नेपाल में बाढ़ का जलवायु परिवर्तन से कनेक्शन? नेपाली पीएम ने वैश्विक जिम्मेदारी की अपील की
नेपाल असहनीय पीड़ा के दौर से गुजर रहा है। 4500 से ज्यादा लोगों के बारे में कुछ पता नहीं चल रहा। एक हफ्ते बाद लापता लोगों के घरवालों की उम्मीदें धुंधली होती जा रही हैं। एक तरफ अज्ञात लोगों के शव दफनाए जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ जिनके अपने खो गए, वे पुतलों का ही अंतिम संस्कार करने को मजबूर हैं।
नेपाल में बाढ़ का जलवायु परिवर्तन से कनेक्शन? नेपाली पीएम ने वैश्विक जिम्मेदारी की अपील की

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने बुधवार को संसद को बताया कि 26 अगस्त को भोटेकोशी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ हिमालयी क्षेत्र में बढ़ते जलवायु जोखिमों की एक गंभीर चेतावनी है। इस आपदा में लगभग 4,000 लोग लापता हो गए। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इसके प्रभावों को कम करने की ज़िम्मेदारी आपस में बांटने की बात कही। सदन में प्रधानमंत्री ने कहा कि एक्सपर्ट्स ने इस आपदा को ऊंचे हिमालय में बर्फ और चट्टानों के हिमस्खलन (Avalanche) का परिणाम बताया है।

प्रधानमंत्री शाह ने कहा कि यह एक गंभीर संकेत है कि जलवायु परिवर्तन के साथ-साथ हिमालयी क्षेत्र में हमें जिन जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है, वे बढ़ रहे हैं। हमें इसके प्रति जागरूक होना चाहिए, और अब समय आ गया है कि हम अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने मजबूती से उन आपदाओं को रखें जिनका सामना हम जलवायु परिवर्तन के कारण कर रहे हैं। जलवायु परिवर्तन पूरी दुनिया के योगदान का परिणाम है। इसके प्रभावों को कम करना और उनको मैनेज करना दुनिया की साझा जिम्मेदारी है।”

यह बाढ़ 26 अगस्त की सुबह रसुवा जिले में नदी के किनारे बसे इलाकों में आई। इसके बाद तेजी से नुवाकोट और धाडिंग सहित पड़ोसी क्षेत्रों को प्रभावित किया। संसद में पेश किए गए नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 11,993 लोगों को बचाया गया है। वहीं, 3,916 लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। आपदा के बाद 1,114 शव बरामद किए गए हैं। इनमें से 95 की पहचान कर परिवारों को सौंप दिया गया है। अस्पतालों में भर्ती कराए गए 292 घायलों में से 182 को छुट्टी दे दी गई है।

आपदा के शुरुआती घंटों से ही सरकारी बलों ने बड़े पैमाने पर राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया था। नेपाल सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के सुरक्षा कर्मियों को बड़ी संख्या में तैनात किया गया, जिनकी संख्या 13,000 से अधिक हो गई थी। हेलीकॉप्टर उड़ानों में गंभीर रूप से घायल लोगों, गर्भवती महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगों को प्राथमिकता दी गई। नुवाकोट में 19 जगहों पर बने अस्थायी आश्रयों में अब 2,653 लोग रह रहे हैं।

  • नेपाल आपदा पर जानें आज के 5 टॉप अपडेट्स
    1. नेपाल में आपदा के बाद शवों को दफनाया जा रहा है। दफनाए गए शवों का DNA परिवार के साथ क्रॉस-मैचिंग के लिए पहले ही सुरक्षित रख लिया गया है। जैसे-जैसे भोटेकोशी बाढ़ में बहे पीड़ितों के शव नीचे की ओर बहकर आ रहे हैं, अस्पतालों को उन्हें रखने और उनकी पहचान करने के लिए जगह खोजने में मुश्किल हो रही है।
    2. संसद में पेश किए गए नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 11,993 लोगों को बचाया गया है। वहीं, 3,916 लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। आपदा के बाद 1,114 शव बरामद किए गए हैं। इनमें से 95 की पहचान कर परिवारों को सौंप दिया गया है। अस्पतालों में भर्ती कराए गए 292 घायलों में से 182 को छुट्टी दे दी गई है।
    3. नेपाल सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के सुरक्षा कर्मियों समेत 13000 से अधिक लोगों की टीम राहत और बचाव कार्य में जुटी हुई है। नुवाकोट में 19 जगहों पर बने अस्थायी आश्रयों में अब 2,653 लोग रह रहे हैं।
    4. बाढ़ के बाद सिंधुपालचोक के लापता हुए 239 लोगों के रिश्तेदार उन्हें ढूंढ रहे हैं। एक सप्ताह तक अपने परिवार के सदस्यों के बारे में पता न चलने और उनके शवों की बरामदगी को लेकर अनिश्चितता के बाद, कुछ परिवारों ने धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार कुश की प्रतिकृतियां बनाकर उनका अंतिम संस्कार करना शुरू कर दिया है। बहराबिसे नगर पालिका के अलग-अलग वार्डों से बाढ़ के बाद लापता हुए लोगों का बुधवार को कुश की प्रतिकृतियां बनाकर सामूहिक रूप से अंतिम संस्कार किया गया।
    5. भयानक बाढ़ के एक सप्ताह बाद भी, बचाव दल अभी भी कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स के अंडरग्राउंड पावरहाउस और टनल में फंसे मजदूरों और कर्मचारियों तक नहीं पहुंच पाए हैं। लापता लोगों के परिवारों का कहना है कि बचाव का काम बहुत धीमा है। इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन, नेपाल (IPPAN)की तरफ से जारी किए गए डेटा से पता चला है कि अलग-अलग हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स के 947 लोगों का अभी भी पता नहीं है।
  • नेपाल आपदा : दफनाए गए शवों के डीएनए सुरक्षित रख रही सरकार

    नेपाल में आपदा के बाद शवों को दफनाया जा रहा है। दफनाए गए शवों का DNA परिवार के साथ क्रॉस-मैचिंग के लिए पहले ही सुरक्षित रख लिया गया है। जैसे-जैसे भोटेकोशी बाढ़ में बहे पीड़ितों के शव नीचे की ओर बहकर आ रहे हैं, अस्पतालों को उन्हें रखने और उनकी पहचान करने के लिए जगह खोजने में मुश्किल हो रही है। इस हिमालयी देश में पूरे देश के मुर्दाघरों में केवल 350 शव रखने की क्षमता है, जिससे परिवारों द्वारा पहचान और दावा किए जाने तक शवों को रखने के लिए जगह की कमी हो गई है। रसुवा और नुवाकोट से बाढ़ में बहे पीड़ितों के अवशेष देश के अलग-अलग हिस्सों में मिल रहे हैं।

    चितवन जिले में सबसे अधिक शव मिले

    चितवन जिले में सबसे ज़्यादा 321 शव मिले हैं। वहां के मुर्दाघर पहले ही नीचे बहकर आए पीड़ितों के शवों से भर चुके हैं। इस वजह से कारण अधिकारियों को अस्थायी सुविधाएं बनानी पड़ी हैं। अधिकारी 'अज्ञात और बिना दावे वाले शवों के प्रबंधन के लिए दिशानिर्देश, 2021' के तहत शवों का प्रबंधन कर रहे हैं। इसके तहत ज़िला पुलिस प्रमुख की अध्यक्षता वाली एक समिति अवशेषों के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार है। मुर्दाघरों में जगह खत्म होने के कारण, सरकार ने 'अज्ञात और बिना दावे वाले शवों के प्रबंधन के लिए दिशानिर्देश, 2021' में संशोधन करके अज्ञात शवों के प्रबंधन का काम शुरू किया है।

    इस बीच, भारतीय दूतावास ने बताया कि नेपाल में हाल ही में आई अचानक बाढ़ से प्रभावित लोगों की पहचान में मदद करने के लिए 19 सदस्यीय भारतीय फोरेंसिक टीम ने फोरेंसिक विशेषज्ञों के साथ मिलकर DNA नमूनों का विश्लेषण शुरू कर दिया है। टीम ने काठमांडू घाटी के खुमलटार इलाके में नेपाल पुलिस सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी और नेशनल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी में विश्लेषण शुरू किया।


    दूतावास के अनुसार, भारतीय विशेषज्ञ बाढ़ प्रभावित इलाकों से एकत्र किए गए DNA नमूनों की प्रोसेसिंग में तेज़ी लाने और पीड़ितों तथा लापता लोगों की पहचान स्थापित करने में मदद करने के लिए अपने समकक्षों के साथ काम कर रहे हैं। दूतावास ने कहा कि भारतीय फोरेंसिक टीम की तैनाती हाल ही में आई अचानक बाढ़ के बाद नेपाल की मदद करने के चल रहे प्रयासों का हिस्सा है, जिसमें जान-माल का भारी नुकसान हुआ और कई लोग लापता हो गए।

    1068 शव बरामद, डीएनए सैंपल रखे 

    नेपाल पुलिस ने बताया कि मंगलवार शाम तक 1,068 शव बरामद किए गए थे, जिनमें से 400 के केवल आंशिक अवशेष ही मिले थे, जिससे पहचान की प्रक्रिया मुश्किल हो गई है। पिछले हफ़्ते आई विनाशकारी बाढ़ के बाद मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ने के कारण, अधिकारियों ने भविष्य में पहचान के प्रयासों में मदद के लिए कई बिना दावे वाले शवों से DNA नमूने एकत्र किए हैं। नेपाल पुलिस के मुताबिक, बुधवार को नेपाल में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,127 हो गई है।

    नेपाल पुलिस के अनुसार, रसुवा से 45, नुवाकोट से 155, धाडिंग से 59, चितवन से 348, गोरखा से 66, तनहुं से 38, नवलपरासी ईस्ट से 217 और नवलपरासी वेस्ट से 190 शव बरामद किए गए हैं। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने कहा है कि लोगों को बचाना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने आगे कहा कि अब तक कुल 11,993 लोगों को बचाया जा चुका है, जबकि 3,916 लोग अभी भी लापता हैं।

  • 'भारत के साथ हमारा रिश्ता बेटी-रोटी का है'

    नेपाल की स्वास्थ्य मंत्री निशा मेहता ने कहा, 'हमारे देश और भारत के बीच का रिश्ता हमेशा से 'बेटी-रोटी' का रहा है यानी बिल्कुल एक परिवार जैसा बंधन। वे हर वक्त हमारे साथ खड़े रहते हैं - चाहे अच्छे दिन हों या बुरे। यह रिश्ता भाईचारे, बहनों जैसे स्नेह और एक साझे परिवार की तरह है। आज हम गहरे दर्द और संकट में हैं, और स्वाभाविक है कि हमारा यह दर्द उन तक भी पहुंचेगा। हमें हमेशा यह महसूस होता है कि वे हमारे साथ हैं। सिर्फ खुशहाली में ही नहीं, बल्कि सबसे कठिन वक्त में भी वे साथ खड़े रहे हैं। वे हमेशा मददगार साबित हुए हैं।”

    उन्होंने आगे कहा, ”इस समय सबसे बड़ी चुनौती शवों के प्रबंधन (डेड बॉडी मैनेजमेंट) को लेकर थी, और वे इसे संभालने में भी हमारी पूरी मदद कर रहे हैं। उन्होंने डीएनए जांच के लिए अपनी विशेषज्ञ टीम भेजी है। इसके साथ ही,वे यहां डीएनए प्रबंधन के लिए प्रयोगशाला (लैब) स्थापित करने में भी हमारी सहायता कर रहे हैं। वे लगातार हमारा हाथ बंटा रहे हैं, और हम उनकी इस मदद को लेकर बेहद आभारी और सकारात्मक हैं।”

  • जिस मैत्री भवन को भारत ने बनवाया, वही बना नेपाल के लिए संकटमोचक, सामने आया वीडियो

    नेपाल के नुवाकोट में बाढ़ पीड़ितों के लिए 'नेपाल-भारत मैत्री भवन' एक बड़ा सहारा बन गया है। 26 अगस्त को आई अचानक और विनाशकारी बाढ़ में जिन लोगों के घर-बार उजड़ गए, उन्हें यहां भारतीय सहायता से चलने वाले अस्पताल में छत,इलाज और जरूरी मदद दी जा रही है। कई पीड़ितों के लिए तो यह जगह सिर्फ एक अस्पताल नहीं,बल्कि नई जिंदगी मिलने जैसा है। यह मैत्री भवन थोड़ी ऊंचाई पर बना है इसलिए जब भोटे कोशी नदी के सैलाब ने नुवाकोट और आसपास के इलाकों में तबाही मचाई तो बेघर हुए सैकड़ों लोगों को यहां सुरक्षित पनाह मिल सकी। इस इमारत में 'आयुर्वेद और वैकल्पिक चिकित्सा अस्पताल' चलता है। 2015 के भीषण भूकंप के बाद भारतीय दूतावास की आर्थिक मदद से इस इमारत को दोबारा तैयार किया गया था। अस्पताल के प्रमुख डॉ.नरेंद्र प्रसाद गिरी ने एएनआई से बात करते हुए बताया कि उन्होंने उन बेघर लोगों के लिए अस्पताल के दरवाजे खोल दिए,जिनके पास जाने के लिए कोई ठिकाना नहीं बचा था।

    ANI से बातचीत में डॉ.गिरी ने बताया,”यह इमारत 2015 के भूकंप के बाद भारत के सहयोग से बनाई गई थी और आज यह संकट की घड़ी में लोगों का सबसे बड़ा सहारा बनी है। तबाही से बचाकर लाए गए कई लोगों का हमने यहां इलाज किया और अब उनकी हालत बिल्कुल स्थिर है।”

    उन्होंने आगे बताया कि हर रात 100 से ज्यादा बेघर लोग यहां रात गुज़ार रहे हैं। इसके अलावा पास के होल्डिंग सेंटरों में रह रहे लोगों तक भी मेडिकल मदद पहुँचाई जा रही है। डॉ.गिरी के मुताबिक,”बाढ़ के बाद करीब छह लोग खुद चलकर हमारे पास आए थे,जिन्हें कटने-छिलने की हल्की चोटें थीं जिन पर टांके लगाने पड़े। एक मरीज के टेंडन (मांसपेशी के जोड़) में चोट थी जिसकी सर्जरी हमने अगले दिन यहीं की।”

    अस्पताल में इस वक्त 11 डॉक्टर, 5 से 7 नर्सें और 5 से 6 पैरामेडिक्स तैनात हैं। जरूरत पड़ने पर आसपास के राहत शिविरों में मोबाइल मेडिकल टीमें भी भेजी जा रही हैं। उन्होंने कहा,”अब हमारे पास दवाइयों की कोई कमी नहीं है,सप्लाई पूरी तरह दुरुस्त हो चुकी है। हम सिर्फ अस्पताल तक सीमित नहीं हैं,बल्कि फील्ड में भी टीमें भेज रहे हैं।” बाढ़ के खौफनाक मंजर से बचकर निकले लोगों के लिए यह अस्पताल वाकई एक नई उम्मीद और जीवनरेखा साबित हो रहा है।

  • हमारे लिए भगवान की तरह... नेपाल की मदद को आगे आया भारत तो पड़ोसियों ने कुछ इस तरीके से कहा थैंक्यू

    नेपाल के लोगों ने इस कठिन समय में भारत का आभार जताया है। एक पीड़ित ने कहा कि हमारे लिए भारत भगवान की तरह है। भारत की सहायता के लिए आभार जताते हुए मरीज ने बताया कि भारत सरकार हमारे पड़ोसी देश की तरह है,एक सच्चा दोस्त है। अब जब नेपाल में यह सब हुआ है,तो भारत सरकार ने हमें बहुत बड़ा सहारा दिया है। भारत शक्तिशाली है और हमारे लिए भगवान की तरह है।

    एक वृद्धाश्रम में रहने वाली भीमा भंडारी ने बताया कि बाढ़ का पानी इतनी तेजी से चढ़ा कि समय रहते न निकाले जा पाने के कारण छह बुज़ुर्गों की जान चली गई। भीमा भंडारी ने कहा,”सुरक्षाकर्मियों ने बाद में हम बचे हुए लोगों को बाहर निकाला और यहां इस अस्पताल में ले आए। हमें यहां खाना,छत और दवाइयां सब मिल रही हैं।” उन्होंने आगे कहा,”हम इस बुनियादी ढांचे को खड़ा करने के लिए भारत सरकार का दिल से शुक्रिया अदा करते हैं और उनके लिए प्रार्थना करते हैं। साथ ही हम बुज़ुर्गों के लिए एक समर्पित वृद्धाश्रम के दोबारा निर्माण में आगे भी ऐसे ही सहयोग और मदद की अपील करते हैं।”

    इस बीच भारत ने नेपाल के लिए अपनी मानवीय सहायता और तेज कर दी है। विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने बताया कि 11 सदस्यीय विशेष बचाव दल और 5.5 टन जरूरी दवाइयां लेकर पांचवां भारतीय विमान नेपाल के लिए रवाना हो चुका है। इसके अलावा,राहत-बचाव कार्यों और मृतकों की शिनाख्त में नेपाल की मदद के लिए भारत ने विशेष रेस्क्यू और फोरेंसिक टीमें भी तैनात की हैं।

    (ANI से इनपुट)

  • पीड़ितों की मदद करने त्रिशूली पहुंचे एक्टर सोनू सूद

  • मेरे साले नहीं मिल रहे...नेपाल आपदा के बाद अपने रिश्तेदार को खोज रहे शख्स की आपबीती

    रसुवा जिले के ग्रांग इलाके में अपने लापता रिश्तेदार की तलाश में पहुंचे उदय राज पाठक ने कहा,”मेरे साले 216 त्रिशूली हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट में एक इंजीनियर के तौर पर काम कर रहे थे। उस दिन वहीं ड्यूटी पर थे। उस घटना के बाद से हमें उनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है कि वह कहां हैं। अब हम जंगली इलाकों से सटे गांवों में नीचे जाएंगे,वहां छानबीन करेंगे और स्थानीय लोगों से बात करेंगे ताकि पता चल सके कि क्या किसी ने उन्हें देखा है। हमने सेना और पुलिस दोनों से बात की है। हमने संबंधित अधिकारियों को उनका नाम और फोटो भी दे दी है, लेकिन अभी तक उनका कुछ पता नहीं चल सका है।”

    उन्होंने आगे कहा, “यह एक बहुत बड़ा नुकसान है। ऐसे हालात पर किसी का कोई बस नहीं था। यह अचानक आई एक विनाशकारी प्राकृतिक आपदा थी,जिसे रोकना किसी भी इंसान के वश में नहीं था। घटना के बाद सरकार और स्थानीय निवासी मिलकर खोज और बचाव अभियान चला रहे हैं। इस मुश्किल घड़ी में सभी एक साथ खड़े हैं। पूरा नेपाली समुदाय एकजुट है और देश के भीतर व बाहर से भी लोग मदद का हाथ बढ़ा रहे हैं।”

  • नेपाल में सबसे ज्यादा प्रभावित हुए त्रिशूली क्षेत्र में कैसे चल रहा रेस्क्यू ऑपरेशन, देखिए

  • नेपाल त्रासदी: 11 बजे तक के अपडेट्स

    -कुल मौतों का आंकड़ा- 1127
    -लापता:4606
    -अब तक बचाए गए लोग:11993
    -घायल:292
    -भारतीय नागरिक:275 से अधिक भारतीय नागरिक और 128 भारतीय मूल के लोग अभी भी लापता
    -बचाए गए भारतीय: 163
    -भारत से भेजी गई सहायता:74 टन आपदा राहत सामग्री (HADR)

  • टनल में कैसे खोजी जा रहीं जिंदगियां, नेपाली सेना का ये वीडियो देखिए

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