
भारत और रूस की दोस्ती वक्त की कसौटी पर खरी उतरी है। ये बेहद गहरे संबंध, भारतीय विदेश नीति के कई महत्वपूर्ण आयाम खासकर गुटनिरपेक्षता का आधार रहे हैं। स्वतंत्रता के बाद के दशकों में, भारत को सोवियत संघ फिर रूस से जो निरंतर समर्थन मिला, जो आपसी समझ विकसित हुई, उसने दोनों देशों के लोगों के बीच एक घनिष्ठ मित्रता और साझा सांस्कृतिक संबंधों का रूप ले लिया है।
भारत की औद्योगिक शक्ति के एक बड़े हिस्से, खासतौर से पब्लिक सेक्टर के विकास में रूसी सहयोग की अहम भूमिका रही है। रक्षा क्षेत्र के विकास में भी रूस का बहुत बड़ा योगदान है। शुरुआती दौर में व्यापार को भी रुपया आधारित ट्रेड से काफी मजबूती मिली थी। दोनों देशों के लोगों की रणनीतिक समझ और विकास को लेकर सहयोग की भावना भी काफी हद तक एक जैसी है।
भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी मुख्य रूप से पांच प्रमुख स्तंभों पर टिकी है-
राजनीति
रक्षा (Defence)
नागरिक परमाणु ऊर्जा
आतंकवाद के खिलाफ सहयोग
अंतरिक्ष संबंधी खोज एवं विकास
दोनों देश ब्रिक्स (BRICS) और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों के सदस्य हैं। RIC (रूस, भारत, चीन) से शुरुआत होकर ऐसे साझा मंचों की संख्या अब 11 तक पहुंच चुकी है।
भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सीट दिए जाने का रूस समर्थन करता है। इसके अलावा, रूस ने पर्यवेक्षक (Observer) के रूप में सार्क (SAARC) में शामिल होने की इच्छा भी जताई है।
आज जब नियम आधारित वैश्विक व्यवस्था दबाव में है और दुनिया में भारी उथल-पुथल मची है, ऐसे समय में भी हमारी दोस्ती का यह भरोसा अमूल्य है। भले ही बहुध्रुवीय व्यवस्था के नए विकल्प उभर रहे हों, लेकिन भारत और रूस कभी एक-दूसरे से दूर नहीं होंगे।
'RT हिंदी' का आगाज भारत और रूस के संबंधों और संचार का एक सामयिक और सशक्त विस्तार है। इस दूरदर्शी और दूरगामी पहल के लिए मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं।
(सलमान खुर्शीद, भारत के पूर्व विदेश मंत्री रहे हैं। RT पर 'In Conversation with Salman Khurshid' नाम से स्पेशल शो करते हैं।)




