
देशभर की बड़ी खबरें.
- 9th Sep21:21 ISTMP में मेडिकल इंटर्न का धरना खत्म, सरकार ने स्टाइपेंड में 50 फीसदी बढ़ाया

MP में मेडिकल इंटर्न का धरना खत्म© ANI मध्य प्रदेश सरकार ने बुधवार को मेडिकल इंटर्न डॉक्टरों के मासिक स्टाइपेंड में 50 फीसदी बढ़ोतरी का ऐलान किया। इसके बाद भोपाल में तीन दिन से प्रदर्शन कर रहे जूनियर डॉक्टरों ने अपना आंदोलन खत्म कर दिया।
उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने बताया कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इंटर्न डॉक्टरों के मासिक स्टाइपेंड में 50 फीसदी बढ़ोतरी के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके बाद अब उन्हें करीब 21,000 रुपये प्रति माह स्टाइपेंड मिलेगा।
सरकार ने सोमवार को प्रदर्शन कर रहे इंटर्न डॉक्टरों पर कथित लाठीचार्ज और वॉटर कैनन के इस्तेमाल के मामले में दो पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच कर दिया है। यानी दोनों को सक्रिय ड्यूटी से हटा दिया गया है।
जूनियर डॉक्टरों ने सोमवार को सरकारी हमीदिया अस्पताल के गेट पर प्रदर्शन शुरू किया था। इस दौरान पुलिस ने उन्हें हटाने के लिए वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया। आरोप है कि कार्रवाई में कुछ प्रदर्शनकारी डॉक्टर घायल भी हुए।
मेडिकल इंटर्न डॉक्टर मासिक स्टाइपेंड को 14,337 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये करने की मांग कर रहे थे।
उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा, “हमने उनके साथ अच्छी बातचीत की और इस मुद्दे का समाधान निकाल लिया है। प्रदर्शन कर रहे डॉक्टर भी फैसले से काफी संतुष्ट हैं। स्टाइपेंड में 50 फीसदी बढ़ोतरी की गई है। छात्रों के खिलाफ अनावश्यक कार्रवाई करने वाले दोनों पुलिस अधिकारियों को पुलिस लाइन भेज दिया गया है। किसी भी छात्र के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया जाएगा।”
- 9th Sep21:12 ISTरेलवे की 5 मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी, 10,021 करोड़ रुपये होंगे खर्च

प्रतीकात्मक तस्वीर© ANI प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने रेलवे की पांच मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं पर कुल 10,021 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। करीब 540 किलोमीटर लंबी इन परियोजनाओं का काम तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना के 17 जिलों में होगा।
मंजूर परियोजनाओं में अरक्कोनम-रेनिगुंटा के बीच 77 किलोमीटर की तीसरी और चौथी लाइन, व्हाइटफील्ड-बांगरपेट के बीच 47 किलोमीटर की तीसरी और चौथी लाइन, होसुर-ओमालूर के बीच 147 किलोमीटर का दोहरीकरण और सलेम-करूर-डिंडीगुल के बीच 159 किलोमीटर का दोहरीकरण शामिल है। इसके अलावा सिकंदराबाद के घाटकेसर से काजीपेट तक 110 किलोमीटर की मल्टी-ट्रैकिंग भी की जाएगी।
2,121 गांवों की कनेक्टिविटी में सुधार
सरकार के मुताबिक, इन परियोजनाओं से करीब 2,121 गांवों की रेल कनेक्टिविटी बेहतर होगी। इन गांवों में करीब 52 लाख लोग रहते हैं। अतिरिक्त रेल लाइनें बनने से व्यस्त रूट पर ट्रेनों की आवाजाही के लिए क्षमता बढ़ेगी और मालगाड़ियों के संचालन में भी आसानी होगी।
इन रूटों का इस्तेमाल कोयला, सीमेंट, लोहा-इस्पात, कंटेनर, ऑटोमोबाइल, अनाज, पेट्रोलियम उत्पाद और उर्वरक जैसी वस्तुओं की ढुलाई के लिए भी होता है। रेलवे के अनुमान के मुताबिक, इन परियोजनाओं से हर साल करीब 4.7 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढोने की क्षमता तैयार होगी।
पर्यटन स्थलों तक भी बेहतर होगी रेल कनेक्टिविटी
इन परियोजनाओं से दक्षिण भारत के कई प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों तक रेल कनेक्टिविटी को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। इनमें तिरुपति, तिरुत्तानी का सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर, तिरूचनूर का श्री पद्मावती अम्मावारी मंदिर, कोलार गोल्ड फील्ड्स, होगेनक्कल फॉल्स, होसुर किला, मेट्टूर बांध और कोडाइकनाल हिल्स समेत कई प्रमुख स्थल शामिल हैं।
रेलवे के मुताबिक, परियोजनाओं को प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य अलग-अलग परिवहन माध्यमों के बीच बेहतर संपर्क और माल ढुलाई की क्षमता बढ़ाना है।
तेल आयात और कार्बन उत्सर्जन घटाने का दावा
सरकार का अनुमान है कि इन परियोजनाओं से रेलवे के जरिए माल और यात्रियों की आवाजाही बढ़ने पर सड़क परिवहन पर निर्भरता कम होगी। इससे हर साल करीब 8 करोड़ लीटर तेल की बचत और लगभग 42 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है। सरकार ने इसे करीब 2 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर बताया है।
- 9th Sep21:00 ISTमैरिटल रेप: सुप्रीम कोर्ट में अगले महीने से होगी अंतिम सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट पत्नी के साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाने को बलात्कार का अपराध माना जाए या नहीं, इस अहम कानूनी सवाल पर सुप्रीम कोर्ट अगले महीने से अंतिम सुनवाई शुरू करेगा। अदालत को यह तय करना है कि वैवाहिक दुष्कर्म को मिली कानूनी छूट संविधान की कसौटी पर खरी उतरती है या नहीं।
दरअसल, भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 375 के अपवाद-2 में पति को अपनी पत्नी के साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाने के मामले में बलात्कार के आरोप से छूट दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट अब इसी प्रावधान की संवैधानिक वैधता पर विचार कर रहा है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह सवाल भी उठाया कि जब तक इस कानूनी छूट की वैधता पर अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक क्या ऐसे मामले में पति के खिलाफ मुकदमा चलाया जा सकता है, जिसमें मौजूदा कानून के तहत उसे स्पष्ट छूट मिली हुई है।
अदालत ने टिप्पणी की कि वह निश्चित रूप से पीड़ितों की सुरक्षा करेगी, लेकिन अगर धारा 375 के तहत किसी व्यक्ति को स्पष्ट कानूनी संरक्षण मिला हुआ है, तो क्या उसके खिलाफ मुकदमा चलाना अदालत के अधिकार क्षेत्र में आता है?
इस मामले का संबंध कर्नाटक हाईकोर्ट के मार्च 2022 के एक फैसले से भी है। हाईकोर्ट ने पत्नी का यौन उत्पीड़न करने के आरोपी पति के खिलाफ दर्ज बलात्कार का मामला रद्द करने से इनकार कर दिया था। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। अब शीर्ष अदालत इस अपील पर भी सुनवाई करेगी।
केंद्र सरकार का क्या कहना है?
लाइव लॉ के मुताबिक, केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि अगर वैवाहिक दुष्कर्म यानी मैरिटल रेप को अपराध के दायरे में लाना है तो इसका फैसला संसद को करना चाहिए, अदालत को नहीं।
इससे पहले केंद्र सरकार ने 2024 में सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर वैवाहिक दुष्कर्म को अपराध घोषित करने का विरोध किया था। सरकार ने इसके पीछे कई तर्क दिए थे—
- यह मामला कानूनी से ज्यादा सामाजिक प्रकृति का है।
- शादी के भीतर बलात्कार जैसे कठोर आपराधिक प्रावधान लागू करना अत्यधिक सख्त और असंगत हो सकता है।
- शादीशुदा महिलाओं को यौन हिंसा से बचाने के लिए मौजूदा कानूनों में पहले से कई प्रावधान मौजूद हैं।
- यह मामला संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है। इस पर व्यापक दृष्टिकोण अपनाने के लिए सभी राज्यों के साथ विचार-विमर्श की जरूरत है।
वहीं, याचिकाकर्ताओं और पीड़ित महिलाओं की ओर से पेश वकीलों का तर्क है कि शादी के बाद भी महिला की शारीरिक स्वायत्तता और सहमति का अधिकार बरकरार रहता है। उनका कहना है कि किसी कृत्य को सिर्फ इसलिए बलात्कार के दायरे से बाहर नहीं रखा जा सकता क्योंकि पीड़ित महिला आरोपी की पत्नी है।
याचिकाकर्ताओं का यह भी तर्क है कि वैवाहिक दुष्कर्म को अपराध के दायरे से बाहर रखना संविधान के अनुच्छेद 21, यानी जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार, का उल्लंघन है।
- 9th Sep15:59 ISTPM मोदी के 25 साल के सार्वजनिक जीवन पर BJP का ‘सेवा संकल्प’, 17 सितंबर से अभियान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी© X/@narendramodi प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 साल पूरे होने और उनके जन्मदिन के मौके पर बीजेपी महीने भर का ‘सेवा संकल्प’ अभियान शुरू करेगी। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने बुधवार को पार्टी मुख्यालय में इसकी घोषणा की। उन्होंने बताया कि यह अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलेगा। इस दौरान देशभर में सेवा और जनकल्याण से जुड़े कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
17 सितंबर को रक्तदान शिविर से होगी शुरुआत
नितिन नवीन ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन ‘सेवा दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा। अभियान की शुरुआत 17 सितंबर को देशभर में रक्तदान शिविरों के आयोजन से होगी। इसी दिन शाम 7 बजे ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा। नवीन ने कहा,
"प्रथम दिन यानी 17 सितंबर को रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा। उसी दिन शाम को सात बजे 'आशीर्वाद का दीया' कार्यक्रम होगा। इस पूरे कार्यक्रम का स्पष्ट उद्देश्य यह दर्शाना है कि पिछले 25 वर्षों में प्रधानमंत्री जी ने निष्ठा के साथ जनसेवा की है।"
नितिन नवीन के मुताबिक, इस पूरे कार्यक्रम का स्पष्ट उद्देश्य है कि पिछले 25 वर्षों में प्रधानमंत्री जी ने जो निष्ठावान जनसेवा की है। उसके प्रति आभार व्यक्त हम जन आशीर्वाद सामूहिक प्रदर्शन के रूप में करेंगे। प्रत्येक लाभार्थी परिवारों के द्वारा प्रधानमंत्री जी को आशीर्वाद के रूप में ये दीप जलाया जाएगा।
बीजेपी के मुताबिक, ‘सेवा संकल्प’ अभियान के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों में हुए बदलावों और उनकी जनसेवा से जुड़े कार्यों को लोगों तक पहुंचाया जाएगा।
'भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप नेशन'
बीजेपी अध्यक्ष ने कहा, "स्टार्टअप और यूनिकॉर्न के माध्यम से भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप नेशन बना है। स्टार्टअप एवं यूनिकॉर्न में हमारे युवा आगे आकर केवल Job seekers नहीं, बल्कि Job Givers बनकर उभरे हैं।"
इसके साथ ही उन्होंने कहा, आज खेलो इंडिया और फिट इंडिया के माध्यम से भारत का युवा हर क्षेत्र में प्रतिनिधित्व कर रहा है।
- 9th Sep15:38 ISTBRICS समिट का पूरा शेड्यूल जारी
BRICS समिट 12-13 सितंबर को दिल्ली के भारत मंडपम में होगा। विदेश मंत्रालय ने कार्यक्रम का पूरा शेड्यूल जारी किया है। 12 सितंबर को BRICS समिट का पहला दिन नेताओं के भारत मंडपम पहुंचने के साथ शुरू होगा। दोपहर 2 बजे से BRICS सदस्य देशों के प्रमुखों का आगमन होगा। इसके बाद 2:35 बजे बंद कमरे में बैठक होगी। बैठक का विषय इंक्लूसिव ग्लोबल गवर्नेंस एंड स्ट्रेंथनिंग मल्टीलेटरलिज्म है। शाम 4:25 बजे देशों के प्रमुख 'भारत इनोवेट्स एग्जिबिशन' का दौरा करेंगे। फिर 5:05 बजे फैमिली फोटो और 5:10 बजे जॉइंट ट्री प्लांटेशन होगा। शाम 7:30 बजे प्रधानमंत्री की ओर से गाला डिनर रखा गया है।
13 सितंबर को सुबह 9:55 बजे पार्टनर देशों और 'आउटरीच प्रोग्राम' के तहत अन्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों/सरकार प्रमुखों का भारत मंडपम में आगमन होगा। इसी दिन सुबह 10:35 बजे फैमिली फोटो का कार्यक्रम होगा। इसके बाद सुबह 10:50 बजे सम्मेलन का महत्वपूर्ण ओपन सेशन शुरू होगा।
सुपरजेट इंजन से ‘फ्लाइंग एम्बुलेंस’ तक, दिल्ली में रूस का ‘टेक शो’

दिल्ली में शुरू हुआ INNOPROM. India नई दिल्ली के भारत मंडपम कॉम्प्लेक्स में ‘इनोप्रोम इंडिया’ नाम से इंटरनेशनल इंडस्ट्रियल प्रदर्शनी सज चुकी है। रूस और भारत की 120 से ज्यादा कंपनियां इसमें भाग ले रही हैं। BRICS समिट से पहले इस प्रदर्शनी में AI, एनर्जी, एविएशन, ट्रांसपोर्ट, डिजिटल टेक्नोलॉजी और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में हुई नई प्रगति को प्रदर्शित किया ज रहा है।
इस इवेंट में रूस के PD-8 इंजन का मॉडल दिखाया गया है, जो कम फ्यूल लेकर ज्यादा पावर देता है। रूस के सुपरजेट SJ-100 का मॉडल भी भारत मंडपम में देखने को मिलता है। इस प्लेन में पीडी-8 इंजन का इस्तेमाल किया जाता है। इस इंजन के बारे में बता रही हैं आरटी इंडिया की रिपोर्टर रुजुता थेटे
इसके साथ ही एग्जीबिशन में फ्लाइंग एंबुलेंस भी प्रदर्शित किया गया है। दरअसल, रूस का Ka-226T हेलिकॉप्टर फ्लाइंग एम्बुलेंस में बदल सकता है। इसकी सीटें हटाकर इसमें दो से तीन स्ट्रेचर लगाए जा सकते हैं। इसके रोटर ब्लेड को मोड़ने की सुविधा भी है, जिससे यह कॉम्पैक्ट हो जाता है और युद्धपोत पर आसानी से स्टोर किया जा सकता है।
भारत मंडपम में रूस की मेडिकल तकनीक की भी खूब चर्चा है। मेड विजन एप्लीकेशन का यूज कर किसी भी मरीज की हार्ट बीट, सीपीआर की फंक्शनिंग की जानकारी देगी। इसके अलावा एक रिपोर्ट भी मिलेगी जिससे मेडिकल छात्रों को पता चल जाएगा कि इस तकनीक का सही उपयोग हो रहा है या नहीं। इसके बारे में विस्तार से बात रही हैं आरटी इंडिया की रिपोर्टर रिद्धिमा केड़िया
- 9th Sep15:16 IST'मजिस्ट्रेट नोटिस कैसे जारी कर सकते हैं?' CJP प्रोटेस्ट को लेकर छात्र को नोटिस पर CJI नाराज

सुप्रीम कोर्ट गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के एक छात्र ने सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर कर ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट की ओर से जारी नोटिस को चुनौती दी है। नोटिस में छात्र से कथित तौर पर साथी छात्रों को प्रस्तावित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के धरने में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करने के आरोप में 5 लाख रुपये का निजी मुचलका और इतनी ही राशि की दो जमानतें भरने को कहा गया है।
मामले में CJI ने सवाल किया कि जब सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया था, तो कार्यकारी मजिस्ट्रेट ऐसा नोटिस कैसे जारी कर सकते हैं।
लाइल लॉ के मुताबिक सीजेआई सूर्यकांत ने कहा “मजिस्ट्रेट नोटिस जारी करने की हिम्मत कैसे कर सकते हैं? हमने स्पष्ट किया था कि किसी भी स्टूडेंट के खिलाफ जबरन कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी. कोई भी मजिस्ट्रेट उस आदेश का उल्लंघन नहीं कर सकता.”
CJI ने यह भी संकेत दिया कि कोर्ट संबंधित प्राधिकरण से इस मामले में स्पष्टीकरण मांगेगा।
यह नोटिस याचिकाकर्ता अक्षत त्रिपाठी को 4 सितंबर 2026 को जारी किया गया था। याचिका में दावा किया गया है कि यह कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। साथ ही, यह सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर के उस आदेश के भी खिलाफ है, जिसमें छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR रद्द कर दी गई थीं।
सुप्रीम कोर्ट का 1 सितंबर का आदेश 20 से 25 जुलाई 2026 के बीच NEET-UG 2026 में कथित अनियमितताओं को लेकर देशभर में हुए छात्र प्रदर्शनों से जुड़ी कार्यवाही के दौरान आया था। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम और महाराष्ट्र में इन प्रदर्शनों से जुड़ी FIR रद्द कर दी थीं। साथ ही, देश के अन्य हिस्सों में दर्ज इसी तरह की FIR को भी बंद करने का निर्देश दिया था।
- 9th Sep14:39 ISTबिहार में बाढ़ का कहर, 14 जिलों में करीब 40 लाख लोग प्रभावित

कटिहार में गंगा, कोसी और महानंदा नदियों के बढ़ते जलस्तर के कारण बाढ़ जैसे हालात हैं।© ANI बिहार में बाढ़ की स्थिति लगातार बिगड़ रही है। राज्य के 14 जिलों में करीब 40 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। मंगलवार को भागलपुर जिले के सुल्तानगंज में गंगा का जलस्तर ‘बाढ़ के निशान’ को पार कर गया, जिसके बाद प्रशासन ने निचले इलाकों में अलर्ट जारी किया।
इस बीच, भागलपुर के बाढ़ प्रभावित खरीक राघोपुर इलाके में मंगलवार सुबह एक छोटी नाव पलट गई। नाव पर सवार सभी 10 लोगों को राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) के जवानों ने सुरक्षित बचा लिया।
बाढ़ से राज्य के 14 जिलों की 514 ग्राम पंचायतें प्रभावित हैं। इनमें पटना, भागलपुर, वैशाली, सारण, बेगूसराय, खगड़िया और मुंगेर समेत अन्य जिले शामिल हैं।
गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, गंगा, पुनपुन, बागमती और घाघरा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। सारण में माही नदी पर बना जमींदारी बांध टूटने से स्थिति गंभीर हो गई है।
सीएम ने किया बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार, 8 सितंबर को वैशाली और सारण के बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया। उन्होंने सामुदायिक रसोई और राहत शिविरों का निरीक्षण किया और प्रभावित लोगों से बातचीत की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में राहत अभियान और तेज करने के निर्देश दिए।
हर जरूरतमंद तक भोजन और अपनत्व पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता।
— Samrat Choudhary (@samrat4bjp) September 8, 2026
सहयोग और संवेदना के साथ समाज के हर वर्ग के कल्याण के लिए निरंतर प्रयास।#स्वास्थ्य_शिविर#सामुदायिक_रसोईpic.twitter.com/seNr7L9LDFबाढ़ प्रभावित जिलों में कुल 723 सामुदायिक रसोई केंद्र का संचालन किया जा रहा है। इसके अलावा 15 राहत शिविरों का भी संचालन किया जा रहा है, जहां 13 हजार से ज्यादा बाढ़ शर्णार्थियों के लिए रहने, खाने और चिकित्सा की व्यवस्था की गई है।
भागलपुर के प्रभारी सचिव दीपक आनंद ने कहा कि बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए राहत शिविरों में दो वक्त के भोजन और मेडिकल कैंप की व्यवस्था की गई है। विस्थापित मवेशियों के लिए चारे और छह साल से कम उम्र के बच्चों के लिए दूध का भी इंतजाम किया गया है।
- 9th Sep14:05 ISTसत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में बुलडोजर एक्शन

दिल्ली के सत्य निकेतन में ढही इमारत से सटी बिल्डिंग को गिराने का काम बुधवार को शुरू हुआ।© ANI राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन में 6 सितंबर को हुए पीजी हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम (MCD) एक्शन मोड में आ गया है. अब MCD ने ढही हुई इमारत से बिल्कुल सटी दूसरी बहुमंजिला बिल्डिंग को गिराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. इसके साथ ही दिल्ली के कई इलाकों में भी अवैध निर्माण पर बुलडोजर कार्रवाई की जा रही है।
इससे पहले एमसीडी की ओर से जारी नोटिस में कहा गया था, "सत्य निकेतन स्थित भवन/मकान नंबर 13 के परिसर में लोग रह रहे हैं। निरीक्षण में पाया गया कि यह संपत्ति जर्जर और खतरनाक स्थिति में है। इससे इमारत में रहने वाले लोगों, वहां आने-जाने वालों और आसपास के लोगों के लिए खतरा पैदा हो सकता है।"
सीएम ने दिया बुलडोजर एक्शन का निर्देश
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने MCD को अवैध निर्माणों के खिलाफ बुलडोजर का इस्तेमाल करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही नगर निगम के सभी सीनियर अधिकारियों को मौके पर मौजूद रहने के लिए भी कहा गया है।
मुख्यमंत्री कार्यालय के मुताबिक, सीएम ने कहा, “दिल्ली के सभी PG हॉस्टलों का गहन निरीक्षण किया जाए और अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की जाए। भवन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच करें और यह स्पष्ट रूप से पता लगाएं कि अवैध निर्माण कब हुआ और उस समय इसकी जिम्मेदारी किस प्राधिकरण के पास थी।”
Delhi Chief Minister Rekha Gupta directs the MCD to use bulldozers against illegal structures. Action to be taken in several areas of Delhi today. All senior municipal corporation officials have been instructed to be present on the ground.
— ANI (@ANI) September 9, 2026
She issued the directive, "Conduct…पांडव नगर में बुलडोजर एक्शन
दिल्ली के पांडव नगर इलाके में एक रिहायशी इमारत के खिलाफ एमसीडी ने कार्रवाई की है।
एमसीडी के एक अधिकारी ने बताया, “इस संपत्ति को अनधिकृत निर्माण के तहत बुक किया गया है। इसके खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की गई है। यहां ग्राउंड फ्लोर के अलावा चार मंजिल बनाने की अनुमति थी, लेकिन इसके ऊपर एक अतिरिक्त हिस्सा बना दिया गया। हमने संपत्ति मालिक को नोटिस दिया था। अब इस इमारत को पूरी तरह गिराया जा रहा है। यहां एक-दो और इमारतों को भी अनधिकृत निर्माण के मामले में बुक किया गया है।”
शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
पीजी हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई थी। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच गया है, जिसकी सुनवाई शुक्रवार, 11 सितंबर को होगी।
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। याचिका में दिल्ली के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के आसपास संचालित PG, निजी हॉस्टल और छात्रों के लिए बनाए गए अन्य आवासीय प्रतिष्ठानों का समयबद्ध निरीक्षण और सुरक्षा ऑडिट कराने की मांग भी शामिल है।
इस पहले दिल्ली हाईकोर्ट में भी सुनवाई हुई थी। आदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि इस तरह की घटना की जिम्मेदारी केवल PG हॉस्टल के मालिक की नहीं है, बल्कि दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन और MCD की भी जिम्मेदारी बनती है।
DU में हॉस्टल की कमी पर NHRC सख्त
दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए पर्याप्त और किफायती हॉस्टल की कमी को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने दिल्ली सरकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) को व्यापक और समयबद्ध योजना तैयार करने का निर्देश दिया है। आयोग ने खास तौर पर राष्ट्रीय राजधानी के बाहर से दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ने आने वाले छात्रों के लिए हॉस्टल की उपलब्धता बढ़ाने पर जोर दिया है।
आयोग ने कहा कि छात्रों के लिए पर्याप्त, सुरक्षित और किफायती आवास की व्यवस्था सुनिश्चित करना जरूरी है।












