
‘पश्चिमी देशों को लगता है कि भारत रूस के खेमे में क्यों है? वास्तव में, भारत किसी एक कैंप में नहीं है। रूस हमारा पुराना, भरोसेमंद रक्षा और ऊर्जा साझेदार है और जहां भी भारत के राष्ट्रीय हित होंगे, वहीं से हम रक्षा उपकरण और ऊर्जा खरीदेंगे।’ वरिष्ठ पत्रकार और समाचार एजेंसी ANI की प्रमुख स्मिता प्रकाश ने RT इंडिया के शो ‘इंडिया रशिया एंड दी वर्ल्ड विद रुनझुन शर्मा’ में बेबाकी से अपनी बात रखी।
दुनिया में बढ़ती ‘अपने फायदे’ वाली राजनीति के बीच भारत और रूस के रिश्ते भरोसे की ऐसी मिसाल हैं, जिसने कोल्ड वॉर से यूक्रेन युद्ध तक हर बड़े भू-राजनीतिक संकट को देखा है। पश्चिमी देशों के लगातार दबाव, प्रतिबंधों और अंतरराष्ट्रीय समीकरणों में बदलाव के बावजूद नई दिल्ली और मॉस्को के संबंध आज भी मजबूत बने हुए हैं। शायद यही वजह है कि पश्चिम को यह दोस्ती अखरती है। हां, एक सबसे बड़ा कारण यही है, जिसकी वजह से भारत की रूस नीति, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की केमिस्ट्री, पश्चिमी मीडिया का भारत को लेकर नजरिया और देश की रणनीतिक स्वायत्तता-जैसे मुद्दे लगातार वैश्विक बहस के केंद्र में बने रहते हैं।

‘रूस भारत का भरोसेमंद साथी, राष्ट्रीय हित सर्वोपरि’
भारत-रूस संबंधों पर स्मिता प्रकाश ने कहा कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से मजबूत रणनीतिक साझेदारी रही है। संकट के समय रूस हमेशा भारत के साथ खड़ा रहा है, यही वजह है कि दोनों देशों के बीच भरोसे का रिश्ता कायम है। भारत-रूस संबंधों पर पश्चिमी देशों के रुख को लेकर जब सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि पश्चिम लंबे समय से इस रिश्ते को लेकर असहज रहा है। स्मिता ने कहा, ‘उन्हें (पश्चिमी देशों को) लगता है कि भारत रूस के खेमे में क्यों है? भारत किसी एक कैंप में नहीं है। रूस हमारा पुराना, भरोसेमंद रक्षा और ऊर्जा साझेदार है। जहां भारत के राष्ट्रीय हित होंगे, वहीं से वह रक्षा उपकरण और ऊर्जा खरीदेगा।’
भारत की विदेश नीति और बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन पर अपनी राय रखते हुए स्मिता प्रकाश ने कहा कि भारत आज रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) की नीति अपनाता है। पहले इसे गुटनिरपेक्षता (Non-Alignment) कहा जाता था, अब इसे मल्टी-अलाइनमेंट कहा जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया के संघर्ष के बाद दुनिया के कई देश अपनी सुरक्षा रणनीतियों और विदेश नीति की प्राथमिकताओं पर दोबारा विचार कर रहे हैं इसलिए भारत की विदेश नीति को भी उसी संदर्भ में समझना चाहिए।
मोदी-पुतिन की 'गुड वाइब्स' ने दुनिया को दिया मैसेज: @smitaprakash
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‘India, Russia and the World’ के नए एपिसोड में RT इंडिया की हेड ऑफ न्यूज @runjhunsharmas ने ANI की एडिटर स्मिता प्रकाश से बातचीत की। इस बातचीत में भारत-रूस के प्रमुखों के बीच आपसी तालमेल पर चर्चा की गई।
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मोदी और पुतिन की केमिस्ट्री
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच व्यक्तिगत तालमेल पर पूछे गए सवाल के जवाब में स्मिता प्रकाश ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच एक अलग तरह की सहजता और सकारात्मक ऊर्जा दिखाई देती है। हालांकि, उन्होंने इसे केवल पीएम मोदी तक ही सीमित नहीं रखा। स्मिता ने बताया कि उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और राष्ट्रपति पुतिन को भी साथ काम करते देखा है और उनके बीच भी कोई असहजता नहीं थी। उनके मुताबिक, पुतिन आमतौर पर सभी राष्ट्राध्यक्षों के साथ संतुलित और संयमित व्यवहार करते हैं। हां, सार्वजनिक रूप से अपनी व्यक्तिगत भावनाएं कम ही जाहिर करते हैं।
उन्होंने आगे कहा, ‘मोदी और पुतिन के बीच अच्छी केमिस्ट्री दिखती है, लेकिन ऐसी ही सहजता प्रधानमंत्री मोदी की जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और अपने पहले कार्यकाल में डोनाल्ड ट्रंप के साथ भी देखने को मिली थी।’
स्मिता प्रकाश ने पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ का उदाहरण देते हुए कहा कि लाहौर यात्रा के दौरान मोदी और नवाज शरीफ की आत्मीयता पर भी काफी चर्चा हुई थी। उस समय दोनों नेताओं का हाथ पकड़कर साथ चलना कई लोगों को असहज लगा था। उन्होंने कहा कि शीर्ष नेताओं की सार्वजनिक बॉडी लैंग्वेज और आपसी व्यवहार केवल व्यक्तिगत नहीं होता, बल्कि वह पूरी नौकरशाही और कूटनीतिक तंत्र के लिए भी एक संदेश होता है। उनके मुताबिक, जब राष्ट्राध्यक्ष सार्वजनिक रूप से किसी तरह का सकारात्मक या नकारात्मक संकेत देते हैं, तो उसका असर नीचे तक पूरी व्यवस्था पर पड़ता है।

रूस से रिश्तों का India-US ट्रेड डील पर हुआ असर?
पिछले कुछ समय से भारत-अमेरिका व्यापार समझौते (India-US Trade Deal) पर खूब चर्चाएं हो रही हैं। भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर एक सवाल के जवाब में स्मिता ने कहा कि उन्हें भरोसा है कि दोनों देशों के बीच समझौता अंततः हो जाएगा। हालांकि, कुछ संवेदनशील मुद्दों पर बातचीत अभी भी अटकी हुई है। उन्होंने कहा कि कृषि और डेयरी ऐसे क्षेत्र हैं, जिस पर मतभेद बने हुए हैं। इसके अलावा जीएम (जेनेटिकली मॉडिफाइड) बीज-जैसे मुद्दों पर भी भारत की अपनी सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक चिंताएं हैं।
रूस के साथ भारत के संबंधों को व्यापार समझौते में बाधा बताए जाने पर स्मिता ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि यही सबसे बड़ी रुकावट है। उनके मुताबिक, भारत हमेशा अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर फैसले लेता है। पाकिस्तान-चीन की ओर इशारा करते हुए स्मिता प्रकाश ने कहा, “भारत के लिए पड़ोसी चुनौतीपूर्ण हैं। हमारी सुरक्षा जरूरतें वास्तविक हैं। जहां से भी हमें अपनी रक्षा और ऊर्जा सुरक्षा के लिए जरूरी संसाधन मिलेंगे, भारत वहीं से खरीद करेगा।” उन्होंने कहा कि व्यापार से जुड़े समझौते हमेशा ‘गिव एंड टेक’ के सिद्धांत पर आधारित होते हैं। दोनों पक्षों को कुछ रियायतें देनी पड़ती हैं और कुछ समझौते करने पड़ते हैं। ऐसे समझौते स्वाभाविक रूप से जटिल होते हैं, इसलिए इनमें समय लगता है। हालांकि, उन्होंने भरोसा जताया कि बातचीत आगे बढ़ रही है और अंततः भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता हो जाएगा।
'रूस पर भरोसा करना भारत का स्वाभाविक रुख': भारत में RT को ब्लॉक करने के अमेरिकी प्रयासों पर @smitaprakash
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‘India, Russia and the World’ के ताजा एपिसोड में ANI की एडिटर स्मिता प्रकाश ने कहा कि प्रेस की आजादी का आकलन हर देश की अपनी परिस्थितियों और समय के साथ हुए बदलावों के आधार… pic.twitter.com/p9CPEBt5PA
क्या प्रेस की आजादी को सीमित करने की कोशिश होती है?
विदेश नीति और वैश्विक राजनीति पर अपनी राय रखने के बाद बातचीत का रुख भारत में मीडिया की स्थिति और प्रेस की आजादी की ओर मुड़ गया। इस पर पूछे गए सवाल के जवाब में स्मिता प्रकाश ने कहा कि प्रेस की आजादी का मूल्यांकन दूसरे देशों और भारत के अपने इतिहास, दोनों संदर्भों में अलग-अलग तरीके से किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, “हर सरकार अपने-अपने तरीके से पत्रकारों की आजादी सीमित करने की कोशिश करती है। अगर कोई खबर सरकार के नजरिए के अनुकूल नहीं होती, तो उसे रोकने की कोशिश की जाती है।” हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया के कई देशों की तुलना में भारत में कहीं अधिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है।
‘गोदी मीडिया जैसे लेबल नए नहीं हैं’
‘गोदी मीडिया’ जैसे शब्दों पर प्रतिक्रिया देते हुए स्मिता प्रकाश ने कहा कि मीडिया को राजनीतिक लेबल देना कोई नई बात नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले अलग-अलग दौर में मीडिया को ‘कांग्रेस मीडिया’, ‘गांधी मीडिया’ और दूसरे नामों से भी पुकारा जाता था। उनका कहना था कि पत्रकारों को आलोचना से घबराने के बजाय पेशेवर मजबूती विकसित करनी चाहिए और अपनी संवेदनशीलता का इस्तेमाल बेहतर रिपोर्टिंग के लिए करना चाहिए।
क्या पश्चिमी मीडिया भारत की सही तस्वीर दिखाता है?
इंटरव्यू में पश्चिमी मीडिया की भारत कवरेज पर स्मिता प्रकाश ने कहा कि विदेशी मीडिया अक्सर सीमित बजट और सीमित ग्राउंड रिपोर्टिंग के कारण भारत की अधूरी तस्वीर पेश करता है। उन्होंने कहा कि अगर कोई पत्रकार सिर्फ विरोध-प्रदर्शनों या नकारात्मक घटनाओं को देखकर पूरे भारत का आकलन करेगा, तो उसकी तस्वीर अधूरी होगी। उन्होंने कहा, “अगर आप बेंगलुरु, हैदराबाद या चेन्नई जाएंगे, तो आपको डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग में काम करता नया भारत दिखाई देगा। भारत में एक साथ कई कहानियां चल रही हैं। किसी एक घटना के आधार पर पूरे देश की तस्वीर नहीं बनाई जा सकती।”
स्मिता प्रकाश ने कहा कि आज का भारत खुद को एक उभरती वैश्विक शक्ति के रूप में देखता है और अब भारतीय अपने विकास और महत्वाकांक्षाओं को लेकर पहले की तरह संकोच नहीं करते। उनके मुताबिक, किसी भी उभरती शक्ति को वैश्विक स्तर पर आलोचना का सामना करना पड़ता है और भारत भी इससे अलग नहीं है।
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