
अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट का पहला मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को बनाया गया है। बुधवार, 2 सितंबर को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक के बाद इसका ऐलान किया गया। चढ़ावा चोरी विवाद के बाद ट्रस्ट के पुनर्गठन की प्रक्रिया में जीतेंद्र मिश्रा को CEO नियुक्त किया गया है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वह वेस्टर्न एयर कमांड के प्रमुख थे। एयरफोर्स में 39 साल तक सेवाएं देने के बाद इसी साल 30 अप्रैल को रिटायर हुए हैं।
राम मंदिर ट्रस्ट में तीन नए सदस्य भी बनाए गए हैं। ये हैं- महेश भागचंदका, मदन मोहन पांडेय और डॉ. निर्मला यादव।
गौरतलब है कि चढ़ावे की चोरी का खुलासा होने के बाद 27 जून को चंपत राय ने ट्रस्ट के महासचिव पद से और अनिल मिश्रा ने ट्रस्टी पद से इस्तीफा दिया था। वहीं ट्रस्ट के एक सदस्य विमलेंद्र मोहन का निधन हो गया। इससे ट्रस्ट में तीन पद खाली हुए थे। चढ़ावा चोरी मामले में अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कार्यवाहक महासचिव कृष्ण मोहन ने बुधवार को नई नियुक्तियों की जानकारी देते हुए बताया कि ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज को अब महामंत्री बनाया गया है। वहीं महेश भागचंदका को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है।
“राम मंदिर ट्रस्ट के सभी कार्यों को व्यवस्थित तरीके से पूरा कराना बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। मुझे उम्मीद है कि नए CEO इस जिम्मेदारी को प्रभावी और सफल तरीके से निभाएंगे।”
- कृष्ण मोहन, कार्यवाहक महासचिव, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट
नए CEO जीतेंद्र मिश्रा का परिचय
पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के रहने वाले हैं। 1 जनवरी 2025 को उन्होंने भारतीय वायुसेना की वेस्टर्न एयर कमांड के प्रमुख का पद संभाला था। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अहम भूमिका निभाई थी। वह फाइटर कॉम्बैट लीडर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट रहे हैं। उनके पास 3,000 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव है।
जीतेंद्र मिश्रा 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट के रूप में कमीशन हुए थे। नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) पुणे, एयर फोर्स टेस्ट पायलट्स स्कूल बेंगलुरु, अमेरिका के एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज और ब्रिटेन के रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज के छात्र रहे हैं।

39 साल से अधिक के अपने सैन्य करियर में उन्होंने भारतीय वायुसेना में कई अहम कमान और स्टाफ पदों पर काम किया। इनमें फाइटर स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर, एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टैब्लिशमेंट (ASTE) के चीफ टेस्ट पायलट, दो अग्रिम एयर बेस के एयर ऑफिसर कमांडिंग और एयर हेडक्वार्टर में डायरेक्टर (ऑपरेशनल प्लानिंग एंड असेसमेंट ग्रुप), प्रिंसिपल डायरेक्टर (ASR) और असिस्टेंट चीफ ऑफ एयर स्टाफ (प्रोजेक्ट्स) जैसे पद शामिल हैं।
जीतेंद्र मिश्रा ASTE के कमांडेंट और डिप्टी चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (डॉक्ट्रिन, ऑर्गनाइजेशन एंड ट्रेनिंग) के पद पर भी रहे। वेस्टर्न एयर कमांड के प्रमुख का पद संभालने से पहले वह डिप्टी चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (ऑपरेशंस) थे।
ऑपरेशन सिंदूर में भूमिका के लिए मिश्रा को सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित किया गया था। इससे पहले उन्हें 2024 में अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) और 2013 में विशिष्ट सेवा मेडल (VSM) भी मिल चुका है।

जीतेंद्र मिश्रा को ही CEO क्यों चुना गया? 3 बड़े कारण
1. प्रशासन और बड़े संस्थान को संभालने का अनुभव
जीतेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना में करीब चार दशक तक सेवाएं दे चुके हैं। उन्होंने कई महत्वपूर्ण कमांड और स्टाफ पदों पर काम किया है। उनके पास बड़े और कई विभागों वाले संस्थान के प्रबंधन का अनुभव है।
2. सिस्टम और ऑपरेशनल मैनेजमेंट में एक्सपर्ट
वायुसेना में उनके कार्यक्षेत्र में ऑपरेशनल प्लानिंग, प्रोजेक्ट्स, ट्रेनिंग और संगठनात्मक जिम्मेदारियां शामिल रही हैं। फील्ड अलग है, लेकिन राम मंदिर ट्रस्ट में भी पूजा, सुरक्षा, रखरखाव, प्रशासन और नई परियोजनाओं जैसे कई कामों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।
3. अनुशासन और समयबद्ध तरीके से काम कराने की क्षमता
सेना में अनुशासन, जवाबदेही और तय प्रक्रिया के अनुसार काम करना होता है। राम मंदिर ट्रस्ट के सामने श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़, मंदिर के संचालन और भविष्य की परियोजनाओं को व्यवस्थित तरीके से चलाने की चुनौती है। ऐसे में मिश्रा की यही प्रशासनिक क्षमता उनकी नियुक्ति की एक अहम वजह हो सकती है।
तीन नए ट्रस्टियों के बारे में भी जानिए
- महेश भागचंदका: 68 वर्षीय भागचंदका दिल्ली के रहने वाले हैं। स्नातक हैं और पेशे से व्यवसायी होने के साथ-साथ समाजसेवा से भी जुड़े हैं। वह ‘हिंदुत्व के पुरोधा’ पुस्तक के लेखक हैं। अयोध्या में श्रीराम मंदिर के भूमिपूजन कार्यक्रम में उन्होंने एक यजमान की भूमिका निभाई थी। इसके अलावा, श्रीराम वनगमन यात्रा से जुड़े 292 पवित्र तीर्थ स्थलों पर श्रीराम स्तंभ की स्थापना के कार्य में भी वह शामिल रहे हैं। भागचंदका वर्ल्ड हिंदू इकोनॉमिक फोरम की कार्यकारिणी सदस्य भी हैं।
- मदन मोहन पांडेय: अयोध्या निवासी हैं और कानून के पेशे से जुड़े रहे हैं। वह उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त महाधिवक्ता पद पर छह साल तक रहे हैं। राम जन्मभूमि मामले में वह 1990 से 2019 तक इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में पैरवी से जुड़े रहे। इसके अलावा, वह हरि सत्संग समिति के उपाध्यक्ष हैं और अयोध्या स्थित कथाकार संयोजन प्रशिक्षण केंद्र के पालक भी हैं।
ट्रस्ट में शामिल होने पर उन्होंने खुशी जताते हुए कहा, “मैं बहुत खुश हूं कि मुझे भगवान की सेवा करने का अवसर मिला है। अब जो भी सेवा मुझसे मांगी जाएगी, मैं उसे करने का पूरा प्रयास करूंगा।”
- डॉ. निर्मला यादव: हिंदी और संस्कृत में पोस्ट ग्रेजुएट हैं और उन्होंने पीएचडी भी की है। वह 19 साल तक कॉलेज की प्रिंसिपल रही हैं। इसके अलावा, 15 साल तक विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद की सदस्य भी रही हैं।
राम मंदिर ट्रस्ट के CEO की नियुक्ति कैसे हुई?
- आवेदन मंगाए गए: CEO पद के लिए कुल 5,585 आवेदन मिले थे। इनमें 3,877 आवेदनों के साथ डिटेल्ड बायोडाटा (CV) जमा किए गए थे।
- पहली छंटनी हुई: CV वाले उम्मीदवारों की योग्यता, बड़े आयोजनों और कर्मचारियों को संभालने का अनुभव, व्यक्तिगत उपलब्धियों, भाषा में महारत, विजन और रणनीतिक योजनाओं के आधार पर स्क्रीनिंग की गई। इसके बाद 1,580 उम्मीदवारों को अगले चरण के लिए चुना गया।
- ऑनलाइन इंटरैक्शन: करीब 111 उम्मीदवारों को कई दिनों तक चले ऑनलाइन इंटरैक्शन के लिए बुलाया गया। इस दौरान पेशेवर अनुभव, नेतृत्व क्षमता, व्यक्तित्व, विजन और तकनीकी समझ को परखा गया।
- फाइनल इंटरव्यू: ऑनलाइन मूल्यांकन के बाद 16 उम्मीदवार चुने गए। ये सेना, ब्यूरोक्रेसी, कॉरपोरेट, शिक्षा और IT समेत अलग-अलग क्षेत्रों से थे। इन 16 उम्मीदवारों के आमने-सामने इंटरव्यू 11 और 12 अगस्त 2026 को अयोध्या में हुए थे।
- 3 नामों का पैनल बनाया: चार सदस्यीय सर्च कमेटी ने 16 फाइनल उम्मीदवारों का अंतिम मूल्यांकन किया था और तीन नामों का पैनल श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र को सौंपा था। इसके बाद ट्रस्ट ने अंतिम नियुक्ति की घोषणा की।




