BRICS मोदी-पुतिन मुलाकातः S-400, AI और न्यूक्लियर प्लांट... आ रहा दोस्ती का शुक्रवार
ब्रिक्स समिट में राष्ट्रपति पुतिन और पीएम मोदी की मुलाकात को लेकर रूस की तरफ से जानकारी दी गई है। रूस के राष्ट्रपति के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने दोनों देशों के आपसी सहयोग के बारे में विस्तार से बताया।
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BRICS मोदी-पुतिन मुलाकातः S-400, AI और न्यूक्लियर प्लांट... आ रहा दोस्ती का शुक्रवार
BRICS 2026- 11 सितंबर को पीएम मोदी और पुतिन की मुलाकात होगीGettyimages.ru

ब्रिक्स का मंच सज रहा है। 12 सितंबर को 11 सदस्य देशों के नेता शिखर सम्मेलन में जुटेंगे। लेकिन उससे एक दिन पहले, 11 सितंबर को भारत-रूस की दोस्ती का एक और अहम अध्याय लिखा जाएगा, जब पीएम मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच द्विपक्षीय मुलाकात होगी। राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा के बारे में रूसी राष्ट्रपति के प्रवक्ता प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने पूरी जानकारी दी।  पेस्कोव ने कहा कि कुछ ही दिनों में राष्ट्रपति पुतिन अपनी भारत यात्रा शुरू करेंगे। वे ब्रिक्स समिट में हिस्सा लेंगे और यह प्रधानमंत्री मोदी के साथ बातचीत के लिए भी एक अहम समय होगा। राष्ट्रपति के प्रवक्ता ने भारत और रूस के बीच सहयोग के अहम क्षेत्रों को बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। पेस्कोव ने ब्रिक्स के एजेंडे, ब्रिक्स ग्रेन एक्चेंज, डी-डॉलराइजेशन, एआई, अंतरिक्ष सहयोग के साथ ही आपसी सुरक्षा के तीन स्तंभों पर बात की।

भारत की बड़ी उपलब्धि

पेस्कोव ने कहा कि सबसे पहले, मैं ब्रिक्स समिट को इस क्लब में भारत की अध्यक्षता की एक बड़ी उपलब्धि कहूंगा। उन्होंने कहा कि हम इस दौरान भारत की अध्यक्षता के नतीजों की बहुत सराहना करते हैं। हमें कोई शक नहीं है कि यह समिट सफल होगी। रूस ब्रिक्स में बहुत सक्रिय भूमिका निभाता रहा है। इसकी शुरुआत 20 साल पहले RIC के तौर पर हुई थी। अब यह एक बहुत बड़ा क्लब बन गया है। पेस्कोव ने कहा कि मैं आपको याद दिलाना चाहूंगा- हमारा कोई चार्टर, नियम-कानून या कोई ऑफिस नहीं है। लेकिन यह उन देशों का क्लब है जो दुनिया में काम करने के तरीके और सहयोग के सभी क्षेत्रों में काम करने के तरीके को लेकर एक जैसी सोच रखते हैं।

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राष्ट्रपति पुतिन ब्रिक्स और उसके सभी मंचों में हिस्सा लेंगे। यह दोनों देशों के आपसी संबंधों के लिए बहुत अहम होगा। हमारे दोनों नेताओं के बीच बहुत करीबी निजी संबंध हैं। वे अपने रिश्तों को लेकर बहुत व्यावहारिक हैं। वे ग्लोबल एजेंडा के सबसे संवेदनशील मुद्दों पर बहुत खुलकर बातचीत कर सकते हैं। इससे हमारे सहयोग के लिए नए रास्ते खुलते हैं।
दिमित्री पेस्कोव
दिमित्री पेस्कोव
राष्ट्रपति पुतिन के प्रवक्ता

अंतरिक्ष में सहयोग, नेशनल करेंसी में पेमेंट

पेस्कोव ने कहा कि हम भारत के साथ द्विपक्षीय स्तर पर बहुत अधिक सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमने ब्रिक्स (BRICS) के अंदर अंतरिक्ष में सहयोग का एक नया पहलू भी शुरू किया है। वित्तीय क्षेत्र बहुत महत्वपूर्ण है। रूस ने हाल ही में ब्रिक्स देशों के साथ होने वाले सभी पेमेंट और लेन-देन में से 90% को अपनी नेशनल करेंसी में करने का स्तर हासिल कर लिया है। यह बहुत महत्वपूर्ण है, इसलिए नहीं कि हम 'डी-डॉलरलाइजेशन' (डॉलर का इस्तेमाल कम करना) चाहते हैं; बल्कि, हम पेमेंट के हर स्वीकार्य तरीके के लिए तैयार हैं।

पेस्कोव ने कहा कि आप जानते हैं कि कुछ देश राष्ट्रीय मुद्राओं का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए कर रहे हैं। वे अपनी नेशनल करेंसी के आधार पर प्रतिबंध लगा रहे हैं। इसलिए, अगर वे हमें अपनी मुद्रा का इस्तेमाल नहीं करने देते, तो हम अपनी मुद्रा का इस्तेमाल करते हैं। हमने मिलकर पाया कि यह दोनों पक्षों के लिए बहुत फायदेमंद प्रक्रिया हो सकती है। इसलिए, ब्रिक्स के भीतर रूस के 90% से अधिक पेमेंट नेशनल करेंसी के आधार पर होते हैं।

Su-57, S-500 और S-400 पर सहयोग

रूस और भारत में रक्षा सहयोग को लेकर पेस्कोव ने कहा कि Su-57, S-500 और S-400 जैसे हथियारों के मामले में रक्षा सहयोग भी अहम है। हम भारत के साथ टेक्नोलॉजी और मिलिट्री के क्षेत्र में अपने सहयोग से संतुष्ट हैं… हमारे पास बहुत अच्छे मिलिट्री उपकरण हैं, जिनमें से कुछ दुनिया में सबसे बेहतरीन हैं और हम उन्हें अपने भारतीय सहयोगियों के साथ साझा करने के लिए तैयार हैं... हम मिलकर ब्रह्मोस मिसाइल बना रहे हैं, इसलिए अब इन मिसाइलों को और बेहतर बनाने के बारे में सोचने का समय आ गया है। रूस भारत के साथ Su-57 टेक्नोलॉजी साझा करने की संभावना पर चर्चा कर रहा है।

फूड सिक्योरिटी के लिए ग्रेन एक्सचेंज

पेस्कोव ने कहा कि फूड सिक्योरिटी एक और बहुत अहम पहलू है। रूस ने ब्रिक्स (BRICS) ग्रेन एक्सचेंज बनाने की पहल की है। हम संबंधित देशों के साथ बातचीत जारी रखे हुए हैं। उन्होंने कहा, 'हमें लगता है कि यह पहल वैश्विक खाद्य सुरक्षा में योगदान दे सकती है। AI बातचीत और चर्चा का एक बहुत बड़ा और कभी न खत्म होने वाला विषय है। नई दिल्ली में होने वाले शिखर सम्मेलन के एजेंडे में इसे खास जगह दी जाएगी; हम इसे बहुत अहम मानते हैं।'

BRICS के एजेंडे में AI

पेस्कोव ने कहा कि AI बातचीत और चर्चा का एक बहुत बड़ा और कभी न खत्म होने वाला विषय है। नई दिल्ली में होने वाले शिखर सम्मेलन के एजेंडे में इसे खास जगह दी जाएगी। हम इसे बहुत अहम मानते हैं। ऊर्जा के क्षेत्र में हमारा सहयोग, जिसमें परमाणु क्षेत्र भी शामिल है। उन्होंने कहा कि रूस परमाणु क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में से एक है, और हम दुनिया भर में परमाणु इकाइयां बनाने के काम में शामिल हैं।


साथ ही, हम भारत में अर्थव्यवस्था का एक नया क्षेत्र, शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा, शुरू कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुडनकुलम में हमारा काम बहुत अच्छी तरह से चल रहा है, और हमें इसमें और विकास की उम्मीद है, जिसमें भारत में बनने वाले एक नए परमाणु संयंत्र के लिए बातचीत भी शामिल है। पेस्कोव ने कहा कि रूस में बहुत से भारतीय छात्र पढ़ते हैं और हमें खुशी है कि वे हमारे देश में पढ़ते हैं।

आपसी सहयोग के तीन मुख्य स्तंभ

राष्ट्रपति के प्रवक्ता पेस्कोव ने कहा कि रूस के तौर पर, हम अपने आपसी सहयोग के 3 मुख्य स्तंभों पॉलिसी और सुरक्षा, इकोनॉमी और फाइनेंस, और संस्कृति और मानवीय संपर्क में ब्रिक्स के और विकास में योगदान देने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम (रूस) BRICS के अंदर सहयोग के अलग-अलग तरीकों में शामिल होने के लिए नए देशों को बुलाने के विचार का समर्थन कर रहे हैं। 2024 में, BRICS के लिए 'पार्टनर देशों' की एक नई कैटेगरी बनाई गई थी। अब यह बहुत अच्छी तरह से आगे बढ़ रही है।

उन्होंने यह कहा कि दर्जा बेलारूस, बोलीविया, वियतनाम, कजाकिस्तान, क्यूबा, ​​थाईलैंड, नाइजीरिया, युगांडा, मलेशिया और उज्बेकिस्तान को दिया गया था... अब ये सभी अलग-अलग वर्किंग फॉर्मेट में शामिल हैं। पेस्कोव ने कहा कि रियो डी जनेरियो में BRICS बैठक के दौरान, रूसी प्रतिनिधिमंडल ने UN में सुधार और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के कामकाज को बेहतर बनाने जैसे कई मुद्दों पर एक्सपर्ट लेवल पर बातचीत शुरू करने की पहल की।

BRICS पर रूस का रुख

रूस की नजर में भारत की BRICS की प्राथमिकताओं और विकासशील देशों की चिंताओं के बीच तालमेल बिठाने की क्षमता, और रूस के 'मल्टीपोलर' (बहु-ध्रुवीय) विजन के लिए यह क्यों जरूरी है? इस पर पेस्कोव ने कहा कि भारत ने BRICS की अपनी अध्यक्षता में बहुत निवेश किया। BRICS की विचारधारा और स्वरूप 'मल्टीपोलर' दुनिया की विचारधारा से काफी मेल खाता है, क्योंकि BRICS में सहयोग आपसी भरोसे, आपसी सम्मान और व्यापार में आपसी लाभ पर आधारित है। और ये आदर्श सभी सदस्य देशों में समान रूप से मौजूद हैं।

उन्होंने कहा कि 'यूनिपोलर' (एक-ध्रुवीय) व्यवस्था ढह रही है और अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता खो रही है। साथ ही, यह व्यवस्था अपनी ताकत फिर से हासिल करने की कोशिश कर रही है, कभी-कभी बहुत कठोर कदम उठाकर, जिससे वैश्विक व्यवस्था, अर्थव्यवस्था, राजनीति, पर्यावरण और अंतरराष्ट्रीय कानून को नुकसान पहुंच रहा है। यह बहुत खतरनाक है।

पेस्कोव ने कहा कि हम जानते हैं कि वैश्विक बहुमत - जिसका प्रतिनिधित्व BRICS में हो रहा है - एक अलग तरह का समूह है। यहां हर देश दूसरे के बराबर है, यहां हर देश को अपनी बात कहने का अधिकार है। हर देश को व्यापार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा का अधिकार है। हर देश गैरकानूनी प्रतिबंधों या गैरकानूनी दबाव से सुरक्षित है। साथ ही, यहां हर देश किसी के दबाव या कुछ और करने की मांगों के बिना अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा कर सकता है।

उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में, हम भारत को वैश्विक बहुमत में एक बहुत महत्वपूर्ण खिलाड़ी मानते हैं। पेस्कोव ने कहा कि हम इस बात की सराहना करते हैं कि भारत वास्तव में वैश्विक बहुमत की विभिन्न प्रक्रियाओं में योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा कि जहां तक हम समझ सकते हैं, भारत ऐसा करना जारी रखेगा। और निश्चित रूप से, भारत के एक बहुत करीबी साझेदार होने के नाते, हमें उम्मीद है कि हम इन सभी प्रक्रियाओं के लिए भारत और अन्य BRICS देशों के साथ मिलकर काम करते रहेंगे।

रूस-यूक्रेन संघर्ष में भारत की भूमिका

क्या भारत रूस-यूक्रेन संघर्ष का समाधान निकालने में मदद कर सकता है? इस सवाल के जवाब में पेस्कोव ने कहा कि हम इस संघर्ष पर भारत का रुख जानते हैं, और काफी हद तक यह हमारे अपने रुख से मेल खाता है, क्योंकि हम शांतिपूर्ण तरीकों से समाधान चाहते हैं और रूस इसके लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि रूस कभी यह युद्ध नहीं चाहता था - हम उस युद्ध को रोकने की कोशिश कर रहे हैं जो पहले शुरू हुआ था। और इसे हमने शुरू नहीं किया था।

पेस्कोव ने कहा कि अगर मैं इस युद्ध के सभी कारणों को याद करने की कोशिश करूं, तो मुझे 2014 में वापस जाना होगा जब कीव में अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, पोलैंड और जर्मनी ने तख्तापलट करवाया था... उस समय, पश्चिमी देशों ने यूक्रेन में रूस के खिलाफ एक केंद्र बनाना शुरू कर दिया था… वहीं से उस युद्ध की शुरुआत हुई जिसे हम अब रोकने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इस सैन्य अभियान के जरिए अपने लक्ष्यों तक पहुंचना है, लेकिन हम इसे शांतिपूर्ण तरीके से करना पसंद करते हैं और इस संदर्भ में, हम यूक्रेन मामले के समाधान में योगदान देने के किसी भी प्रयास का स्वागत करते हैं। पेस्कोव ने कहा कि हम भारतीय पक्ष के योगदान देने की इच्छा का स्वागत करते हैं।

उन्होंने कहा कि हम राष्ट्रपति ट्रंप के प्रयासों का स्वागत करते हैं… हम त्रिपक्षीय बातचीत (अमेरिका, रूस, यूक्रेन) के फिर से शुरू होने की उम्मीद करते हैं। उन्होंने कहा कि मैं यह नहीं कहूँगा कि कीव तैयार है, अगर वे तैयार होते, तो युद्ध खत्म हो गया होता। उन्हें यूरोपीय देशों द्वारा उकसाया जा रहा है जो रूस को रणनीतिक रूप से हराने के विचार से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं।

अमेरिकी सीनेट में रूस-ईरान प्रतिबंध बिल

अमेरिकी सीनेट में रूस-ईरान प्रतिबंध बिल पेस्कोव ने कहा कि हम अंतरराष्ट्रीय कानून के हिसाब से इस बिल को गैर-कानूनी मानते हैं... गैर-कानूनी, अनुचित, अस्वीकार्य। ये प्रतिबंध एजेंडे में हैं - लेकिन ये सबसे अहम मुद्दा नहीं हैं। हालांकि, ईरान-यूक्रेन मामले का शांतिपूर्ण समाधान एजेंडे का हिस्सा है। पेस्कोव ने कहा कि हॉर्मुज संकट की वजह से दुनिया को 20% तेल और 30% LNG का नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर रूस UAE-ईरान के रिश्तों को सामान्य बनाने में योगदान देने के लिए तैयार है।

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