब उस पर भरोसा कम हुआ। ऐसे में देशों के लिए अपनी अर्थव्यवस्था और आपसी व्यापार को सुरक्षित रखना जरूरी है।
राष्ट्रीय मुद्राओं में ज्यादा व्यापार पर जोर
बाबुश्किन ने हिंदी में कहा कि भारत और रूस के बीच व्यापारिक सहयोग को सुरक्षित बनाने के लिए राष्ट्रीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ाना चाहिए। उनका कहना था कि दोनों देशों को ऐसी व्यवस्था की ओर बढ़ना चाहिए, जिसमें आपसी लेनदेन के लिए राष्ट्रीय मुद्राओं का ज्यादा इस्तेमाल हो सके। उनका साफ संकेत था कि वह इस सवाल को भारत और रूस के बीच मतभेद के बजाय बदलती वैश्विक आर्थिक व्यवस्था से जोड़कर देखते हैं।
अलग सोच के बावजूद रिश्तों में दबाव नहीं
इसी इंटरव्यू में बाबुश्किन ने भारत-रूस रिश्तों को लेकर कहा कि दोनों देशों के संबंध उनके राष्ट्रीय हितों के मुताबिक आगे बढ़ते हैं और इनमें किसी तरह का दबाव नहीं है।
यही बात डॉलर के सवाल पर भी उनके जवाब का आधार दिखाई देती है। रूस अपनी तरफ से राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने को जरूरी मानता है, लेकिन बाबुश्किन ने भारत पर यही रास्ता अपनाने के लिए दबाव डालने जैसी कोई बात नहीं कही।
व्यापार बढ़ाने के लिए और क्या कर रहे भारत-रूस?
बाबुश्किन ने द्विपक्षीय व्यापार को लेकर वैकल्पिक पेमेंट सिस्टम का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दोनों देश वैकल्पिक भुगतान प्रणाली विकसित करने पर काम कर रहे हैं। इसके अलावा मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर बातचीत शुरू हुई है और व्यापारिक मंच भी आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने फिनटेक और बीमा क्षेत्र में सहयोग का भी जिक्र किया और माना कि इस दिशा में अभी और काम करने की जरूरत है।
इस तरह डॉलर पर भारत और रूस का नजरिया पूरी तरह एक जैसा न होने के सवाल पर रूसी राजनयिक का जवाब यह है कि दोनों देशों का जोर व्यापार को सुरक्षित रखने और राष्ट्रीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ाने पर हो सकता है, बिना एक-दूसरे पर अपनी नीति थोपे।

सोवियत दौर जैसी नजदीकी क्यों नहीं?
भारत और रूस की दोस्ती दशकों पुरानी है। सोवियत दौर में दोनों देशों के बीच सिर्फ सरकारों के स्तर पर ही नहीं, बल्कि आम लोगों के बीच भी मजबूत जुड़ाव दिखाई देता था। ऐसे में सवाल है कि क्या आज भारत और रूस के लोगों के बीच वह संपर्क कुछ कम हुआ है?
RT हिंदी से बातचीत में रूस के डिप्टी एम्बेसडर रोमन बाबुश्किन ने माना कि दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर संपर्क बढ़ाने के लिए अभी और काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में भी संस्कृति, युवाओं और छात्रों को जोड़ने के लिए कई कार्यक्रम चल रहे हैं।
लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर जोर
बाबुश्किन ने कहा कि भारत और रूस के बीच हर साल सांस्कृतिक और यूथ फेस्टिवल आयोजित किए जाते हैं। इसके अलावा छात्रों का आदान-प्रदान भी होता है। उन्होंने बताया कि ये कार्यक्रम द्विपक्षीय स्तर के साथ-साथ BRICS जैसे बहुपक्षीय मंचों पर भी होते हैं। हालांकि उन्होंने माना कि मौजूदा संपर्क पर्याप्त नहीं है। बाबुश्किन ने कहा, ‘मैं सहमत हूं कि इसे और बढ़ाना पड़ेगा।’
यानी रूस भी मानता है कि सरकारी और रणनीतिक स्तर पर रिश्तों की मजबूती के साथ-साथ दोनों देशों के आम लोगों के बीच संपर्क को और मजबूत करने की जरूरत है।

क्या रूस में भी लोकप्रिय हैं प्रधानमंत्री मोदी?
बाबुश्किन से इंटरव्यू में यह सवाल भी किया गया कि जिस तरह राष्ट्रपति पुतिन भारत में लोकप्रिय हैं, क्या प्रधानमंत्री मोदी को भी रूस में पसंद किया जाता है? इस पर बाबुश्किन ने कहा, ‘जी, हां’। बाबुश्किन ने कहा कि रूस में जब भी कोई शिखर सम्मेलन, बड़ा सम्मेलन या फोरम होता है, राष्ट्रपति पुतिन प्रधानमंत्री मोदी के बारे में अच्छी बातें कहते हैं और उनकी नीतियों और विचारों की सराहना करते हैं।
‘रूस की प्राथमिकता है मजबूत भारत’
भारत-रूस की दोस्ती इतनी मजबूत क्यों है, इस सवाल पर बाबुश्किन ने कहा कि केवल पुराना इतिहास ही इसकी वजह नहीं है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के विकास के रास्ते में भारत और रूस एक-दूसरे के पूरक हैं। मजबूत भारत रूस की प्राथमिकता है।




