रूस में भारतीय युवाओं के लिए कहां हैं सबसे ज्यादा मौके? रूसी दूतावास के डिप्टी चीफ ने बताए 3 बड़े ऑप्शन
RT हिंदी से एक्सक्लूसिव बातचीत में रूस के डिप्टी एंबेसडर रोमन बाबुश्किन ने कहा कि भारतीय युवाओं के लिए रूस में इंजीनियरिंग, एयरक्राफ्ट कंस्ट्रक्शन, शिपबिल्डिंग, AI और साइंस के क्षेत्रों में भी अवसर हैं, लेकिन सबसे ज्यादा मौके 3 क्षेत्रों में हैं।
रूस में भारतीय युवाओं के लिए कहां हैं सबसे ज्यादा मौके? रूसी दूतावास के डिप्टी चीफ ने बताए 3 बड़े ऑप्शन
रूस के डिप्टी एंबेसडर रोमन बाबुश्किन ने की RT हिंदी से खास बातचीत

भारत और रूस के रिश्तों की चर्चा अक्सर रक्षा और ऊर्जा के इर्द-गिर्द होती रही है, लेकिन आने वाले समय में दोनों देशों की साझेदारी सिर्फ इन्हीं दो क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेगी। नई दिल्ली स्थित रूसी दूतावास के डिप्टी चीफ रोमन बाबुश्किन ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आर्कटिक और अंतरिक्ष ऐसे तीन बड़े क्षेत्र हैं, जहां भारत और रूस के बीच सहयोग तेजी से आगे बढ़ सकता है।

RT इंडिया की न्यूज हेड रुनझुन शर्मा से एक्सक्लूसिव बातचीत में बाबुश्किन ने न सिर्फ दोनों देशों के बीच भविष्य के सहयोग के क्षेत्रों की बात की, बल्कि यह भी बताया कि रूस में करियर बनाने वाले भारतीय युवाओं के लिए किन क्षेत्रों में अवसर हो सकते हैं। खास बात यह रही कि रूसी राजनयिक ने पूरा इंटरव्यू हिंदी में दिया। वह अच्छी हिंदी बोल लेते हैं।

बाबुश्किन
इंजीनियरिंग, एयरक्राफ्ट कंस्ट्रक्शन, शिपबिल्डिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और विज्ञान के दूसरे क्षेत्रों में बहुत मौके हैं। लेकिन ऐसा इकोसिस्टम विकसित करना चाहिए, ताकि रूस में पढ़ाई करने वाले विदेशी विद्यार्थियों को शिक्षा के बाद रोजगार भी मिल सके।
रोमन बाबुश्किन
रोमन बाबुश्किन
भारत में रूस के डिप्टी एंबेसडर

AI, आर्कटिक और अंतरिक्ष में सबसे ज्यादा संभावना

रक्षा और ऊर्जा के अलावा भारत-रूस सहयोग की सबसे ज्यादा संभावना किन क्षेत्रों में है, इस सवाल पर बाबुश्किन ने 3A का जिक्र किया-

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस,
  • आर्कटिक और..
  • अंतरिक्ष

AI को लेकर बाबुश्किन ने कहा कि देशों के अपने राष्ट्रीय AI मॉडल होने चाहिए, ताकि उनकी तकनीकी संप्रभुता बनी रहे। उनके मुताबिक भारत और रूस इस क्षेत्र में एक-दूसरे का समर्थन कर सकते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि AI डेटा सेंटर चलाने के लिए बहुत ज्यादा ऊर्जा की जरूरत होती है और रूस इस जरूरत को पूरा करने में भारत की मदद कर सकता है। उन्होंने खास तौर पर परमाणु ऊर्जा और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर यानी एसएमआर का जिक्र किया।

आर्कटिक में कनेक्टिविटी से शिपबिल्डिंग तक मौके

आर्कटिक को लेकर बाबुश्किन ने कहा कि यहां सहयोग की संभावनाएं सिर्फ किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं। उन्होंने कनेक्टिविटी, इंफ्रास्ट्रक्चर, शिपबिल्डिंग, प्राकृतिक संसाधन, विज्ञान और प्रशिक्षण जैसे क्षेत्रों का जिक्र किया। उनके मुताबिक आर्कटिक भारत और रूस के बीच भविष्य के सहयोग का एक बड़ा क्षेत्र बन सकता है।

अंतरिक्ष सहयोग का पुराना रिश्ता, आगे भी बड़ी संभावना

अंतरिक्ष को बाबुश्किन ने भारत-रूस साझेदारी का ऐसा क्षेत्र बताया, जिसकी मजबूत ऐतिहासिक नींव पहले से मौजूद है। उन्होंने कहा कि भारत की अंतरिक्ष यात्रा की शुरुआत रूस के सहयोग से ही हुई थी, जब राकेश शर्मा सोवियत स्पेसक्राफ्ट से अंतरिक्ष में गए थे।

Rakesh Sharma File Photo
अंतरिक्ष में जाने वाले पहले भारतीय राकेश शर्मा और उनके दो सोवियत साथी।

बाबुश्किन के मुताबिक, आज भी इंजन निर्माण, नेविगेशन और गगनयान मिशन जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग जारी है। यानी अंतरिक्ष में भारत और रूस का रिश्ता सिर्फ पुराने इतिहास तक सीमित नहीं है, बल्कि मौजूदा और भविष्य की परियोजनाओं में भी इसकी भूमिका बनी हुई है।

भारतीय युवाओं के लिए रूस में कहां हैं मौके?

इंटरव्यू में बाबुश्किन से पूछा गया कि अगर कोई भारतीय युवा रूस में अपना करियर बनाना चाहता है, तो उसके लिए किन क्षेत्रों में सबसे अच्छे अवसर हो सकते हैं। उन्होंने इंजीनियरिंग, एयरक्राफ्ट कंस्ट्रक्शन, शिपबिल्डिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और विज्ञान के दूसरे क्षेत्रों का नाम लिया।

हालांकि, बाबुश्किन ने सिर्फ अवसरों की बात नहीं की। उन्होंने ऐसा इकोसिस्टम विकसित करने पर भी जोर दिया, जिससे रूस में पढ़ाई करने वाले विदेशी छात्रों को शिक्षा पूरी करने के बाद रोजगार भी मिल सके। 

सोवियत दौर जैसी नजदीकी क्यों नहीं?  

भारत और रूस की दोस्ती दशकों पुरानी है। सोवियत दौर में दोनों देशों के बीच सिर्फ सरकारों के स्तर पर ही नहीं, बल्कि आम लोगों के बीच भी मजबूत जुड़ाव दिखाई देता था। ऐसे में सवाल है कि क्या आज भारत और रूस के लोगों के बीच वह संपर्क कुछ कम हुआ है?

RT हिंदी से बातचीत में रूसी दूतावास के DCM रोमन बाबुश्किन ने माना कि दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर संपर्क बढ़ाने के लिए अभी और काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में भी संस्कृति, युवाओं और छात्रों को जोड़ने के लिए कई कार्यक्रम चल रहे हैं।

आपसी संपर्क और बढ़ाने पर जोर

बाबुश्किन ने कहा कि भारत और रूस के बीच हर साल सांस्कृतिक और युवा फेस्टिवल आयोजित किए जाते हैं। इसके अलावा छात्रों का आदान-प्रदान भी होता है। उन्होंने बताया कि ये कार्यक्रम द्विपक्षीय स्तर के साथ-साथ BRICS जैसे बहुपक्षीय मंचों पर भी होते हैं। हालांकि उन्होंने माना कि मौजूदा संपर्क पर्याप्त नहीं है। बाबुश्किन ने कहा, ‘मैं सहमत हूं कि इसे और बढ़ाना पड़ेगा।’

यानी रूस भी मानता है कि सरकारी और रणनीतिक रिश्तों की मजबूती के साथ-साथ दोनों देशों के आम लोगों के बीच संपर्क को और मजबूत करने की जरूरत है।

भारत-रूस संबंधों के 80 साल पर बड़ी तैयारी

बाबुश्किन ने इंटरव्यू में कहा कि अगले साल भारत और रूस के कूटनीतिक संबंधों के 80 साल पूरे होने जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस मौके पर कई कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी की जा रही है। बाबुश्किन ने कहा, ‘हम एक बड़ी योजना तैयार कर रहे हैं।’

उनके मुताबिक दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक कार्यक्रम, युवा फेस्टिवल और छात्र आदान-प्रदान पहले से होते हैं, लेकिन लोगों के बीच संपर्क को और बढ़ाने की जरूरत है।

इस तरह उनके इंटरव्यू से भारत-रूस संबंधों के अगले चरण की एक बड़ी तस्वीर निकलती है। बाबुश्किन ने रक्षा और ऊर्जा की पुरानी साझेदारी के साथ AI, आर्कटिक और अंतरिक्ष में नए अवसर; युवाओं के लिए शिक्षा और रोजगार के रास्ते; और दोनों देशों के लोगों को करीब लाने के लिए मीडिया और सांस्कृतिक संपर्क के विस्तार पर जोर दिया। 

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